Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Your Cart (0)
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindi > हमारे ऋषि-मुनि और संत-महात्मा: Our Great Sages and Great Saints
Displaying 9333 of 11377         Previous  |  NextSubscribe to our newsletter and discounts
हमारे ऋषि-मुनि और संत-महात्मा: Our Great Sages and Great Saints
Pages from the book
हमारे ऋषि-मुनि और संत-महात्मा: Our Great Sages and Great Saints
Look Inside the Book
Description

हमारा देश ऋषियों मुनियों व संत महात्मा

हमारा देश ऋषियों मुनियों व संत महात्माओं का देश है, जिन्होंने अपने तप पूत ज्ञान से न केवल आध्यात्मिक शक्ति की ज्योति जलाई अपितु अपने श्रेष्ठ मर्यादित शील, आचरण, अहिंसा, सत्य, परोपकार, त्याग, ईश्वरभक्ति आदि के द्वारा समस्त मानव जाति के समक्ष जीवन जीने का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

इन्हीं के बताए मार्ग पर चलकर, उसका आचरण करके भारत किसी समय ज्ञान विज्ञान, भक्ति और समृद्धि के चरम शिखर तक पहुंचा था। इस देश में इतने ऋषि मुनि और संत महात्मा हुए हैं कि उनका नाम गिनाना संभव नहीं है। कौन कितना बड़ा और श्रेष्ठ था, इसका मूल्यांकन करना भी संभव नहीं है।

प्रस्तुत पुस्तक में कुछ चुने हुए ऋषियों मुनियों और संत महात्माओं के बारे में संक्षेप में वर्णन किया गया है, जिन्होंने समाज को एक नयी दिशा दी, उसका मार्गदर्शन किया। पुस्तक के आरंभ में ऋषि मुनि और संत महात्मा शब्दों की व्याख्या भी दी गयी है, जिसे पढ़कर पाठक उनका अर्थ समझकर लाभान्वित होंगे। यह पुस्तक हमारे ऋषि मुनि और संत महात्मा ज्ञान पिपासुओं के लिए लाभकारी और पठनीय तो है ही, संग्रहणीय भी है।

 

लेखक का परिचय

65 वर्षीय सुदर्शन भाटिया की विभिन्न विषयों पर सवा सौ से अधिक पुस्तके तथा देश भर की 270 पत्र पत्रिकाओं में तीन हजार से अधिक रचनाए प्रकाशित हो चुकी हैं । हिन्दी साहित्य जगत् में भली प्रकार परिचित सुदर्शन भाटिया को हिमाचल केसरी अवार्ड (1997), आचार्य की मानद उपाधि (1999), हिम साहित्य परिषद का राज्य स्तरीय सम्मान (1999), साहित्य श्री सम्मान (2000), बीसवीं शताब्दी रत्न सम्मान (2000) पद्मश्री डी लक्ष्मी नारायण दुबे स्मृति सम्मान (2001) रामवृक्ष बेनीपुरी जन्म शताब्दी सम्मान (2002), राष्ट्रभाषा रत्न सम्मान (2003), सुभद्राकुमारी चौहान जन्म शताब्दी सम्मान (2004) हिमोत्कर्ष हिमाचल श्री सम्मान (2004 05), पद्मश्री सोहन लाल द्विवेदी जन्म शताब्दी सम्मान (2005) आदि अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं । पत्रकारिता तथा संपादन से जुडे सुदर्शन भाटिया पूर्ब अधिशासी अभियन्ता (विद्युत) हैं तथा इन दिनों अनेक समाज सेवी तथा स्वयं सेवी संस्थाओ से भी जुडे हैं । सुदर्शन भाटिया ने हिमाचल के लेखको को प्रकाश में लाने के लिए एक लंबी लेखमाला इधर भी हैं शब्द लिखी जो धारावाहिक प्रकाशित हुई ।

पुस्तक महल से प्रकाशित लेखक की अन्य कृतियां हैं 1 शिशु पालन तथा मां के दायित्व 2 रोग पहचानें उनका उपचार जानें 3 भारत की प्रसिद्ध वीरांगनाएं । लेखक की यह चौथी पुस्तक हमारे ऋषि मुनि और संत महात्मा है ।

भूमिका

ऐसे हुई इस पुस्तक की रचना

ईश्वर की महान् सत्ता में पूरी तरह आस्था रखने वाले, धार्मिक परंपराओं को समर्पित, पूर्णत शाकाहारी परिवार से संबंधित होने के कारण हिंदू देवी देवताओं, संत महात्माओं, ऋषि मुनियों । में बाल्यकाल से रुचि बनी रही । गीताप्रेस, गोरखपुर की गाड़ी अनेकानेक धार्मिक पुस्तकों को लेकर विक्रय के लिए कभी कभी हमारे उपनगर में भी आया करती थी । चूंकि ये पुस्तकें सुंदर, सचित्र तथा बहुत सस्ती हुआ करतीं थीं, इसीलिए हम छह भाई बहन अपनी दो चार दिनों की पॉकेट मनी से ही कुछ लघु पुस्तकें खरीद लिया करते थे । हमारी माताजी बहुत अधिक पुस्तकें ले लेतीं थीं । इस प्रकार हमें घर में ही काफी धार्मिक साहित्य पढ़ने के लिए मिल जाता था । यह रुचि तबसे अब तक बनी है । मामाजी के घर आध्यात्मिक मासिक पत्रिका कल्याण नियमित आती थी । ग्रीष्म अवकाश में या जब भी समय होता, इन्हें पढ़ने का अवसर भी मिलता । पूर्वजों के बताए रास्ते पर चलने के लिए दृढ़संकल्प होना सरल हो जाता था ।

कुछ परिस्थितियों ऐसी बनीं कि विद्युत अभियंता होते हुए भी मुझे साहित्य सृजन का अवसर मिल गया । मूलरूप से कहानीकार हूँ बाकी बाद में । मेरी एक सौ से अधिक प्रकाशित पुस्तकों में अनेक पुरातन धार्मिक घटनाओं पर पचास से अधिक लंबी कहानियां भी प्रकाशित हो चुकी हैं । द्वापर दर्पण तथा त्रेता दर्पण दो पुस्तकें भी अनेक उलझनों को सुलझाने में योगदान कर रही हैं । सैकड़ों लघुकथाएं तथा प्रेरक प्रसंग, जो रामायण, महाभारत, उपनिषदों तथा पुराणों के प्रसंगों पर आधारित हैं, देशभर की तमाम पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं । अत धर्म तथा संस्कृति की ओर मेरा निरंतर झुकाव बना रहा है । जन, 2004 में जब मुझे पुस्तक महल के प्रबंध निदेशक जी से मिलने का अवसर मिला, तो बातों बातों में उन्होंने मेरी मन तथा क्षमता को भांपकर, हमारे ऋषि मुनि औरसंत महात्मा नाम की पुस्तक लिखने की प्रबल प्रेरणा दी । मैंने इसे अपना सौभाग्य समझा और इस बड़े प्रोजेक्ट को सहर्ष स्वीकार कर अपने को धन्य माना । दिन रात, प्रतिदिन 10 से 12 घंटे लगातार अध्ययन व लेखन में जुट गया । इसी का परिणाम है यह पवित्र पुस्तक ।

मैंने इस पुस्तक के लिए अनेक ग्रंथों का अवलोकन किया । कुछ विद्वानों से चर्चा की । जो मार्गदर्शन तथा मैटीरियल मुझे गीताप्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित कल्याण के संत अंक तथा भक्त चरितांक से मिला, उसने भी मेरे लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मार्ग प्रशस्त किया । अत मैं इस संस्था का हृदय से आभारी हूं । इसमें जिन महान् लेखकों, भक्तों व विचारकों ने विस्तृत जीवन चरित दिए गए हैं, उनका भी आभार व्यक्त करता हूं । लोगों के मन में धार्मिक भावनाओं को बढ़ावा देना, अधिक से अधिक लोगों तक अपने ऋषि मुनियों, संत महात्माओं की सही जानकारी पहुंचाना लक्ष्य है इस पुस्तक का ।

सुधी पाठकों से विनम्र निवेदन है कि इस लेखन में मेरी त्रुटियों की ओर ध्यान न देते हुए मुझे अबोध मानकर, इस प्रयास को स्वीकार करें । यदि कुछ कमियां अखरें तो उन्हें सुधारने में हमें सहयोग दें । आभारी हूं पुस्तक महल प्रकाशक का, जिन्होंने इस पुनीत कार्य को हाथ में लेकर इसे पूर्ण भी किया । परिणामस्वरूप आज यह पुस्तक आपके हाथों में है । गागर में सागर भरने का यह तुच्छ प्रयास स्वीकृत हो जाए, तो बड़ा हर्ष होगा । यदि पुस्तक का सीमित आकार रखना विवशता न होती, तो कुछ अधिक जानकारियां भी जोड़ी जा सकती थीं । भारत की पवित्र धरा पर कई हजार संत महात्मा हुए हैं, जिनमें से कुछ ही नाम प्रचलित हैं । इस पुस्तक के माध्यम से अन्य संतों को सम्मानित कर इस कमी को दूर करने का प्रयास किया गया है । पाठकों को साधुवाद ।

 

अनुक्रम

 

ऐसे हुई इस पुस्तक की रचना

5

 

ऋषि व मुनि कौन?

9

 

संत के लक्षण तथा वर्तमान में संत की स्थिति

11

 

(खण्ड अ) ऋषि और मुनि

13

1

देवर्षि नारद

15

2

महर्षि भृगु

17

3

महर्षि ऋभु

18

4

सप्तर्षि

20

 

मरीचि ऋषि

20

 

अत्रि ऋषि

21

 

अंगिरा ऋषि

22

 

पुलस्त्य ऋषि

22

 

पुलह ऋषि

23

 

क्रतु ऋषि

23

 

वसिष्ठ ऋषि

24

5

महर्षि कश्यप

26

6

देवगुरु बृहस्पति

27

7

असुर गुरु शुक्राचार्य

28

8

महर्षि दत्तात्रेय

30

9

ऋषि भरद्वाज

31

10

ऋषि नर नारायण

32

11

ऋषि व्चवन

33

12

ब्रह्मर्षि विश्वामित्र

34

13

ब्रह्मनिष्ठ याज्ञवल्क्य

35

14

ऋषि शांडिल्य

36

15

आचार्य वैशम्पायन

37

16

ऋषि मार्कण्डेय

38

17

महर्षि जमदग्नि

40

18

ऋषि सौभरि

41

19

ऋषि गौतम

42

20

ऋषि अष्टावक्र

44

21

महर्षि कपिल

45

22

महर्षि अगस्त्य

47

23

महर्षि पतंजलि

49

24

महर्षि वेदव्यास

50

25

मुनि शरमंग

52

26

महर्षि वाल्मीकि

53

27

महर्षि दधीचि

55

28

ऋषि जरत्कारु

56

29

मुनि शुकदेव

57

30

ऋषि अणिमाण्डव्य

59

31

महात्मा गोकर्ण

61

32

ऋषभदेव

63

33

ब्रह्मवादिनी सुलभा

65

 

(खण्ड ब) संत और महात्मा

67

34

मुनि नृसिंह

69

35

संत गौड़पाद

70

36

श्री विष्णुस्वामी

71

37

श्री यामुनाचार्य

72

38

श्री रामानुजाचार्य

73

39

श्री शंकराचार्य

75

40

श्री निम्बार्काचार्य

77

41

श्री मध्वाचार्य

78

42

श्री वल्लभाचार्य

80

43

श्री चैतन्य महाप्रभु

82

44

श्री रामानंदाचार्य

84

45

महात्मा बुद्ध

86

46

महात्मा कस्सप

88

47

महर्षि मेतार्य

90

48

श्री श्रीधर स्वामी

91

49

भगवान् महावीर

92

50

संत ज्ञानेश्वर

94

51

संत नामदेव

96

52

श्री चांगदेव

98

53

संत रैदास

99

54

संत कबीर

100

55

कृष्णभक्त मीरा

101

56

संत नरसी मेहता

102

57

श्री मधुसूदन सरस्वती

104

58

भक्त धन्नाजाट

105

59

गोस्वामी तुलसीदास

106

60

श्री भानुदास

108

61

संत एकनाथ

109

62

श्री गुरुनानक देव

111

63

गुरु अंगददेव

113

64

गुरु अमरदास

115

65

गुरु रामदास

117

66

गुरु अर्जुनदेव

118

67

गुरु हरगोविंद

120

68

गुरु हरिराय

121

69

गुरु हरिकृष्ण

122

70

गुरु तेगबहादुर

123

71

गुरु गोविंद सिंह

125

72

बाबा श्रीचंद्र

127

73

भक्त सूरदास

128

74

संत रज्जब

130

75

श्री रामसनेही सम्प्रदाय के

131

 

संत श्रीहरि रामदासजी

131

 

श्री रामदासजी महाराज

131

 

श्री दयालुदास जी महाराज

131

76

संत सिंगा

132

77

बाबा कीनाराम अघोरी

133

78

बाबा धरनीदास

135

79

श्री वासुदेवानन्द सरस्वती

136

80

संत तुकाराम

137

81

समर्थ गुरु रामदास

139

82

संत दादूदयाल

141

Sample Pages

हमारे ऋषि-मुनि और संत-महात्मा: Our Great Sages and Great Saints

Item Code:
HAA233
Cover:
Paperback
Edition:
2009
ISBN:
9788122310382
Language:
Hindi
Size:
9.5 inch X 7.5 inch
Pages:
149
Other Details:
Weight of the Book: 280 gms
Price:
$10.00   Shipping Free
Look Inside the Book
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
हमारे ऋषि-मुनि और संत-महात्मा: Our Great Sages and Great Saints

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 3154 times since 30th Aug, 2014

हमारा देश ऋषियों मुनियों व संत महात्मा

हमारा देश ऋषियों मुनियों व संत महात्माओं का देश है, जिन्होंने अपने तप पूत ज्ञान से न केवल आध्यात्मिक शक्ति की ज्योति जलाई अपितु अपने श्रेष्ठ मर्यादित शील, आचरण, अहिंसा, सत्य, परोपकार, त्याग, ईश्वरभक्ति आदि के द्वारा समस्त मानव जाति के समक्ष जीवन जीने का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

इन्हीं के बताए मार्ग पर चलकर, उसका आचरण करके भारत किसी समय ज्ञान विज्ञान, भक्ति और समृद्धि के चरम शिखर तक पहुंचा था। इस देश में इतने ऋषि मुनि और संत महात्मा हुए हैं कि उनका नाम गिनाना संभव नहीं है। कौन कितना बड़ा और श्रेष्ठ था, इसका मूल्यांकन करना भी संभव नहीं है।

प्रस्तुत पुस्तक में कुछ चुने हुए ऋषियों मुनियों और संत महात्माओं के बारे में संक्षेप में वर्णन किया गया है, जिन्होंने समाज को एक नयी दिशा दी, उसका मार्गदर्शन किया। पुस्तक के आरंभ में ऋषि मुनि और संत महात्मा शब्दों की व्याख्या भी दी गयी है, जिसे पढ़कर पाठक उनका अर्थ समझकर लाभान्वित होंगे। यह पुस्तक हमारे ऋषि मुनि और संत महात्मा ज्ञान पिपासुओं के लिए लाभकारी और पठनीय तो है ही, संग्रहणीय भी है।

 

लेखक का परिचय

65 वर्षीय सुदर्शन भाटिया की विभिन्न विषयों पर सवा सौ से अधिक पुस्तके तथा देश भर की 270 पत्र पत्रिकाओं में तीन हजार से अधिक रचनाए प्रकाशित हो चुकी हैं । हिन्दी साहित्य जगत् में भली प्रकार परिचित सुदर्शन भाटिया को हिमाचल केसरी अवार्ड (1997), आचार्य की मानद उपाधि (1999), हिम साहित्य परिषद का राज्य स्तरीय सम्मान (1999), साहित्य श्री सम्मान (2000), बीसवीं शताब्दी रत्न सम्मान (2000) पद्मश्री डी लक्ष्मी नारायण दुबे स्मृति सम्मान (2001) रामवृक्ष बेनीपुरी जन्म शताब्दी सम्मान (2002), राष्ट्रभाषा रत्न सम्मान (2003), सुभद्राकुमारी चौहान जन्म शताब्दी सम्मान (2004) हिमोत्कर्ष हिमाचल श्री सम्मान (2004 05), पद्मश्री सोहन लाल द्विवेदी जन्म शताब्दी सम्मान (2005) आदि अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं । पत्रकारिता तथा संपादन से जुडे सुदर्शन भाटिया पूर्ब अधिशासी अभियन्ता (विद्युत) हैं तथा इन दिनों अनेक समाज सेवी तथा स्वयं सेवी संस्थाओ से भी जुडे हैं । सुदर्शन भाटिया ने हिमाचल के लेखको को प्रकाश में लाने के लिए एक लंबी लेखमाला इधर भी हैं शब्द लिखी जो धारावाहिक प्रकाशित हुई ।

पुस्तक महल से प्रकाशित लेखक की अन्य कृतियां हैं 1 शिशु पालन तथा मां के दायित्व 2 रोग पहचानें उनका उपचार जानें 3 भारत की प्रसिद्ध वीरांगनाएं । लेखक की यह चौथी पुस्तक हमारे ऋषि मुनि और संत महात्मा है ।

भूमिका

ऐसे हुई इस पुस्तक की रचना

ईश्वर की महान् सत्ता में पूरी तरह आस्था रखने वाले, धार्मिक परंपराओं को समर्पित, पूर्णत शाकाहारी परिवार से संबंधित होने के कारण हिंदू देवी देवताओं, संत महात्माओं, ऋषि मुनियों । में बाल्यकाल से रुचि बनी रही । गीताप्रेस, गोरखपुर की गाड़ी अनेकानेक धार्मिक पुस्तकों को लेकर विक्रय के लिए कभी कभी हमारे उपनगर में भी आया करती थी । चूंकि ये पुस्तकें सुंदर, सचित्र तथा बहुत सस्ती हुआ करतीं थीं, इसीलिए हम छह भाई बहन अपनी दो चार दिनों की पॉकेट मनी से ही कुछ लघु पुस्तकें खरीद लिया करते थे । हमारी माताजी बहुत अधिक पुस्तकें ले लेतीं थीं । इस प्रकार हमें घर में ही काफी धार्मिक साहित्य पढ़ने के लिए मिल जाता था । यह रुचि तबसे अब तक बनी है । मामाजी के घर आध्यात्मिक मासिक पत्रिका कल्याण नियमित आती थी । ग्रीष्म अवकाश में या जब भी समय होता, इन्हें पढ़ने का अवसर भी मिलता । पूर्वजों के बताए रास्ते पर चलने के लिए दृढ़संकल्प होना सरल हो जाता था ।

कुछ परिस्थितियों ऐसी बनीं कि विद्युत अभियंता होते हुए भी मुझे साहित्य सृजन का अवसर मिल गया । मूलरूप से कहानीकार हूँ बाकी बाद में । मेरी एक सौ से अधिक प्रकाशित पुस्तकों में अनेक पुरातन धार्मिक घटनाओं पर पचास से अधिक लंबी कहानियां भी प्रकाशित हो चुकी हैं । द्वापर दर्पण तथा त्रेता दर्पण दो पुस्तकें भी अनेक उलझनों को सुलझाने में योगदान कर रही हैं । सैकड़ों लघुकथाएं तथा प्रेरक प्रसंग, जो रामायण, महाभारत, उपनिषदों तथा पुराणों के प्रसंगों पर आधारित हैं, देशभर की तमाम पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं । अत धर्म तथा संस्कृति की ओर मेरा निरंतर झुकाव बना रहा है । जन, 2004 में जब मुझे पुस्तक महल के प्रबंध निदेशक जी से मिलने का अवसर मिला, तो बातों बातों में उन्होंने मेरी मन तथा क्षमता को भांपकर, हमारे ऋषि मुनि औरसंत महात्मा नाम की पुस्तक लिखने की प्रबल प्रेरणा दी । मैंने इसे अपना सौभाग्य समझा और इस बड़े प्रोजेक्ट को सहर्ष स्वीकार कर अपने को धन्य माना । दिन रात, प्रतिदिन 10 से 12 घंटे लगातार अध्ययन व लेखन में जुट गया । इसी का परिणाम है यह पवित्र पुस्तक ।

मैंने इस पुस्तक के लिए अनेक ग्रंथों का अवलोकन किया । कुछ विद्वानों से चर्चा की । जो मार्गदर्शन तथा मैटीरियल मुझे गीताप्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित कल्याण के संत अंक तथा भक्त चरितांक से मिला, उसने भी मेरे लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मार्ग प्रशस्त किया । अत मैं इस संस्था का हृदय से आभारी हूं । इसमें जिन महान् लेखकों, भक्तों व विचारकों ने विस्तृत जीवन चरित दिए गए हैं, उनका भी आभार व्यक्त करता हूं । लोगों के मन में धार्मिक भावनाओं को बढ़ावा देना, अधिक से अधिक लोगों तक अपने ऋषि मुनियों, संत महात्माओं की सही जानकारी पहुंचाना लक्ष्य है इस पुस्तक का ।

सुधी पाठकों से विनम्र निवेदन है कि इस लेखन में मेरी त्रुटियों की ओर ध्यान न देते हुए मुझे अबोध मानकर, इस प्रयास को स्वीकार करें । यदि कुछ कमियां अखरें तो उन्हें सुधारने में हमें सहयोग दें । आभारी हूं पुस्तक महल प्रकाशक का, जिन्होंने इस पुनीत कार्य को हाथ में लेकर इसे पूर्ण भी किया । परिणामस्वरूप आज यह पुस्तक आपके हाथों में है । गागर में सागर भरने का यह तुच्छ प्रयास स्वीकृत हो जाए, तो बड़ा हर्ष होगा । यदि पुस्तक का सीमित आकार रखना विवशता न होती, तो कुछ अधिक जानकारियां भी जोड़ी जा सकती थीं । भारत की पवित्र धरा पर कई हजार संत महात्मा हुए हैं, जिनमें से कुछ ही नाम प्रचलित हैं । इस पुस्तक के माध्यम से अन्य संतों को सम्मानित कर इस कमी को दूर करने का प्रयास किया गया है । पाठकों को साधुवाद ।

 

अनुक्रम

 

ऐसे हुई इस पुस्तक की रचना

5

 

ऋषि व मुनि कौन?

9

 

संत के लक्षण तथा वर्तमान में संत की स्थिति

11

 

(खण्ड अ) ऋषि और मुनि

13

1

देवर्षि नारद

15

2

महर्षि भृगु

17

3

महर्षि ऋभु

18

4

सप्तर्षि

20

 

मरीचि ऋषि

20

 

अत्रि ऋषि

21

 

अंगिरा ऋषि

22

 

पुलस्त्य ऋषि

22

 

पुलह ऋषि

23

 

क्रतु ऋषि

23

 

वसिष्ठ ऋषि

24

5

महर्षि कश्यप

26

6

देवगुरु बृहस्पति

27

7

असुर गुरु शुक्राचार्य

28

8

महर्षि दत्तात्रेय

30

9

ऋषि भरद्वाज

31

10

ऋषि नर नारायण

32

11

ऋषि व्चवन

33

12

ब्रह्मर्षि विश्वामित्र

34

13

ब्रह्मनिष्ठ याज्ञवल्क्य

35

14

ऋषि शांडिल्य

36

15

आचार्य वैशम्पायन

37

16

ऋषि मार्कण्डेय

38

17

महर्षि जमदग्नि

40

18

ऋषि सौभरि

41

19

ऋषि गौतम

42

20

ऋषि अष्टावक्र

44

21

महर्षि कपिल

45

22

महर्षि अगस्त्य

47

23

महर्षि पतंजलि

49

24

महर्षि वेदव्यास

50

25

मुनि शरमंग

52

26

महर्षि वाल्मीकि

53

27

महर्षि दधीचि

55

28

ऋषि जरत्कारु

56

29

मुनि शुकदेव

57

30

ऋषि अणिमाण्डव्य

59

31

महात्मा गोकर्ण

61

32

ऋषभदेव

63

33

ब्रह्मवादिनी सुलभा

65

 

(खण्ड ब) संत और महात्मा

67

34

मुनि नृसिंह

69

35

संत गौड़पाद

70

36

श्री विष्णुस्वामी

71

37

श्री यामुनाचार्य

72

38

श्री रामानुजाचार्य

73

39

श्री शंकराचार्य

75

40

श्री निम्बार्काचार्य

77

41

श्री मध्वाचार्य

78

42

श्री वल्लभाचार्य

80

43

श्री चैतन्य महाप्रभु

82

44

श्री रामानंदाचार्य

84

45

महात्मा बुद्ध

86

46

महात्मा कस्सप

88

47

महर्षि मेतार्य

90

48

श्री श्रीधर स्वामी

91

49

भगवान् महावीर

92

50

संत ज्ञानेश्वर

94

51

संत नामदेव

96

52

श्री चांगदेव

98

53

संत रैदास

99

54

संत कबीर

100

55

कृष्णभक्त मीरा

101

56

संत नरसी मेहता

102

57

श्री मधुसूदन सरस्वती

104

58

भक्त धन्नाजाट

105

59

गोस्वामी तुलसीदास

106

60

श्री भानुदास

108

61

संत एकनाथ

109

62

श्री गुरुनानक देव

111

63

गुरु अंगददेव

113

64

गुरु अमरदास

115

65

गुरु रामदास

117

66

गुरु अर्जुनदेव

118

67

गुरु हरगोविंद

120

68

गुरु हरिराय

121

69

गुरु हरिकृष्ण

122

70

गुरु तेगबहादुर

123

71

गुरु गोविंद सिंह

125

72

बाबा श्रीचंद्र

127

73

भक्त सूरदास

128

74

संत रज्जब

130

75

श्री रामसनेही सम्प्रदाय के

131

 

संत श्रीहरि रामदासजी

131

 

श्री रामदासजी महाराज

131

 

श्री दयालुदास जी महाराज

131

76

संत सिंगा

132

77

बाबा कीनाराम अघोरी

133

78

बाबा धरनीदास

135

79

श्री वासुदेवानन्द सरस्वती

136

80

संत तुकाराम

137

81

समर्थ गुरु रामदास

139

82

संत दादूदयाल

141

Sample Pages

Post a Comment
 
Post Review
  • ok
    by mahipal sharma on 17th Aug 2014
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Related Items

सूफ़ी संत चरित: Sufi Saints
Item Code: NZC395
$12.00
Add to Cart
Buy Now
ललद्यद: Lalla - A Kashmiri Saint Poetess
Item Code: NZD115
$10.00
Add to Cart
Buy Now
प्रमुख ऋषि मुनि:  Saints and Sages (Picture Book)
Paperback (Edition: 2006)
Gita Press, Gorakhpur
Item Code: GPA230
$8.00
Add to Cart
Buy Now

Testimonials

I have been buying from Exotic India for years and am always pleased and excited to receive my packages. Thanks for the quality products.
Delia, USA
As ever, brilliant price and service.
Howard, UK.
The best and fastest service worldwide - I am in Australia and I put in a big order of books (14 items) on a Wednesday; it was sent on Friday and arrived at my doorstep early on Monday morning - amazing! All very securely packed in a very strong cardboard box. I have bought several times from Exotic India and the service is always exceptionally good. THANK YOU and NAMASTE!
Charles (Rudra)
I just wanted to say that this is I think my 3rd (big) order from you, and the last two times I received immaculate service, the books arrived well and it has been a very pleasant experience. Just wanted to say thanks for your efficient service.
Shantala, Belgium
Thank you so much EXOTIC INDIA for the wonderfull packaging!! I received my order today and it was gift wrapped with so much love and taste in a beautiful golden gift wrap and everything was neat and beautifully packed. Also my order came very fast... i am impressed! Besides selling fantastic items, you provide an exceptional customer service and i will surely purchase again from you! I am very glad and happy :) Thank you, Salma
Salma, Canada.
Artwork received today. Very pleased both with the product quality and speed of delivery. Many thanks for your help.
Carl, UK.
I wanted to let you know how happy we are with our framed pieces of Shree Durga and Shree Kali. Thank you and thank your framers for us. By the way, this month we offered a Puja and Yagna to the Ardhanarishwara murti we purchased from you last November. The Brahmin priest, Shree Vivek Godbol, who was visiting LA preformed the rites. He really loved our murti and thought it very paka. I am so happy to have found your site , it is very paka and trustworthy. Plus such great packing and quick shipping. Thanks for your service Vipin, it is a pleasure.
Gina, USA
My marble statue of Durga arrived today in perfect condition, it's such a beautiful statue. Thanks again for giving me a discount on it, I'm always very pleased with the items I order from you. You always have the best quality items.
Charles, Tennessee
Jay Shree Krishna Shrimud Bhagavatam Mahapurana in Sanskrat Parayana is very very thankful to you we are so gratefully to your seva
Mrs. Darbar, UK.
Its a very efficient website and questions queries are responded promptly. very reliable website. Thank you.
Kailash, Australia.
TRUSTe
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2017 © Exotic India