Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
Share
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Your Cart (0)
Books > History > सावित्रीबाई फुले (क्रांतिज्योति ): Savitribai Phule (The Flame of Revolution)
Displaying 856 of 4780         Previous  |  NextSubscribe to our newsletter and discounts
सावित्रीबाई फुले (क्रांतिज्योति ): Savitribai Phule (The Flame of Revolution)
Pages from the book
सावित्रीबाई फुले (क्रांतिज्योति ): Savitribai Phule (The Flame of Revolution)
Look Inside the Book
Description

आमुख

उन्नीसवीं सदी में भारतीय सामाजिक जीवन दुर्गति की चक्की में पिसता जा रहा था। सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से मानवीय विपन्नावस्था के गर्त में पहुंच चुक था। वह रूढ़ परंपराओं की श्रृंखलाओं से आबद्ध था । इस विपन्नावस्था का अपने स्वार्थ के लिए लाभ उठाकर भट्ट भिक्षुक धर्म का हवाला देकर दीन-हीन रूढ़िबद्ध समाज का शोषण करने में निमग्न थे। फलस्वरूप पूरा समाज ही शोषण, अन्याय और अत्याचार के बोझ से दबकर निष्क्रिय हो गया था। अन्याय एवं अत्याचार सहने का आदी समाज अपने अधिकारों को ही भूल चुका था, सिर्फ सहते रहना और भाग्य को कोसते रहना ही वह जानता था । अत: मनुष्य अपना मनुष्यत्व ही खो चुका था।

कीचड़ से जिस प्रकार कमल विकसित होता है उसी प्रकार इस सामाजिक पार्श्वभूमि पर सत्य, समता और मानवता के दर्शन की जलती मशाल के साथ महाराष्ट्र में महात्मा ज्योतिबा फुले का उदय हुआ। सामाजिक दुर्गति ने ही उन्हें समाज सेवा की ओर आकृष्ट किया। निद्रित समाज में नई हुंकार भरकर मानव को मानव बनकर जीने का अधिकार दिलाने के लिए ही महात्मा फुले ने पुणे में अछूतों एवं लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोलकर क्रांति की घोषणा की। उन्होंने बालहत्या प्रतिबंधक गृह की स्थापना की, सती-प्रथा, बाल-विवाह का समर्थन किया। उस काल में महात्मा ज्योतिबा फुले का कार्य सभी लोगों को एक चमत्कार सा लगा।

अनेक समस्याओं, विरोधों और यहां तक कि हत्या की धमकी कीपरवाह न करते हुए महात्मा फुले अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहे । अथक परिश्रम एवं लगन के कारण सफलता उनके कदम चूमने लगी । उनके इस ऐतिहासिक कार्य में उनकी पत्नी सावित्रीबाई का महत्त्वपूर्ण योगदान है । लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि इस युग-नारी के बारे में नई पीढ़ी को इससे अधिक जानकारी नहीं है कि वह ज्योतिबा फुले की पत्नी थीं और उन्होंने अध्यापन कार्य किया।

जब मैंने एक शोधकर्त्ता की हैसियत से इस यथार्थ की ओर देखा और सावित्रीबाई के संदर्भ में सही जानकारी प्राप्त करने हेतु लगातार दो साल तक पूरे महाराष्ट्र का भ्रमण किया तथा अनेक बुजुर्ग लोगों से साक्षात्कार हुए, तब पता चला कि सावित्रीबाई केवल ज्योतिबा की धर्मपत्नी एवं एक शिक्षिका ही नहीं थीं, बल्कि उनका व्यक्तित्व एवं कार्य भी मौलिक रूप से महात्मा ज्योतिबा फुले की तरह की हिमालय सदृश ऊंचा था। इस शोध ने मुझे प्रोत्साहित किया और 10 मार्च) 1980 को ग्रंथ रूप में सावित्रीबाई फुले का जीवन-कार्य मराठी पाठकों के सम्मुख रखकर उन्हें एक ममतामयी, त्यागमयी, आदर्श नारी रत्न से परिचित कराने का प्रयास किया, जिसमें मुझे सफलता मिली। सावित्रीबाई के संदर्भ में अपने पास जो भी जानकारी पत्र-पत्रिकाएं एवं साहित्य था, वह मेरे हवाले करते हुए सावित्रीबाई के प्रति असीम श्रद्धा तथा मुझ जैसे एक शोधकर्ता के प्रति उदारता का प्रदर्शन करने वाले माननीय दादासाहेब झोडगे तथा उनकी हर्ग्मपत्नी श्रीमती फुलवंताबाई झोडगे का मैं हृदय में आभारी हूं। सावित्रीबाई फुले था जीवन के कार्य को अनजान कुहासे ये बहार निकालकर मैंने पाठकों के सम्मुख रखा। महाराष्ट्र शासन की ओर से उसे पुरस्कृत भी किया गया और साथ ही साथ अन्य भाषा-भाषी राज्यों से भी सावित्रीबाई फुले के चरित्र-ग्रंथ की मांग बढ़ गई । जब मैंने भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय से संपर्क स्थापित किया तो सावित्रीबाई फुले के महान क्रांतिकार्य से सुपरिचित भूतपूर्व सूचना और प्रसारण मंत्री मानवीय, वसंत साठे जी ने उदारता साथ हिंदी मेंसावित्रीबाई फुले का चरित्र प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित करने की अनुमति दी । माननीय साठे जी का आभार व्यक्त करने के लिए मेरे शब्द नहीं है, बस मैं इतना ही कहूंगा कि मैं उनका ऋणी हूं ।

भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय एवं प्रकाशन विभाग के अधिकारियों ने इस ग्रंथ के प्रकाशन कार्य में जो योगदान दिया है, उन सबका मैं हृदय से आभारी हूं।

अंतत: उन दो व्यक्तियों के प्रति मैं अपना विनम्र आभार प्रकट करना चाहता हूं जिन्होंने सावित्रीबाई के चरित्र को हिंदी में शब्दांकित करके हिंदी पाठकों के सम्मुख रखने की योजना को साकार बनाने में सहायता दी । वे हैं- सावित्रीबाई फुले के जीवनकार्य से अवगत मेरे मित्र तथा उदयोम्मुख हिंदी लेखक प्रो. डॉ आनंद वास्कर और उनकी पत्नी डॉ. पुष्पा वास्कर।

इस ग्रंथ प्रकाशन के लिए सहायक ज्ञात-अज्ञात सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रस्तुत ग्रंथ हिंदी पाठकों के सम्मुख रखकर मैं खुशी अनुभव कर रहा हूं।

 

  विषय-सूची  
1 जन्म एवं बचपन 1
2 विवाह 6
3 तत्कालीन स्त्री-समाज 10
4 अध्ययन और अध्यापन 18
5 उपेक्षितों की शिक्षा की नींव 23
6 प्रेरणा के स्रोत 29
7 सामाजिक जीवन 33
8 नारी-मुक्ति आदोलन की प्रथम नेता 41
9 साहित्य सृजन 45
10 जीवन के कुछ प्रसंग 47
11 महानिर्वाण 51

Sample Pages









सावित्रीबाई फुले (क्रांतिज्योति ): Savitribai Phule (The Flame of Revolution)

Item Code:
NZD007
Cover:
Paperback
Edition:
2011
Publisher:
Publications Division, Government of India
ISBN:
9788123017198
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
87 (9 B/W Illustrations)
Other Details:
Weight of the Book: 110 gms
Price:
$10.00   Shipping Free
Look Inside the Book
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
सावित्रीबाई फुले (क्रांतिज्योति ): Savitribai Phule (The Flame of Revolution)

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 47568 times since 19th Apr, 2016

आमुख

उन्नीसवीं सदी में भारतीय सामाजिक जीवन दुर्गति की चक्की में पिसता जा रहा था। सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से मानवीय विपन्नावस्था के गर्त में पहुंच चुक था। वह रूढ़ परंपराओं की श्रृंखलाओं से आबद्ध था । इस विपन्नावस्था का अपने स्वार्थ के लिए लाभ उठाकर भट्ट भिक्षुक धर्म का हवाला देकर दीन-हीन रूढ़िबद्ध समाज का शोषण करने में निमग्न थे। फलस्वरूप पूरा समाज ही शोषण, अन्याय और अत्याचार के बोझ से दबकर निष्क्रिय हो गया था। अन्याय एवं अत्याचार सहने का आदी समाज अपने अधिकारों को ही भूल चुका था, सिर्फ सहते रहना और भाग्य को कोसते रहना ही वह जानता था । अत: मनुष्य अपना मनुष्यत्व ही खो चुका था।

कीचड़ से जिस प्रकार कमल विकसित होता है उसी प्रकार इस सामाजिक पार्श्वभूमि पर सत्य, समता और मानवता के दर्शन की जलती मशाल के साथ महाराष्ट्र में महात्मा ज्योतिबा फुले का उदय हुआ। सामाजिक दुर्गति ने ही उन्हें समाज सेवा की ओर आकृष्ट किया। निद्रित समाज में नई हुंकार भरकर मानव को मानव बनकर जीने का अधिकार दिलाने के लिए ही महात्मा फुले ने पुणे में अछूतों एवं लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोलकर क्रांति की घोषणा की। उन्होंने बालहत्या प्रतिबंधक गृह की स्थापना की, सती-प्रथा, बाल-विवाह का समर्थन किया। उस काल में महात्मा ज्योतिबा फुले का कार्य सभी लोगों को एक चमत्कार सा लगा।

अनेक समस्याओं, विरोधों और यहां तक कि हत्या की धमकी कीपरवाह न करते हुए महात्मा फुले अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहे । अथक परिश्रम एवं लगन के कारण सफलता उनके कदम चूमने लगी । उनके इस ऐतिहासिक कार्य में उनकी पत्नी सावित्रीबाई का महत्त्वपूर्ण योगदान है । लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि इस युग-नारी के बारे में नई पीढ़ी को इससे अधिक जानकारी नहीं है कि वह ज्योतिबा फुले की पत्नी थीं और उन्होंने अध्यापन कार्य किया।

जब मैंने एक शोधकर्त्ता की हैसियत से इस यथार्थ की ओर देखा और सावित्रीबाई के संदर्भ में सही जानकारी प्राप्त करने हेतु लगातार दो साल तक पूरे महाराष्ट्र का भ्रमण किया तथा अनेक बुजुर्ग लोगों से साक्षात्कार हुए, तब पता चला कि सावित्रीबाई केवल ज्योतिबा की धर्मपत्नी एवं एक शिक्षिका ही नहीं थीं, बल्कि उनका व्यक्तित्व एवं कार्य भी मौलिक रूप से महात्मा ज्योतिबा फुले की तरह की हिमालय सदृश ऊंचा था। इस शोध ने मुझे प्रोत्साहित किया और 10 मार्च) 1980 को ग्रंथ रूप में सावित्रीबाई फुले का जीवन-कार्य मराठी पाठकों के सम्मुख रखकर उन्हें एक ममतामयी, त्यागमयी, आदर्श नारी रत्न से परिचित कराने का प्रयास किया, जिसमें मुझे सफलता मिली। सावित्रीबाई के संदर्भ में अपने पास जो भी जानकारी पत्र-पत्रिकाएं एवं साहित्य था, वह मेरे हवाले करते हुए सावित्रीबाई के प्रति असीम श्रद्धा तथा मुझ जैसे एक शोधकर्ता के प्रति उदारता का प्रदर्शन करने वाले माननीय दादासाहेब झोडगे तथा उनकी हर्ग्मपत्नी श्रीमती फुलवंताबाई झोडगे का मैं हृदय में आभारी हूं। सावित्रीबाई फुले था जीवन के कार्य को अनजान कुहासे ये बहार निकालकर मैंने पाठकों के सम्मुख रखा। महाराष्ट्र शासन की ओर से उसे पुरस्कृत भी किया गया और साथ ही साथ अन्य भाषा-भाषी राज्यों से भी सावित्रीबाई फुले के चरित्र-ग्रंथ की मांग बढ़ गई । जब मैंने भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय से संपर्क स्थापित किया तो सावित्रीबाई फुले के महान क्रांतिकार्य से सुपरिचित भूतपूर्व सूचना और प्रसारण मंत्री मानवीय, वसंत साठे जी ने उदारता साथ हिंदी मेंसावित्रीबाई फुले का चरित्र प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित करने की अनुमति दी । माननीय साठे जी का आभार व्यक्त करने के लिए मेरे शब्द नहीं है, बस मैं इतना ही कहूंगा कि मैं उनका ऋणी हूं ।

भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय एवं प्रकाशन विभाग के अधिकारियों ने इस ग्रंथ के प्रकाशन कार्य में जो योगदान दिया है, उन सबका मैं हृदय से आभारी हूं।

अंतत: उन दो व्यक्तियों के प्रति मैं अपना विनम्र आभार प्रकट करना चाहता हूं जिन्होंने सावित्रीबाई के चरित्र को हिंदी में शब्दांकित करके हिंदी पाठकों के सम्मुख रखने की योजना को साकार बनाने में सहायता दी । वे हैं- सावित्रीबाई फुले के जीवनकार्य से अवगत मेरे मित्र तथा उदयोम्मुख हिंदी लेखक प्रो. डॉ आनंद वास्कर और उनकी पत्नी डॉ. पुष्पा वास्कर।

इस ग्रंथ प्रकाशन के लिए सहायक ज्ञात-अज्ञात सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रस्तुत ग्रंथ हिंदी पाठकों के सम्मुख रखकर मैं खुशी अनुभव कर रहा हूं।

 

  विषय-सूची  
1 जन्म एवं बचपन 1
2 विवाह 6
3 तत्कालीन स्त्री-समाज 10
4 अध्ययन और अध्यापन 18
5 उपेक्षितों की शिक्षा की नींव 23
6 प्रेरणा के स्रोत 29
7 सामाजिक जीवन 33
8 नारी-मुक्ति आदोलन की प्रथम नेता 41
9 साहित्य सृजन 45
10 जीवन के कुछ प्रसंग 47
11 महानिर्वाण 51

Sample Pages









Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Related Items

The World of Ideas in Modern Marathi (Phule, Vinoba, Savarkar)
by G.P. Deshpande
Paperback (Edition: 2009)
Tulika Books
Item Code: NAF888
$15.00
Add to Cart
Buy Now
Jyotiba Phule (A Modern Indian Philosopher)
by Archana Malik-Goure
Paperback (Edition: 2013)
Suryodaya Books
Item Code: NAF080
$20.00
Add to Cart
Buy Now
Poisoned Bread (Modern Marathi Dalit Literature)
by Arjun Dangle
Paperback (Edition: 2009)
Orient Black Swan
Item Code: NAF979
$37.50
Add to Cart
Buy Now
Bringing Modernity Home (Marathi Literary Theory in The Nineteenth Century)
by Prachi Gurjarpadhye
Hardcover (Edition: 2014)
Indian Institute of Advanced study
Item Code: NAK451
$38.00
Add to Cart
Buy Now
Crossing Thresholds (Feminist Essays in Social History)
by Meera Kosambi
Paperback (Edition: 2011)
Permanent Black
Item Code: NAJ004
$25.00
Add to Cart
Buy Now
Survival and Other Stories (Bangla Dalit Fiction in Translation)
by Sankar Prasad Singha and Indranil Acharya
Paperback (Edition: 2012)
Orient Blackswan Pvt. Ltd.
Item Code: NAH293
$25.00
Add to Cart
Buy Now
Writing caste/ Writing Gender (Narrating Dalit Women;s Testimonios)
by Sharmila Rege
Paperback (Edition: 2013)
Zubaan Publications
Item Code: NAF932
$28.00
Add to Cart
Buy Now
A History Of The Jana Natya Manch (Plays For The People)
by Arjun Ghosh
Hardcover (Edition: 2012)
Sage Publications India Pvt. Ltd.
Item Code: NAG346
$49.00
Add to Cart
Buy Now
Ram Manohar Lohia
by Desh Raj Goyal
Paperback (Edition: 2010)
National Book Trust, India
Item Code: NAE555
$12.50
Add to Cart
Buy Now
A Tale of Two Revolts: India 1857 and the American Civil War
by Rajmohan Gandhi
Hardcover (Edition: 2009)
Penguin Viking
Item Code: IHL457
$40.00
Add to Cart
Buy Now
Social Thinkers  of Modern India (Contemporaries of Swami Vivekananda)
Paperback (Edition: 2014)
National Council of Educational Research and Training
Item Code: NAM843
$10.00
Add to Cart
Buy Now
The Songs of Tukoba
by Gail Omvedt and Bharat Patankar
Hardcover (Edition: 2012)
Manohar Publishers and Distributors
Item Code: NAF743
$30.00
Add to Cart
Buy Now
Women Pioneers In India's Renaissance
by Ed. By. Sushila Nayar & Kamla Mankekar
Paperback (Edition: 2003)
National Book Trust, India
Item Code: IDD677
$29.00
Add to Cart
Buy Now
100 Great Indian Lives
by H. D. Sharma
Paperback (Edition: 2007)
Rupa Publication Pvt. Ltd.
Item Code: IDJ903
$30.00
Add to Cart
Buy Now

Testimonials

I recieved my Mahavir pendant today. It is wonderful. I was recently in Delhi and as it was a spiritual trip visiting Jain temples in Rajasthan, Agra, Rishikesh and Delhi i did not have the opportunity to shop much. The pendant is beautiful and i shall treasure it. I have attached a picture of me in India. Your country and the people will always be in my heart.
Evelyn, Desoto, Texas.
I received my Order this week, It's wonderful. I really thank you very much.
Antonio Freitas, Sao Paulo, Brazil.
I have been ordering from your site for several years and am always pleased with my orders and the time frame is lovely also. Thanks for being such a wonderful company.
Delia, USA
I recviced Book Air Parcel(Nadi-Astrology). I am glad to see this book. Thankx. Muhammad Arshad Nadeem Pakistan.
Muhammad Arshad Nadeem
It is always a great pleasure to return to Exotic India with its exquisit artwork, books and other items. As I said several times before, Exotic India is far more than a highly professional Indian online shop; it is in fact an excellent ambassador to the world for the splendour of Indian wisdom and spirituality. I wish a happy and successful New Year 2017 to Exotic India and its employees! You can be very proud of yourself!
Dr Michael Seeber (psychiatrist and psychotherapist, Essen/Germany)
My last order arrived in a reasonable amount of time, regarding the long way it had to take! I am glad to find this and some other ayurvedic remedy, as well as books and much other things at your online-store and I am looking forward to be your customer again, some time.
Andreas, Germany.
Намаскар! Честно говоря, сомневался. Но сегодня получил свой заказ. Порадовала упаковка, упаковано всё очень тщательно и аккуратно. Большое спасибо, как раз подарок к Новому Году! Namaskar! Frankly, I doubted. But today received my order. We were pleased with the packaging. Everything is packed carefully and accurately. Thank you very much, just a gift for the New Year!
Ruslan, Russia.
Thanks for the great sale!! It really helped me out. I love Exotic India.
Shannon, USA
I have got the 3 parcels with my order today and everything is perfect. Thank you very much for such a good packaging to protect the items and for your service.
Guadalupe, Spain
Great books! I am so glad you make them available to order, thank you!
Yevgen, USA
TRUSTe online privacy certification
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2017 © Exotic India