Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
Share
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Your Cart (0)
Books > Tantra > मुद्रा रहस्य (मुद्रा प्रदर्शन चित्र सहित) - Mudra Rahasya (With Illustrations)
Displaying 1067 of 1313         Previous  |  NextSubscribe to our newsletter and discounts
मुद्रा रहस्य (मुद्रा प्रदर्शन चित्र सहित) - Mudra Rahasya (With Illustrations)
मुद्रा रहस्य (मुद्रा प्रदर्शन चित्र सहित) - Mudra Rahasya (With Illustrations)
Description

प्राक्कथन

 

मुद्रा शब्द का अर्थ प्रमुखतया छाप, मुहर, अंकन आदि से होता है । समाचार पत्र, पुस्तकें आदि मुद्रित की जाती हैं और जिन स्थानों में ये कार्य होते हैं उन्हें मुद्रणालय के नाम से जाना जाता है । वस्रों पर भी विभिन्न प्रकार के बेल बूटों की छपाई की जाती है । शैव अथवा वैष्णव सम्प्रदाय के भक्तगण अपने शरीरांगों (मस्तक, वक्षःस्थल एवं भुजाओं) पर चंदन के द्वारा भगवन्नामों की छाप का तिलकांकन करते हैं ।

इसके अतिरिक्त मुद्रा का अर्थ सिक्का से भी होता है । प्राचीन काल के सिक्कों में तत्कालीन राजाओं के चित्र भी अंकित हुआ करते थे । आधुनिक सिक्कों में भी भारत सरकार के चिह्न अंकित रहते हैं । पूर्वकाल में किसी व्यक्ति या घटना की प्रामाणिकता सिद्ध करने के लिए शिलालेख उत्कीर्ण कराये जाते थे । इन दिनों अर्थशास्त्र में भी मौद्रिक प्रणाली अपनायी जाती हैं ।

मुद्रा के द्वारा मन की भाव भंगिमा भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है । महाराज जनक की रंगभूमि में धनुष भंग के पश्चात् महर्षि परशुराम का पदार्पण अत्यन्त क्रोध की मुद्रा में होता है जिसे कविवर तुलसीदासजी ने अपने शब्दों में इस प्रकार व्यक्त किया है

तेहि अवसर सुनि शिवधनु भंगा,

आये रघुकुल कमल पतंगा ।

शीश जटा शशि वदन सुहावा,

क्त रिस वश कछुक अरुण होई आवा । ।

भृकुटी कुटिल नयन रिस सते,

सहजहिं चितवत मनहुँ रिसाते ।

अति रिस बोले वचन कठोरा,

कहु जड़ जनक धनुष केहि तोरा ।।

वेगि दिखाव मूढ़ नतु आजू,

उलटी महि जहँ लगि तव राजू ।।

इसी प्रकार अभिनय या नृत्य के क्षेत्र में भी अंग संचालन के द्वारा विविध मुद्राएँ प्रदर्शित की जाती हैं । देवोपासना में भी आवाहन आदि की मुद्राएँ प्रदर्शित की जाती हैं क्योंकि मुद्रा के अभाव में देवगण भी की गयी पूजा को पूर्ण रूप से ग्रहण नहीं करते । फलस्वरूप आराधक की पूजाप्रस्तुत पुस्तक मुद्रा रहस्य में देवपूजन की मुद्राओं का उल्लेख किया गया है । इसके साथ ही योगसाधन की मुद्राएँ भी उल्लिखित हैं ।

योगाभ्यासी साधक मुद्राओं के आश्रयण से जराव्याधि से रहित हो जाता है। इन मुद्राओं के द्वारा अनेक प्रकार के दु साध्य रोग भी निर्मूल हो जाया करते हैं । इस पुस्तक के परिशिष्ट भाग में पूजनोपयोगी कुछ नियम भी दे दिये गये हैं, जैसे देवपूजन की उपयुक्त तिथियाँ, दश महाविद्या के जपमंत्र, जप के विधान, जप का माहात्म्य आदि अनेक विषय दिये गये हैं जो उपासक के लिए परमावश्यक एवं अत्यन्त उपयोगी है । पुस्तक के लेखन कार्य में पाराशर संहिता, शैवरत्नाकर, शारदातिलक, वाराही तंत्र एवं मंत्रमहार्णव आदि ग्रन्यों से भी सहायता ली गयी है । इस पुस्तक के प्रकाशक श्री टोडरदासजी गुप्त, चौखम्बा, वाराणसी ने पूजनोपयोगी ऐसी अनुपम पुस्तक का प्रकाशन कर अध्यात्म जगत में प्रशंसनीय योगदान दिया है । एतदर्थ वे साधुवाद के पात्र हैं ।

 

अनुक्रमणिका

देवताओं के आवाहन स्थापन हेतु प्रयुक्त होने वाली नव मुद्राएं

1 से 2

षडंगन्यास की छह मुदाएं

2

पंचोपचार पूजन की पंच मुद्राएं

2 से 3

पंञ्चप्राण की पाँच मुद्राएँ

3

षोडशोपचार पूजन में प्रयुक्त होनेवाली सोलह मुद्राएँ

3 से 5

षोडशोपचार पूजन महात्म्य

5 से 6

विष्णुपूजन में प्रयुक्त होने वाली उन्नीस मुद्राएँ

7 से 9

शिवपूजन हेतु प्रयुक्त होने वाली दश मुद्राएँ

9 से 11

गणेशसेपूजन की सप्त मुद्राएँ

11

सरस्वती पूजन की चार मुद्राएँ

11 से 12

लक्ष्मी पूजन हेतु प्रयोग की जाने वाली षडंग मुद्राएँ

12 से 13

लक्ष्मी पूजन में प्रदर्शित की जाने वाली मुद्राएँ

13

लक्ष्मी बीजमन्त्र प्रयोग

13 से 14

शक्तिपूजा में उपयोगी मुद्राएँ

तान्त्रिक हवन मुद्रा

14 से 21

श्रीचक्र एवं त्रिपुरसुन्दरी पूजन में व्यह्त होने वाली मुद्राएँ

21 से 25

मातृकान्यास में व्यक्ह्त होने वाली मुद्राएँ

25 से 27

पूजन काल की मुद्राएँ

27 से 30

बहिर्मातृकान्यास की मुद्राएँ

30 से 31

दश महाविद्या के अन्तर्गत तारापूजन की मुद्राएँ

31 से 32

मुद्रा प्रयोग विधान एवं कुछ अन्य मुद्राओं के लक्षण

32 से 36

षट्कर्मानुसार तर्पण की विशिष्ट मुद्राएँ

36 से 37

मन्त्रों के अधिष्ठाता देवता तथा ह्रदय शिर आदि मुद्राओं के भेद

37 से 39

पुरश्रर्यार्णव के मतानुसार कुछ मुद्राओं के प्रायोगिक लक्षण

39 से 40

योगसेसाधना सम्बन्धी कुछ मुद्राओं का विवेचन

40 से 46

गायत्री पूजन में व्यवह्त होने वाली मुद्राएँ

46 से 52

ध्यान धारणा हेतु पंचतत्तव की मुद्राएँ

53

रोगोपचार हेतु कुछ अन्य मुद्राएँ

53 से 56

पंचबलि मुद्राएँ

56

परिशिष्ट

57 से 58

समस्त देवों के पूजनार्थ उपयुक्त तिथियाँ

59

देवपूजन में ग्राह्या आग्राह्या पुष्पों के प्रयोग

60

आयुर्वेद मतानुसार पुष्पों के की गुणवत्ता

61 से 62

पूजनोपयोगी कुछ अन्य नियम

62 से 66

दश महाविद्या के जापमन्त्र

66 से 67

 

मुद्रा रहस्य (मुद्रा प्रदर्शन चित्र सहित) - Mudra Rahasya (With Illustrations)

Item Code:
HAA178
Cover:
paperback
Edition:
2010
Publisher:
Chowkhamba Krishnadas Academy
ISBN:
978812180132x
Language:
Sanskrit Text to Hindi Translation
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
92
Other Details:
Weight of the Book: 90 gms
Price:
$10.00   Shipping Free
Notify me when this item is available
Notify me when this item is available
You will be notified when this item is available
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
मुद्रा रहस्य (मुद्रा प्रदर्शन चित्र सहित) - Mudra Rahasya (With Illustrations)

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 3534 times since 13th Feb, 2013

प्राक्कथन

 

मुद्रा शब्द का अर्थ प्रमुखतया छाप, मुहर, अंकन आदि से होता है । समाचार पत्र, पुस्तकें आदि मुद्रित की जाती हैं और जिन स्थानों में ये कार्य होते हैं उन्हें मुद्रणालय के नाम से जाना जाता है । वस्रों पर भी विभिन्न प्रकार के बेल बूटों की छपाई की जाती है । शैव अथवा वैष्णव सम्प्रदाय के भक्तगण अपने शरीरांगों (मस्तक, वक्षःस्थल एवं भुजाओं) पर चंदन के द्वारा भगवन्नामों की छाप का तिलकांकन करते हैं ।

इसके अतिरिक्त मुद्रा का अर्थ सिक्का से भी होता है । प्राचीन काल के सिक्कों में तत्कालीन राजाओं के चित्र भी अंकित हुआ करते थे । आधुनिक सिक्कों में भी भारत सरकार के चिह्न अंकित रहते हैं । पूर्वकाल में किसी व्यक्ति या घटना की प्रामाणिकता सिद्ध करने के लिए शिलालेख उत्कीर्ण कराये जाते थे । इन दिनों अर्थशास्त्र में भी मौद्रिक प्रणाली अपनायी जाती हैं ।

मुद्रा के द्वारा मन की भाव भंगिमा भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है । महाराज जनक की रंगभूमि में धनुष भंग के पश्चात् महर्षि परशुराम का पदार्पण अत्यन्त क्रोध की मुद्रा में होता है जिसे कविवर तुलसीदासजी ने अपने शब्दों में इस प्रकार व्यक्त किया है

तेहि अवसर सुनि शिवधनु भंगा,

आये रघुकुल कमल पतंगा ।

शीश जटा शशि वदन सुहावा,

क्त रिस वश कछुक अरुण होई आवा । ।

भृकुटी कुटिल नयन रिस सते,

सहजहिं चितवत मनहुँ रिसाते ।

अति रिस बोले वचन कठोरा,

कहु जड़ जनक धनुष केहि तोरा ।।

वेगि दिखाव मूढ़ नतु आजू,

उलटी महि जहँ लगि तव राजू ।।

इसी प्रकार अभिनय या नृत्य के क्षेत्र में भी अंग संचालन के द्वारा विविध मुद्राएँ प्रदर्शित की जाती हैं । देवोपासना में भी आवाहन आदि की मुद्राएँ प्रदर्शित की जाती हैं क्योंकि मुद्रा के अभाव में देवगण भी की गयी पूजा को पूर्ण रूप से ग्रहण नहीं करते । फलस्वरूप आराधक की पूजाप्रस्तुत पुस्तक मुद्रा रहस्य में देवपूजन की मुद्राओं का उल्लेख किया गया है । इसके साथ ही योगसाधन की मुद्राएँ भी उल्लिखित हैं ।

योगाभ्यासी साधक मुद्राओं के आश्रयण से जराव्याधि से रहित हो जाता है। इन मुद्राओं के द्वारा अनेक प्रकार के दु साध्य रोग भी निर्मूल हो जाया करते हैं । इस पुस्तक के परिशिष्ट भाग में पूजनोपयोगी कुछ नियम भी दे दिये गये हैं, जैसे देवपूजन की उपयुक्त तिथियाँ, दश महाविद्या के जपमंत्र, जप के विधान, जप का माहात्म्य आदि अनेक विषय दिये गये हैं जो उपासक के लिए परमावश्यक एवं अत्यन्त उपयोगी है । पुस्तक के लेखन कार्य में पाराशर संहिता, शैवरत्नाकर, शारदातिलक, वाराही तंत्र एवं मंत्रमहार्णव आदि ग्रन्यों से भी सहायता ली गयी है । इस पुस्तक के प्रकाशक श्री टोडरदासजी गुप्त, चौखम्बा, वाराणसी ने पूजनोपयोगी ऐसी अनुपम पुस्तक का प्रकाशन कर अध्यात्म जगत में प्रशंसनीय योगदान दिया है । एतदर्थ वे साधुवाद के पात्र हैं ।

 

अनुक्रमणिका

देवताओं के आवाहन स्थापन हेतु प्रयुक्त होने वाली नव मुद्राएं

1 से 2

षडंगन्यास की छह मुदाएं

2

पंचोपचार पूजन की पंच मुद्राएं

2 से 3

पंञ्चप्राण की पाँच मुद्राएँ

3

षोडशोपचार पूजन में प्रयुक्त होनेवाली सोलह मुद्राएँ

3 से 5

षोडशोपचार पूजन महात्म्य

5 से 6

विष्णुपूजन में प्रयुक्त होने वाली उन्नीस मुद्राएँ

7 से 9

शिवपूजन हेतु प्रयुक्त होने वाली दश मुद्राएँ

9 से 11

गणेशसेपूजन की सप्त मुद्राएँ

11

सरस्वती पूजन की चार मुद्राएँ

11 से 12

लक्ष्मी पूजन हेतु प्रयोग की जाने वाली षडंग मुद्राएँ

12 से 13

लक्ष्मी पूजन में प्रदर्शित की जाने वाली मुद्राएँ

13

लक्ष्मी बीजमन्त्र प्रयोग

13 से 14

शक्तिपूजा में उपयोगी मुद्राएँ

तान्त्रिक हवन मुद्रा

14 से 21

श्रीचक्र एवं त्रिपुरसुन्दरी पूजन में व्यह्त होने वाली मुद्राएँ

21 से 25

मातृकान्यास में व्यक्ह्त होने वाली मुद्राएँ

25 से 27

पूजन काल की मुद्राएँ

27 से 30

बहिर्मातृकान्यास की मुद्राएँ

30 से 31

दश महाविद्या के अन्तर्गत तारापूजन की मुद्राएँ

31 से 32

मुद्रा प्रयोग विधान एवं कुछ अन्य मुद्राओं के लक्षण

32 से 36

षट्कर्मानुसार तर्पण की विशिष्ट मुद्राएँ

36 से 37

मन्त्रों के अधिष्ठाता देवता तथा ह्रदय शिर आदि मुद्राओं के भेद

37 से 39

पुरश्रर्यार्णव के मतानुसार कुछ मुद्राओं के प्रायोगिक लक्षण

39 से 40

योगसेसाधना सम्बन्धी कुछ मुद्राओं का विवेचन

40 से 46

गायत्री पूजन में व्यवह्त होने वाली मुद्राएँ

46 से 52

ध्यान धारणा हेतु पंचतत्तव की मुद्राएँ

53

रोगोपचार हेतु कुछ अन्य मुद्राएँ

53 से 56

पंचबलि मुद्राएँ

56

परिशिष्ट

57 से 58

समस्त देवों के पूजनार्थ उपयुक्त तिथियाँ

59

देवपूजन में ग्राह्या आग्राह्या पुष्पों के प्रयोग

60

आयुर्वेद मतानुसार पुष्पों के की गुणवत्ता

61 से 62

पूजनोपयोगी कुछ अन्य नियम

62 से 66

दश महाविद्या के जापमन्त्र

66 से 67

 

Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Related Items

Yoga Exercise for Health and Happiness
by Swami Jyotir Maya Nanda
Hardcover (Edition: 2002)
International Yoga Society
Item Code: IDF667
$17.50
Mahidhara's Mantra Mahodadhih:  (Two Volumes)
by Ram Kumar Rai
Hardcover (Edition: 2009)
Prachya Prakashan
Item Code: IDI581
$105.00
Art of Dancing: Classical and Folk Dances
by Priyabala Shah
Hardcover (Edition: 2005)
Parimal Publication
Item Code: IDF467
$26.00
Saundaryalahari of Sri Sankaracarya with Transliteration
by Trans. By: Swami Tapasyananda
Paperback (Edition: 2003)
Sri Ramakrishna Math
Item Code: IDE071
$15.00
Tantra Mantra Yantra: The Tantra Psychology
by Prof. S.K. Ramachandra Rao
Hardcover (Edition: 2008)
Sri Satguru Publications
Item Code: IDK698
$17.00
Psychotherapy, Yoga and Traditional Therapies of East and West
by Edited By: Ganesh Shankar
Paperback (Edition: 2005)
Jagdamba Publishing Company
Item Code: IDF944
$22.50

Testimonials

I’ve received my blue scarf and I am delighted. I am impressed by your professionalism. Thank you so much! I will place another order soon.
Celine, France
Received the consignment in time. Excellent service. I place on record your prompt service and excellent way the product was packed and sent. Kindly accept my appreciation and thanks for all those involved in this work. My prayers t the Almighty to continue the excellent service for the many more years to come. Long live EXOTIC INDIA and its employees
N.KALAICHELVAN, Tamil Nadu
A very thorough and beautiful website and webstore. I have tried for several years to get this Bhagavad Gita Home Study Course from Arshavidya and have been unable. Was so pleased to find it in your store!
George Marshall
A big fan of Exotic India. Have been for years and years. I am always certain to find exactly what I am looking for in your merchandise.
John Dash, western New York, USA
I just got my order and it’s exactly as I hoped it would be!
Nancy, USA.
It is amazing. I am really very very happy with your excellent service. I received the book today in an awesome condition. Thanks again.
Shambhu, New York.
Thank you for making available some many amazing literary works!
Parmanand Jagnandan, USA
I have been very happy with your service in selling Puranas. I have bought several in the past and am happy with the packaging and care you exhibit. Thank you for this Divine Service.
Raj, USA
Thank you very much! My grandpa received the book today and the smile you put on his face was priceless. He has been trying to order this book from other companies for months now. He only recently asked me for help and you have made this transaction so easy. My grandpa is so happy he wants to order two more copies. I am currently in the process of ordering 2 more.
Rinay, Australia
I would just let you know that today I received my order. It was packed so beautifully and what lovely service.
Caroline, Australia
TRUSTe online privacy certification
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2016 © Exotic India