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Books > Philosophy > असंभव क्रांति: Impossible Revolution
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असंभव क्रांति: Impossible Revolution
असंभव क्रांति: Impossible Revolution
Description

 

पुस्तक के विषय में

स्वतंत्रता विद्रोह नहीं है, क्रांति है। क्रांति की बात ही अलग है। क्रांति का अर्थ है दूसरे से कोई प्रयोजन नहीं है। हम किसी के विरोध में स्वतंत्रत नही हो रहे है। क्योंकि विरोध में हम स्वतंत्र होगे, तो वह स्वच्छंदता हो जाएगी। हम दूसरे मुक्त हो रहे है न उसमें हमें विरोध है, न हमें उसका अनुगमन है। न हम उसके शत्रु है, न हम उसके मित्र है हम उससे मुक्त हो रहे है। और यह मुक्ति पर से मुक्ति जिस ऊर्जा को जन्म देती है, जिसे डाइमेन्शन को जिस दिशा को खोल देती है, उसका नाम स्वतंत्रता है।

पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदु:-

पल-पल, मोमेंट टु मोमेंट जीने का सूत्र

मनुष्य होने की पहली शुरुआत भीड़ से मुक्ति है

शास्त्र और किताब में फर्क क्या है?

धर्म आत्मा का विज्ञान है

प्रेम का जीवन ही सृजनात्मक जीवन है

भूमिका

एकाग्रता चित्त का श्रम है । एकाग्रता का मतलब है, कनसनट्रेशन का : किसी एक चीज पर चित्त को जबर्दस्ती रोकना, शेष सारी चीजो पर चित्त को बंद करना, केवल एक चीज पर खोलना । चाहे नाम पर, चाहे मूर्ति पर, चाहे शब्द पर, चाहे किसी ओर प्रतीक पर, कोई सिंबल पर । एक पर मन को रोकना और शेष सबके प्रति मन को बंद करना ।

यह मन के स्वभाव के प्रतिकूल है । यह जबर्दस्ती है । इस जबर्दस्ती में चित्त पर तनाव पैदा होगा, श्रम होगा, स्ट्रेन होगा, परेशानी होगी । और परेशानी के दो फल हो सकते हैं । अगर चित्त बहुत परेशान हो जाएगा तो बचने के दो उपाय है । या तो चित्त सो जाए तो परेशानी से छुटकारा हो जाता है । और या चित्त पागल हो जाए तो भी परेशानी से छुटकारा हो जाता है ।

कनसनट्रेशन या तो नींद में ले जा सकता है, या पागलपन में । और कहीं भी नहीं ले जा सकता । जो अनेक साधु पागल होते देखे जाते है, उसका कोई और कारण नहीं है । लेकिन हम तो अजीब ही लोग है । हम कहते हैं, ईश्वर का उन्माद चढ़ गया है, ईश्वर के आनंद में मस्त हो गए है । हो गए हैं पागल! और या चित्त सो जाता है । क्योंकि चित्त को ज्यादा हम परेशान करें, तो फिर चित्त परेशानी से ऊब जाता है और नींद में चला जाता है, वह उसकी एस्केप है ।

तो अनेक लोग जो माला-वाला जपते रहते हैं, अक्सर गहरी नींद में सोए रहते है । राम-राम जपते रहते हैं, उससे नींद अच्छी आती है । उतनी देर नींद अगर आ जाती है तो उन्हें अच्छा लगता है । क्योंकि उतनी देर सब भूल जाता है । जहां सब भूल जाता है, वहां दुख, चिंताएं भी भूल जाती है । दुख, चिंताओ का भूल जाना- -परमात्मा को, आनंद को, या सत्य को पा लेना नहीं है । वह तो शराब पीने वाला भी यही कर रहा है; दुख, चिंताओ को भूल रहा है । तो कनसनट्रेशन, एकाग्रता, चित्त की जबर्दस्ती से, चित्त को या तो निद्रा मे और या असंतुलन में ले जाने का उपाय है ।

लेकिन जिसे मैं ध्यान कह रहा हूं वह कनसनट्रेशन नहीं है, वह एकाग्रता नहीं है । वह केवल सहज जागरूकता है जागरूकता का अर्थ एक चीज के प्रति नहीं, समस्त के प्रति केवल जागे हुए होना है । और जागरूकता का कोई भी उपाय नींद में ले जाने वाला नहीं हो सकता है । क्योंकि जागरूकता नींद से बिलकुल विपरीत दिशा है । और चूकि जागरूकता में कोई तनाव, कोई टेशन का कोई कारण नहीं है । क्योंकि तनाव जब पैदा होता है, जब हम चुनाव करते है । जब हम चुनाव ही नहीं करते और सब चीजों के प्रति सरलता से जागते है, कोई दबाव नही डालते मन पर तो मन के विक्षिप्त होने का भी कोई कारण नही है ।

मन स्वस्थ होता है जागरूकता से । और जो जागरूकता को उपलब्ध हो जाता है, उसके चित्त मे न तो चंचलता रह जाती है । और चंचलता न रह जाने के कारण एकाग्र करने की कोई जरूरत भी नहीं रह जाती । उसका चित्त पो सहज ही किसी भी चीज पर पूरे रूप से जाग जाता है।

एकाग्रता की जरूरत ही इसीलिए पड़ती है कि हमारा चित्त एक चीज पर जाग नहीं पाता, इसलिए हम सब तरफ से सुला कर एक तरफ जगाने की कोशिश करते है ।

 

अनुक्रम

1

सत्य का द्वार

1

2

पुराने का विसर्जन, नये का जन्म

21

3

मौन का स्वर

39

4

ध्यान की आंख

57

5

क्रांति का क्षण

79

6

जीवन का आविर्भाव

97

7

सत्य का संगीत

115

8

सृजन का सूत्र

131

9

काम का रूपांतरण

151

10

बस एक कदम

169

ओशो एक परिचय

187

ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन रिजॉर्ट

188

ओशो का हिंदी साहित्य

190

अधिक जानकारी के लिए

195

 

 

 

असंभव क्रांति: Impossible Revolution

Item Code:
NZA648
Cover:
Hardcover
Edition:
2012
ISBN:
9788172612665
Language:
Hindi
Size:
9.0 inch X 6.0 inch
Pages:
203
Other Details:
Weight of the Book: 450 gms
Price:
$25.00   Shipping Free
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असंभव क्रांति: Impossible Revolution

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पुस्तक के विषय में

स्वतंत्रता विद्रोह नहीं है, क्रांति है। क्रांति की बात ही अलग है। क्रांति का अर्थ है दूसरे से कोई प्रयोजन नहीं है। हम किसी के विरोध में स्वतंत्रत नही हो रहे है। क्योंकि विरोध में हम स्वतंत्र होगे, तो वह स्वच्छंदता हो जाएगी। हम दूसरे मुक्त हो रहे है न उसमें हमें विरोध है, न हमें उसका अनुगमन है। न हम उसके शत्रु है, न हम उसके मित्र है हम उससे मुक्त हो रहे है। और यह मुक्ति पर से मुक्ति जिस ऊर्जा को जन्म देती है, जिसे डाइमेन्शन को जिस दिशा को खोल देती है, उसका नाम स्वतंत्रता है।

पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदु:-

पल-पल, मोमेंट टु मोमेंट जीने का सूत्र

मनुष्य होने की पहली शुरुआत भीड़ से मुक्ति है

शास्त्र और किताब में फर्क क्या है?

धर्म आत्मा का विज्ञान है

प्रेम का जीवन ही सृजनात्मक जीवन है

भूमिका

एकाग्रता चित्त का श्रम है । एकाग्रता का मतलब है, कनसनट्रेशन का : किसी एक चीज पर चित्त को जबर्दस्ती रोकना, शेष सारी चीजो पर चित्त को बंद करना, केवल एक चीज पर खोलना । चाहे नाम पर, चाहे मूर्ति पर, चाहे शब्द पर, चाहे किसी ओर प्रतीक पर, कोई सिंबल पर । एक पर मन को रोकना और शेष सबके प्रति मन को बंद करना ।

यह मन के स्वभाव के प्रतिकूल है । यह जबर्दस्ती है । इस जबर्दस्ती में चित्त पर तनाव पैदा होगा, श्रम होगा, स्ट्रेन होगा, परेशानी होगी । और परेशानी के दो फल हो सकते हैं । अगर चित्त बहुत परेशान हो जाएगा तो बचने के दो उपाय है । या तो चित्त सो जाए तो परेशानी से छुटकारा हो जाता है । और या चित्त पागल हो जाए तो भी परेशानी से छुटकारा हो जाता है ।

कनसनट्रेशन या तो नींद में ले जा सकता है, या पागलपन में । और कहीं भी नहीं ले जा सकता । जो अनेक साधु पागल होते देखे जाते है, उसका कोई और कारण नहीं है । लेकिन हम तो अजीब ही लोग है । हम कहते हैं, ईश्वर का उन्माद चढ़ गया है, ईश्वर के आनंद में मस्त हो गए है । हो गए हैं पागल! और या चित्त सो जाता है । क्योंकि चित्त को ज्यादा हम परेशान करें, तो फिर चित्त परेशानी से ऊब जाता है और नींद में चला जाता है, वह उसकी एस्केप है ।

तो अनेक लोग जो माला-वाला जपते रहते हैं, अक्सर गहरी नींद में सोए रहते है । राम-राम जपते रहते हैं, उससे नींद अच्छी आती है । उतनी देर नींद अगर आ जाती है तो उन्हें अच्छा लगता है । क्योंकि उतनी देर सब भूल जाता है । जहां सब भूल जाता है, वहां दुख, चिंताएं भी भूल जाती है । दुख, चिंताओ का भूल जाना- -परमात्मा को, आनंद को, या सत्य को पा लेना नहीं है । वह तो शराब पीने वाला भी यही कर रहा है; दुख, चिंताओ को भूल रहा है । तो कनसनट्रेशन, एकाग्रता, चित्त की जबर्दस्ती से, चित्त को या तो निद्रा मे और या असंतुलन में ले जाने का उपाय है ।

लेकिन जिसे मैं ध्यान कह रहा हूं वह कनसनट्रेशन नहीं है, वह एकाग्रता नहीं है । वह केवल सहज जागरूकता है जागरूकता का अर्थ एक चीज के प्रति नहीं, समस्त के प्रति केवल जागे हुए होना है । और जागरूकता का कोई भी उपाय नींद में ले जाने वाला नहीं हो सकता है । क्योंकि जागरूकता नींद से बिलकुल विपरीत दिशा है । और चूकि जागरूकता में कोई तनाव, कोई टेशन का कोई कारण नहीं है । क्योंकि तनाव जब पैदा होता है, जब हम चुनाव करते है । जब हम चुनाव ही नहीं करते और सब चीजों के प्रति सरलता से जागते है, कोई दबाव नही डालते मन पर तो मन के विक्षिप्त होने का भी कोई कारण नही है ।

मन स्वस्थ होता है जागरूकता से । और जो जागरूकता को उपलब्ध हो जाता है, उसके चित्त मे न तो चंचलता रह जाती है । और चंचलता न रह जाने के कारण एकाग्र करने की कोई जरूरत भी नहीं रह जाती । उसका चित्त पो सहज ही किसी भी चीज पर पूरे रूप से जाग जाता है।

एकाग्रता की जरूरत ही इसीलिए पड़ती है कि हमारा चित्त एक चीज पर जाग नहीं पाता, इसलिए हम सब तरफ से सुला कर एक तरफ जगाने की कोशिश करते है ।

 

अनुक्रम

1

सत्य का द्वार

1

2

पुराने का विसर्जन, नये का जन्म

21

3

मौन का स्वर

39

4

ध्यान की आंख

57

5

क्रांति का क्षण

79

6

जीवन का आविर्भाव

97

7

सत्य का संगीत

115

8

सृजन का सूत्र

131

9

काम का रूपांतरण

151

10

बस एक कदम

169

ओशो एक परिचय

187

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188

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