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Books > Astrology > भृगु संहिता (फलित प्रकाश): Bhrigu Samhita
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भृगु संहिता (फलित प्रकाश): Bhrigu Samhita
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भृगु संहिता (फलित प्रकाश): Bhrigu Samhita
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Description

लेखकीय

भृगुसंहिता भारतीय ज्योतिषविद्या का एक विश्व-प्रसिद्ध ग्रन्थ है। यह वह ग्रन्थ है जिसमें इस विश्व के प्रत्येक मनुष्य के भाग्य का लेखा-जोखा है। अपने आप में यह बात अविश्वसनीय लगती है पर यह सत्य है। भृगुसंहिता में प्रत्येक व्यक्ति के भाग्य को दर्पण की तरह देखा जा सकता है।

भृगुसंहिता एक विस्तृत ग्रन्थ है। आकार को लेकर नहीं बल्कि इस कारण कि इसमें भारतीय ज्योतिष के प्रत्येक पक्ष का सूक्ष्म विवरण दिया गया है । वस्तुत: यह एक तकनीकी है जिसका आविष्कार भृगु ऋषि ने किया था। इस तकनीकी के आधार पर लिखे गये प्रत्येक ग्रन्थ को भृगुसंहिता ही कहा जाता है। यह ज्योतिषविद्या की अमूल्य तकनीकी है जिसमें सारिणीबद्ध करके सभी प्रकार की कुंडलियों के फल जानने के तरीके का वर्णन है।

परन्तु आज जितनी भी भृगुसंहिता बाजार में उपलब्ध है, वे अधूरी हैं। इसमें अलग-अलग ग्रहों का फल बताया गया है और आशा की गयी है कि इनके सहारे सम्पूर्ण कुंडली का फल ज्ञात कर लिया जायेगा परन्तु कुंडली का फल अलग-अलग ग्रहों की स्थिति के फलों का संयुक्त रूप से प्रभावी समीकरण होता है। ग्रहों का प्रभाव एक दूसरे पर पड़ता है, भावों एवं राशियों का भी फल में हस्तक्षेप होता है। इन प्रचलित भृगुसंहिताओं में वह तकनीकी नहीं बतायी गयी है, जिसके द्वारा इनका सम्मलित सटीक फलादेश ज्ञात किया जा सके। इसके अतिरिक्त भी इनमें कई कमजोरियाँ एवं कमियाँ हैं जिससे प्राप्त भृगुसंहितायें निरर्थक ग्रन्थ बनकर रह गयीं है। भृगुसंहिताओं की इस कमी को देखते हुए मैंने इस ग्रन्थ को लिखने का संकल्प किया था। अन्तत: सोलह वर्षों तक प्राचीन पाण्डुलिपियोंज्योतिषाचार्यों की सलाह एवं अपने सहयोगी ज्योतिषविदों के कठिन परिश्रम के बाद यह ग्रन्थ तैयार हो पाया है । इस ग्रन्थ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह हर ओर से सम्पूर्ण सरल एवं व्यवहारिक है। इसमें कुंडलीशुद्धि लग्नशुद्धि आदि से लेकर ग्रहों भावों एवं राशियों के सभी प्रकार के सम्बन्धों के प्रभाव को निकालने की तकनीकी बतायी गयी है। फल कथन करनेवाला यदि ज्योतिषी नहीं भी है तो वह किसी का फल सम्पूर्ण रूप से केवल इस पुस्तक की सहायता से प्राप्त कर सकता है। महादशा और अन्तर दशा सहित समस्त प्रकार के विाशिष्ट योग मुहुर्त, विवाह आदि का विस्तृत विचार एवं सभी ग्रहों की शान्ति के सभी प्रकार के (पूजा-अनुष्ठान टोटके-ताबीज तंत्रिक अनुष्ठान एवं रत्न) उपायों का भी विस्तृत विवरण दिया गया है।

भृगु संहिता का यह संस्करण एक अद्भुत, सम्पूर्ण एवं विलक्षण संस्करण है । ग्रंथ के महत्व एवं उपयोगिता का ज्ञान तो इसका सम्पूर्ण रूपेण अध्ययन करने पर ही ज्ञात हो सकता है तथापि हमारा विश्वास है कि भृगुसंहिता का कोई भी संस्करण इस ग्रंथ की उपयोगिता को प्राप्त नहीं कर सकता । आपके सुझावों का सदा स्वागत रहेगा ।

इस पुस्तक को उपयोगी स्वरूप देने में बिहार (मिथिला) के प्रसिद्ध ज्थोतिषविद् श्री विकास कुमार ठाकुर एवं श्री उमेश कुमार मिश्र के साथ-साथ भोजपुर एवं बनारस के ज्योतिषाचार्यों पंडित मुधुसूदन पाण्डे एवं पंडित अरुण बिहारी का अपूर्व परिश्रम एवं सहयोग प्राप्त हुआ है । मैं इनके सहयोग के लिये इनका कृतज्ञ हूँ ।

 

विषय सामग्री

प्रथम अध्याय: विषय-परिचय

1

ज्योतिषशास्त्र क्या है?

17

2

तरंगों का महाविज्ञान

18

3

ज्योतिष का सृष्टिसिद्धान्त

18

4

ज्योतिष के नौ ग्रह का रहस्य

18

5

ज्योतिष का गोपनीय रहस्य

19

6

कुछ विशेष स्पष्टीकरण

19

7

जातक पर जन्म के समय के प्रभाव का कारण

20

8

जन्म स्थान के प्रभाव के कारण

21

9

सृष्टि के निर्माण का सिद्धान्त

21

10

कालगणना

22

11

ज्योतिषशास्त्र का अर्थ

23

12

ज्योतिष की उत्पत्ति

24

13

कर्मफल का दर्शन

25

14

ज्योतिषशास्त्र की शाखायें

25

द्वितीय अध्याय:समय गणना के ज्योतिषीय माप

1

खगोलमान

28

2

तिथि एवं पक्ष

29

3

तिथियों के स्वामी

30

4

तिथियों के स्वामीदेवता

31

5

तिथियों की संज्ञायें

31

6

सिद्ध-तिथियां

31

7

दग्ध तिथियाँ

32

8

शून्यमास तिथियाँ

32

9

मृत्यु योग तिथियाँ

32

10

पक्षरन्ध्र तिथियां

33

11

मास एवं वर्ष

33

12

ऋतु अयन तथा सम्वत्सर

35

13

बार

36

14

नक्षत्र

37

15

नक्षत्र और उनके स्वामी देवता

38

16

नक्षत्र चरणाक्षर

40

17

नक्षत्रों के स्वामीग्रह

41

18

नक्षत्रों के प्रकार

41

19

मासशून्य नक्षत्र

42

20

अशुभ नक्षत्र और उनके फल

42

21

मानव शरीर पर नक्षत्रों की स्थिति

43

22

नक्षत्रानुसार जातकफल

44

23

योग

47

24

योगों के स्वामी

47

25

करण

48

26

राशि

49

27

नक्षत्र चरणाक्षर और राशिज्ञान

50

28

राशियों के स्वामीग्रह

51

29

चर-अचर राशियां

52

30

राशियों की प्रकृति एवं उनके प्रभाव

52

31

शून्यसंज्ञक राशियाँ

56

32

जन्मराशि के प्रभाव

56

33

ग्रह

66

34

ग्रहों की प्रवृत्ति और प्रभाव

68

35

ग्रहों के बल

69

36

ग्रहों की तात्कालिक मित्रता-शत्रुता

71

37

अयन एवं अयन बल

71

38

ग्रहों के मूलत्रिकोण

71

39

मूलत्रिकोणस्थ ग्रहों के विशेष फल

73

40

ग्रहों का राशिभोग काल

74

41

ग्रहों की कक्षायें

74

42

ग्रहों का बलाबल क्रम

75

43

ग्रहों के बल के प्रकार

75

44

ग्रहों के अंश और उनमें उनकी स्थिति

75

45

स्वक्षेत्री ग्रह

75

46

ग्रहों की उच्चस्थिति

76

47

ग्रहों की निम्नस्थिति

76

48

ग्रहों की गतियाँ

77

49

ग्रहों का मैत्री-विचार

77

50

ग्रहों की कक्षायें

78

51

ग्रहों का उदयास्त

78

52

ग्रहों के देवता

78

53

सम्बन्धियों पर ग्रहों का प्रभाव

79

54

ग्रहों का शुभाशुभ

79

55

ग्रहों का शरीर के विभिन्न अंगों पर प्रभाव

79

56

ग्रहों की दृष्टि

80

57

ग्रहों की दृष्टि और स्थान-सम्बन्ध

84

58

जातक की कुंडली की फलगणना में ग्रहों का प्रभाव

85

59

जन्मकुंडली के द्वादशभाव और उनके विषय

86

60

जन्मकुंडली में लग्न

87

61

जन्मकुंडली में जन्मराशि

87

62

जन्मकुंडली के द्वादशभाव और उनके नाम

88

63

भावों के प्रभावानुसार विशिष्ट नाम

89

64

भावों के अन्य विशिष्ट प्रभावानुसार नाम

90

65

भावों के विचारणीय विषय

90

66

भावों का शुभाशुभ ज्ञान

93

तृतीय अध्याय (क्रियात्मक)

1

फल के लिए क्यों क्रियात्मक ज्ञान आवश्यक है ।

95

2

जन्मकुण्डली में लग्न स्थापना

95

3

जन्मकुण्डली में राशियों की स्थापना

96

4

जन्मकुण्डली में ग्रहों की स्थापना

96

5

लग्न शुद्धि विचार

96

6

त्रिकुण्डली विधि से लग्न शुद्धि

97

7

प्राणपदविधि से लग्न शुद्धि

97

8

गुलिक विधि से लग्न शुद्धि

98

9

ग्रहों का बलाबल निकालना

99

10

स्थानबल साधन

99

11

युग्मायुग्म बल साधन

100

12

द्रेष्कान बल साधन

101

13

सप्तवगैंक्य बल साधन

101

14

दिग्बल साधन

102

15

कालबल साधन

103

16

पक्ष बल साधन

103

17

त्रयंश बल साधन

103

18

चेष्टा बल साधन

105

19

मध्यम ग्रह बनाने के नियम

105

20

नैसर्गिक बल साधन

107

21

अष्टक वर्ग विचार

108

22

अष्टक वर्गाक फल

109

23

नवग्रह स्पष्ट करने की विधि

110

24

नवांश कुण्डली

111

25

विषम राशियों में त्रिशांश

112

26

कारकांश कुण्डली

113

27

दशा विचार

114

28

विंशोत्तरी दशा

114

29

विंशोत्तरी अंतरदशा

116

30

विंशोत्तरी प्रत्यंतर दशा

117

31

अष्टोत्तरी दशा विचार

129

32

अष्टोत्तरी अंतरदशा

130

33

योगिनी दशा विचार

131

34

योगिनी अंतर्दशा विचार

132

35

ग्रहों के मूल त्रिकोण एवं स्वक्षेत्र बल

133

36

अंग विचार

133

37

कालपुरुष विचार

133

38

कालपुरुष का निर्धारण

134

39

अरिष्ट विचार

135

40

अरिष्ट नाशक योग

137

41

ग्रहों की उच्चबल सारिणी

139

चतुर्थ अध्याय (विशिष्ट फल एवं योग)

1

फल विचार के सिद्धान्त

146

2

फलगणना से सम्बन्धित विशेष जानकारियाँ

151

3

नवग्रहों के विचारणीय विषय

151

4

द्वादशभाव के कारक ग्रह

152

5

भावों के अधिपति और उनके नाम

153

6

द्वादशभावों में नवग्रहों के फल

153

7

उच्च राशि स्थित ग्रहों के फल

157

8

नीच राशि स्थित ग्रहों के फल

158

9

मित्र क्षेत्र के ग्रहों के फल

158

10

शत्रुक्षेत्र के ग्रहों के फल

158

11

स्वक्षेत्रगत ग्रहों के फल

158

12

मूलत्रिकोण में ग्रहों के फल

159

13

लग्न में द्वादशराशियों के नवग्रहों के फल

159

14

भावानुसार नवग्रहों के दृष्टिफल

162

15

द्वादशभाव में भावेश की स्थिति के फल

168

16

ग्रहों पर ग्रहों की दृष्टि के प्रभाव

204

17

आयुविचार

232

18

राजयोग

240

19

धनयोग

244

20

जीविकायोग

247

21

सुखयोग

248

22

संतानयोग

249

23

बुद्धियोग

252

24

व्याधियोग

253

25

शत्रुयोग

254

26

विवाहयोग

255

27

भाग्ययोग

258

28

लाभयोग

261

29

व्यययोग

262

30

वाहनयोग

262

31

मकानयोग

263

32

नौकरीयोग

263

33

विशिष्टयोग

264

34

शासकयोग

274

35

भातृयोग

278

36

माता-पितायोग

279

37

स्त्री जातक योग

279

38

द्वादशांश कुण्डली के फल

286

39

चन्द्रकुण्डली के फल

287

40

विंशोत्तरी दशा के फल

287

41

वर-वधू विचार

308

42

मुहूर्त्त विचार

316

पंचम अध्याय : विभिन्न ग्रहों के फलादेश

(राशि एवं भाव के अनुसार)

1

मेष राशि में सूर्य का फल

323

2

मेष राशि में चंद्रमा का फल

237

3

मेष राशि में मंगल का फल

331

4

मेष राशि में बुध का फल

334

5

मेष राशि में गुरु (वृहस्पति) का फल

338

6

मेष राशि में शुक्र का फल

342

7

मेष राशि में शनि का फल

345

8

मेष राशि में राहु का फल

350

9

मेष राशि में केतु का फल

353

10

वृष राशि में सूर्य का फल

356

11

वृष राशि में चन्द्रमा का फल

359

12

वृष राशि में मंगल का फल

363

13

वृष राशि में बुध का फल

367

14

वृष राशि में गुरु (बृहस्पति) का फल

370

15

वृष राशि में शुक्र का फल

374

16

वृष राशि में शनि का फल

378

17

वृष राशि में राहु का फल

382

18

वृष राशि में केतु का फल

385

19

मिथुन राशि में सूर्य का फल

388

20

मिथुन राशि में चंद्रमा का फल

391

21

मिथुन राशि में मंगल का फल

395

22

मिथुन राशि में बुध का फल

399

23

मिथुन राशि में गुरु (बृहस्पति) का फल

402

24

मिथुन राशि में शुक्र का फल

407

25

मिथुन राशि में शनि का फल

410

26

मिथुन राशि में राहु का फल

411

27

मिथुन राशि में केतु का फल

415

28

कर्क राशि में सूर्य का फल

418

29

कर्क राशि में चन्द्र का फल

421

30

कर्क राशि में मंगल का फल

424

31

कर्क राशि में बुध का फल

427

32

कर्क राशि में गुरु (बृहस्पति) का फल

430

33

कर्क राशि में शुक्र का फल

433

34

कर्क राशि में शनि का फल

437

35

कर्क राशि में राहु का फल

440

36

कर्क राशि में केतु का फल

443

37

सिंह राशि में सूर्य का फल

446

38

सिंह राशि में चन्द्रमा का फल

449

39

सिंह राशि में मंगल का फल

452

40

सिंह राशि में बुध का फल

456

41

सिंह राशि में गुरु (बृहस्पति) का फल

459

42

सिंह राशि में शुक्र का फल

462

43

सिंह राशि में शनि का फल

465

44

सिंह राशि में राहु का फल

469

45

सिंह राशि में केतु का फल

472

46

कन्या राशि में सूर्य का फल

475

47

कन्या राशि में चन्द्रमा का फल

478

48

कन्या राशि में मंगल का फल

482

49

कन्या राशि में बुध का फल

485

50

कन्या राशि में गुरु (बृहस्पति) का फल

488

51

कन्या राशि में शुक्र का फल

492

52

कन्या राशि में शनि का फल

495

53

कन्या राशि में राहु का फल

498

54

कन्या राशि में केतु का फल

501

55

तुला राशि में सूर्य का फल

504

56

तुला राशि में चन्द्रमा का फल

507

57

तुला राशि में मंगल का फल

510

58

तुला राशि में बुध का फल

513

59

तुला राशि में गुरु (बृहस्पति) का फल

516

60

तुला राशि में शुक्र का फल

519

61

तुला राशि में शनि का फल

522

62

तुला राशि में राहु का फल

525

63

तुला राशि में केतु का फल

528

64

वृश्चिक राशि में सूर्य का फल

531

65

वृश्चिक राशि में चन्द्रमा का फल

534

66

वृश्चिक राशि में मंगल का फल

537

67

वृश्चिक राशि में बुध का फल

540

68

वृश्चिक राशि में गुरु (बृहस्पति) का फल

543

69

वृश्चिक राशि में शुक्र का फल

546

70

वृश्चिक राशि में शनि का फल

549

71

वृश्चिक राशि में राहु का फल

552

72

वृश्चिक राशि में केतु का फल

555

73

धनु राशि में सूर्य का फल

558

74

धनु राशि में चन्द्रमा का फल

561

75

धनु राशि में मंगल का फल

564

76

धनु राशि में बुध का फल

567

77

धनु राशि में गुरु (बृहस्पति) का फल

570

78

धनु राशि में शुक्र का फल

573

79

धनु राशि में शनि का फल

576

80

धनु राशि में राहु का फल

589

81

धनु राशि में केतु का फल

582

82

मकर राशि में सूर्य का फल

585

83

मकर राशि में चन्द्रमा का फल

588

84

मकर राशि में मंगल का फल

591

85

मकर राशि में बुध का फल

594

86

मकर राशि में गुरु (बृहस्पति) का फल

597

87

मकर राशि में शुक्र का फल

600

88

मकर राशि में शनि का फल

603

89

मकर राशि में राहु का फल

606

90

मकर राशि में केतु का फल

609

91

कुम्भ राशि मे सूर्य का फल

612

92

कुम्भ राशि में चन्द्रमा का फल

615

93

कुम्भ राशि में मंगल का फल

618

94

कम्म राशि में बुध का फल

621

95

कुम्भ राशि में गुरु (बृहस्पति) का फल

624

96

कम्म राशि में शुक्र का फल

627

97

कुम्भ राशि में शनि का फल

630

98

कुम्भ राशि में राहु का फल

633

99

कुम्भ राशि में केतु का फल

636

100

मीन राशि में सूर्य का फल

639

101

मीनू राशि में चन्द्रमा का फल

642

102

मीन राशि में मंगल का फल

645

103

मीन राशि में बुध का फल

648

104

मीन राशि में गुरु (बृहस्पति) का फल

651

105

मीन राशि में शुक्र का फल

654

106

मीन राशि में शनि का फल

657

107

मीन राशि में राहु का फल

660

108

मीन राशि मे केतु का फल

663

अष्टम अध्याय : ग्रहों की युति क् फल

1

दो ग्रहों की युति का फलादेश

667

2

तीन ग्रहों की युति का फलादेश

672

3

चार ग्रहों की युति का फलादेश

681

4

पांच ग्रहों की युति का फलादेश

690

5

छ: ग्रहों की युति का फलादेश

695

6

मान ग्रहों की युति का फलादेश

697

सप्तम अध्याय : आधुनिक ग्रह एवं उनके फल

1

विभिन्न राशिस्थ 'हर्शल' का फल

698

2

विभिन्न राशिस्थ 'नेचच्यून' का फल

701

3

हर्शल पर दृष्टि-प्रभाव

704

4

भाव के प्रभाव (उपर्युक्त युति में)

705

5

नेपच्यून पर दृष्टि-प्रभाव

706

6

भावानुसार प्रभाव (युति या दृष्टि सम्बन्ध मे)

707

7

हर्शल एवं नेपच्यून का आपसी सम्बन्ध

707

अष्टम् अध्याय : उपाय

1

सूर्य का प्रथम भाव से द्वादश भाव तक उपाय

708

2

चन्द्रमा का प्रथम भाव से द्वादश भाव तक उपाय

712

3

मंगल का प्रथम भाव से द्वादश भाव तक उपाय

715

4

बुध का प्रथम भाव से द्वादश भाव तक उपाय

719

5

गुरु (बृहस्पति) का प्रथम भाव से द्वादश भाव तक उपाय

723

6

शुक्र का प्रथम भाव से द्वादश भाव तक उपाय

726

7

शनि का प्रथम भाव से द्वादश भाव तक उपाय

731

8

राहु का प्रथम भाव से द्वादश भाव तक उपाय

734

9

केतु का प्रथम भाव से द्वादश भाव तक उपाय

737

10

दो ग्रहों की युति का उपाय

740

11

कुछ विशिष्ट युतियों के उपाय

742

12

नवग्रह शान्ति: सात्विक अनुष्ठान

744

13

नवग्रह शान्ति अनुष्ठान

745

14

सूर्य ग्रह शांति अनुष्ठान

746

15

चन्द्रग्रह शांति अनुष्ठान

747

16

मंगल ग्रह शांति अनुष्ठान

749

17

बुध ग्रह शांति अनुष्ठान

751

18

वृहस्पति ग्रह शांति अनुष्ठान

752

19

शुक्र ग्रह शांति अनुष्ठान

754

20

शनि ग्रह शांति अनुष्ठान

755

21

राहु ग्रह शांति अनुष्ठान

757

22

केतु ग्रह शांति अनुष्ठान

759

23

कुछ विशेष शक्तिशाली स्रोत

760

24

ग्रह शांति के तांत्रिक उपाय

764

नवम अध्याय : रत्न और ज्योतिषफल

1

रत्न और ज्योतिष सम्बन्ध

715

2

रत्नों की पहचान एवं मात्रा

715

3

लग्न राशि के अनुसार रत्न

717

4

जन्म तिथि के अनुसार रत्न

809

5

नव रत्न अँगूठी एवं माला

810

6

अन्य कम मूल्यों के रत्नों के प्रभाव

810

7

रत्नों की विशिष्ट श्रेणियाँ एवं देवी-देवता

814

 

Sample Pages



भृगु संहिता (फलित प्रकाश): Bhrigu Samhita

Item Code:
NZD231
Cover:
Hardcover
Publisher:
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
837
Other Details:
Weight of the Book: 1.0 kg
Price:
$40.00
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भृगु संहिता (फलित प्रकाश): Bhrigu Samhita

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लेखकीय

भृगुसंहिता भारतीय ज्योतिषविद्या का एक विश्व-प्रसिद्ध ग्रन्थ है। यह वह ग्रन्थ है जिसमें इस विश्व के प्रत्येक मनुष्य के भाग्य का लेखा-जोखा है। अपने आप में यह बात अविश्वसनीय लगती है पर यह सत्य है। भृगुसंहिता में प्रत्येक व्यक्ति के भाग्य को दर्पण की तरह देखा जा सकता है।

भृगुसंहिता एक विस्तृत ग्रन्थ है। आकार को लेकर नहीं बल्कि इस कारण कि इसमें भारतीय ज्योतिष के प्रत्येक पक्ष का सूक्ष्म विवरण दिया गया है । वस्तुत: यह एक तकनीकी है जिसका आविष्कार भृगु ऋषि ने किया था। इस तकनीकी के आधार पर लिखे गये प्रत्येक ग्रन्थ को भृगुसंहिता ही कहा जाता है। यह ज्योतिषविद्या की अमूल्य तकनीकी है जिसमें सारिणीबद्ध करके सभी प्रकार की कुंडलियों के फल जानने के तरीके का वर्णन है।

परन्तु आज जितनी भी भृगुसंहिता बाजार में उपलब्ध है, वे अधूरी हैं। इसमें अलग-अलग ग्रहों का फल बताया गया है और आशा की गयी है कि इनके सहारे सम्पूर्ण कुंडली का फल ज्ञात कर लिया जायेगा परन्तु कुंडली का फल अलग-अलग ग्रहों की स्थिति के फलों का संयुक्त रूप से प्रभावी समीकरण होता है। ग्रहों का प्रभाव एक दूसरे पर पड़ता है, भावों एवं राशियों का भी फल में हस्तक्षेप होता है। इन प्रचलित भृगुसंहिताओं में वह तकनीकी नहीं बतायी गयी है, जिसके द्वारा इनका सम्मलित सटीक फलादेश ज्ञात किया जा सके। इसके अतिरिक्त भी इनमें कई कमजोरियाँ एवं कमियाँ हैं जिससे प्राप्त भृगुसंहितायें निरर्थक ग्रन्थ बनकर रह गयीं है। भृगुसंहिताओं की इस कमी को देखते हुए मैंने इस ग्रन्थ को लिखने का संकल्प किया था। अन्तत: सोलह वर्षों तक प्राचीन पाण्डुलिपियोंज्योतिषाचार्यों की सलाह एवं अपने सहयोगी ज्योतिषविदों के कठिन परिश्रम के बाद यह ग्रन्थ तैयार हो पाया है । इस ग्रन्थ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह हर ओर से सम्पूर्ण सरल एवं व्यवहारिक है। इसमें कुंडलीशुद्धि लग्नशुद्धि आदि से लेकर ग्रहों भावों एवं राशियों के सभी प्रकार के सम्बन्धों के प्रभाव को निकालने की तकनीकी बतायी गयी है। फल कथन करनेवाला यदि ज्योतिषी नहीं भी है तो वह किसी का फल सम्पूर्ण रूप से केवल इस पुस्तक की सहायता से प्राप्त कर सकता है। महादशा और अन्तर दशा सहित समस्त प्रकार के विाशिष्ट योग मुहुर्त, विवाह आदि का विस्तृत विचार एवं सभी ग्रहों की शान्ति के सभी प्रकार के (पूजा-अनुष्ठान टोटके-ताबीज तंत्रिक अनुष्ठान एवं रत्न) उपायों का भी विस्तृत विवरण दिया गया है।

भृगु संहिता का यह संस्करण एक अद्भुत, सम्पूर्ण एवं विलक्षण संस्करण है । ग्रंथ के महत्व एवं उपयोगिता का ज्ञान तो इसका सम्पूर्ण रूपेण अध्ययन करने पर ही ज्ञात हो सकता है तथापि हमारा विश्वास है कि भृगुसंहिता का कोई भी संस्करण इस ग्रंथ की उपयोगिता को प्राप्त नहीं कर सकता । आपके सुझावों का सदा स्वागत रहेगा ।

इस पुस्तक को उपयोगी स्वरूप देने में बिहार (मिथिला) के प्रसिद्ध ज्थोतिषविद् श्री विकास कुमार ठाकुर एवं श्री उमेश कुमार मिश्र के साथ-साथ भोजपुर एवं बनारस के ज्योतिषाचार्यों पंडित मुधुसूदन पाण्डे एवं पंडित अरुण बिहारी का अपूर्व परिश्रम एवं सहयोग प्राप्त हुआ है । मैं इनके सहयोग के लिये इनका कृतज्ञ हूँ ।

 

विषय सामग्री

प्रथम अध्याय: विषय-परिचय

1

ज्योतिषशास्त्र क्या है?

17

2

तरंगों का महाविज्ञान

18

3

ज्योतिष का सृष्टिसिद्धान्त

18

4

ज्योतिष के नौ ग्रह का रहस्य

18

5

ज्योतिष का गोपनीय रहस्य

19

6

कुछ विशेष स्पष्टीकरण

19

7

जातक पर जन्म के समय के प्रभाव का कारण

20

8

जन्म स्थान के प्रभाव के कारण

21

9

सृष्टि के निर्माण का सिद्धान्त

21

10

कालगणना

22

11

ज्योतिषशास्त्र का अर्थ

23

12

ज्योतिष की उत्पत्ति

24

13

कर्मफल का दर्शन

25

14

ज्योतिषशास्त्र की शाखायें

25

द्वितीय अध्याय:समय गणना के ज्योतिषीय माप

1

खगोलमान

28

2

तिथि एवं पक्ष

29

3

तिथियों के स्वामी

30

4

तिथियों के स्वामीदेवता

31

5

तिथियों की संज्ञायें

31

6

सिद्ध-तिथियां

31

7

दग्ध तिथियाँ

32

8

शून्यमास तिथियाँ

32

9

मृत्यु योग तिथियाँ

32

10

पक्षरन्ध्र तिथियां

33

11

मास एवं वर्ष

33

12

ऋतु अयन तथा सम्वत्सर

35

13

बार

36

14

नक्षत्र

37

15

नक्षत्र और उनके स्वामी देवता

38

16

नक्षत्र चरणाक्षर

40

17

नक्षत्रों के स्वामीग्रह

41

18

नक्षत्रों के प्रकार

41

19

मासशून्य नक्षत्र

42

20

अशुभ नक्षत्र और उनके फल

42

21

मानव शरीर पर नक्षत्रों की स्थिति

43

22

नक्षत्रानुसार जातकफल

44

23

योग

47

24

योगों के स्वामी

47

25

करण

48

26

राशि

49

27

नक्षत्र चरणाक्षर और राशिज्ञान

50

28

राशियों के स्वामीग्रह

51

29

चर-अचर राशियां

52

30

राशियों की प्रकृति एवं उनके प्रभाव

52

31

शून्यसंज्ञक राशियाँ

56

32

जन्मराशि के प्रभाव

56

33

ग्रह

66

34

ग्रहों की प्रवृत्ति और प्रभाव

68

35

ग्रहों के बल

69

36

ग्रहों की तात्कालिक मित्रता-शत्रुता

71

37

अयन एवं अयन बल

71

38

ग्रहों के मूलत्रिकोण

71

39

मूलत्रिकोणस्थ ग्रहों के विशेष फल

73

40

ग्रहों का राशिभोग काल

74

41

ग्रहों की कक्षायें

74

42

ग्रहों का बलाबल क्रम

75

43

ग्रहों के बल के प्रकार

75

44

ग्रहों के अंश और उनमें उनकी स्थिति

75

45

स्वक्षेत्री ग्रह

75

46

ग्रहों की उच्चस्थिति

76

47

ग्रहों की निम्नस्थिति

76

48

ग्रहों की गतियाँ

77

49

ग्रहों का मैत्री-विचार

77

50

ग्रहों की कक्षायें

78

51

ग्रहों का उदयास्त

78

52

ग्रहों के देवता

78

53

सम्बन्धियों पर ग्रहों का प्रभाव

79

54

ग्रहों का शुभाशुभ

79

55

ग्रहों का शरीर के विभिन्न अंगों पर प्रभाव

79

56

ग्रहों की दृष्टि

80

57

ग्रहों की दृष्टि और स्थान-सम्बन्ध

84

58

जातक की कुंडली की फलगणना में ग्रहों का प्रभाव

85

59

जन्मकुंडली के द्वादशभाव और उनके विषय

86

60

जन्मकुंडली में लग्न

87

61

जन्मकुंडली में जन्मराशि

87

62

जन्मकुंडली के द्वादशभाव और उनके नाम

88

63

भावों के प्रभावानुसार विशिष्ट नाम

89

64

भावों के अन्य विशिष्ट प्रभावानुसार नाम

90

65

भावों के विचारणीय विषय

90

66

भावों का शुभाशुभ ज्ञान

93

तृतीय अध्याय (क्रियात्मक)

1

फल के लिए क्यों क्रियात्मक ज्ञान आवश्यक है ।

95

2

जन्मकुण्डली में लग्न स्थापना

95

3

जन्मकुण्डली में राशियों की स्थापना

96

4

जन्मकुण्डली में ग्रहों की स्थापना

96

5

लग्न शुद्धि विचार

96

6

त्रिकुण्डली विधि से लग्न शुद्धि

97

7

प्राणपदविधि से लग्न शुद्धि

97

8

गुलिक विधि से लग्न शुद्धि

98

9

ग्रहों का बलाबल निकालना

99

10

स्थानबल साधन

99

11

युग्मायुग्म बल साधन

100

12

द्रेष्कान बल साधन

101

13

सप्तवगैंक्य बल साधन

101

14

दिग्बल साधन

102

15

कालबल साधन

103

16

पक्ष बल साधन

103

17

त्रयंश बल साधन

103

18

चेष्टा बल साधन

105

19

मध्यम ग्रह बनाने के नियम

105

20

नैसर्गिक बल साधन

107

21

अष्टक वर्ग विचार

108

22

अष्टक वर्गाक फल

109

23

नवग्रह स्पष्ट करने की विधि

110

24

नवांश कुण्डली

111

25

विषम राशियों में त्रिशांश

112

26

कारकांश कुण्डली

113

27

दशा विचार

114

28

विंशोत्तरी दशा

114

29

विंशोत्तरी अंतरदशा

116

30

विंशोत्तरी प्रत्यंतर दशा

117

31

अष्टोत्तरी दशा विचार

129

32

अष्टोत्तरी अंतरदशा

130

33

योगिनी दशा विचार

131

34

योगिनी अंतर्दशा विचार

132

35

ग्रहों के मूल त्रिकोण एवं स्वक्षेत्र बल

133

36

अंग विचार

133

37

कालपुरुष विचार

133

38

कालपुरुष का निर्धारण

134

39

अरिष्ट विचार

135

40

अरिष्ट नाशक योग

137

41

ग्रहों की उच्चबल सारिणी

139

चतुर्थ अध्याय (विशिष्ट फल एवं योग)

1

फल विचार के सिद्धान्त

146

2

फलगणना से सम्बन्धित विशेष जानकारियाँ

151

3

नवग्रहों के विचारणीय विषय

151

4

द्वादशभाव के कारक ग्रह

152

5

भावों के अधिपति और उनके नाम

153

6

द्वादशभावों में नवग्रहों के फल

153

7

उच्च राशि स्थित ग्रहों के फल

157

8

नीच राशि स्थित ग्रहों के फल

158

9

मित्र क्षेत्र के ग्रहों के फल

158

10

शत्रुक्षेत्र के ग्रहों के फल

158

11

स्वक्षेत्रगत ग्रहों के फल

158

12

मूलत्रिकोण में ग्रहों के फल

159

13

लग्न में द्वादशराशियों के नवग्रहों के फल

159

14

भावानुसार नवग्रहों के दृष्टिफल

162

15

द्वादशभाव में भावेश की स्थिति के फल

168

16

ग्रहों पर ग्रहों की दृष्टि के प्रभाव

204

17

आयुविचार

232

18

राजयोग

240

19

धनयोग

244

20

जीविकायोग

247

21

सुखयोग

248

22

संतानयोग

249

23

बुद्धियोग

252

24

व्याधियोग

253

25

शत्रुयोग

254

26

विवाहयोग

255

27

भाग्ययोग

258

28

लाभयोग

261

29

व्यययोग

262

30

वाहनयोग

262

31

मकानयोग

263

32

नौकरीयोग

263

33

विशिष्टयोग

264

34

शासकयोग

274

35

भातृयोग

278

36

माता-पितायोग

279

37

स्त्री जातक योग

279

38

द्वादशांश कुण्डली के फल

286

39

चन्द्रकुण्डली के फल

287

40

विंशोत्तरी दशा के फल

287

41

वर-वधू विचार

308

42

मुहूर्त्त विचार

316

पंचम अध्याय : विभिन्न ग्रहों के फलादेश

(राशि एवं भाव के अनुसार)

1

मेष राशि में सूर्य का फल

323

2

मेष राशि में चंद्रमा का फल

237

3

मेष राशि में मंगल का फल

331

4

मेष राशि में बुध का फल

334

5

मेष राशि में गुरु (वृहस्पति) का फल

338

6

मेष राशि में शुक्र का फल

342

7

मेष राशि में शनि का फल

345

8

मेष राशि में राहु का फल

350

9

मेष राशि में केतु का फल

353

10

वृष राशि में सूर्य का फल

356

11

वृष राशि में चन्द्रमा का फल

359

12

वृष राशि में मंगल का फल

363

13

वृष राशि में बुध का फल

367

14

वृष राशि में गुरु (बृहस्पति) का फल

370

15

वृष राशि में शुक्र का फल

374

16

वृष राशि में शनि का फल

378

17

वृष राशि में राहु का फल

382

18

वृष राशि में केतु का फल

385

19

मिथुन राशि में सूर्य का फल

388

20

मिथुन राशि में चंद्रमा का फल

391

21

मिथुन राशि में मंगल का फल

395

22

मिथुन राशि में बुध का फल

399

23

मिथुन राशि में गुरु (बृहस्पति) का फल

402

24

मिथुन राशि में शुक्र का फल

407

25

मिथुन राशि में शनि का फल

410

26

मिथुन राशि में राहु का फल

411

27

मिथुन राशि में केतु का फल

415

28

कर्क राशि में सूर्य का फल

418

29

कर्क राशि में चन्द्र का फल

421

30

कर्क राशि में मंगल का फल

424

31

कर्क राशि में बुध का फल

427

32

कर्क राशि में गुरु (बृहस्पति) का फल

430

33

कर्क राशि में शुक्र का फल

433

34

कर्क राशि में शनि का फल

437

35

कर्क राशि में राहु का फल

440

36

कर्क राशि में केतु का फल

443

37

सिंह राशि में सूर्य का फल

446

38

सिंह राशि में चन्द्रमा का फल

449

39

सिंह राशि में मंगल का फल

452

40

सिंह राशि में बुध का फल

456

41

सिंह राशि में गुरु (बृहस्पति) का फल

459

42

सिंह राशि में शुक्र का फल

462

43

सिंह राशि में शनि का फल

465

44

सिंह राशि में राहु का फल

469

45

सिंह राशि में केतु का फल

472

46

कन्या राशि में सूर्य का फल

475

47

कन्या राशि में चन्द्रमा का फल

478

48

कन्या राशि में मंगल का फल

482

49

कन्या राशि में बुध का फल

485

50

कन्या राशि में गुरु (बृहस्पति) का फल

488

51

कन्या राशि में शुक्र का फल

492

52

कन्या राशि में शनि का फल

495

53

कन्या राशि में राहु का फल

498

54

कन्या राशि में केतु का फल

501

55

तुला राशि में सूर्य का फल

504

56

तुला राशि में चन्द्रमा का फल

507

57

तुला राशि में मंगल का फल

510

58

तुला राशि में बुध का फल

513

59

तुला राशि में गुरु (बृहस्पति) का फल

516

60

तुला राशि में शुक्र का फल

519

61

तुला राशि में शनि का फल

522

62

तुला राशि में राहु का फल

525

63

तुला राशि में केतु का फल

528

64

वृश्चिक राशि में सूर्य का फल

531

65

वृश्चिक राशि में चन्द्रमा का फल

534

66

वृश्चिक राशि में मंगल का फल

537

67

वृश्चिक राशि में बुध का फल

540

68

वृश्चिक राशि में गुरु (बृहस्पति) का फल

543

69

वृश्चिक राशि में शुक्र का फल

546

70

वृश्चिक राशि में शनि का फल

549

71

वृश्चिक राशि में राहु का फल

552

72

वृश्चिक राशि में केतु का फल

555

73

धनु राशि में सूर्य का फल

558

74

धनु राशि में चन्द्रमा का फल

561

75

धनु राशि में मंगल का फल

564

76

धनु राशि में बुध का फल

567

77

धनु राशि में गुरु (बृहस्पति) का फल

570

78

धनु राशि में शुक्र का फल

573

79

धनु राशि में शनि का फल

576

80

धनु राशि में राहु का फल

589

81

धनु राशि में केतु का फल

582

82

मकर राशि में सूर्य का फल

585

83

मकर राशि में चन्द्रमा का फल

588

84

मकर राशि में मंगल का फल

591

85

मकर राशि में बुध का फल

594

86

मकर राशि में गुरु (बृहस्पति) का फल

597

87

मकर राशि में शुक्र का फल

600

88

मकर राशि में शनि का फल

603

89

मकर राशि में राहु का फल

606

90

मकर राशि में केतु का फल

609

91

कुम्भ राशि मे सूर्य का फल

612

92

कुम्भ राशि में चन्द्रमा का फल

615

93

कुम्भ राशि में मंगल का फल

618

94

कम्म राशि में बुध का फल

621

95

कुम्भ राशि में गुरु (बृहस्पति) का फल

624

96

कम्म राशि में शुक्र का फल

627

97

कुम्भ राशि में शनि का फल

630

98

कुम्भ राशि में राहु का फल

633

99

कुम्भ राशि में केतु का फल

636

100

मीन राशि में सूर्य का फल

639

101

मीनू राशि में चन्द्रमा का फल

642

102

मीन राशि में मंगल का फल

645

103

मीन राशि में बुध का फल

648

104

मीन राशि में गुरु (बृहस्पति) का फल

651

105

मीन राशि में शुक्र का फल

654

106

मीन राशि में शनि का फल

657

107

मीन राशि में राहु का फल

660

108

मीन राशि मे केतु का फल

663

अष्टम अध्याय : ग्रहों की युति क् फल

1

दो ग्रहों की युति का फलादेश

667

2

तीन ग्रहों की युति का फलादेश

672

3

चार ग्रहों की युति का फलादेश

681

4

पांच ग्रहों की युति का फलादेश

690

5

छ: ग्रहों की युति का फलादेश

695

6

मान ग्रहों की युति का फलादेश

697

सप्तम अध्याय : आधुनिक ग्रह एवं उनके फल

1

विभिन्न राशिस्थ 'हर्शल' का फल

698

2

विभिन्न राशिस्थ 'नेचच्यून' का फल

701

3

हर्शल पर दृष्टि-प्रभाव

704

4

भाव के प्रभाव (उपर्युक्त युति में)

705

5

नेपच्यून पर दृष्टि-प्रभाव

706

6

भावानुसार प्रभाव (युति या दृष्टि सम्बन्ध मे)

707

7

हर्शल एवं नेपच्यून का आपसी सम्बन्ध

707

अष्टम् अध्याय : उपाय

1

सूर्य का प्रथम भाव से द्वादश भाव तक उपाय

708

2

चन्द्रमा का प्रथम भाव से द्वादश भाव तक उपाय

712

3

मंगल का प्रथम भाव से द्वादश भाव तक उपाय

715

4

बुध का प्रथम भाव से द्वादश भाव तक उपाय

719

5

गुरु (बृहस्पति) का प्रथम भाव से द्वादश भाव तक उपाय

723

6

शुक्र का प्रथम भाव से द्वादश भाव तक उपाय

726

7

शनि का प्रथम भाव से द्वादश भाव तक उपाय

731

8

राहु का प्रथम भाव से द्वादश भाव तक उपाय

734

9

केतु का प्रथम भाव से द्वादश भाव तक उपाय

737

10

दो ग्रहों की युति का उपाय

740

11

कुछ विशिष्ट युतियों के उपाय

742

12

नवग्रह शान्ति: सात्विक अनुष्ठान

744

13

नवग्रह शान्ति अनुष्ठान

745

14

सूर्य ग्रह शांति अनुष्ठान

746

15

चन्द्रग्रह शांति अनुष्ठान

747

16

मंगल ग्रह शांति अनुष्ठान

749

17

बुध ग्रह शांति अनुष्ठान

751

18

वृहस्पति ग्रह शांति अनुष्ठान

752

19

शुक्र ग्रह शांति अनुष्ठान

754

20

शनि ग्रह शांति अनुष्ठान

755

21

राहु ग्रह शांति अनुष्ठान

757

22

केतु ग्रह शांति अनुष्ठान

759

23

कुछ विशेष शक्तिशाली स्रोत

760

24

ग्रह शांति के तांत्रिक उपाय

764

नवम अध्याय : रत्न और ज्योतिषफल

1

रत्न और ज्योतिष सम्बन्ध

715

2

रत्नों की पहचान एवं मात्रा

715

3

लग्न राशि के अनुसार रत्न

717

4

जन्म तिथि के अनुसार रत्न

809

5

नव रत्न अँगूठी एवं माला

810

6

अन्य कम मूल्यों के रत्नों के प्रभाव

810

7

रत्नों की विशिष्ट श्रेणियाँ एवं देवी-देवता

814

 

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