Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Your Cart (0)
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindu > हिन्दी > मुक्ति के चार सोपान (पातंजल योग सूत्रों का योगिक भाष्य) - Four Chapters on Freedom: Commentary on the Yoga Sutras of Patanjali
Displaying 1 of 7328         Previous  |  NextSubscribe to our newsletter and discounts
मुक्ति के चार सोपान (पातंजल योग सूत्रों का योगिक भाष्य) - Four Chapters on Freedom: Commentary on the Yoga Sutras of Patanjali
मुक्ति के चार सोपान (पातंजल योग सूत्रों का योगिक भाष्य) - Four Chapters on Freedom: Commentary on the Yoga Sutras of Patanjali
Description
पुस्तक परिचय

यह पुस्तक महर्षि पंतजलि द्वारा प्रणीत योग सूत्र का यौगिक भाष्य है। स्वामी सत्यानन्द जी ने अपने गहन ज्ञात तथा व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर इन सूत्रों के निहितार्थ को सरल भाषा में समझाया है ताकि सभी उनसे लाभन्वित हो सकें। अष्टांग योग के ये सूत्र साधक का मार्गदर्शन तथा आगे बढ़ने में सहायता करते हैं और उसे ऐसा सामर्थ्थ प्रदान करते हैं,जिससे वह अपने मन की परत दर परत खोजबीन करके आत्मसाक्षात्कार तथा मुक्ति प्राप्त कर लेता है। योगाभ्यास द्वार पूर्ण मुक्ति का पथ इन सूत्रों द्वारा ही प्रशस्त तथा निर्देशित होता है।

यह ग्रंथा आधुनिक मनोचिकित्सीय तथा मनोवैज्ञानिक विधियों का सार है। यह मनोचिकित्सकों के लिए मानक संदर्भ ग्रंथ तथा व्यावहारिक ज्ञान का एक अनुपमेय संग्रहणीय ग्रंथ है।

 

लेखक परिचय

स्वामी सत्यानन्द सरस्वती का जन्म उत्तर प्रदेश के अल्मोड़ा ग्राम में 1923 में हुआ । 1943 में उन्हें ऋषिकेश में अपने गुरु स्वामी शिवानन्द के दर्शन हुए । 1947 में गुरु ने उन्हें परमहंस संन्याय में दीक्षित किया ।

1956 में उन्होंने परिव्राजक संन्यासी के रूप में भ्रमण करने के लिए शिवानन्द आश्रम छोड़ दिया । तत्पश्चात् 1956 में ही उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय योग मित्र मण्डल एवं 1963 मे बिहार योग विद्यालय की स्थापना की । अगले 20 वर्षों तक वे योग के अग्रणी प्रवक्ता के रूप में विश्व भ्रमण करते रहे । अस्सी से अधिक ग्रन्यों के प्रणेता स्वामीजी ने ग्राम्य विकास की भावना से 1984 में दातव्य संस्था शिवानन्द मठ की एवं योग पर वैज्ञानिक शोध की दृष्टि से योग शोध संस्थान की स्थापना की ।

1988 में अपने मिशन से अवकाश ले, क्षेत्र संन्यास अपनाकर सार्वभौम दृष्टि से परमहंस संन्यासी का जीवन अपना लिया है ।

 

 

 














Sample Pages














मुक्ति के चार सोपान (पातंजल योग सूत्रों का योगिक भाष्य) - Four Chapters on Freedom: Commentary on the Yoga Sutras of Patanjali

Item Code:
HAA251
Cover:
Paperback
Edition:
2004
ISBN:
9788185787923
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
236
Other Details:
Weight of the Book: 270 gms
Price:
$15.00   Shipping Free
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
मुक्ति के चार सोपान (पातंजल योग सूत्रों का योगिक भाष्य) - Four Chapters on Freedom: Commentary on the Yoga Sutras of Patanjali

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 4738 times since 11th Aug, 2017
पुस्तक परिचय

यह पुस्तक महर्षि पंतजलि द्वारा प्रणीत योग सूत्र का यौगिक भाष्य है। स्वामी सत्यानन्द जी ने अपने गहन ज्ञात तथा व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर इन सूत्रों के निहितार्थ को सरल भाषा में समझाया है ताकि सभी उनसे लाभन्वित हो सकें। अष्टांग योग के ये सूत्र साधक का मार्गदर्शन तथा आगे बढ़ने में सहायता करते हैं और उसे ऐसा सामर्थ्थ प्रदान करते हैं,जिससे वह अपने मन की परत दर परत खोजबीन करके आत्मसाक्षात्कार तथा मुक्ति प्राप्त कर लेता है। योगाभ्यास द्वार पूर्ण मुक्ति का पथ इन सूत्रों द्वारा ही प्रशस्त तथा निर्देशित होता है।

यह ग्रंथा आधुनिक मनोचिकित्सीय तथा मनोवैज्ञानिक विधियों का सार है। यह मनोचिकित्सकों के लिए मानक संदर्भ ग्रंथ तथा व्यावहारिक ज्ञान का एक अनुपमेय संग्रहणीय ग्रंथ है।

 

लेखक परिचय

स्वामी सत्यानन्द सरस्वती का जन्म उत्तर प्रदेश के अल्मोड़ा ग्राम में 1923 में हुआ । 1943 में उन्हें ऋषिकेश में अपने गुरु स्वामी शिवानन्द के दर्शन हुए । 1947 में गुरु ने उन्हें परमहंस संन्याय में दीक्षित किया ।

1956 में उन्होंने परिव्राजक संन्यासी के रूप में भ्रमण करने के लिए शिवानन्द आश्रम छोड़ दिया । तत्पश्चात् 1956 में ही उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय योग मित्र मण्डल एवं 1963 मे बिहार योग विद्यालय की स्थापना की । अगले 20 वर्षों तक वे योग के अग्रणी प्रवक्ता के रूप में विश्व भ्रमण करते रहे । अस्सी से अधिक ग्रन्यों के प्रणेता स्वामीजी ने ग्राम्य विकास की भावना से 1984 में दातव्य संस्था शिवानन्द मठ की एवं योग पर वैज्ञानिक शोध की दृष्टि से योग शोध संस्थान की स्थापना की ।

1988 में अपने मिशन से अवकाश ले, क्षेत्र संन्यास अपनाकर सार्वभौम दृष्टि से परमहंस संन्यासी का जीवन अपना लिया है ।

 

 

 














Sample Pages














Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Based on your browsing history

Loading... Please wait

Related Items

Patanjali Caritam (The Legend of Sage Patanjali)
by Dr. M. Jayaraman
Paperback (Edition: 2012)
Krishnamacharya Yoga Mandiram
Item Code: NAK063
$15.00
Add to Cart
Buy Now
The Wisdom of Patanjali’s Yoga Sutras
Item Code: NAD672
$40.00
Add to Cart
Buy Now
Patanjali’s Yoga Sutra
Item Code: NAG646
$20.00
Add to Cart
Buy Now
Yoga Sutras of Patanjali
Item Code: NAN651
$35.00
Add to Cart
Buy Now

Testimonials

Thanks for sharpening our skills with wisdom and sense of humor.The torchbearers of the ancient deity religion are spread around the world and the books of wisdom from India bridges the gap between east and west.
Kaushiki, USA
Thank you for this wonderful New Year sale!
Michael, USA
Many Thanks for all Your superb quality Artworks at unbeatable prices. We have been recommending EI to friends & family for over 5 yrs & will continue to do so fervently. Cheers
Dara, Canada
Thank you for your wonderful selection of books and art work. I am a regular customer and always appreciate the excellent items you offer and your great service.
Lars, USA
Colis bien reçu, emballage excellent et statue conforme aux attentes. Du bon travail, je reviendrai sur votre site !
Alain, France
GREAT SITE. SANSKRIT AND HINDI LINGUISTICS IS MY PASSION. AND I THANK YOU FOR THIS SITE.
Madhu, USA
I love your site and although today is my first order, I have been seeing your site for the past several years. Thank you for providing such great art and books to people around the World who can't make it to India as often as we would like.
Rupesh
Heramba Ganapati arrived safely today and was shipped promptly. Another fantastic find from Exotic India with perfect customer service. Thank you. Jai Ganesha Deva
Marc, UK
I ordered Padmapani Statue. I have received my statue. The delivering process was very fast and the statue looks so beautiful. Thank you exoticindia, Mr. Vipin (customer care). I am very satisfied.
Hartono, Indonesia
Very easy to buy, great site! Thanks
Ilda, Brazil
TRUSTe
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2018 © Exotic India