Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Your Cart (0)
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Performing Arts > संगीत विशारद: Sangeet Visharad
Displaying 18 of 1281         Previous  |  NextSubscribe to our newsletter and discounts
संगीत विशारद: Sangeet Visharad
Pages from the book
संगीत विशारद: Sangeet Visharad
Look Inside the Book
Description

प्राक्कथन

'संगीत-विशारद' का नया संस्करण संगीत-जगत् की सेवा में प्रस्तुत है विद्यार्थियों तथा शिक्षकों की मांग और कठिनाई को ध्यान में रखकर इसे प्रथम वर्ष से एम० ए० स्तर तक के पाठ्यक्रमनुसार कर दिया गया है, अत: संगीत-परीक्षाओं में आनेवाले प्राय हर प्रश्न का उत्तर इसमें प्राप्त हो जाएगा बी० ए० तथा एम० एल स्तर के पाठ्यक्रम में जो भी नया बदलाव हुआ है और नए विषय बढाए गए हैं, उन सभा के बारे में विस्तार से सामग्री दे दी गई है।

'संगीत-विशारद' एक ही ऐसा ग्रन्थ है, जिसे पढ़ लेने के बाद अन्य ग्रन्थों के अध्ययन की आवश्यकता नहीं रह जाती फिर भी यदि किसी प्रश्न का उत्तर 'संगीत-विशारद' न दे सके तो पाठक हमें इसकी सूचना दे सकते हैं, ताकि आगामी संस्करण में उस कमी को पूरा किया जा सके । परिवर्तन और संशोधन कभी समाप्त नहीं होते, काल-चक्र की तरह उनका पहिया निरन्तर विकासोन्मुख रहकर गतिशील रहता है, यही कला और संस्कृति के उत्थान का रहस्य है । अनेक बार पाठ्यक्रम में कुछ ऐसे परिवर्धन या परिवर्तन कर दिए जाते हैं, जिनका मूल-विषय तो एक ही रहता है; परन्तु उसे प्रस्तुत करने का तरीका शब्दों के हेर-फेर से ऐसा प्रतीत होता है, जैसे वह कोई नया विषय हो। ऐसी प्रतीति होने पर विद्यार्थी योग्य शिक्षक से सम्पर्क स्थापित करके इस पुस्तक में उसके समाधान की खोज भी कर सकते हैं।हम चाहेंगे कि 'संगीत-विशारद का पाठक अपने लक्ष्य में अग्रसर होते हुए कला के उच्चतम शिखर की ओर बढ़ता जाए, तभी हमारा परिश्रम सार्थक होगा।

इस पुस्तक को भाषा, विषय-वस्तु और सामग्री की दृष्टि से काफी समृद्ध कर दिया गया है, जिसमें श्री भगवतशरण शर्मा और 'संगीत' मासिक पत्र के प्रधान सम्पादक डॉ० लक्ष्मीनारायण गर्ग का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ है उनके प्रति कृतज्ञताज्ञापन करना यदि मेरे लिए समीचीन नहीं होगा और स्नेह की अभिव्यक्ति राग का प्रतीक कहलाएगी, अत: यही कहा जा सकता है कि संगीत की आराधना के निमित्त भगवती सरस्वती के मन्दिर में मेरे पुष्पार्चन के साथ मेरे दो प्रियजन का नैवेद्य भी समर्पित है। वास्तव में संगीत एक यज्ञ है और हम सब यज्ञी।

 

     
 

अनुक्रम

 

1

संगीत की धरोहर

9

2

भारतीय संगीत की उत्पत्ति

12

3

उत्तर भारतीय संगीत का संक्षिप्त इतिहास

14

4

सौंदर्य-शास्त्र

29

5

संगीत का स्वर-पक्ष

33

6

सारणा चतुष्टयी

48

7

दक्षिणी (कर्नाटिकी) और उत्तरी (हिन्दुस्तानी) संगीत-पद्धतियाँ

52

8

उत्तर और दक्षिण भारत का संगीत

55

 

दक्षिणी ताल- पद्धति

64

9

ध्वनि-विज्ञान

71

10

ध्वनि तरंग और उपकरण

90

11

संगीत वाद्य और ध्वनि तरंग

94

12

वाद्य-यन्त्रों की कंपन संख्या

101

13

ध्वनि अभिलेखन तथा पुनरुत्पादन

106

14

भवन ध्वनिकी

115

15

स्वर-शास्त्र

122

16

संगीत के सप्तक का विकास

145

17

संगीत में ठांठ(थाट) पद्धति का विकास

155

18

उत्तर-भारतीय संगीत पद्धति के बारह स्वरों से बत्तीस ठाठ

161

19

उत्तर भारतीय संगीत-पद्धति के दस ठाठों से उत्पन्न कुछ राग

164

20

वेंकट मखी पंडित के बहत्तर मेल (ठाठ)

166

21

नाद-स्था, सप्तक, वर्ण, अलंकार, राग और ग्राम मूर्च्छना

175

22

जाति गायन

185

23

रागों का लक्षण

189

24

अध्वदर्शक स्वर 'मध्यम' का महत्त्व

198

25

हिंदुस्तानी संगीत-पद्धति के चालीस सिद्धांत

200

26

राग में वादी स्वर का महत्त्व

204

27

राग-रागिनी-पद्धति

207

28

गायकों के गुण-अवगुण

212

29

यंत्र-वादकों के गुण-दोष

217

30

 नायक वे गाय आदि के भेद

218

31

गीत, गांधर्व, गान, मार्ग संगीत, देशी संगीत, ग्रह, अंश और न्यास

222

32

चतुर्दण्डी और उसकी अवधारणा

225

33

प्राचीन प्रबंध-गायन अथवा शैलियाँ

227

34

आधुनिक प्रबन्ध-गायन या संगीत शैलियाँ

232

35

प्राचीन आलाप-तान तथा अन्य परिभाषाएँ

241

36

सामवेदकालीन संगीत

248

37

आधुनिक आलाप-तान

255

38

रागों का दस विभागों वर्गीकरण में करने का प्राचीन सिद्धांत

260

39

आदत-जिगर-हिसाब

263

40

भारतीय स्वरलिपि पद्धति

265

41

144 रागों का वर्णन (प्रथम वर्ष से अष्टम वर्ष तक)

269-336

42

ताल-मात्रा-लय विवरण

325

43

उत्तर भारतीय संगीत-पद्धति की कुछ मुख्य तालें

337

44

तबला एवं पखावज पर दोनों हाथों के अलग-अलग तथा संयुक्त आघात का वर्णन

343

45

ताल वाद्य-वादकों के गुण-दोष

348

46

वाद्यमंत्र परिचय, वाद्यों के प्रकार

349

47

गायकों के प्रमुख घराने

380

48

संगीत के विभिन्न घरानों की परम्परा

386

49

कथक नृत्य के घराने

410

50

ताल-वाद्यों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और पखावज के घराने

413

51

छह राष्ट्रों का संगीत (चीन, जापान, ग्रीस, मिश्र, अरब, ईरान)

416

52

पाश्चात्य स्वरलिपि-पद्धति

432

53

पाश्चात्य संगीत में रिदम

447

54

पाश्चात्य संगीत में हारमाँनी और मैलॉडी

449

55

पाश्चात्य संगीत-पद्धति में ठाठ व रागों का स्वरांकन

459

56

पाश्चात्य स्वरलिपि-लेखन

463

57

भारतीय वृन्दवादन का ऐतिहासिक विवेचन

465

58

संगीत के कुछ प्रसिद्ध ग्रन्थ

470

59

संगीतकारों का संक्षिप्त परिचय

480

60

पाश्चात्य संगीतकार

522

61

संगीत और जीवन

524

62

संगीत की शक्ति

527

63

संगीत और छन्दशास्त्र

531

64

रागों का रस एवं भावों से सम्बन्ध

543

65

राग और ऋतुएँ

546

66

संगीत और रस

548

67

ताल और रस

551

68

ललित कलाओं में संगीत का स्थान

559

69

विभिन्न प्रदेशों की लोकप्रिय गीत शैली (धुनें) व नृत्य

562

70

लोक संगीत का भाव पक्ष

566

71

भारतीय वाद्य-परम्परा

568

72

लोक-संगीत के वाद्ययंत्र

575

73

पाश्चात्य संगीत के वाद्ययंत्र

585

74

संगीत में काकु

591

75

भारतीय संगीत में सौंदर्य-बोध

594

76

काव्य और संगीत

598

77

शास्त्रीय संगीत और लोक-संगीत

599

78

कंठ संस्कार

600

79

कंठ-साधना और पार्श्व-गायन

612

80

राग, निर्माण और स्वर-रचना के सिद्धांत

617

81

संगीत निर्देशन और उसकी कला

621

82

फिल्म संगीत की ऐतिहासिक परम्परा और उसके घराने

630

83

नटराज-उपाधि का रहस्य

649

84

तांडव और लास्य की उत्पत्ति

650

85

नृत्य-निर्देशन की कला

651

86

सरल एवं शास्त्रीय संगीत की तुलना

658

87

संगीत का मनोविज्ञान

659

88

वृन्दगान, वाद्यवृन्द गीत-नाट्य और नृत्य-नाट्य

662

89

गाथागान, नृत्यगीत और गीतकाव्य भारतीय नृत्य-कला

668

90

भारतीय नृ्त्य-कला

671

91

नृत्याचार्य, नर्तक तथा नर्तकी के गुण दोष

677

92

वैणिक(वीणावादक), वांशिक (बाँसुरी वादक), कविताकार, नर्तक, नर्तकी के गुण-दोष एवं कलाकारों के भेद

679

93

रवीन्द्र संगीत

680

94

नज़रूल संगीत

695

95

बंगाल का लोक संगीत (भवइया, गंभीरा, बाउल, भटियाली, चटका और कीर्तन)

706

96

मंच-प्रर्दशन और संगीत-समारोह

713

97

चित्रपट-संगीत, नाट्य-संगीत और ऑडियो-विजुअल-विद्या

720

98

नाट्य संगीत विद्या

726

99

शोध प्रबन्ध और उनकी रूपरेखा

734

100

कर्नाटिक संगीत की स्वरलिपि पद्धति

738

101

पाश्चात्य देशों में अवनद्ध वाद्यों का विकास

747

102

पंजाब का गुरमति संगीत

754

103

संगीत वाद्यों में ध्वनि तरंगे

762

104

ध्वनि विज्ञान से सम्बन्धित महत्वपूर्ण तथ्य

768

105

विभिन्न माध्यमों में ध्वनि का वेग तथा प्रसारण

771

106

पाश्चात्य संगीत के कुछ शब्दों का स्पष्टीकरण

773

107

स्वरलिपि चिन्ह परिचय

785

Sample Pages













संगीत विशारद: Sangeet Visharad

Item Code:
NZA658
Cover:
Hardcover
Edition:
2013
ISBN:
8185057001
Language:
Hindi
Size:
9.0 inch X 6.0 inch
Pages:
785
Other Details:
Weight of the Book:1.0 Kg
Price:
$45.00
Discounted:
$36.00   Shipping Free
You Save:
$9.00 (20%)
Look Inside the Book
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
संगीत विशारद: Sangeet Visharad

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 12289 times since 11th Aug, 2017

प्राक्कथन

'संगीत-विशारद' का नया संस्करण संगीत-जगत् की सेवा में प्रस्तुत है विद्यार्थियों तथा शिक्षकों की मांग और कठिनाई को ध्यान में रखकर इसे प्रथम वर्ष से एम० ए० स्तर तक के पाठ्यक्रमनुसार कर दिया गया है, अत: संगीत-परीक्षाओं में आनेवाले प्राय हर प्रश्न का उत्तर इसमें प्राप्त हो जाएगा बी० ए० तथा एम० एल स्तर के पाठ्यक्रम में जो भी नया बदलाव हुआ है और नए विषय बढाए गए हैं, उन सभा के बारे में विस्तार से सामग्री दे दी गई है।

'संगीत-विशारद' एक ही ऐसा ग्रन्थ है, जिसे पढ़ लेने के बाद अन्य ग्रन्थों के अध्ययन की आवश्यकता नहीं रह जाती फिर भी यदि किसी प्रश्न का उत्तर 'संगीत-विशारद' न दे सके तो पाठक हमें इसकी सूचना दे सकते हैं, ताकि आगामी संस्करण में उस कमी को पूरा किया जा सके । परिवर्तन और संशोधन कभी समाप्त नहीं होते, काल-चक्र की तरह उनका पहिया निरन्तर विकासोन्मुख रहकर गतिशील रहता है, यही कला और संस्कृति के उत्थान का रहस्य है । अनेक बार पाठ्यक्रम में कुछ ऐसे परिवर्धन या परिवर्तन कर दिए जाते हैं, जिनका मूल-विषय तो एक ही रहता है; परन्तु उसे प्रस्तुत करने का तरीका शब्दों के हेर-फेर से ऐसा प्रतीत होता है, जैसे वह कोई नया विषय हो। ऐसी प्रतीति होने पर विद्यार्थी योग्य शिक्षक से सम्पर्क स्थापित करके इस पुस्तक में उसके समाधान की खोज भी कर सकते हैं।हम चाहेंगे कि 'संगीत-विशारद का पाठक अपने लक्ष्य में अग्रसर होते हुए कला के उच्चतम शिखर की ओर बढ़ता जाए, तभी हमारा परिश्रम सार्थक होगा।

इस पुस्तक को भाषा, विषय-वस्तु और सामग्री की दृष्टि से काफी समृद्ध कर दिया गया है, जिसमें श्री भगवतशरण शर्मा और 'संगीत' मासिक पत्र के प्रधान सम्पादक डॉ० लक्ष्मीनारायण गर्ग का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ है उनके प्रति कृतज्ञताज्ञापन करना यदि मेरे लिए समीचीन नहीं होगा और स्नेह की अभिव्यक्ति राग का प्रतीक कहलाएगी, अत: यही कहा जा सकता है कि संगीत की आराधना के निमित्त भगवती सरस्वती के मन्दिर में मेरे पुष्पार्चन के साथ मेरे दो प्रियजन का नैवेद्य भी समर्पित है। वास्तव में संगीत एक यज्ञ है और हम सब यज्ञी।

 

     
 

अनुक्रम

 

1

संगीत की धरोहर

9

2

भारतीय संगीत की उत्पत्ति

12

3

उत्तर भारतीय संगीत का संक्षिप्त इतिहास

14

4

सौंदर्य-शास्त्र

29

5

संगीत का स्वर-पक्ष

33

6

सारणा चतुष्टयी

48

7

दक्षिणी (कर्नाटिकी) और उत्तरी (हिन्दुस्तानी) संगीत-पद्धतियाँ

52

8

उत्तर और दक्षिण भारत का संगीत

55

 

दक्षिणी ताल- पद्धति

64

9

ध्वनि-विज्ञान

71

10

ध्वनि तरंग और उपकरण

90

11

संगीत वाद्य और ध्वनि तरंग

94

12

वाद्य-यन्त्रों की कंपन संख्या

101

13

ध्वनि अभिलेखन तथा पुनरुत्पादन

106

14

भवन ध्वनिकी

115

15

स्वर-शास्त्र

122

16

संगीत के सप्तक का विकास

145

17

संगीत में ठांठ(थाट) पद्धति का विकास

155

18

उत्तर-भारतीय संगीत पद्धति के बारह स्वरों से बत्तीस ठाठ

161

19

उत्तर भारतीय संगीत-पद्धति के दस ठाठों से उत्पन्न कुछ राग

164

20

वेंकट मखी पंडित के बहत्तर मेल (ठाठ)

166

21

नाद-स्था, सप्तक, वर्ण, अलंकार, राग और ग्राम मूर्च्छना

175

22

जाति गायन

185

23

रागों का लक्षण

189

24

अध्वदर्शक स्वर 'मध्यम' का महत्त्व

198

25

हिंदुस्तानी संगीत-पद्धति के चालीस सिद्धांत

200

26

राग में वादी स्वर का महत्त्व

204

27

राग-रागिनी-पद्धति

207

28

गायकों के गुण-अवगुण

212

29

यंत्र-वादकों के गुण-दोष

217

30

 नायक वे गाय आदि के भेद

218

31

गीत, गांधर्व, गान, मार्ग संगीत, देशी संगीत, ग्रह, अंश और न्यास

222

32

चतुर्दण्डी और उसकी अवधारणा

225

33

प्राचीन प्रबंध-गायन अथवा शैलियाँ

227

34

आधुनिक प्रबन्ध-गायन या संगीत शैलियाँ

232

35

प्राचीन आलाप-तान तथा अन्य परिभाषाएँ

241

36

सामवेदकालीन संगीत

248

37

आधुनिक आलाप-तान

255

38

रागों का दस विभागों वर्गीकरण में करने का प्राचीन सिद्धांत

260

39

आदत-जिगर-हिसाब

263

40

भारतीय स्वरलिपि पद्धति

265

41

144 रागों का वर्णन (प्रथम वर्ष से अष्टम वर्ष तक)

269-336

42

ताल-मात्रा-लय विवरण

325

43

उत्तर भारतीय संगीत-पद्धति की कुछ मुख्य तालें

337

44

तबला एवं पखावज पर दोनों हाथों के अलग-अलग तथा संयुक्त आघात का वर्णन

343

45

ताल वाद्य-वादकों के गुण-दोष

348

46

वाद्यमंत्र परिचय, वाद्यों के प्रकार

349

47

गायकों के प्रमुख घराने

380

48

संगीत के विभिन्न घरानों की परम्परा

386

49

कथक नृत्य के घराने

410

50

ताल-वाद्यों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और पखावज के घराने

413

51

छह राष्ट्रों का संगीत (चीन, जापान, ग्रीस, मिश्र, अरब, ईरान)

416

52

पाश्चात्य स्वरलिपि-पद्धति

432

53

पाश्चात्य संगीत में रिदम

447

54

पाश्चात्य संगीत में हारमाँनी और मैलॉडी

449

55

पाश्चात्य संगीत-पद्धति में ठाठ व रागों का स्वरांकन

459

56

पाश्चात्य स्वरलिपि-लेखन

463

57

भारतीय वृन्दवादन का ऐतिहासिक विवेचन

465

58

संगीत के कुछ प्रसिद्ध ग्रन्थ

470

59

संगीतकारों का संक्षिप्त परिचय

480

60

पाश्चात्य संगीतकार

522

61

संगीत और जीवन

524

62

संगीत की शक्ति

527

63

संगीत और छन्दशास्त्र

531

64

रागों का रस एवं भावों से सम्बन्ध

543

65

राग और ऋतुएँ

546

66

संगीत और रस

548

67

ताल और रस

551

68

ललित कलाओं में संगीत का स्थान

559

69

विभिन्न प्रदेशों की लोकप्रिय गीत शैली (धुनें) व नृत्य

562

70

लोक संगीत का भाव पक्ष

566

71

भारतीय वाद्य-परम्परा

568

72

लोक-संगीत के वाद्ययंत्र

575

73

पाश्चात्य संगीत के वाद्ययंत्र

585

74

संगीत में काकु

591

75

भारतीय संगीत में सौंदर्य-बोध

594

76

काव्य और संगीत

598

77

शास्त्रीय संगीत और लोक-संगीत

599

78

कंठ संस्कार

600

79

कंठ-साधना और पार्श्व-गायन

612

80

राग, निर्माण और स्वर-रचना के सिद्धांत

617

81

संगीत निर्देशन और उसकी कला

621

82

फिल्म संगीत की ऐतिहासिक परम्परा और उसके घराने

630

83

नटराज-उपाधि का रहस्य

649

84

तांडव और लास्य की उत्पत्ति

650

85

नृत्य-निर्देशन की कला

651

86

सरल एवं शास्त्रीय संगीत की तुलना

658

87

संगीत का मनोविज्ञान

659

88

वृन्दगान, वाद्यवृन्द गीत-नाट्य और नृत्य-नाट्य

662

89

गाथागान, नृत्यगीत और गीतकाव्य भारतीय नृत्य-कला

668

90

भारतीय नृ्त्य-कला

671

91

नृत्याचार्य, नर्तक तथा नर्तकी के गुण दोष

677

92

वैणिक(वीणावादक), वांशिक (बाँसुरी वादक), कविताकार, नर्तक, नर्तकी के गुण-दोष एवं कलाकारों के भेद

679

93

रवीन्द्र संगीत

680

94

नज़रूल संगीत

695

95

बंगाल का लोक संगीत (भवइया, गंभीरा, बाउल, भटियाली, चटका और कीर्तन)

706

96

मंच-प्रर्दशन और संगीत-समारोह

713

97

चित्रपट-संगीत, नाट्य-संगीत और ऑडियो-विजुअल-विद्या

720

98

नाट्य संगीत विद्या

726

99

शोध प्रबन्ध और उनकी रूपरेखा

734

100

कर्नाटिक संगीत की स्वरलिपि पद्धति

738

101

पाश्चात्य देशों में अवनद्ध वाद्यों का विकास

747

102

पंजाब का गुरमति संगीत

754

103

संगीत वाद्यों में ध्वनि तरंगे

762

104

ध्वनि विज्ञान से सम्बन्धित महत्वपूर्ण तथ्य

768

105

विभिन्न माध्यमों में ध्वनि का वेग तथा प्रसारण

771

106

पाश्चात्य संगीत के कुछ शब्दों का स्पष्टीकरण

773

107

स्वरलिपि चिन्ह परिचय

785

Sample Pages













Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Related Items

नेट संगीत: Net Sangeet
Item Code: NZK759
$30.00$24.00
You save: $6.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
संगीत मांगल्य: Sangeet Mangalya
Item Code: NZK758
$30.00$24.00
You save: $6.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now

Testimonials

Very grateful for this service, of making this precious treasure of Haveli Sangeet for ThakurJi so easily in the US. Appreciate the fact that notation is provided.
Leena, USA.
The Bhairava painting I ordered by Sri Kailash Raj is excellent. I have been purchasing from Exotic India for well over a decade and am always beyond delighted with my extraordinary purchases and customer service. Thank you.
Marc, UK
I have been buying from Exotic India for years and am always pleased and excited to receive my packages. Thanks for the quality products.
Delia, USA
As ever, brilliant price and service.
Howard, UK.
The best and fastest service worldwide - I am in Australia and I put in a big order of books (14 items) on a Wednesday; it was sent on Friday and arrived at my doorstep early on Monday morning - amazing! All very securely packed in a very strong cardboard box. I have bought several times from Exotic India and the service is always exceptionally good. THANK YOU and NAMASTE!
Charles (Rudra)
I just wanted to say that this is I think my 3rd (big) order from you, and the last two times I received immaculate service, the books arrived well and it has been a very pleasant experience. Just wanted to say thanks for your efficient service.
Shantala, Belgium
Thank you so much EXOTIC INDIA for the wonderfull packaging!! I received my order today and it was gift wrapped with so much love and taste in a beautiful golden gift wrap and everything was neat and beautifully packed. Also my order came very fast... i am impressed! Besides selling fantastic items, you provide an exceptional customer service and i will surely purchase again from you! I am very glad and happy :) Thank you, Salma
Salma, Canada.
Artwork received today. Very pleased both with the product quality and speed of delivery. Many thanks for your help.
Carl, UK.
I wanted to let you know how happy we are with our framed pieces of Shree Durga and Shree Kali. Thank you and thank your framers for us. By the way, this month we offered a Puja and Yagna to the Ardhanarishwara murti we purchased from you last November. The Brahmin priest, Shree Vivek Godbol, who was visiting LA preformed the rites. He really loved our murti and thought it very paka. I am so happy to have found your site , it is very paka and trustworthy. Plus such great packing and quick shipping. Thanks for your service Vipin, it is a pleasure.
Gina, USA
My marble statue of Durga arrived today in perfect condition, it's such a beautiful statue. Thanks again for giving me a discount on it, I'm always very pleased with the items I order from you. You always have the best quality items.
Charles, Tennessee
TRUSTe
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2017 © Exotic India