Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Your Cart (0)
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Philosophy > योग: नये आयाम (Yoga: Naye Aayam)
Displaying 1895 of 2813         Previous  |  NextSubscribe to our newsletter and discounts
योग: नये आयाम (Yoga: Naye Aayam)
योग: नये आयाम (Yoga: Naye Aayam)
Description

पुस्तक के बारे में

 

योग एक विज्ञान है, कोई शास्त्र नहीं है। योग के अतिरिक्त जीवन के परम सत्य तक पहुंचने का कोई उपाय नहीं है। योग जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरुरत नहीं है। नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक।

योग चेतना को इन दो हिस्सों में बांटता है स्व- चेतन और स्व- अचेतन । जो अचेतन हैं स्व की दृष्टि से, वे तो स्व- अचेतन हैं ही । हम जिन्हें कि स्व- चेतन होना चाहिए, हम भी बहुत हिस्सों में पशुओं के साथ हैं, बहुत हिस्सों में पौधों के साथ हैं, बहुत हिस्सों में पत्थरों के साथ हैं । थोड़ा सा हिस्सा हमारा आदमी हुआ है, बहुत थोड़ा सा हिस्सा । जैसे कि बर्फ के एक टुकड़े को हम पानी में डाल दें तो जरा सा हिस्सा बाहर निकला रहता है, दसवां हिस्सा । और नौ हिस्से नीचे डूबे रहते हैं । हम ऐसे ही है । हमारे नौ हिस्से तो नीचे डूबे हैं अभी अंधेरे में, एक हिस्सा थोड़ा सा सतह के ऊपर आकर आदमी हुआ है ।

तो योग आदमी को मानता है एक शास्त्र । और उसमें बहुत से अनपढ़े अध्याय पड़े हैं- अनजाने, अपरिचित- जिन पर हम कभी रोशनी लेकर नहीं गए, जिनका हमे कोई पता ही नहीं रहा है । ऐसे ही, जैसे कोई सम्राट अपने महल में सोया हो और भूल गया हो अपनी तिजोड़ियो को, अपने धन को, और सपना देख रहा हो कि मैं भिखारी हो गया और सडक पर भीख मांग रहा हूं और कोई एक पैसा नहीं दे रहा है, और वह रो रहा है और परेशान हो रहा है और चिल्ला रहा है । करीब- करीब हम ऐसे सम्राट की हालत में हैं, जिन्हें अपनी पूरी संपत्ति का कोई पता ही नहीं है । पता ही नहीं है! अगर कोई हमसे कहे भी तो भरोसा नहीं पड़ेगा । कैसे भरोसा पड़े कि हमारे पास और इतनी संपत्ति? नहीं- नहीं । अगर उस सम्राट को उसके सपनों में कोई कहे भी कि तुम और भीख मांगते हो?तुम तो सम्राट हो! तो वह सम्राट कहेगा, कैसा मजाक करते हो?जाक मत करो, एक पैसा दान करो तो समझ में आएगा । ठीक हमारी स्थिति वैसी है ।

योग कहता है, हमारे भीतर अनंत संपदाओं का विस्तार है । लेकिन वे सारी संपदाएं स्व चेतन होने से जगेंगी, उसके अतिरिक्त कोई जगने का उपाय नही है ।

सात तलों में योग मनुष्य को बांटता है; सात केंद्रों में, सप्त चक्रों में मनुष्य के व्यक्तित्व को बांटता है । इन सातो चक्रो पर अनंत ऊर्जा और शक्ति सोई हुई है । जैसे एक कली में फूल बंद होता है । कली देख कर पता भी नही चलता कि इसके भीतर ऐसा फूल होगा, ऐसा कमल खिलेगा, इतने दलों वाला कमल प्रकट होगा । कली तो बंद होती है । अगर किसी ने सिर्फ कमल की कलियां ही देखी हों और कभी फूल न देखा हो, तो वह कल्पना भी नहीं कर सकता कि यह कली और फूल बन सकती है! हमारे पास जितने चक्र है, वे कलियों की तरह बंद है । अगर वे खिल जाएं पूरे तो हमें पता भी नहीं कि उनके भीतर क्या- क्या छिपा हो सकता है- कितनी सुगंध! कितना सौदर्य! कितनी शक्ति! एक- एक चक्र के पास अनंत सौदर्य, अनंत शक्ति छिपी है । वह लेकिन कलियां खिले तो प्रकट हो सकती है, न खिले तो प्रकट नहीं हो सकती ।

कभी आपने कमल की कलियो को खिलते देखा है? कब खिलती हैं? सूरज जब निकलता है सुबह और रोशनी छा जाती है, तब रात के अंधेरे मे बंद कलियां सुबह खिल जाती है सूरज के साथ । ठीक ऐसे ही जिस दिन हमारी चेतना का सूर्य एक- एक केंद्र पर प्रकट होता है तो एक- एक केंद्र की कली खिलनी शुरू हो जाती है ।

भीतर भी हमारी चेतना का सूर्य है । उसके पहुंचने सें- उसे हम ध्यान कहें या और कोई नाम दे, इससे फर्क नही पड़ता- हमारे भीतर होश का एक सूर्य है, उसका प्रकाश जिस केंद्र पर पड़ता है, उसकी कली खिल जाती है चटक कर और फूल बन जाती है । और उसके फूल बनते ही हम पाते हैं कि अनंत शक्तियां हममें छिपी पड़ी थीं, वे प्रकट होनी शुरू हो गई ।

ये जो सात चक्र हैं, यह प्रत्येक चक्र खोला जा सकता है और प्रत्येक चक्र की अपनी क्षमताएं हैं । और जब सातों खुल जाते हैं तो व्यक्ति के द्वार- दरवाजे, जिनकी मैं कल बात कर रहा था, वे अनंत के लिए खुल जाते हैं । व्यक्ति तब अनंत के साथ एक हो जाता है । 

अनुक्रम

1

जगत- एक परिवार

1

2

घर- मंदिर

27

3

प्रेम का केंद्र

47

4

परम जीवन का सूत्र

71

5

सरल सत्य

93

6

संन्यास की दिशा

105

 

 

योग: नये आयाम (Yoga: Naye Aayam)

Item Code:
NZA623
Cover:
Paperback
Edition:
2012
ISBN:
9788172610838
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 6.0 inch
Pages:
134 (12 B/W illustrations)
Other Details:
Weight of the Book: 160 gms
Price:
$20.00   Shipping Free
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
योग: नये आयाम (Yoga: Naye Aayam)

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 2130 times since 15th Feb, 2014

पुस्तक के बारे में

 

योग एक विज्ञान है, कोई शास्त्र नहीं है। योग के अतिरिक्त जीवन के परम सत्य तक पहुंचने का कोई उपाय नहीं है। योग जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरुरत नहीं है। नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक।

योग चेतना को इन दो हिस्सों में बांटता है स्व- चेतन और स्व- अचेतन । जो अचेतन हैं स्व की दृष्टि से, वे तो स्व- अचेतन हैं ही । हम जिन्हें कि स्व- चेतन होना चाहिए, हम भी बहुत हिस्सों में पशुओं के साथ हैं, बहुत हिस्सों में पौधों के साथ हैं, बहुत हिस्सों में पत्थरों के साथ हैं । थोड़ा सा हिस्सा हमारा आदमी हुआ है, बहुत थोड़ा सा हिस्सा । जैसे कि बर्फ के एक टुकड़े को हम पानी में डाल दें तो जरा सा हिस्सा बाहर निकला रहता है, दसवां हिस्सा । और नौ हिस्से नीचे डूबे रहते हैं । हम ऐसे ही है । हमारे नौ हिस्से तो नीचे डूबे हैं अभी अंधेरे में, एक हिस्सा थोड़ा सा सतह के ऊपर आकर आदमी हुआ है ।

तो योग आदमी को मानता है एक शास्त्र । और उसमें बहुत से अनपढ़े अध्याय पड़े हैं- अनजाने, अपरिचित- जिन पर हम कभी रोशनी लेकर नहीं गए, जिनका हमे कोई पता ही नहीं रहा है । ऐसे ही, जैसे कोई सम्राट अपने महल में सोया हो और भूल गया हो अपनी तिजोड़ियो को, अपने धन को, और सपना देख रहा हो कि मैं भिखारी हो गया और सडक पर भीख मांग रहा हूं और कोई एक पैसा नहीं दे रहा है, और वह रो रहा है और परेशान हो रहा है और चिल्ला रहा है । करीब- करीब हम ऐसे सम्राट की हालत में हैं, जिन्हें अपनी पूरी संपत्ति का कोई पता ही नहीं है । पता ही नहीं है! अगर कोई हमसे कहे भी तो भरोसा नहीं पड़ेगा । कैसे भरोसा पड़े कि हमारे पास और इतनी संपत्ति? नहीं- नहीं । अगर उस सम्राट को उसके सपनों में कोई कहे भी कि तुम और भीख मांगते हो?तुम तो सम्राट हो! तो वह सम्राट कहेगा, कैसा मजाक करते हो?जाक मत करो, एक पैसा दान करो तो समझ में आएगा । ठीक हमारी स्थिति वैसी है ।

योग कहता है, हमारे भीतर अनंत संपदाओं का विस्तार है । लेकिन वे सारी संपदाएं स्व चेतन होने से जगेंगी, उसके अतिरिक्त कोई जगने का उपाय नही है ।

सात तलों में योग मनुष्य को बांटता है; सात केंद्रों में, सप्त चक्रों में मनुष्य के व्यक्तित्व को बांटता है । इन सातो चक्रो पर अनंत ऊर्जा और शक्ति सोई हुई है । जैसे एक कली में फूल बंद होता है । कली देख कर पता भी नही चलता कि इसके भीतर ऐसा फूल होगा, ऐसा कमल खिलेगा, इतने दलों वाला कमल प्रकट होगा । कली तो बंद होती है । अगर किसी ने सिर्फ कमल की कलियां ही देखी हों और कभी फूल न देखा हो, तो वह कल्पना भी नहीं कर सकता कि यह कली और फूल बन सकती है! हमारे पास जितने चक्र है, वे कलियों की तरह बंद है । अगर वे खिल जाएं पूरे तो हमें पता भी नहीं कि उनके भीतर क्या- क्या छिपा हो सकता है- कितनी सुगंध! कितना सौदर्य! कितनी शक्ति! एक- एक चक्र के पास अनंत सौदर्य, अनंत शक्ति छिपी है । वह लेकिन कलियां खिले तो प्रकट हो सकती है, न खिले तो प्रकट नहीं हो सकती ।

कभी आपने कमल की कलियो को खिलते देखा है? कब खिलती हैं? सूरज जब निकलता है सुबह और रोशनी छा जाती है, तब रात के अंधेरे मे बंद कलियां सुबह खिल जाती है सूरज के साथ । ठीक ऐसे ही जिस दिन हमारी चेतना का सूर्य एक- एक केंद्र पर प्रकट होता है तो एक- एक केंद्र की कली खिलनी शुरू हो जाती है ।

भीतर भी हमारी चेतना का सूर्य है । उसके पहुंचने सें- उसे हम ध्यान कहें या और कोई नाम दे, इससे फर्क नही पड़ता- हमारे भीतर होश का एक सूर्य है, उसका प्रकाश जिस केंद्र पर पड़ता है, उसकी कली खिल जाती है चटक कर और फूल बन जाती है । और उसके फूल बनते ही हम पाते हैं कि अनंत शक्तियां हममें छिपी पड़ी थीं, वे प्रकट होनी शुरू हो गई ।

ये जो सात चक्र हैं, यह प्रत्येक चक्र खोला जा सकता है और प्रत्येक चक्र की अपनी क्षमताएं हैं । और जब सातों खुल जाते हैं तो व्यक्ति के द्वार- दरवाजे, जिनकी मैं कल बात कर रहा था, वे अनंत के लिए खुल जाते हैं । व्यक्ति तब अनंत के साथ एक हो जाता है । 

अनुक्रम

1

जगत- एक परिवार

1

2

घर- मंदिर

27

3

प्रेम का केंद्र

47

4

परम जीवन का सूत्र

71

5

सरल सत्य

93

6

संन्यास की दिशा

105

 

 

Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Based on your browsing history

Loading... Please wait

Related Items

अध्यात्म उपनिषद (ओशो): Adhyatma Upanishad (Osho)
by Osho
Hardcover (Edition: 2015)
Osho Media International
Item Code: HAA273
$40.00
Add to Cart
Buy Now
मरौ हे जोगी मरौ: Osho on Gorakhnath
by ओशो (Osho)
Hardcover (Edition: 2013)
OSHO Media International
Item Code: NZA633
$40.00
Add to Cart
Buy Now
सत भाषै रैदास: Osho on Raidas
Item Code: NZE219
$25.00
Add to Cart
Buy Now
ध्यान-सूत्र: Dhyana Sutra by Osho
by ओशो (Osho)
Paperback (Edition: 2012)
Osho Media International
Item Code: NZA890
$20.00
Add to Cart
Buy Now
चित चकमल लागै नहीं: Discourses by Osho
by ओशो (Osho)
Paperback (Edition: 2012)
Osho Media International
Item Code: NZA889
$12.00
Add to Cart
Buy Now
ज्योतिष विज्ञान: Science of Astrology
by ओशो (Osho)
Hardcover (Edition: 2013)
Osho Media International
Item Code: NZA915
$20.00
Add to Cart
Buy Now
गीता दर्शन : Gita Darshan (Set of 8 Volumes)
by ओशो (Osho)
Hardcover (Edition: 2013)
Osho Media International
Item Code: NZB929
$325.00
Add to Cart
Buy Now
क्रांतिबीज: The Seeds of Revolution
by ओशो (Osho)
Paperback (Edition: 2013)
Osho Media International
Item Code: NZA907
$25.00
Add to Cart
Buy Now
पिव पिव लागी प्यास: Piv Piv Lagi Pyaas
by ओशो (Osho)
Hardcover (Edition: 2014)
OSHO Media International
Item Code: NZA655
$30.00
Add to Cart
Buy Now
जीवन रहस्य: Secret of Life
by ओशो (Osho)
Hardcover (Edition: 2013)
OSHO Media International
Item Code: NZA624
$25.00
Add to Cart
Buy Now

Testimonials

THANK YOU SO MUCH for your kind generosity! This golden-brass statue of Padmasambhava will receive a place of honor in our home and remind us every day to practice the dharma and to be better persons. We deeply appreciate your excellent packing of even the largest and heaviest sculptures as well as the fast delivery you provide. Every sculpture we have purchased from you over the years has arrived in perfect condition. Our entire house is filled with treasures from Exotic India, but we always have room for one more!
Mark & Sue, Eureka, California
I received my black Katappa Stone Shiva Lingam today and am extremely satisfied with my purchase. I would not hesitate to refer friends to your business or order again. Thank you and God Bless.
Marc, UK
The altar arrived today. Really beautiful. Thank you
Morris, Texas.
Very Great Indian shopping website!!!
Edem, Sweden
I have just received the Phiran I ordered last week. Very beautiful indeed! Thank you.
Gonzalo, Spain
I am very satisfied with my order, received it quickly and it looks OK so far. I would order from you again.
Arun, USA
We received the order and extremely happy with the purchase and would recommend to friends also.
Chandana, USA
The statue arrived today fully intact. It is beautiful.
Morris, Texas.
Thank you Exotic India team, I love your website and the quick turn around with helping me with my purchase. It was absolutely a pleasure this time and look forward to do business with you.
Pushkala, USA.
Very grateful for this service, of making this precious treasure of Haveli Sangeet for ThakurJi so easily in the US. Appreciate the fact that notation is provided.
Leena, USA.
TRUSTe
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2017 © Exotic India