Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Your Cart (0)
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Philosophy > जीवन ही है प्रभु और ना खोजना कहीं: Life is God , Do Not Look Elsewhere
Displaying 1857 of 2772         Previous  |  NextSubscribe to our newsletter and discounts
जीवन ही है प्रभु और ना खोजना कहीं: Life is God , Do Not Look Elsewhere
जीवन ही है प्रभु और ना खोजना कहीं: Life is God , Do Not Look Elsewhere
by Osho
Description

पुस्तक परिचय

ध्यान की गहराइयों में वह किरण आती है, वह रथ आता है द्वार पर जो कहता है सम्राट हो तुम, परमात्मा हो तुम, प्रभु हो तुम, सब प्रभु है, सारा जीवन प्रभु है । जिस दिन वह किरण आती है, वह रथ आता है, उसी दिन सब बदल जाता है । उस दिन जिंदगी और हो जाती है । उस दिन चोर होना असंभव है । सम्राट कहीं चोर होते हैं! उस दिन क्रोध करना असंभव है । उस दिन दुखी होना असंभव है । उस दिन एक नया जगत शुरू होता है । उस जगत, उस जीवन की खोज ही धर्म है ।

इन चर्चाओं में इस जीवन, इस प्रभु को खोजने के लिए क्या हम करें, उस संबंध में कुछ बातें मैंने कही हैं । मेरी बातों से वह किरण न आएगी, मेरी बातों से वह रथ भी न आएगा, मेरी बातों से आप उस जगह न पहुंच जाएंगे । लेकिन ही, मेरी बाते आपको प्यासा कर सकती हैं । मेरी बातें आपके मन में घाव छोड जा सकती हैं । मेरी बातों से आपके मन की नींद थोड़ी बहुत चौंक सकती है । हो सकता है, शायद आप चौंक जाएं और उस यात्रा पर निकल जाएं जो ध्यान की यात्रा है ।

तो निश्चित है, आश्वासन है कि जो कभी भी ध्यान की यात्रा पर गया है, वह धर्म के मंदिर पर पहुंच जाता है । ध्यान का पथ है, उपलब्ध धर्म का मंदिर हो जाता है । और उस मंदिर के भीतर जो प्रभु विराजमान है, वह कोई मूर्तिवाला प्रभु नहीं है, समस्त जीवन का ही प्रभु है ।

 

इस पुस्तक के कुछ विषय बिंदु :

o   परमात्मा को कहा खोजें ?

o   क्यों सबमें दोष दिखाई पड़ते हैं

o   जिंदगी को एक खेल और एक लीला बना लेना

o   क्या ध्यान और आत्मलीनता में जाने से बुराई मिट सकेगी

 

सम्यक प्रारंभ

मैने सुना है एक फकीर के पास कुछ युवक साधना के लिए आए थे कि हमें परमात्मा को खोजना है । तो उस फकीर ने कहा तुम एक छोटा सा काम कर लाओ । उसने उन चारो युवकों को एकएक कबूतर दे दिया और कहा कि कहीं अंधेरे में मार लाओ जहां कोई देखता न हो । एक गया बाहर उसने देखा चारों तरफ, सड़क पर कोई नहीं था, दोपहरी थी, दोपहर था, लोग घरों में सोए थे, तो उसने जल्दी से गर्दन मरोड़ी । भीतर आकर उसने कहा कि यह रहा, सड़क पर कोई भी नहीं था । दूसरा युवक बड़ा परेशान हुआ, दिन था, दोपहरी थी । उसने कहा मैं मारूं, तब तक कोई आ जाए, कोई खिड़की खोल कर झांक ले, कोई दरवाजा खोल दे, कोई सड़क पर निकल आए, तो गलती हो जाएगी । उसने कहा, रात तक रुक जाना जरूरी है । रात जब अंधेरा उतर आया तब वह गया और उसने गर्दन मरोड़ी और वापस लाकर सांझ को गुरु को दे दिया और कहा, यह रहा कोई भी नहीं था अंधेरा पूरा था । अगर होता भी तो भी दिखाई नही पड़ सकता था तीसरे युवक ने सोचा कि रात तो है, अंधेरी है, सब ठीक है, लेकिन आकाश में तारो का प्रकाश है, और कोई निकल आए, कोई दरवाजे से झांक ले, किसी को थोड़ा भी दिखाई पड़ जाए तो खतरा है । तो वह एक तलघरे मे गया, द्वार बंद कर लिया, ताला लगा लिया, गर्दन मरोड़ी, लाकर गुरु को दे दिया । उसने कहा कि तलघरे मे मारा, ताला बद था, भीतर आने का उपाय न था, नजर की तो बात ही नहीं आनी थी

चौथा युवक बहुत परेशान हुआ । पंद्रह दिन बीत गए और महीना बीतने लगा । गुरु ने कहा, वह चौथा कहां है? क्या अभी तक जगह नहीं खोज पाया आदमी खोजने भेजे । वह लड़का करीब करीब पागल हो गया था । कबूतर को लिए गाव गाव फिर रहा था, बिलकुल पागल हो गया था । लोगों से पूछता था ऐसी कोई जगह बता दो जहा कोई न हो । लोगों ने उसे पकड़ा, उसे गुरु के पास लाए और कहा कि पागल हो गए हो । तुम्हारे तीन साथी तो उसी दिनमार कर आ गए; रात होते होते सब वापस लौट आए । तुम क्या कर रहे हो? उसने कहा : मैं बडी मुश्किल में पड़ गया हूं । मैं भी अंधेरे तलघरे में गया, लेकिन जब मै कबूतर की गर्दन मरोड़ने लगा तो मैंने देखा, कबूतर मुझे देख रहा है । तो मैंने कबूतर की आंखो पर पट्टी बांध दी और मैं तब एक और अंधेरी गुफा में गया कि पट्टी में से ही किसी तरह दिखाई न पड़ जाए । लेकिन जब मै गर्दन मरोड़ने को था तो मैंने देखा कि में तो देख ही रहा हूं । तब मैंने अपनी आंखों पर भी पट्टी बांध ली और पट्टियों पर पट्टी बांध ली, ताकि आंख कहीं से झांक कर देख न ले । क्योंकि आदमी की आंख का कोई भरोसा नहीं । कितनी पट्टियां बंधी हों, थोड़ी तो झांक कर देख ही सकती है । और जहां मना ही हो वहां तो झांक कर देख ही सकती है । उसने कहा, मैंने काफी पट्टियां बांध लो, सब तरफ से पट्टियां बाध लीं, कबूतर की आंखों पर पट्टियां बांध लीं । बस गर्दन दबाने को था कि मुझे यह खयाल आया, अगर परमात्मा कहीं है तो उसे दिखाई तो पड़ ही रहा होगा । और उसी की खोज में मैं निकला हूं । तबसे मैं पागल हुआ जा रहा हूं और मुझे वह जगह ही नहीं मिल रही है जहा परमात्मा न हो । यह कबूतर सभ्हालिए आप । यह काम नहीं होने का । उसके गुरु ने कहा कि बाकी तीन फौरन विदा हो जाओ, तुम्हारी यहां कोई जरूरत नहीं है । इस चौथे आदमी की यात्रा हो सकती है । इसे जीवन के चारों तरफ छिपे हुए का थोडा सा बोध हुआ । इसने गहरे से गहरे खोज करने की कोशिश की । इसे कुछ बोध हुआ है कि कोई मौजूद है चारों तरफ ।

यह चारों तरफ जो मौजूदगी है, जो प्रेजेंस है उसका अनुभव, स्मरण इसका स्मरण कैसे जगे? जिसे हम भूल गए हैं और खोया नहीं, उसे हम फिर कैसे स्मरण करें? इन चार दिनों में आपसे मैं बात ही नहीं करना चाहता; सच तो यह है कि बात मै सिर्फ मजबूरी में करता हूं बात करने में मुझे बहुत रस नहीं है । बात सिर्फ इसलिए करता हूं कि कुछ और करने को भी आपको राजी कर सकूं । हो सकता है बात से आप राजी हो जाएं कुछ और किया जा सके, जिसका बात से कोई संबंध नहीं है । तो सांझ बात करूंगा और जिनको लगे कि ही, कहीं और यात्रा करनी है उनके लिए सुबह, बात नहीं, सुबह ध्यान का प्रयोग करेंगे और उस द्वार में प्रवेश की कोशिश करेंगे जहां से उस प्रभु का पता चलता है जो कि जीवन है । उसका पता चल सकता है । कठिन नहीं, क्योंकि वह बहुत निकट है । कठिन नहीं, क्योंकि वह दूर नहीं । और कठिन नहीं, क्योंकि हमने उसे सच में खोया नहीं है । और कठिन नहीं, क्योंकि हम चाहे उसे कितना ही भूल गए हों, वह हमें किसी भी हालत में और कभी भी नहीं भूल पाता है ।

 

 

अनुक्रम

 

1

प्रभु की खोज

9

2

बहने दो जीवन को

29

3

प्रभु की पुकार

41

4

जिंदगी बहाव है महान से महान की तरफ

61

5

प्रभु का द्वारा

73

6

ध्यान अविरोध है

91

7

जीवन ही है प्रभु

105

 

जीवन ही है प्रभु और ना खोजना कहीं: Life is God , Do Not Look Elsewhere

Item Code:
HAA297
Cover:
Paperback
Edition:
2014
ISBN:
9788172610470
Language:
Hindi
Size:
9.0 inch X 7.0 inch
Pages:
134
Other Details:
Weight of the Book: 220 gms
Price:
$20.00   Shipping Free
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
जीवन ही है प्रभु और ना खोजना कहीं: Life is God , Do Not Look Elsewhere

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 1931 times since 11th Feb, 2014

पुस्तक परिचय

ध्यान की गहराइयों में वह किरण आती है, वह रथ आता है द्वार पर जो कहता है सम्राट हो तुम, परमात्मा हो तुम, प्रभु हो तुम, सब प्रभु है, सारा जीवन प्रभु है । जिस दिन वह किरण आती है, वह रथ आता है, उसी दिन सब बदल जाता है । उस दिन जिंदगी और हो जाती है । उस दिन चोर होना असंभव है । सम्राट कहीं चोर होते हैं! उस दिन क्रोध करना असंभव है । उस दिन दुखी होना असंभव है । उस दिन एक नया जगत शुरू होता है । उस जगत, उस जीवन की खोज ही धर्म है ।

इन चर्चाओं में इस जीवन, इस प्रभु को खोजने के लिए क्या हम करें, उस संबंध में कुछ बातें मैंने कही हैं । मेरी बातों से वह किरण न आएगी, मेरी बातों से वह रथ भी न आएगा, मेरी बातों से आप उस जगह न पहुंच जाएंगे । लेकिन ही, मेरी बाते आपको प्यासा कर सकती हैं । मेरी बातें आपके मन में घाव छोड जा सकती हैं । मेरी बातों से आपके मन की नींद थोड़ी बहुत चौंक सकती है । हो सकता है, शायद आप चौंक जाएं और उस यात्रा पर निकल जाएं जो ध्यान की यात्रा है ।

तो निश्चित है, आश्वासन है कि जो कभी भी ध्यान की यात्रा पर गया है, वह धर्म के मंदिर पर पहुंच जाता है । ध्यान का पथ है, उपलब्ध धर्म का मंदिर हो जाता है । और उस मंदिर के भीतर जो प्रभु विराजमान है, वह कोई मूर्तिवाला प्रभु नहीं है, समस्त जीवन का ही प्रभु है ।

 

इस पुस्तक के कुछ विषय बिंदु :

o   परमात्मा को कहा खोजें ?

o   क्यों सबमें दोष दिखाई पड़ते हैं

o   जिंदगी को एक खेल और एक लीला बना लेना

o   क्या ध्यान और आत्मलीनता में जाने से बुराई मिट सकेगी

 

सम्यक प्रारंभ

मैने सुना है एक फकीर के पास कुछ युवक साधना के लिए आए थे कि हमें परमात्मा को खोजना है । तो उस फकीर ने कहा तुम एक छोटा सा काम कर लाओ । उसने उन चारो युवकों को एकएक कबूतर दे दिया और कहा कि कहीं अंधेरे में मार लाओ जहां कोई देखता न हो । एक गया बाहर उसने देखा चारों तरफ, सड़क पर कोई नहीं था, दोपहरी थी, दोपहर था, लोग घरों में सोए थे, तो उसने जल्दी से गर्दन मरोड़ी । भीतर आकर उसने कहा कि यह रहा, सड़क पर कोई भी नहीं था । दूसरा युवक बड़ा परेशान हुआ, दिन था, दोपहरी थी । उसने कहा मैं मारूं, तब तक कोई आ जाए, कोई खिड़की खोल कर झांक ले, कोई दरवाजा खोल दे, कोई सड़क पर निकल आए, तो गलती हो जाएगी । उसने कहा, रात तक रुक जाना जरूरी है । रात जब अंधेरा उतर आया तब वह गया और उसने गर्दन मरोड़ी और वापस लाकर सांझ को गुरु को दे दिया और कहा, यह रहा कोई भी नहीं था अंधेरा पूरा था । अगर होता भी तो भी दिखाई नही पड़ सकता था तीसरे युवक ने सोचा कि रात तो है, अंधेरी है, सब ठीक है, लेकिन आकाश में तारो का प्रकाश है, और कोई निकल आए, कोई दरवाजे से झांक ले, किसी को थोड़ा भी दिखाई पड़ जाए तो खतरा है । तो वह एक तलघरे मे गया, द्वार बंद कर लिया, ताला लगा लिया, गर्दन मरोड़ी, लाकर गुरु को दे दिया । उसने कहा कि तलघरे मे मारा, ताला बद था, भीतर आने का उपाय न था, नजर की तो बात ही नहीं आनी थी

चौथा युवक बहुत परेशान हुआ । पंद्रह दिन बीत गए और महीना बीतने लगा । गुरु ने कहा, वह चौथा कहां है? क्या अभी तक जगह नहीं खोज पाया आदमी खोजने भेजे । वह लड़का करीब करीब पागल हो गया था । कबूतर को लिए गाव गाव फिर रहा था, बिलकुल पागल हो गया था । लोगों से पूछता था ऐसी कोई जगह बता दो जहा कोई न हो । लोगों ने उसे पकड़ा, उसे गुरु के पास लाए और कहा कि पागल हो गए हो । तुम्हारे तीन साथी तो उसी दिनमार कर आ गए; रात होते होते सब वापस लौट आए । तुम क्या कर रहे हो? उसने कहा : मैं बडी मुश्किल में पड़ गया हूं । मैं भी अंधेरे तलघरे में गया, लेकिन जब मै कबूतर की गर्दन मरोड़ने लगा तो मैंने देखा, कबूतर मुझे देख रहा है । तो मैंने कबूतर की आंखो पर पट्टी बांध दी और मैं तब एक और अंधेरी गुफा में गया कि पट्टी में से ही किसी तरह दिखाई न पड़ जाए । लेकिन जब मै गर्दन मरोड़ने को था तो मैंने देखा कि में तो देख ही रहा हूं । तब मैंने अपनी आंखों पर भी पट्टी बांध ली और पट्टियों पर पट्टी बांध ली, ताकि आंख कहीं से झांक कर देख न ले । क्योंकि आदमी की आंख का कोई भरोसा नहीं । कितनी पट्टियां बंधी हों, थोड़ी तो झांक कर देख ही सकती है । और जहां मना ही हो वहां तो झांक कर देख ही सकती है । उसने कहा, मैंने काफी पट्टियां बांध लो, सब तरफ से पट्टियां बाध लीं, कबूतर की आंखों पर पट्टियां बांध लीं । बस गर्दन दबाने को था कि मुझे यह खयाल आया, अगर परमात्मा कहीं है तो उसे दिखाई तो पड़ ही रहा होगा । और उसी की खोज में मैं निकला हूं । तबसे मैं पागल हुआ जा रहा हूं और मुझे वह जगह ही नहीं मिल रही है जहा परमात्मा न हो । यह कबूतर सभ्हालिए आप । यह काम नहीं होने का । उसके गुरु ने कहा कि बाकी तीन फौरन विदा हो जाओ, तुम्हारी यहां कोई जरूरत नहीं है । इस चौथे आदमी की यात्रा हो सकती है । इसे जीवन के चारों तरफ छिपे हुए का थोडा सा बोध हुआ । इसने गहरे से गहरे खोज करने की कोशिश की । इसे कुछ बोध हुआ है कि कोई मौजूद है चारों तरफ ।

यह चारों तरफ जो मौजूदगी है, जो प्रेजेंस है उसका अनुभव, स्मरण इसका स्मरण कैसे जगे? जिसे हम भूल गए हैं और खोया नहीं, उसे हम फिर कैसे स्मरण करें? इन चार दिनों में आपसे मैं बात ही नहीं करना चाहता; सच तो यह है कि बात मै सिर्फ मजबूरी में करता हूं बात करने में मुझे बहुत रस नहीं है । बात सिर्फ इसलिए करता हूं कि कुछ और करने को भी आपको राजी कर सकूं । हो सकता है बात से आप राजी हो जाएं कुछ और किया जा सके, जिसका बात से कोई संबंध नहीं है । तो सांझ बात करूंगा और जिनको लगे कि ही, कहीं और यात्रा करनी है उनके लिए सुबह, बात नहीं, सुबह ध्यान का प्रयोग करेंगे और उस द्वार में प्रवेश की कोशिश करेंगे जहां से उस प्रभु का पता चलता है जो कि जीवन है । उसका पता चल सकता है । कठिन नहीं, क्योंकि वह बहुत निकट है । कठिन नहीं, क्योंकि वह दूर नहीं । और कठिन नहीं, क्योंकि हमने उसे सच में खोया नहीं है । और कठिन नहीं, क्योंकि हम चाहे उसे कितना ही भूल गए हों, वह हमें किसी भी हालत में और कभी भी नहीं भूल पाता है ।

 

 

अनुक्रम

 

1

प्रभु की खोज

9

2

बहने दो जीवन को

29

3

प्रभु की पुकार

41

4

जिंदगी बहाव है महान से महान की तरफ

61

5

प्रभु का द्वारा

73

6

ध्यान अविरोध है

91

7

जीवन ही है प्रभु

105

 

Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Related Items

अध्यात्म उपनिषद (ओशो): Adhyatma Upanishad (Osho)
by Osho
Hardcover (Edition: 2015)
Osho Media International
Item Code: HAA273
$40.00
Add to Cart
Buy Now
मरौ हे जोगी मरौ: Osho on Gorakhnath
by ओशो (Osho)
Hardcover (Edition: 2013)
OSHO Media International
Item Code: NZA633
$40.00
Add to Cart
Buy Now
सत भाषै रैदास: Osho on Raidas
Item Code: NZE219
$25.00
Add to Cart
Buy Now
ध्यान-सूत्र: Dhyana Sutra by Osho
by ओशो (Osho)
Paperback (Edition: 2012)
Osho Media International
Item Code: NZA890
$20.00
Add to Cart
Buy Now
चित चकमल लागै नहीं: Discourses by Osho
by ओशो (Osho)
Paperback (Edition: 2012)
Osho Media International
Item Code: NZA889
$12.00
Add to Cart
Buy Now
ज्योतिष विज्ञान: Science of Astrology
by ओशो (Osho)
Hardcover (Edition: 2013)
Osho Media International
Item Code: NZA915
$20.00
Add to Cart
Buy Now
गीता दर्शन : Gita Darshan (Set of 8 Volumes)
by ओशो (Osho)
Hardcover (Edition: 2013)
Osho Media International
Item Code: NZB929
$325.00
Add to Cart
Buy Now
क्रांतिबीज: The Seeds of Revolution
by ओशो (Osho)
Paperback (Edition: 2013)
Osho Media International
Item Code: NZA907
$25.00
Add to Cart
Buy Now
पिव पिव लागी प्यास: Piv Piv Lagi Pyaas
by ओशो (Osho)
Hardcover (Edition: 2014)
OSHO Media International
Item Code: NZA655
$30.00
Add to Cart
Buy Now
जीवन रहस्य: Secret of Life
by ओशो (Osho)
Hardcover (Edition: 2013)
OSHO Media International
Item Code: NZA624
$25.00
Add to Cart
Buy Now

Testimonials

Thank you so much. I have received Krishna statue. Excellent art work and beautiful as I expected. Certainly I will recommend and plan to visit your store when I am coming to India.
Kannan, Canada.
STATUE RECEIVED. EXCELLENT STATUE AND EXCELLENT SERVICE.
Charles, London
To my astonishment and joy, your book arrived (quicker than the speed of light) today with no further adoo concerning customs. I am very pleased and grateful.
Christine, the Netherlands
You have excellent books!!
Jorge, USA.
You have a very interesting collection of books. Great job! And the ordering is easy and the books are not expensive. Great!
Ketil, Norway
I just wanted to thank you for being so helpful and wonderful to work with. My artwork arrived exquisitely framed, and I am anxious to get it up on the walls of my house. I am truly grateful to have discovered your website. All of the items I’ve received have been truly lovely.
Katherine, USA
I have received yesterday a parcel with the ordered books. Thanks for the fast delivery through DHL! I will surely order for other books in the future.
Ravindra, the Netherlands
My order has been delivered today. Thanks for your excellent customer services. I really appreciate that. I hope to see you again. Good luck.
Ankush, Australia
I just love shopping with Exotic India.
Delia, USA.
Fantastic products, fantastic service, something for every budget.
LB, United Kingdom
TRUSTe
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2017 © Exotic India