Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Your Cart (0)
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindi > रामाज्ञा-प्रश्न: Ramajna Prashan of Tulsidas
Displaying 8875 of 11191         Previous  |  NextSubscribe to our newsletter and discounts
रामाज्ञा-प्रश्न: Ramajna Prashan of Tulsidas
Pages from the book
रामाज्ञा-प्रश्न: Ramajna Prashan of Tulsidas
Look Inside the Book
Description

पुस्तक परिचय

 

कहा जाता है कि गोस्वामी तुलसीदासजीने अपने परिचित गंगाराम ज्योतिषीके लिये इस रामाज्ञा प्रश्नकी रचना की थी । गंगाराम ज्योतिषी काशीमें प्रह्वादघाटपर रहते थे । वे प्रतिदिन सायंकाल श्रीगोस्वामीजीके साथ ही संध्या करने गङ्गातटपर जाया करते थे । एक दिन गोस्वामीजी संध्या समय उनके द्वारपर आये तो गंगारामजीने कहा आप पधारें, मैं आज गंगा किनारे नहीं जा सकूँगा।

गोस्वामीजीने पूछा आप बहुत उदास दीखते हैं, कारण क्या है?

ज्योतिषीजीने बतलाया राजघाटपर जो गढ़बार वंशीय नरेश हैं, उनके राजकुमार आखेटके लिये गये थे, किन्तु लौटे नहीं । समाचार मिला है कि आखेटमें जो लोग गये थे, उनमेंसे एकको बाघने मार दिया है । राजाने मुझे आज बुलाया था । मुझसे पूछा गया कि उनका पुत्र सकुशल है या नहीं, किंन्तु यह बात राजाओंकी ठहरी, कहा गया है कि उत्तर ठीक निकला तो भारी पुरस्कार मिलेगा अन्यथा प्राणदण्ड दिया जायगा । मैं एक दिनका समय माँगकर घर आ गया हूँ किन्तु मेरा ज्योतिष ज्ञान इतना नहीं कि निश्चयात्मक उत्तर दे सकूँ । पता नहीं कल क्या होगा । दुखी ब्राह्मणपर गोस्वामीजीको दया आ गयी । उन्होंने कहा आप चिन्ता न करें । श्रीरघुनाथजी सब मङ्गल करेंगे । आश्वासन मिलनेपर गंगारामजी गोस्वामीजीके साथ संध्या करने गये । संध्या करके लौटनेपर गोस्वामीजी यह ग्रन्थलिखने बैठ गये । उस समय उनके पास स्याही नहीं थी । कत्था घोलकर सरकण्डेकी कलमसे ६ घंटेमें यह ग्रन्थ गोस्वामीजीने लिखा और गंगारामजीको दे दिया ।

दूसरे दिन ज्योतिषी गंगारामजी राजाके समीप गये । कन्दसे शकुन देखकर उन्होंने बता दिया राजकुमार सकुशल हैं ।

राजकुमार सकुशल थे । उनके किसी साथीको बाघने मारा था, किन्तु राजकुमारके लौटनेतक राजाने गंगारामको बन्दीगृहमें बन्द रखा । जब राजकुमार घर लौट आये, तब राजाने ज्योतिषी गंगारामको कारागारसे छोड़ा, क्षमा माँगी और बहुत अधिक सम्पत्ति दी । वह सब धन गंगारामजीने गोस्वामीजीके चरणोंमें लाकर रख दिया । गोस्वामीजीको धनका क्या करना था, किन्तु गंगारामका बहुत अधिक आग्रह देखकर उनके सन्तोषके लिये दस हजार रुपये उसमेंसे लेकर उनसे हनुमान्जीके दस मन्दिर गोस्वामीजीने बनवाये । उन मन्दिरोंमें दक्षिणाभिमुख हनुमान्जीकी मूर्तियाँ हैं । यह ग्रन्थ सात सर्गोंमें समाप्त हुआ है । प्रत्येक सर्गमें सात सात सप्तक हैं और प्रत्येक सप्तकमें सात सात दोहे हैं । इसमें श्रीरामचरितमानसकी कथा वर्णित है किन्तु क्रम भिन्न हैं । प्रथम सर्ग तथा चतुर्थ सर्गमें बालकाण्डकी कथा है । द्वितीय सर्गमें अयोध्याकाण्ड तथा कुछ अरण्यकाण्डकी भी । तृतीय सर्गमें अरण्यकाण्ड तथा किष्किन्धाकाण्डकी कथा है । पञ्चम सर्गमें सुन्दरकाण्ड तथा लंकाकाण्डकी, षष्ठ सर्गमें राज्याभिषेककी कथा तथा कुछ अन्य कथाएँ हैं । सप्तम सर्गमें स्फुट दोहे हैं और शकुन देखनेकी विधि है ।

 

Sample Page

 

रामाज्ञा-प्रश्न: Ramajna Prashan of Tulsidas

Item Code:
GPA148
Cover:
Paperback
Edition:
2013
ISBN:
9788129305015
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
96
Other Details:
Weight of the Book: 70 gms
Price:
$5.00
Discounted:
$4.00   Shipping Free
You Save:
$1.00 (20%)
Look Inside the Book
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
रामाज्ञा-प्रश्न: Ramajna Prashan of Tulsidas

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 1852 times since 22nd Sep, 2014

पुस्तक परिचय

 

कहा जाता है कि गोस्वामी तुलसीदासजीने अपने परिचित गंगाराम ज्योतिषीके लिये इस रामाज्ञा प्रश्नकी रचना की थी । गंगाराम ज्योतिषी काशीमें प्रह्वादघाटपर रहते थे । वे प्रतिदिन सायंकाल श्रीगोस्वामीजीके साथ ही संध्या करने गङ्गातटपर जाया करते थे । एक दिन गोस्वामीजी संध्या समय उनके द्वारपर आये तो गंगारामजीने कहा आप पधारें, मैं आज गंगा किनारे नहीं जा सकूँगा।

गोस्वामीजीने पूछा आप बहुत उदास दीखते हैं, कारण क्या है?

ज्योतिषीजीने बतलाया राजघाटपर जो गढ़बार वंशीय नरेश हैं, उनके राजकुमार आखेटके लिये गये थे, किन्तु लौटे नहीं । समाचार मिला है कि आखेटमें जो लोग गये थे, उनमेंसे एकको बाघने मार दिया है । राजाने मुझे आज बुलाया था । मुझसे पूछा गया कि उनका पुत्र सकुशल है या नहीं, किंन्तु यह बात राजाओंकी ठहरी, कहा गया है कि उत्तर ठीक निकला तो भारी पुरस्कार मिलेगा अन्यथा प्राणदण्ड दिया जायगा । मैं एक दिनका समय माँगकर घर आ गया हूँ किन्तु मेरा ज्योतिष ज्ञान इतना नहीं कि निश्चयात्मक उत्तर दे सकूँ । पता नहीं कल क्या होगा । दुखी ब्राह्मणपर गोस्वामीजीको दया आ गयी । उन्होंने कहा आप चिन्ता न करें । श्रीरघुनाथजी सब मङ्गल करेंगे । आश्वासन मिलनेपर गंगारामजी गोस्वामीजीके साथ संध्या करने गये । संध्या करके लौटनेपर गोस्वामीजी यह ग्रन्थलिखने बैठ गये । उस समय उनके पास स्याही नहीं थी । कत्था घोलकर सरकण्डेकी कलमसे ६ घंटेमें यह ग्रन्थ गोस्वामीजीने लिखा और गंगारामजीको दे दिया ।

दूसरे दिन ज्योतिषी गंगारामजी राजाके समीप गये । कन्दसे शकुन देखकर उन्होंने बता दिया राजकुमार सकुशल हैं ।

राजकुमार सकुशल थे । उनके किसी साथीको बाघने मारा था, किन्तु राजकुमारके लौटनेतक राजाने गंगारामको बन्दीगृहमें बन्द रखा । जब राजकुमार घर लौट आये, तब राजाने ज्योतिषी गंगारामको कारागारसे छोड़ा, क्षमा माँगी और बहुत अधिक सम्पत्ति दी । वह सब धन गंगारामजीने गोस्वामीजीके चरणोंमें लाकर रख दिया । गोस्वामीजीको धनका क्या करना था, किन्तु गंगारामका बहुत अधिक आग्रह देखकर उनके सन्तोषके लिये दस हजार रुपये उसमेंसे लेकर उनसे हनुमान्जीके दस मन्दिर गोस्वामीजीने बनवाये । उन मन्दिरोंमें दक्षिणाभिमुख हनुमान्जीकी मूर्तियाँ हैं । यह ग्रन्थ सात सर्गोंमें समाप्त हुआ है । प्रत्येक सर्गमें सात सात सप्तक हैं और प्रत्येक सप्तकमें सात सात दोहे हैं । इसमें श्रीरामचरितमानसकी कथा वर्णित है किन्तु क्रम भिन्न हैं । प्रथम सर्ग तथा चतुर्थ सर्गमें बालकाण्डकी कथा है । द्वितीय सर्गमें अयोध्याकाण्ड तथा कुछ अरण्यकाण्डकी भी । तृतीय सर्गमें अरण्यकाण्ड तथा किष्किन्धाकाण्डकी कथा है । पञ्चम सर्गमें सुन्दरकाण्ड तथा लंकाकाण्डकी, षष्ठ सर्गमें राज्याभिषेककी कथा तथा कुछ अन्य कथाएँ हैं । सप्तम सर्गमें स्फुट दोहे हैं और शकुन देखनेकी विधि है ।

 

Sample Page

 

Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Related Items

सूर्यांक: The Most Exhaustive Collection of Articles on the Sun God
Item Code: GPA031
$35.00$28.00
You save: $7.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
ईश्वर और संसार: God and World
Item Code: GPA141
$7.00$5.60
You save: $1.40 (20%)
Add to Cart
Buy Now

Testimonials

I love this web site and love coming to see what you have online.
Glenn, Australia
Received package today, thank you! Love how everything was packed, I especially enjoyed the fabric covering! Thank you for all you do!
Frances, Austin, Texas
Hi, just got my order! Wow! Soooooo beautiful!!! I'm so happy! You rock, thank you!
Amy, Malibu, USA
Nice website..has a collection of rare books.
Srikanth
Beautiful products nicely presented and easy to use website
Amanda, UK.
I received my order, very very beautiful products. I hope to buy something more. Thank you!
Gulnora, Uzbekistan
Thank you very much for the courtesy you showed me for the time I buy my books. The last book is a good book. İt is important in terms of recognizing fine art of İndia.
Suzan, Turkey
Thank You very much Sir. I really like the saree and the blouse fit perfeact. Thank You again.
Sulbha, USA
I have received the parcel yesterday and the shiv-linga idol is sooo beautiful and u have exceeded my expectations...
Guruprasad, Bangalore
Yesterday I received my lost and through you again found order. Very quickly I must say !. Thank you and thank you again for your service. I am very happy with this double CD of Ustad Shujaat Husain Khan. I thought it was lost forever and now I can add it to my CD collection. I hope in the near future to buy again at your online shop. You have wonderful items to offer !
Joke van der Baars, the Netherlands
TRUSTe
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2017 © Exotic India