Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Your Cart (0)
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindi > व्योमकेश दरवेश (आचार्य हज़ारी प्रसाद द्विवेदी का पुण्या स्मरण) - Vyomkesh Darvesh (Biography of Hazari Prasad Dwivedi)
Displaying 11218 of 11271         Previous  |  NextSubscribe to our newsletter and discounts
व्योमकेश दरवेश (आचार्य हज़ारी प्रसाद द्विवेदी का पुण्या स्मरण) - Vyomkesh Darvesh (Biography of Hazari Prasad Dwivedi)
व्योमकेश दरवेश (आचार्य हज़ारी प्रसाद द्विवेदी का पुण्या स्मरण) - Vyomkesh Darvesh (Biography of Hazari Prasad Dwivedi)
Description

लेखक परिचय

 

आकाशधर्मा गुरु आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी अपने जीवन काल में ही मिथक पुरुष बन गए थे। हिन्दी में 'आकाशधर्मा और 'मिथक' इन दोनों शब्दों के प्रयोग का प्रवर्तन उन्होंने ही किया था।

उनका रचित साहित्य विविध एवं विपुल है। उनके शिष्य देश विदेश में बिखरे हैं। लगभग साठ वर्षेां तक उन्होंने सरस्वती की अनवरत साधना की। उन्होंने हिन्दी साहित्य के इतिहास का नया दिक्काल एवं प्राचीन भारत का आत्मीय सांस्कृतिक पर्यावरण रचा। हिन्दी की जातीय संस्कृति के मूल्यों की खोज की, उन्हें अखिल भारतीय एवं मानवीय मूल्यों के सन्दर्भ में परिभाषित किया। परम्परा और आधुनिकता की पहचान कराई। सहज के सौन्दर्य को प्रतिष्ठित किया। वे उन दुर्लभ विद्यवान सर्जकों की परम्परा में हैं जिसके प्रतिमान तुलसीदास हैं और जिसमें पं. चन्द्रधर शर्मा गुलेरी स्मरणीय हैं।

उनका जीवन संघर्ष विस्थापित होत रहने का संघर्ष है। उनकी जीवन यात्रा के बारे में लिखना जितना जरूरी है उससे ज्यादा मुश्किल। इस पुस्तक के लेखक को दो दशकों से भी अधिक समय तक उनका सान्निय और शिष्यत्व प्राप्त होने का सौभाग्य मिला। इसलिए पुस्तक को संस्मरणात्मक भी हो जाना पड़ा है। प्रयास किया है कि प्रसंगों और स्थितियों को यथासम्भव प्रामाणिक स्त्रोतों से ही ग्रहण किया जाए। आदरणीयों के प्रति आदर में कमी न आने पावे। काशी की तत्कालीन साहित्य मंडली, लेखक की मित्र अनायास पुस्तक में आ गई है।

 

अनुक्रम

भूमिका

9 से 28

नाम रूप पंडितजी के गाँव में, पुण्य स्मरण यह किताब

बचपन, बसरिकापुर और काशी

अथेयं विश्वभारती

शान्तिनिकेतन का प्रभाव

हिन्दी भवन

विश्वभारती पत्रिका

शान्तिनिकेतन का जीवन

मातृ संस्था का निमंत्रण: मन का बन्धन

काशी विश्वविद्यालय:देखी तुम्हरी कासी

133 से 236

अध्यापक मंडल

सतीर्थ मंडल

'संदेश रासक' प्रकरण

बना रहे बनारस

हिन्दी विभागाध्यक्ष: आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी

काशी नागरी प्रचारिणी सभा

साहित्य अकादमी

द्विवेदी जी परिवार में

आकाशधर्मा का विस्थापन

237 से 254

गाढ़े का साथी:पंजाब

255 से 282

काशी विश्वविद्यालय का एक और निमंत्रण

फिर बैतलवा उसी डार पर

283 से 318

हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, उत्तर प्रदेश

व्योमकेश दरवेश चलो अब

319 से 344

सूर्य अस्त हो गया!

हजारीप्रसाद द्विवेदी का निधन

हजारीप्रसाद द्विवेदी की आत्म स्वीकृतियाँ

रचना और रचनाकार

345 से 464

रजनी दिन नित्य चला ही किया

ज्ञान की सर्जना

परम्परा एवं आधुनिकता

'मैं हूँ स्वयं निज प्रतिवाद'

इतिहास राजनीति

भारतीय सामूहिक चित्त का निर्णय

 

 

 

व्योमकेश दरवेश (आचार्य हज़ारी प्रसाद द्विवेदी का पुण्या स्मरण) - Vyomkesh Darvesh (Biography of Hazari Prasad Dwivedi)

Item Code:
HAA144
Cover:
Paperback
Edition:
2012
ISBN:
9788126722020
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
464
Other Details:
Weight of the Book:
Price:
$20.00
Discounted:
$16.00   Shipping Free
You Save:
$4.00 (20%)
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
व्योमकेश दरवेश (आचार्य हज़ारी प्रसाद द्विवेदी का पुण्या स्मरण) - Vyomkesh Darvesh (Biography of Hazari Prasad Dwivedi)

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 5165 times since 8th Feb, 2013

लेखक परिचय

 

आकाशधर्मा गुरु आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी अपने जीवन काल में ही मिथक पुरुष बन गए थे। हिन्दी में 'आकाशधर्मा और 'मिथक' इन दोनों शब्दों के प्रयोग का प्रवर्तन उन्होंने ही किया था।

उनका रचित साहित्य विविध एवं विपुल है। उनके शिष्य देश विदेश में बिखरे हैं। लगभग साठ वर्षेां तक उन्होंने सरस्वती की अनवरत साधना की। उन्होंने हिन्दी साहित्य के इतिहास का नया दिक्काल एवं प्राचीन भारत का आत्मीय सांस्कृतिक पर्यावरण रचा। हिन्दी की जातीय संस्कृति के मूल्यों की खोज की, उन्हें अखिल भारतीय एवं मानवीय मूल्यों के सन्दर्भ में परिभाषित किया। परम्परा और आधुनिकता की पहचान कराई। सहज के सौन्दर्य को प्रतिष्ठित किया। वे उन दुर्लभ विद्यवान सर्जकों की परम्परा में हैं जिसके प्रतिमान तुलसीदास हैं और जिसमें पं. चन्द्रधर शर्मा गुलेरी स्मरणीय हैं।

उनका जीवन संघर्ष विस्थापित होत रहने का संघर्ष है। उनकी जीवन यात्रा के बारे में लिखना जितना जरूरी है उससे ज्यादा मुश्किल। इस पुस्तक के लेखक को दो दशकों से भी अधिक समय तक उनका सान्निय और शिष्यत्व प्राप्त होने का सौभाग्य मिला। इसलिए पुस्तक को संस्मरणात्मक भी हो जाना पड़ा है। प्रयास किया है कि प्रसंगों और स्थितियों को यथासम्भव प्रामाणिक स्त्रोतों से ही ग्रहण किया जाए। आदरणीयों के प्रति आदर में कमी न आने पावे। काशी की तत्कालीन साहित्य मंडली, लेखक की मित्र अनायास पुस्तक में आ गई है।

 

अनुक्रम

भूमिका

9 से 28

नाम रूप पंडितजी के गाँव में, पुण्य स्मरण यह किताब

बचपन, बसरिकापुर और काशी

अथेयं विश्वभारती

शान्तिनिकेतन का प्रभाव

हिन्दी भवन

विश्वभारती पत्रिका

शान्तिनिकेतन का जीवन

मातृ संस्था का निमंत्रण: मन का बन्धन

काशी विश्वविद्यालय:देखी तुम्हरी कासी

133 से 236

अध्यापक मंडल

सतीर्थ मंडल

'संदेश रासक' प्रकरण

बना रहे बनारस

हिन्दी विभागाध्यक्ष: आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी

काशी नागरी प्रचारिणी सभा

साहित्य अकादमी

द्विवेदी जी परिवार में

आकाशधर्मा का विस्थापन

237 से 254

गाढ़े का साथी:पंजाब

255 से 282

काशी विश्वविद्यालय का एक और निमंत्रण

फिर बैतलवा उसी डार पर

283 से 318

हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, उत्तर प्रदेश

व्योमकेश दरवेश चलो अब

319 से 344

सूर्य अस्त हो गया!

हजारीप्रसाद द्विवेदी का निधन

हजारीप्रसाद द्विवेदी की आत्म स्वीकृतियाँ

रचना और रचनाकार

345 से 464

रजनी दिन नित्य चला ही किया

ज्ञान की सर्जना

परम्परा एवं आधुनिकता

'मैं हूँ स्वयं निज प्रतिवाद'

इतिहास राजनीति

भारतीय सामूहिक चित्त का निर्णय

 

 

 

Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Related Items

Couplets from Kabir (Kabir Dohe)
Item Code: IDD885
$13.00$10.40
You save: $2.60 (20%)
Add to Cart
Buy Now
The Complete Pancatantra: Sanskrit Text with English Translation
by Dr. Naveen Kumar Jha
Paperback (Edition: 2016)
J.P. Publishing House
Item Code: NAL574
$30.00$24.00
You save: $6.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Change and Continuity in Indian Sufism
by Thomas Dahnhardt 
Hardcover (Edition: 2002)
D. K. Printworld Pvt. Ltd.
Item Code: IDD271
$35.00$28.00
You save: $7.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
The Oxford India Anthology of Bengali Literature: 1861-1941 and 1941-1991 (Set of Two Volumes)
Deal 12% Off
by Kalpana Bardhan
Hardcover (Edition: 2010)
Oxford University Press
Item Code: IHJ004
$95.00$66.88
You save: $28.12 (12 + 20%)
Add to Cart
Buy Now
The Cultural Heritage of India (Set of 9 Volumes)
Item Code: NAF605
$450.00$360.00
You save: $90.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Famous Great Indian Authors and Poets
by Shyam Dua
Paperback (Edition: 2007)
Tiny Tot Publications
Item Code: NAF095
$15.00$12.00
You save: $3.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
The Wandering Sufis (Qalandars and Their Path)
by Kumkum Srivastava
Hardcover (Edition: 2009)
Aryan Books International
Item Code: IDK971
$50.00$40.00
You save: $10.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
The Structure of Indian Mind
Item Code: IHL155
$25.00$20.00
You save: $5.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Couplets from Kabir (Kabir Dohe)
Item Code: IDD884
$19.00$15.20
You save: $3.80 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Yogi Heroes and Poets (Histories and Legends of the Naths)
Item Code: NAF957
$35.00$28.00
You save: $7.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Kabir: The Weaver's Songs
by Vinay Dharwadker
Paperback (Edition: 2003)
Penguin Books India
Item Code: IHL372
$30.00$24.00
You save: $6.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Shock Therapy
by Subodh Ghose
Paperback (Edition: 2001)
Orient Longman Pvt. Ltd.
Item Code: NAI398
$18.00$14.40
You save: $3.60 (20%)
Add to Cart
Buy Now
The Bijak of Kabir
Item Code: NAD088
$20.00$16.00
You save: $4.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now

Testimonials

To my astonishment and joy, your book arrived (quicker than the speed of light) today with no further adoo concerning customs. I am very pleased and grateful.
Christine, the Netherlands
You have excellent books!!
Jorge, USA.
You have a very interesting collection of books. Great job! And the ordering is easy and the books are not expensive. Great!
Ketil, Norway
I just wanted to thank you for being so helpful and wonderful to work with. My artwork arrived exquisitely framed, and I am anxious to get it up on the walls of my house. I am truly grateful to have discovered your website. All of the items I’ve received have been truly lovely.
Katherine, USA
I have received yesterday a parcel with the ordered books. Thanks for the fast delivery through DHL! I will surely order for other books in the future.
Ravindra, the Netherlands
My order has been delivered today. Thanks for your excellent customer services. I really appreciate that. I hope to see you again. Good luck.
Ankush, Australia
I just love shopping with Exotic India.
Delia, USA.
Fantastic products, fantastic service, something for every budget.
LB, United Kingdom
I love this web site and love coming to see what you have online.
Glenn, Australia
Received package today, thank you! Love how everything was packed, I especially enjoyed the fabric covering! Thank you for all you do!
Frances, Austin, Texas
TRUSTe
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2017 © Exotic India