Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Your Cart (0)
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindi > प्रवृत्ति एवं निवृत्ति: The Trend and Quietism
Displaying 7849 of 11131         Previous  |  NextSubscribe to our newsletter and discounts
प्रवृत्ति एवं निवृत्ति: The Trend and Quietism
प्रवृत्ति एवं निवृत्ति: The Trend and Quietism
Description

पुस्तक के विषय में

स्वामी निरंजनानन्द का जन्म छत्तीसगढ़ के राजनाँदगाँव मे 1960 में हुआ चार वर्ष की अवस्था में बिहार योग विद्यालय आये तथा दस वर्ष की अवस्था में संन्यास परम्परा में दीक्षित हुए। आश्रमों एवं योग केन्द्रों का विकास करने के लिए उन्होंने 1971 से ग्यारह वर्षों तक अनेक देशों की यात्राएँ कीं। 1983 में उन्हें भारत वापस बुलाकर बिहार योग विद्यालय का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। अगले ग्यारह वर्षों तक उन्होंने गंगादर्शन, शिवानन्द मठ तथा योग शोध संस्थान के विकास-कार्य को दिशा दी 1990 में वे परमहंस-परम्परा में दीक्षित हुए और 1993 में परमहंस सत्यानन्द के उत्तराधिकारी के रूप में उनका अभिषेक किया गया। 1993 में ही उन्होंने अपने गुरु के संन्यास की स्वर्ण-जयन्ती के उपलक्ष्य में एक विश्व योग सम्मेलन का आयोजन किया। 1994 में उनके मार्गदर्शन में योग-विज्ञान के उच्च अध्ययन के संस्थान) बिहार योग भारती की स्थापना हुई

'एक यात्री था जो अनन्त काल से यात्रा करता रहा था उसकी यात्रा का उद्देश्य अपने नगर पहुँचना था पर वह नगर कत दूर था। यात्री धीरे- धीरे अपने पगों को अपने गन्तव्य की ओर बढ़ाते चलता था। नगर का नाम था ब्रह्मपुरी और यात्री का नाम था श्रीमान् आत्माराम सन् 2009 से स्वामी निरंजनानन्द सरस्वती के जीवन का एक नया अध्याय प्रारम्भ हुआ है और मुंगेर में योगदृष्टि सत्संग श्रृंखला के अन्तर्गत योग के विभिन्न पक्षों पर दिये गये प्रबोधक व्याख्यान स्वामीजी की इसी नयी जीवनशैली के अंग हैं।

हिमालय पर्वतों के सुरम्य, एकान्तमय वातावरण में गहन चिंतन करने के बाद स्वामीजी ने गंगा दर्शन लौटकर जून 2010 की योगदृष्टि सत्संग श्रृंखला में प्रवृत्ति एवं निवृत्ति-मार्ग को अपने सत्संगों का विषय चुना उनके विवेचन की शुरुआत एक प्रतीकात्मक कथा से होती है जिसका मुख्य नायक, आत्माराम, अपने गन्तव्य, ब्रह्मपुरी की ओर यात्रा कर रहा है इस कथा को आधार बनाकर स्वामीजी ने बहुत सुन्दर ढंग से प्रवृत्ति तथा निवृत्ति मार्ग के मुख्य लक्षणों, साधनाओं और लक्ष्यों का निरूपण किया है सांसारिक जीवन जीते हुए भी किस प्रकार सुख, सामंजस्य और संतुष्टि का अनुभव किया जा सकता है; जीवन के किस मोड़ पर साधक वास्तविक रूप से आध्यात्मिक मार्ग पर आता है; और साधक की इस यात्रा में मार्गदर्शक की क्या भूमिका होती है-आध्यात्मिक जीवन से सम्बन्धित इन सभी आधारभूत प्रश्नों का उत्तर इन सत्संगों में निहित है

 

विषय-सूची

 

1

एक यात्री की कहानी

1

2

प्रवृत्ति-मार्ग

14

3

प्रवृत्ति का प्रबन्धन, निवृत्ति का अन्वेषण

34

4

गुरु का मार्गदर्शन

50

प्रवृत्ति एवं निवृत्ति: The Trend and Quietism

Item Code:
NZA754
Cover:
Paperback
Edition:
2012
ISBN:
9789381620106
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
77 (22 Color Illustrations)
Other Details:
Weight of the Book: 120 gms
Price:
$12.50   Shipping Free
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
प्रवृत्ति एवं निवृत्ति: The Trend and Quietism

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 1698 times since 29th Nov, 2014

पुस्तक के विषय में

स्वामी निरंजनानन्द का जन्म छत्तीसगढ़ के राजनाँदगाँव मे 1960 में हुआ चार वर्ष की अवस्था में बिहार योग विद्यालय आये तथा दस वर्ष की अवस्था में संन्यास परम्परा में दीक्षित हुए। आश्रमों एवं योग केन्द्रों का विकास करने के लिए उन्होंने 1971 से ग्यारह वर्षों तक अनेक देशों की यात्राएँ कीं। 1983 में उन्हें भारत वापस बुलाकर बिहार योग विद्यालय का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। अगले ग्यारह वर्षों तक उन्होंने गंगादर्शन, शिवानन्द मठ तथा योग शोध संस्थान के विकास-कार्य को दिशा दी 1990 में वे परमहंस-परम्परा में दीक्षित हुए और 1993 में परमहंस सत्यानन्द के उत्तराधिकारी के रूप में उनका अभिषेक किया गया। 1993 में ही उन्होंने अपने गुरु के संन्यास की स्वर्ण-जयन्ती के उपलक्ष्य में एक विश्व योग सम्मेलन का आयोजन किया। 1994 में उनके मार्गदर्शन में योग-विज्ञान के उच्च अध्ययन के संस्थान) बिहार योग भारती की स्थापना हुई

'एक यात्री था जो अनन्त काल से यात्रा करता रहा था उसकी यात्रा का उद्देश्य अपने नगर पहुँचना था पर वह नगर कत दूर था। यात्री धीरे- धीरे अपने पगों को अपने गन्तव्य की ओर बढ़ाते चलता था। नगर का नाम था ब्रह्मपुरी और यात्री का नाम था श्रीमान् आत्माराम सन् 2009 से स्वामी निरंजनानन्द सरस्वती के जीवन का एक नया अध्याय प्रारम्भ हुआ है और मुंगेर में योगदृष्टि सत्संग श्रृंखला के अन्तर्गत योग के विभिन्न पक्षों पर दिये गये प्रबोधक व्याख्यान स्वामीजी की इसी नयी जीवनशैली के अंग हैं।

हिमालय पर्वतों के सुरम्य, एकान्तमय वातावरण में गहन चिंतन करने के बाद स्वामीजी ने गंगा दर्शन लौटकर जून 2010 की योगदृष्टि सत्संग श्रृंखला में प्रवृत्ति एवं निवृत्ति-मार्ग को अपने सत्संगों का विषय चुना उनके विवेचन की शुरुआत एक प्रतीकात्मक कथा से होती है जिसका मुख्य नायक, आत्माराम, अपने गन्तव्य, ब्रह्मपुरी की ओर यात्रा कर रहा है इस कथा को आधार बनाकर स्वामीजी ने बहुत सुन्दर ढंग से प्रवृत्ति तथा निवृत्ति मार्ग के मुख्य लक्षणों, साधनाओं और लक्ष्यों का निरूपण किया है सांसारिक जीवन जीते हुए भी किस प्रकार सुख, सामंजस्य और संतुष्टि का अनुभव किया जा सकता है; जीवन के किस मोड़ पर साधक वास्तविक रूप से आध्यात्मिक मार्ग पर आता है; और साधक की इस यात्रा में मार्गदर्शक की क्या भूमिका होती है-आध्यात्मिक जीवन से सम्बन्धित इन सभी आधारभूत प्रश्नों का उत्तर इन सत्संगों में निहित है

 

विषय-सूची

 

1

एक यात्री की कहानी

1

2

प्रवृत्ति-मार्ग

14

3

प्रवृत्ति का प्रबन्धन, निवृत्ति का अन्वेषण

34

4

गुरु का मार्गदर्शन

50

Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Related Items

Prana and Pranayama
Item Code: IHL188
$45.00
Add to Cart
Buy Now
Mind, Mind Management and Raja Yoga
Item Code: NAC973
$22.50
Add to Cart
Buy Now
The Yoga of Sage Vasishtha
Item Code: NAF259
$15.00
Add to Cart
Buy Now
Head, Heart and Hands
Item Code: NAC972
$11.50
Add to Cart
Buy Now
On The Wings of The Swan (Set of 4 Volumes)
Item Code: NAF018
$60.00
Add to Cart
Buy Now
The Yoga of Sri Krishna
Item Code: NAF230
$20.00
Add to Cart
Buy Now
Mantra and Yantra
Item Code: NAF450
$20.00
Add to Cart
Buy Now
Yoga Darshan: Vision of the Yoga Upanishads
Item Code: IDE239
$36.50
Add to Cart
Buy Now
Yoga Education for Children (Volume Two )
by Swami Niranjanananda
Paperback (Edition: 2012)
Yoga Publications Trust
Item Code: IDE259
$32.50
Add to Cart
Buy Now
Samkhya Darshan (Yogic Perspective on Theories of Realism)
Item Code: IHL187
$20.00
Add to Cart
Buy Now
The Paths of Pravritti and Nivritti
Item Code: NAC974
$12.50
Add to Cart
Buy Now
Yoga Sadhana Panorama (Volume Five)
Item Code: NAE499
$32.50
Add to Cart
Buy Now

Testimonials

Today Lord SIVA arrived well in Munich. Thank you for the save packing. Everything fine. Hari Om
Hermann, Munchen
Thank you very much for keeping such an exotic collection of Books. Keep going strong Exotic India!!!
Shweta, Germany
I am very thankful to you for keeping such rare and quality books, DVDs, and CDs of classical music and even Dhrupad which is almost unbelievable. I hope you continue to be this good in your helpfulness. I have found books about rare cultural heritage such as Kodava samaj, Dhrupad and other DVDs and CDs in addition to the beautiful sarees I have from your business, actually business is not the right word, but for lack of a word I am using this.
Prashanti, USA
Shiva Shankar brass statue arrived yesterday. It´s very perfect and beautiful and it was very carefully packed. THANK YOU!!! OM NAMAH SHIVAYA
Mª Rosário Costa, Portugal
I have purchased many books from your company. Your packaging is excellent, service is great and attention is prompt. Please maintain this quality for this order also!
Raghavan, USA
My order arrived today with plenty of time to spare. Everything is gorgeous, packing excellent.
Vana, Australia
I was pleased to chance upon your site last year though the name threw me at first! I have ordered several books on Indian theatre and performance, which I haven't found elsewhere (including Amazon) or were unbelievably exorbitantly priced first editions etc. I appreciate how well you pack the books in your distinctive protective packaging for international and domestic mailing (for I order books for India delivery as well) and the speed with which my order is delivered, well within the indicated time. Good work!
Chitra, United Kingdom
The statue has arrived today. It so beautiful, lots of details. I am very happy and will order from you shop again.
Ekaterina, Canada.
I love your company and have been buying a variety of wonderful items from you for many years! Keep up the good work!
Phyllis, USA
The Lakshmi statue arrived today and it is beautiful. Thank you so much for all of your help. I am thrilled and she is an amazing statue for my living room.
Susanna, West Hollywood, CA.
TRUSTe
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2017 © Exotic India