Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Your Cart (0)
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Tantra > मुद्रा रहस्य (मुद्रा प्रदर्शन चित्र सहित) - Mudra Rahasya (With Illustrations)
Displaying 1094 of 1321         Previous  |  NextSubscribe to our newsletter and discounts
मुद्रा रहस्य (मुद्रा प्रदर्शन चित्र सहित) - Mudra Rahasya (With Illustrations)
मुद्रा रहस्य (मुद्रा प्रदर्शन चित्र सहित) - Mudra Rahasya (With Illustrations)
Description

प्राक्कथन

 

मुद्रा शब्द का अर्थ प्रमुखतया छाप, मुहर, अंकन आदि से होता है । समाचार पत्र, पुस्तकें आदि मुद्रित की जाती हैं और जिन स्थानों में ये कार्य होते हैं उन्हें मुद्रणालय के नाम से जाना जाता है । वस्रों पर भी विभिन्न प्रकार के बेल बूटों की छपाई की जाती है । शैव अथवा वैष्णव सम्प्रदाय के भक्तगण अपने शरीरांगों (मस्तक, वक्षःस्थल एवं भुजाओं) पर चंदन के द्वारा भगवन्नामों की छाप का तिलकांकन करते हैं ।

इसके अतिरिक्त मुद्रा का अर्थ सिक्का से भी होता है । प्राचीन काल के सिक्कों में तत्कालीन राजाओं के चित्र भी अंकित हुआ करते थे । आधुनिक सिक्कों में भी भारत सरकार के चिह्न अंकित रहते हैं । पूर्वकाल में किसी व्यक्ति या घटना की प्रामाणिकता सिद्ध करने के लिए शिलालेख उत्कीर्ण कराये जाते थे । इन दिनों अर्थशास्त्र में भी मौद्रिक प्रणाली अपनायी जाती हैं ।

मुद्रा के द्वारा मन की भाव भंगिमा भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है । महाराज जनक की रंगभूमि में धनुष भंग के पश्चात् महर्षि परशुराम का पदार्पण अत्यन्त क्रोध की मुद्रा में होता है जिसे कविवर तुलसीदासजी ने अपने शब्दों में इस प्रकार व्यक्त किया है

तेहि अवसर सुनि शिवधनु भंगा,

आये रघुकुल कमल पतंगा ।

शीश जटा शशि वदन सुहावा,

क्त रिस वश कछुक अरुण होई आवा । ।

भृकुटी कुटिल नयन रिस सते,

सहजहिं चितवत मनहुँ रिसाते ।

अति रिस बोले वचन कठोरा,

कहु जड़ जनक धनुष केहि तोरा ।।

वेगि दिखाव मूढ़ नतु आजू,

उलटी महि जहँ लगि तव राजू ।।

इसी प्रकार अभिनय या नृत्य के क्षेत्र में भी अंग संचालन के द्वारा विविध मुद्राएँ प्रदर्शित की जाती हैं । देवोपासना में भी आवाहन आदि की मुद्राएँ प्रदर्शित की जाती हैं क्योंकि मुद्रा के अभाव में देवगण भी की गयी पूजा को पूर्ण रूप से ग्रहण नहीं करते । फलस्वरूप आराधक की पूजाप्रस्तुत पुस्तक मुद्रा रहस्य में देवपूजन की मुद्राओं का उल्लेख किया गया है । इसके साथ ही योगसाधन की मुद्राएँ भी उल्लिखित हैं ।

योगाभ्यासी साधक मुद्राओं के आश्रयण से जराव्याधि से रहित हो जाता है। इन मुद्राओं के द्वारा अनेक प्रकार के दु साध्य रोग भी निर्मूल हो जाया करते हैं । इस पुस्तक के परिशिष्ट भाग में पूजनोपयोगी कुछ नियम भी दे दिये गये हैं, जैसे देवपूजन की उपयुक्त तिथियाँ, दश महाविद्या के जपमंत्र, जप के विधान, जप का माहात्म्य आदि अनेक विषय दिये गये हैं जो उपासक के लिए परमावश्यक एवं अत्यन्त उपयोगी है । पुस्तक के लेखन कार्य में पाराशर संहिता, शैवरत्नाकर, शारदातिलक, वाराही तंत्र एवं मंत्रमहार्णव आदि ग्रन्यों से भी सहायता ली गयी है । इस पुस्तक के प्रकाशक श्री टोडरदासजी गुप्त, चौखम्बा, वाराणसी ने पूजनोपयोगी ऐसी अनुपम पुस्तक का प्रकाशन कर अध्यात्म जगत में प्रशंसनीय योगदान दिया है । एतदर्थ वे साधुवाद के पात्र हैं ।

 

अनुक्रमणिका

देवताओं के आवाहन स्थापन हेतु प्रयुक्त होने वाली नव मुद्राएं

1 से 2

षडंगन्यास की छह मुदाएं

2

पंचोपचार पूजन की पंच मुद्राएं

2 से 3

पंञ्चप्राण की पाँच मुद्राएँ

3

षोडशोपचार पूजन में प्रयुक्त होनेवाली सोलह मुद्राएँ

3 से 5

षोडशोपचार पूजन महात्म्य

5 से 6

विष्णुपूजन में प्रयुक्त होने वाली उन्नीस मुद्राएँ

7 से 9

शिवपूजन हेतु प्रयुक्त होने वाली दश मुद्राएँ

9 से 11

गणेशसेपूजन की सप्त मुद्राएँ

11

सरस्वती पूजन की चार मुद्राएँ

11 से 12

लक्ष्मी पूजन हेतु प्रयोग की जाने वाली षडंग मुद्राएँ

12 से 13

लक्ष्मी पूजन में प्रदर्शित की जाने वाली मुद्राएँ

13

लक्ष्मी बीजमन्त्र प्रयोग

13 से 14

शक्तिपूजा में उपयोगी मुद्राएँ

तान्त्रिक हवन मुद्रा

14 से 21

श्रीचक्र एवं त्रिपुरसुन्दरी पूजन में व्यह्त होने वाली मुद्राएँ

21 से 25

मातृकान्यास में व्यक्ह्त होने वाली मुद्राएँ

25 से 27

पूजन काल की मुद्राएँ

27 से 30

बहिर्मातृकान्यास की मुद्राएँ

30 से 31

दश महाविद्या के अन्तर्गत तारापूजन की मुद्राएँ

31 से 32

मुद्रा प्रयोग विधान एवं कुछ अन्य मुद्राओं के लक्षण

32 से 36

षट्कर्मानुसार तर्पण की विशिष्ट मुद्राएँ

36 से 37

मन्त्रों के अधिष्ठाता देवता तथा ह्रदय शिर आदि मुद्राओं के भेद

37 से 39

पुरश्रर्यार्णव के मतानुसार कुछ मुद्राओं के प्रायोगिक लक्षण

39 से 40

योगसेसाधना सम्बन्धी कुछ मुद्राओं का विवेचन

40 से 46

गायत्री पूजन में व्यवह्त होने वाली मुद्राएँ

46 से 52

ध्यान धारणा हेतु पंचतत्तव की मुद्राएँ

53

रोगोपचार हेतु कुछ अन्य मुद्राएँ

53 से 56

पंचबलि मुद्राएँ

56

परिशिष्ट

57 से 58

समस्त देवों के पूजनार्थ उपयुक्त तिथियाँ

59

देवपूजन में ग्राह्या आग्राह्या पुष्पों के प्रयोग

60

आयुर्वेद मतानुसार पुष्पों के की गुणवत्ता

61 से 62

पूजनोपयोगी कुछ अन्य नियम

62 से 66

दश महाविद्या के जापमन्त्र

66 से 67

 

मुद्रा रहस्य (मुद्रा प्रदर्शन चित्र सहित) - Mudra Rahasya (With Illustrations)

Item Code:
HAA178
Cover:
paperback
Edition:
2010
ISBN:
978812180132x
Language:
Sanskrit Text to Hindi Translation
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
92
Other Details:
Weight of the Book: 90 gms
Price:
$10.00
Discounted:
$8.00   Shipping Free
You Save:
$2.00 (20%)
Notify me when this item is available
Notify me when this item is available
You will be notified when this item is available
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
मुद्रा रहस्य (मुद्रा प्रदर्शन चित्र सहित) - Mudra Rahasya (With Illustrations)

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 5634 times since 13th Feb, 2013

प्राक्कथन

 

मुद्रा शब्द का अर्थ प्रमुखतया छाप, मुहर, अंकन आदि से होता है । समाचार पत्र, पुस्तकें आदि मुद्रित की जाती हैं और जिन स्थानों में ये कार्य होते हैं उन्हें मुद्रणालय के नाम से जाना जाता है । वस्रों पर भी विभिन्न प्रकार के बेल बूटों की छपाई की जाती है । शैव अथवा वैष्णव सम्प्रदाय के भक्तगण अपने शरीरांगों (मस्तक, वक्षःस्थल एवं भुजाओं) पर चंदन के द्वारा भगवन्नामों की छाप का तिलकांकन करते हैं ।

इसके अतिरिक्त मुद्रा का अर्थ सिक्का से भी होता है । प्राचीन काल के सिक्कों में तत्कालीन राजाओं के चित्र भी अंकित हुआ करते थे । आधुनिक सिक्कों में भी भारत सरकार के चिह्न अंकित रहते हैं । पूर्वकाल में किसी व्यक्ति या घटना की प्रामाणिकता सिद्ध करने के लिए शिलालेख उत्कीर्ण कराये जाते थे । इन दिनों अर्थशास्त्र में भी मौद्रिक प्रणाली अपनायी जाती हैं ।

मुद्रा के द्वारा मन की भाव भंगिमा भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है । महाराज जनक की रंगभूमि में धनुष भंग के पश्चात् महर्षि परशुराम का पदार्पण अत्यन्त क्रोध की मुद्रा में होता है जिसे कविवर तुलसीदासजी ने अपने शब्दों में इस प्रकार व्यक्त किया है

तेहि अवसर सुनि शिवधनु भंगा,

आये रघुकुल कमल पतंगा ।

शीश जटा शशि वदन सुहावा,

क्त रिस वश कछुक अरुण होई आवा । ।

भृकुटी कुटिल नयन रिस सते,

सहजहिं चितवत मनहुँ रिसाते ।

अति रिस बोले वचन कठोरा,

कहु जड़ जनक धनुष केहि तोरा ।।

वेगि दिखाव मूढ़ नतु आजू,

उलटी महि जहँ लगि तव राजू ।।

इसी प्रकार अभिनय या नृत्य के क्षेत्र में भी अंग संचालन के द्वारा विविध मुद्राएँ प्रदर्शित की जाती हैं । देवोपासना में भी आवाहन आदि की मुद्राएँ प्रदर्शित की जाती हैं क्योंकि मुद्रा के अभाव में देवगण भी की गयी पूजा को पूर्ण रूप से ग्रहण नहीं करते । फलस्वरूप आराधक की पूजाप्रस्तुत पुस्तक मुद्रा रहस्य में देवपूजन की मुद्राओं का उल्लेख किया गया है । इसके साथ ही योगसाधन की मुद्राएँ भी उल्लिखित हैं ।

योगाभ्यासी साधक मुद्राओं के आश्रयण से जराव्याधि से रहित हो जाता है। इन मुद्राओं के द्वारा अनेक प्रकार के दु साध्य रोग भी निर्मूल हो जाया करते हैं । इस पुस्तक के परिशिष्ट भाग में पूजनोपयोगी कुछ नियम भी दे दिये गये हैं, जैसे देवपूजन की उपयुक्त तिथियाँ, दश महाविद्या के जपमंत्र, जप के विधान, जप का माहात्म्य आदि अनेक विषय दिये गये हैं जो उपासक के लिए परमावश्यक एवं अत्यन्त उपयोगी है । पुस्तक के लेखन कार्य में पाराशर संहिता, शैवरत्नाकर, शारदातिलक, वाराही तंत्र एवं मंत्रमहार्णव आदि ग्रन्यों से भी सहायता ली गयी है । इस पुस्तक के प्रकाशक श्री टोडरदासजी गुप्त, चौखम्बा, वाराणसी ने पूजनोपयोगी ऐसी अनुपम पुस्तक का प्रकाशन कर अध्यात्म जगत में प्रशंसनीय योगदान दिया है । एतदर्थ वे साधुवाद के पात्र हैं ।

 

अनुक्रमणिका

देवताओं के आवाहन स्थापन हेतु प्रयुक्त होने वाली नव मुद्राएं

1 से 2

षडंगन्यास की छह मुदाएं

2

पंचोपचार पूजन की पंच मुद्राएं

2 से 3

पंञ्चप्राण की पाँच मुद्राएँ

3

षोडशोपचार पूजन में प्रयुक्त होनेवाली सोलह मुद्राएँ

3 से 5

षोडशोपचार पूजन महात्म्य

5 से 6

विष्णुपूजन में प्रयुक्त होने वाली उन्नीस मुद्राएँ

7 से 9

शिवपूजन हेतु प्रयुक्त होने वाली दश मुद्राएँ

9 से 11

गणेशसेपूजन की सप्त मुद्राएँ

11

सरस्वती पूजन की चार मुद्राएँ

11 से 12

लक्ष्मी पूजन हेतु प्रयोग की जाने वाली षडंग मुद्राएँ

12 से 13

लक्ष्मी पूजन में प्रदर्शित की जाने वाली मुद्राएँ

13

लक्ष्मी बीजमन्त्र प्रयोग

13 से 14

शक्तिपूजा में उपयोगी मुद्राएँ

तान्त्रिक हवन मुद्रा

14 से 21

श्रीचक्र एवं त्रिपुरसुन्दरी पूजन में व्यह्त होने वाली मुद्राएँ

21 से 25

मातृकान्यास में व्यक्ह्त होने वाली मुद्राएँ

25 से 27

पूजन काल की मुद्राएँ

27 से 30

बहिर्मातृकान्यास की मुद्राएँ

30 से 31

दश महाविद्या के अन्तर्गत तारापूजन की मुद्राएँ

31 से 32

मुद्रा प्रयोग विधान एवं कुछ अन्य मुद्राओं के लक्षण

32 से 36

षट्कर्मानुसार तर्पण की विशिष्ट मुद्राएँ

36 से 37

मन्त्रों के अधिष्ठाता देवता तथा ह्रदय शिर आदि मुद्राओं के भेद

37 से 39

पुरश्रर्यार्णव के मतानुसार कुछ मुद्राओं के प्रायोगिक लक्षण

39 से 40

योगसेसाधना सम्बन्धी कुछ मुद्राओं का विवेचन

40 से 46

गायत्री पूजन में व्यवह्त होने वाली मुद्राएँ

46 से 52

ध्यान धारणा हेतु पंचतत्तव की मुद्राएँ

53

रोगोपचार हेतु कुछ अन्य मुद्राएँ

53 से 56

पंचबलि मुद्राएँ

56

परिशिष्ट

57 से 58

समस्त देवों के पूजनार्थ उपयुक्त तिथियाँ

59

देवपूजन में ग्राह्या आग्राह्या पुष्पों के प्रयोग

60

आयुर्वेद मतानुसार पुष्पों के की गुणवत्ता

61 से 62

पूजनोपयोगी कुछ अन्य नियम

62 से 66

दश महाविद्या के जापमन्त्र

66 से 67

 

Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Related Items

Yoga Exercise for Health and Happiness
Item Code: IDF667
$17.50$14.00
You save: $3.50 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Yoga Exercises for Health and Happiness
Item Code: NAK226
$23.00$18.40
You save: $4.60 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Art of Dancing: Classical and Folk Dances
by Priyabala Shah
Hardcover (Edition: 2005)
Parimal Publication Pvt. Ltd.
Item Code: IDF467
$26.00$20.80
You save: $5.20 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Mahidhara's Mantra Mahodadhih:  (Two Volumes)
by Ram Kumar Rai
Hardcover (Edition: 2009)
Prachya Prakashan
Item Code: IDI581
$105.00$84.00
You save: $21.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Saundaryalahari of Sri Sankaracarya with Transliteration
Item Code: IDE071
$15.00$12.00
You save: $3.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Tantra Mantra Yantra: The Tantra Psychology
Item Code: IDK698
$17.00$13.60
You save: $3.40 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Psychotherapy, Yoga and Traditional Therapies of East and West
Item Code: IDF944
$22.50$18.00
You save: $4.50 (20%)
Add to Cart
Buy Now

Testimonials

Nice website..has a collection of rare books.
Srikanth
Beautiful products nicely presented and easy to use website
Amanda, UK.
I received my order, very very beautiful products. I hope to buy something more. Thank you!
Gulnora, Uzbekistan
Thank you very much for the courtesy you showed me for the time I buy my books. The last book is a good book. İt is important in terms of recognizing fine art of İndia.
Suzan, Turkey
Thank You very much Sir. I really like the saree and the blouse fit perfeact. Thank You again.
Sulbha, USA
I have received the parcel yesterday and the shiv-linga idol is sooo beautiful and u have exceeded my expectations...
Guruprasad, Bangalore
Yesterday I received my lost and through you again found order. Very quickly I must say !. Thank you and thank you again for your service. I am very happy with this double CD of Ustad Shujaat Husain Khan. I thought it was lost forever and now I can add it to my CD collection. I hope in the near future to buy again at your online shop. You have wonderful items to offer !
Joke van der Baars, the Netherlands
I recently ordered a hand embroidered stole. It was expensive and I was slightly worried about ordering it on line. It has arrived and is magnificent. I couldn't be happier, I will treasure this stole for ever. Thank you.
Jackie
Today Lord SIVA arrived well in Munich. Thank you for the save packing. Everything fine. Hari Om
Hermann, Munchen
Thank you very much for keeping such an exotic collection of Books. Keep going strong Exotic India!!!
Shweta, Germany
TRUSTe
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2017 © Exotic India