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Books > Language and Literature > हिन्दी साहित्य > अल्मा कबूतरी: Alma Kabutari
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अल्मा कबूतरी: Alma Kabutari
अल्मा कबूतरी: Alma Kabutari
Description

पुस्तक परिचय

कभी कभी सड़कों, गलियों में घूमते या अखबारों की अपराध सुसिर्खयों में दिखाई देनेवाले कंजर, साँसी, नट, मदारी, पारदी, हावूडे, बनजारे, बावरिया,कबूतरे न जाने कितनी जन जातियाँ हैं जो सभ्य समाज के हाशियों पर डेरा लगाए सदियाँ गुज़ार देती हैं हमारा उनसे चौकन्ना सम्बन्ध सिर्फ कामचलाऊ ही बना रहता है। उनके लिए हम हैं कज्ज़ा और दिकू यानी सभ्य सम्भ्रान्त, परदेसी, उनका इस्तेमाल करनेवाले शोषक उनके अपराधों से डरते हुए, मगर उन्हें अपराधी बनाए रखने के आग्रही। हमारे लिए वे ऐसे छापामार गुरिल्ले हैं जो हमारी असावधानियों की दरारों से झपट्टा मारकर वापस अपनी दुनिया में जा छिपते हैं। कबूतरा पुरुष या तो जंगल में रहता है या जेल में स्त्रियाँ शराब की भटि्टयों पर या हमारे बिस्तरों पर इन्हीं अपरिचित लोगों की कहानी उठाई है कथाकार मैत्रेयी पुष्पा ने अल्मा कबूतरी में। यह बुन्देलखंड की विलुप्त होती जनजाति का समाज वैज्ञानिक अध्ययन बिल्कुल नहीं है, हालाँकि कबूतरा समाज का लगभग सम्पूर्ण ताना बाना यहाँ मौजूद है यहाँ के लोग लुगाइयाँ, उनके प्रेम प्यार, शौर्य इस क्षेत्र को गुंजान किए हुए हैं।

 

लेखक परिचय

मैत्रेयी पुष्पा

जन्म 30 नवम्बर, 1944, अलीगढ़ जिले के सिकुर्रा गाँव में ।

आरम्भिक जीवन जिला झाँसी के खिल्ली गाँव में ।

शिक्षा एम ए (हिन्दी साहित्य), बुदेलखंड कॉलेज, झाँसी ।

कृतियाँ चिन्हार केश हँसती है ललमनियाँ तथा अन्य कहानियाँ पियरी का सपना प्रतिनिधि कहानियाँ समग्र कहानियाँ (कहानी संग्रह) बेतवा बहती रही इदन्नमम चाक, झुला नट अल्मा कबूतरी आगनपाखी, विजन, कही ईसुरी फाग, त्रिया हठ गुनाह बेगुनाह (उपन्यास) कस्तूरी कुडंल बसै गुड़िया भीतर गुड़िया (आत्मकथा) खुली खिड़कियाँ सुनो मालिक सुना चर्चा हमारा आवाज तब्दील निगाहें (स्त्री विमर्श) फाइटर की डायरी (रिपोर्ताज)

फैसला कहानी पर टेलीफिल्म वसुमती की चिट्ठी।

प्रमुख सम्मान सार्क लिट्ररेरी अवार्ड द हंगर प्रोजेक्ट (पंचायती राज) का सरोजिनी नायडू पुरस्कार मंगला प्रसाद पारितोषिक प्रेमचन्द सम्मान हिन्दी अकादमी का साहित्यकार सम्मान मध्यप्रदेश साहित्य परिषद् का वीरसिंह जूदेव पुरस्कार कथाक्रम सम्मान एवं शाश्वती सम्मान ।

सम्प्रति स्वतंत्र लेखन और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय हस्तक्षेप ।

आवरण छाया डी लाल रत्नाकर

12 अगस्त, 1957 को जौनपुर (उ.प्र.) में जन्म । कानपुर वि वि से 1978 में कला में स्नातकोत्तर एवं बनारस हिन्दू विवि से डॉक्टरेट । प्रमुख शहरों में एकल व सामूहिक प्रदर्शनियाँ । विभिन्न पत्रिकाओं में रेखांकन प्रकाशित ।

डी लाल रत्नाकर एम एम कॉलेज, गाजियाबाद के चित्रकला विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर एवं अध्यक्ष हैं ।

अल्मा कबूतरी: Alma Kabutari

Item Code:
HAA242
Cover:
Paperback
Edition:
2013
ISBN:
9788126704736
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
390
Other Details:
Weight of the Book: 390 gms
Price:
$20.00   Shipping Free
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पुस्तक परिचय

कभी कभी सड़कों, गलियों में घूमते या अखबारों की अपराध सुसिर्खयों में दिखाई देनेवाले कंजर, साँसी, नट, मदारी, पारदी, हावूडे, बनजारे, बावरिया,कबूतरे न जाने कितनी जन जातियाँ हैं जो सभ्य समाज के हाशियों पर डेरा लगाए सदियाँ गुज़ार देती हैं हमारा उनसे चौकन्ना सम्बन्ध सिर्फ कामचलाऊ ही बना रहता है। उनके लिए हम हैं कज्ज़ा और दिकू यानी सभ्य सम्भ्रान्त, परदेसी, उनका इस्तेमाल करनेवाले शोषक उनके अपराधों से डरते हुए, मगर उन्हें अपराधी बनाए रखने के आग्रही। हमारे लिए वे ऐसे छापामार गुरिल्ले हैं जो हमारी असावधानियों की दरारों से झपट्टा मारकर वापस अपनी दुनिया में जा छिपते हैं। कबूतरा पुरुष या तो जंगल में रहता है या जेल में स्त्रियाँ शराब की भटि्टयों पर या हमारे बिस्तरों पर इन्हीं अपरिचित लोगों की कहानी उठाई है कथाकार मैत्रेयी पुष्पा ने अल्मा कबूतरी में। यह बुन्देलखंड की विलुप्त होती जनजाति का समाज वैज्ञानिक अध्ययन बिल्कुल नहीं है, हालाँकि कबूतरा समाज का लगभग सम्पूर्ण ताना बाना यहाँ मौजूद है यहाँ के लोग लुगाइयाँ, उनके प्रेम प्यार, शौर्य इस क्षेत्र को गुंजान किए हुए हैं।

 

लेखक परिचय

मैत्रेयी पुष्पा

जन्म 30 नवम्बर, 1944, अलीगढ़ जिले के सिकुर्रा गाँव में ।

आरम्भिक जीवन जिला झाँसी के खिल्ली गाँव में ।

शिक्षा एम ए (हिन्दी साहित्य), बुदेलखंड कॉलेज, झाँसी ।

कृतियाँ चिन्हार केश हँसती है ललमनियाँ तथा अन्य कहानियाँ पियरी का सपना प्रतिनिधि कहानियाँ समग्र कहानियाँ (कहानी संग्रह) बेतवा बहती रही इदन्नमम चाक, झुला नट अल्मा कबूतरी आगनपाखी, विजन, कही ईसुरी फाग, त्रिया हठ गुनाह बेगुनाह (उपन्यास) कस्तूरी कुडंल बसै गुड़िया भीतर गुड़िया (आत्मकथा) खुली खिड़कियाँ सुनो मालिक सुना चर्चा हमारा आवाज तब्दील निगाहें (स्त्री विमर्श) फाइटर की डायरी (रिपोर्ताज)

फैसला कहानी पर टेलीफिल्म वसुमती की चिट्ठी।

प्रमुख सम्मान सार्क लिट्ररेरी अवार्ड द हंगर प्रोजेक्ट (पंचायती राज) का सरोजिनी नायडू पुरस्कार मंगला प्रसाद पारितोषिक प्रेमचन्द सम्मान हिन्दी अकादमी का साहित्यकार सम्मान मध्यप्रदेश साहित्य परिषद् का वीरसिंह जूदेव पुरस्कार कथाक्रम सम्मान एवं शाश्वती सम्मान ।

सम्प्रति स्वतंत्र लेखन और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय हस्तक्षेप ।

आवरण छाया डी लाल रत्नाकर

12 अगस्त, 1957 को जौनपुर (उ.प्र.) में जन्म । कानपुर वि वि से 1978 में कला में स्नातकोत्तर एवं बनारस हिन्दू विवि से डॉक्टरेट । प्रमुख शहरों में एकल व सामूहिक प्रदर्शनियाँ । विभिन्न पत्रिकाओं में रेखांकन प्रकाशित ।

डी लाल रत्नाकर एम एम कॉलेज, गाजियाबाद के चित्रकला विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर एवं अध्यक्ष हैं ।

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