Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Your Cart (0)
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindi > भारतीय ज्योतिष: Indian Astrology
Displaying 3591 of 11200         Previous  |  NextSubscribe to our newsletter and discounts
भारतीय ज्योतिष: Indian Astrology
भारतीय ज्योतिष: Indian Astrology
Description

प्रकाशकीय

प्रकृति की जिन घटनाओ से मनुष्य का पहला-पहला साक्षात्कार हुआ, उनमें या उनके प्रेरक तत्वों के रूप में खगोलीय घटनाओं का अत्यंत प्रमुख योगदान है। ग्रहों उपग्रहों, नक्षत्रों, नीहारिकाओं की स्थितियाँ और ब्रह्माण्ड की विभिन्न घटनाए निरतर उसकी उत्सुकता का केन्द्र रही हैं। अत्यत प्राचीन काल से विशेषकर भारतीयों ने इस दिशा में अत्यन्त सराहनीय कार्य किया है और ऋग्वेद तक में काल-गणना आदि के संकेत मिलते हैं। बाद में इसे ज्योतिष है रूप में अभिहित किया गया। आश्चर्यजनक रूप से आज भी जिन दो सर्वाधिक प्रमुख क्षेत्रों यथा कम्प्यूटर साइरन और अतरिक्ष विज्ञान आदि में भारत दुनिया का नेतृत्व कर रहा है, वे दोनों ही काफी हद तक इसी काल-गणना और खगोलीय विज्ञान के ही विकसित रूप हैं।

देश के सुप्रसिद्ध खगोलविद् और ज्योतिषाचार्य स्वर्गीय श्रीशंकर बालकृष्ण दीक्षित की पुस्तक 'भारतीय ज्योतिष' इस सदर्भ में वर्तमान में लिखी गयी पुस्तको में अत्यन्त उल्लेखनीय रही है। इस क्षेत्र के विद्वान और जिज्ञासु पाठक इस रचना को मानक-रूप में स्वीकारते हैं। मूलत: 'भारतीय ज्योतिष' एक सदी पूर्व मराठी में लिखी गयी थी, जिसका यह हिन्दी अनुवाद ज्योतिषाचार्य-शिवनाथ झारखण्डी जी ने किया है। इसका पहला सस्करण पिछली सदी के छठे दशक में हिन्दी समिति प्रकाशन योजना में किया गया था। तब से इस अमूल्य धरोहर के तीन सस्करण प्रकाशित हो चुके हैं। इन्हे अत्यत सराहा गया, अपनाया गया और इसी के चलते यह चौथा सस्करण आपके हाथो में है। विद्वान लेखक और अनुवादक दोनो ही अब नही हैं, सो उनकी पुण्य स्मृति में नमन के साथ हम यह पुस्तक अपनी हिन्दी समिति प्रभाग की प्रकाशन योजना के अन्तर्गत पुन मुद्रित करते हुए विद्वान द्वय के प्रति श्रद्धाविनत हैं।

मूलत यह ग्रन्थ दो भागों में विभक्त है -प्रथम भाग में वैदिककाल तथा वैदागकाल में ज्योतिष' के विकास की चर्चा है । द्वितीय भाग में सिद्धान्तकालीन ज्योतिषशास्त्र के इतिहास की चर्चा है। इनमें ज्योतिषशारत्र के सभी अगों पर गम्भीर विस्तारित और तार्किक जानकारियाँ पग-पग पर पाठक को गहरे प्रभावित एव प्रशिक्षित करती है । ज्योतिषशास्त्र के सहिता व जातक जैसे क्षेत्र ग्रहादि की ज्योतियों की गति पर अवलम्बित होते हैं। इसी तरह, अमुक समय पर अमुक ग्रह आकाश में अमुक स्थान पर रहेगा, यह बताना भी ज्योतिषशास्त्र का अत्यन्त महत्वपूर्ण अंग है। ऐसी अनेकानेक दुरूह जानकारियाँ यह ग्रथ हमें तत्काल देने में सक्षम है। विद्वान लेखक ने अपनी भूमिका में ज्योतिष के लगभग पाँच सौ प्राचीन ग्रथों के अध्ययन की चर्चा की है, दो हजार अन्य ग्रथों को न पढ़ पाने पर दु:ख भी व्यक्त किया है, इससे सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि वह कितने जिज्ञासु विनयी और प्रखर चिन्तक रहे होंगे और इसके चलते यह पुस्तक इतनी उपयोगी और सारगर्भित है। आशा है ऐसे असाधारण मनीषी के इस ग्रंथ रत्न का पूर्व तू की भाँति यह चतुर्थ सस्करण भी विद्वानों, छात्रों एव जिज्ञासु पाठकों के बीच समुचित रूप से समादृत होगा।

 

 






Sample Pages
















भारतीय ज्योतिष: Indian Astrology

Item Code:
NZA858
Cover:
Paperback
Edition:
2010
ISBN:
9788189989545
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
755
Other Details:
Weight of the Book: 780 gms
Price:
$30.00   Shipping Free
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
भारतीय ज्योतिष: Indian Astrology

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 1732 times since 17th Oct, 2016

प्रकाशकीय

प्रकृति की जिन घटनाओ से मनुष्य का पहला-पहला साक्षात्कार हुआ, उनमें या उनके प्रेरक तत्वों के रूप में खगोलीय घटनाओं का अत्यंत प्रमुख योगदान है। ग्रहों उपग्रहों, नक्षत्रों, नीहारिकाओं की स्थितियाँ और ब्रह्माण्ड की विभिन्न घटनाए निरतर उसकी उत्सुकता का केन्द्र रही हैं। अत्यत प्राचीन काल से विशेषकर भारतीयों ने इस दिशा में अत्यन्त सराहनीय कार्य किया है और ऋग्वेद तक में काल-गणना आदि के संकेत मिलते हैं। बाद में इसे ज्योतिष है रूप में अभिहित किया गया। आश्चर्यजनक रूप से आज भी जिन दो सर्वाधिक प्रमुख क्षेत्रों यथा कम्प्यूटर साइरन और अतरिक्ष विज्ञान आदि में भारत दुनिया का नेतृत्व कर रहा है, वे दोनों ही काफी हद तक इसी काल-गणना और खगोलीय विज्ञान के ही विकसित रूप हैं।

देश के सुप्रसिद्ध खगोलविद् और ज्योतिषाचार्य स्वर्गीय श्रीशंकर बालकृष्ण दीक्षित की पुस्तक 'भारतीय ज्योतिष' इस सदर्भ में वर्तमान में लिखी गयी पुस्तको में अत्यन्त उल्लेखनीय रही है। इस क्षेत्र के विद्वान और जिज्ञासु पाठक इस रचना को मानक-रूप में स्वीकारते हैं। मूलत: 'भारतीय ज्योतिष' एक सदी पूर्व मराठी में लिखी गयी थी, जिसका यह हिन्दी अनुवाद ज्योतिषाचार्य-शिवनाथ झारखण्डी जी ने किया है। इसका पहला सस्करण पिछली सदी के छठे दशक में हिन्दी समिति प्रकाशन योजना में किया गया था। तब से इस अमूल्य धरोहर के तीन सस्करण प्रकाशित हो चुके हैं। इन्हे अत्यत सराहा गया, अपनाया गया और इसी के चलते यह चौथा सस्करण आपके हाथो में है। विद्वान लेखक और अनुवादक दोनो ही अब नही हैं, सो उनकी पुण्य स्मृति में नमन के साथ हम यह पुस्तक अपनी हिन्दी समिति प्रभाग की प्रकाशन योजना के अन्तर्गत पुन मुद्रित करते हुए विद्वान द्वय के प्रति श्रद्धाविनत हैं।

मूलत यह ग्रन्थ दो भागों में विभक्त है -प्रथम भाग में वैदिककाल तथा वैदागकाल में ज्योतिष' के विकास की चर्चा है । द्वितीय भाग में सिद्धान्तकालीन ज्योतिषशास्त्र के इतिहास की चर्चा है। इनमें ज्योतिषशारत्र के सभी अगों पर गम्भीर विस्तारित और तार्किक जानकारियाँ पग-पग पर पाठक को गहरे प्रभावित एव प्रशिक्षित करती है । ज्योतिषशास्त्र के सहिता व जातक जैसे क्षेत्र ग्रहादि की ज्योतियों की गति पर अवलम्बित होते हैं। इसी तरह, अमुक समय पर अमुक ग्रह आकाश में अमुक स्थान पर रहेगा, यह बताना भी ज्योतिषशास्त्र का अत्यन्त महत्वपूर्ण अंग है। ऐसी अनेकानेक दुरूह जानकारियाँ यह ग्रथ हमें तत्काल देने में सक्षम है। विद्वान लेखक ने अपनी भूमिका में ज्योतिष के लगभग पाँच सौ प्राचीन ग्रथों के अध्ययन की चर्चा की है, दो हजार अन्य ग्रथों को न पढ़ पाने पर दु:ख भी व्यक्त किया है, इससे सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि वह कितने जिज्ञासु विनयी और प्रखर चिन्तक रहे होंगे और इसके चलते यह पुस्तक इतनी उपयोगी और सारगर्भित है। आशा है ऐसे असाधारण मनीषी के इस ग्रंथ रत्न का पूर्व तू की भाँति यह चतुर्थ सस्करण भी विद्वानों, छात्रों एव जिज्ञासु पाठकों के बीच समुचित रूप से समादृत होगा।

 

 






Sample Pages
















Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Related Items

Hindi-English Phrase Book
by Kavita Kumar
Paperback (Edition: 2008)
Rupa Publication Pvt. Ltd.
Item Code: IDC389
$14.00
Add to Cart
Buy Now

Testimonials

I love this web site and love coming to see what you have online.
Glenn, Australia
Received package today, thank you! Love how everything was packed, I especially enjoyed the fabric covering! Thank you for all you do!
Frances, Austin, Texas
Hi, just got my order! Wow! Soooooo beautiful!!! I'm so happy! You rock, thank you!
Amy, Malibu, USA
Nice website..has a collection of rare books.
Srikanth
Beautiful products nicely presented and easy to use website
Amanda, UK.
I received my order, very very beautiful products. I hope to buy something more. Thank you!
Gulnora, Uzbekistan
Thank you very much for the courtesy you showed me for the time I buy my books. The last book is a good book. İt is important in terms of recognizing fine art of İndia.
Suzan, Turkey
Thank You very much Sir. I really like the saree and the blouse fit perfeact. Thank You again.
Sulbha, USA
I have received the parcel yesterday and the shiv-linga idol is sooo beautiful and u have exceeded my expectations...
Guruprasad, Bangalore
Yesterday I received my lost and through you again found order. Very quickly I must say !. Thank you and thank you again for your service. I am very happy with this double CD of Ustad Shujaat Husain Khan. I thought it was lost forever and now I can add it to my CD collection. I hope in the near future to buy again at your online shop. You have wonderful items to offer !
Joke van der Baars, the Netherlands
TRUSTe
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2017 © Exotic India