Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Your Cart (0)
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindi > योगी प्रारब्ध एवं कालचक्र: Yogi Destiny and the Wheel of Time
Displaying 8336 of 11377         Previous  |  NextSubscribe to our newsletter and discounts
योगी प्रारब्ध एवं कालचक्र: Yogi Destiny and the Wheel of Time
योगी प्रारब्ध एवं कालचक्र: Yogi Destiny and the Wheel of Time
Description

पुस्तक के विषय में

भारत की सनातन परम्परा अक्षुण्ण भाव से जीवित रहने का मुख्य कारण है कि भारत विष्णुपुराण के कथानुसार कर्म भूमि है, भोग भूमि नहीं- अर्थात् जन कल्याण के लिए कर्म करना।

यह कर्म भारत के उन सन्यासियों ने, चाहे वे किसी भी मत के क्यों ना हों, सदैव किया है और सदैव करते रहेंगे।

प्रश्न यह उठता है आज भी भारत के विभिन्न भागों में महान साधु संग दृष्टिगोचर होते हैं क्या? उत्तर है कि हाँ।

यह पुस्तक कुछ ऐसे ही संतों की कहानी है जो एक भ्रमणशील व्यक्ति ने, उनका सत्संग करके, उसका लाभ उठाकर, आपके सामने प्रस्तुत किया है।

आभार

यह पुस्तक अंग्रेजी में पन्द्रह वर्ष पूर्व छपी थी कई बार मैंने सोचा कि हरो हिन्दी में भी लिखूं मगर अव्वल तो मैं हिंदी टाइप नहीं कर पाता और अगर कुछ लिखता भी है तो मेरी रफ्तार बेहद धीमी है इसीलिए हिंदी में इसे लिखने का विचार टलता ही गया।

सौभाग्यवश मेरी एक पूर्व शिष्या पद्मजा ने इसे अनुवादित करने का प्रस्ताव रखा और मैंने सहर्ष इसकी अनुमति दे दी यह पुस्तक उन्ही के विशेष श्रम का संतोषजनक परिणाम है। इसलिए सर्वप्रथम मैं पद्मजा के प्रति अपना आभार प्रकट करता है।

मेरा हार्दिक आभार उन महात्माओं और साधकों के प्रति लै जिनके सान्निध्य में मैंने आध्यात्मिक जीवन के रहस्यों को प्रल्यक्षत: समझा। विष्णु पुराण में भारत को कर्म भूमि क्यों कहा गया है, यह बात भी मैंने उन्हीं से जानी।

वर्तमान समय में दुनिया को गंभीर संकट से बचाने का दायित्व भारत पर है। हमारी आध्यात्मिक परम्परा को बड़े पैमाने पर प्रसारित करने का भार देश की वर्तमान और भावी पीढ़ी पर है। इसलिए जब पाश्चात्य सभ्यता के भूत को सिर रो उतारकर उत्तम चरित्र के साथ भारत की सनातन परम्परा में निष्ठा रखने वाली हमारी पीढ़ी देश का नेतृत्व संभालेगी, तब दुनिया को उस शांति और स्थायित्व का अनुभव होगा जो आणविक विनाश के साथ दो महायुद्ध झेल चुकी दुनिया के लिए एक सपना ही बनकर रह गया है।

 

विषय-सूची

 
 

आभार

3

 
 
 

निष्ठा

4

 
 
 

लेखक परिचय

5

 

अध्याय 1

वह महान गुरु

10

 

अध्याय 2

गुरु के जीवन का संक्षिप्त रेखा चित्र

33

 

अध्याय 3

प्रभु बिजयकृष्ण गोस्वामी (गुरु के गुरु)

44

 

अध्याय 4

मेरी अपने गुरु से मुलाकात

53

 

अध्याय 5

जागृत कुंडलिनी

65

 

अध्याय 6

ज्योतिषीय निर्देश

77

 

अध्याय 7

प्रारब्ध (नकारात्मक पक्ष)

89

 

अध्याय 8

रोकड़िया हनुमान बाबा (बाबा प्रभुदास)

104

 

पूर्व निर्धारित साधना

 

अध्याय 9

मेरे ज्योतिष गुरू।

121

 
 

अध्याय 10

मेरे ज्योतिष गुरू-।।

136

 

अध्याय 11

प्रारब्ध एवं दैवी आनंद

145

 

अध्याय 12

नागरी दास बाबा

165

 

अध्याय 13

रंगा अवधूत

187

 

अध्याय 14

योगियों का धर्म

209

 

अध्वाय 15

सावधानी एवं चेतावनी

216

 

अम्भाय 16

आध्यात्मिक ऊर्जा से उद्भुत आनंद-I

231

 

(मेरी कहानी)

 

अध्याय 17

आध्यात्मिक ऊर्जा से उद्भुत आनंद-II(मेरी कहानी)

254

 
 

अध्याय 18

आध्यात्मिक ऊर्जा से उद्भुत आनंद-III

270

 

(बटुक भाई)

 

अध्याय 19

आध्यात्मिक ऊर्जा से उद्भुत आनंद-IV(श्रीमती ' 'एस' ')

274

 
 

अध्याय 20

 

281

 

आध्यात्मिक ऊर्जा से उद्भुत आनंद-V

 

(एस.डी.)

 

अध्याय 21

आध्यात्मिक ऊर्जा से उद्भुत आनंद-VI

290

 

(दो दिव्यात्माओं की कथा)

 

अध्याय 22

दृष्टा योगी

298

 
 

अध्याय 23

ज्योतिष जब क्सोति जगासे

307

 
 

अध्याय 24

प्रदीप्त स्मृतियँ

320

 
 

अध्याय 25

ज्योतिष करें ही क्यौं

328

 
 

अध्याय 26

काव्यात्मक मार्गदर्शन

333

 
 

अध्याय 27

दैवी आनंद एवं भ्रम

345

 
 

योगी प्रारब्ध एवं कालचक्र: Yogi Destiny and the Wheel of Time

Item Code:
NZA809
Cover:
Paperback
Edition:
2010
Publisher:
ISBN:
8189221671
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
352
Other Details:
Weight of the Book: 390 gms
Price:
$17.50
Discounted:
$14.00   Shipping Free
You Save:
$3.50 (20%)
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
योगी प्रारब्ध एवं कालचक्र: Yogi Destiny and the Wheel of Time

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 2627 times since 29th Nov, 2014

पुस्तक के विषय में

भारत की सनातन परम्परा अक्षुण्ण भाव से जीवित रहने का मुख्य कारण है कि भारत विष्णुपुराण के कथानुसार कर्म भूमि है, भोग भूमि नहीं- अर्थात् जन कल्याण के लिए कर्म करना।

यह कर्म भारत के उन सन्यासियों ने, चाहे वे किसी भी मत के क्यों ना हों, सदैव किया है और सदैव करते रहेंगे।

प्रश्न यह उठता है आज भी भारत के विभिन्न भागों में महान साधु संग दृष्टिगोचर होते हैं क्या? उत्तर है कि हाँ।

यह पुस्तक कुछ ऐसे ही संतों की कहानी है जो एक भ्रमणशील व्यक्ति ने, उनका सत्संग करके, उसका लाभ उठाकर, आपके सामने प्रस्तुत किया है।

आभार

यह पुस्तक अंग्रेजी में पन्द्रह वर्ष पूर्व छपी थी कई बार मैंने सोचा कि हरो हिन्दी में भी लिखूं मगर अव्वल तो मैं हिंदी टाइप नहीं कर पाता और अगर कुछ लिखता भी है तो मेरी रफ्तार बेहद धीमी है इसीलिए हिंदी में इसे लिखने का विचार टलता ही गया।

सौभाग्यवश मेरी एक पूर्व शिष्या पद्मजा ने इसे अनुवादित करने का प्रस्ताव रखा और मैंने सहर्ष इसकी अनुमति दे दी यह पुस्तक उन्ही के विशेष श्रम का संतोषजनक परिणाम है। इसलिए सर्वप्रथम मैं पद्मजा के प्रति अपना आभार प्रकट करता है।

मेरा हार्दिक आभार उन महात्माओं और साधकों के प्रति लै जिनके सान्निध्य में मैंने आध्यात्मिक जीवन के रहस्यों को प्रल्यक्षत: समझा। विष्णु पुराण में भारत को कर्म भूमि क्यों कहा गया है, यह बात भी मैंने उन्हीं से जानी।

वर्तमान समय में दुनिया को गंभीर संकट से बचाने का दायित्व भारत पर है। हमारी आध्यात्मिक परम्परा को बड़े पैमाने पर प्रसारित करने का भार देश की वर्तमान और भावी पीढ़ी पर है। इसलिए जब पाश्चात्य सभ्यता के भूत को सिर रो उतारकर उत्तम चरित्र के साथ भारत की सनातन परम्परा में निष्ठा रखने वाली हमारी पीढ़ी देश का नेतृत्व संभालेगी, तब दुनिया को उस शांति और स्थायित्व का अनुभव होगा जो आणविक विनाश के साथ दो महायुद्ध झेल चुकी दुनिया के लिए एक सपना ही बनकर रह गया है।

 

विषय-सूची

 
 

आभार

3

 
 
 

निष्ठा

4

 
 
 

लेखक परिचय

5

 

अध्याय 1

वह महान गुरु

10

 

अध्याय 2

गुरु के जीवन का संक्षिप्त रेखा चित्र

33

 

अध्याय 3

प्रभु बिजयकृष्ण गोस्वामी (गुरु के गुरु)

44

 

अध्याय 4

मेरी अपने गुरु से मुलाकात

53

 

अध्याय 5

जागृत कुंडलिनी

65

 

अध्याय 6

ज्योतिषीय निर्देश

77

 

अध्याय 7

प्रारब्ध (नकारात्मक पक्ष)

89

 

अध्याय 8

रोकड़िया हनुमान बाबा (बाबा प्रभुदास)

104

 

पूर्व निर्धारित साधना

 

अध्याय 9

मेरे ज्योतिष गुरू।

121

 
 

अध्याय 10

मेरे ज्योतिष गुरू-।।

136

 

अध्याय 11

प्रारब्ध एवं दैवी आनंद

145

 

अध्याय 12

नागरी दास बाबा

165

 

अध्याय 13

रंगा अवधूत

187

 

अध्याय 14

योगियों का धर्म

209

 

अध्वाय 15

सावधानी एवं चेतावनी

216

 

अम्भाय 16

आध्यात्मिक ऊर्जा से उद्भुत आनंद-I

231

 

(मेरी कहानी)

 

अध्याय 17

आध्यात्मिक ऊर्जा से उद्भुत आनंद-II(मेरी कहानी)

254

 
 

अध्याय 18

आध्यात्मिक ऊर्जा से उद्भुत आनंद-III

270

 

(बटुक भाई)

 

अध्याय 19

आध्यात्मिक ऊर्जा से उद्भुत आनंद-IV(श्रीमती ' 'एस' ')

274

 
 

अध्याय 20

 

281

 

आध्यात्मिक ऊर्जा से उद्भुत आनंद-V

 

(एस.डी.)

 

अध्याय 21

आध्यात्मिक ऊर्जा से उद्भुत आनंद-VI

290

 

(दो दिव्यात्माओं की कथा)

 

अध्याय 22

दृष्टा योगी

298

 
 

अध्याय 23

ज्योतिष जब क्सोति जगासे

307

 
 

अध्याय 24

प्रदीप्त स्मृतियँ

320

 
 

अध्याय 25

ज्योतिष करें ही क्यौं

328

 
 

अध्याय 26

काव्यात्मक मार्गदर्शन

333

 
 

अध्याय 27

दैवी आनंद एवं भ्रम

345

 
 
Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Related Items

Yogis Destiny and The Wheel of Time
by K.N. Rao
Paperback (Edition: 2012)
Vani Publications
Item Code: NAF181
$20.00$16.00
You save: $4.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Crystals and Us (A Loving, Healing Relationship)
Item Code: NAI086
$20.00$16.00
You save: $4.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Yogic Nadis (The Subtle Flow of Vibration)
by Dr. Sachin Sharma
Paperback (Edition: 2014)
Chaukhambha Orientalia
Item Code: NAJ945
$15.00$12.00
You save: $3.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Saptarishis Astrology (As Read in 96 Countries)
by C.S. Patel
Paperback (Edition: 2009)
Sagar Publications
Item Code: IDL212
$30.00$24.00
You save: $6.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Karma and Rebirth in Hindu Astrology (Explained Illustratively With Many Horoscopes)
by K. N. Rao
Paperback (Edition: 2015)
Vani Publications
Item Code: NAE058
$20.00$16.00
You save: $4.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Learn Hindu Astrology Easily
by K.N Rao and K. Ashu Rao
Paperback (Edition: 2011)
Vani Publications
Item Code: NAG040
$15.00$12.00
You save: $3.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Predicting Through Karakamsha and Jaimini?s Mandook Dasha
by K.N.Rao
Paperback (Edition: 2012)
Vani Publications
Item Code: NAE599
$16.00$12.80
You save: $3.20 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Timing Events Through Vimshottary Dasha
by K.N. Rao
Paperback (Edition: 2010)
Vani Publications
Item Code: NAE586
$17.50$14.00
You save: $3.50 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Enigmas In Astrology
by K. N. Rao
Paperback (Edition: 2007)
Vani Publications
Item Code: NAD970
$15.00$12.00
You save: $3.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Planets and Children
by K.N. Rao
Paperback (Edition: 2012)
Vani Publications
Item Code: NAD991
$17.00$13.60
You save: $3.40 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Snapshot Prediction Using Yogini Dasha
by V.P. Goel
Paperback (Edition: 2016)
Sagar Publications
Item Code: NAF339
$15.00$12.00
You save: $3.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Yogini and Kalchakra Dasa
by Sumeet Chugh
Paperback (Edition: 1999)
Sagar Publications
Item Code: IHL131
$11.50$9.20
You save: $2.30 (20%)
SOLD
Astrology Destiny and the Wheel of Time (Techniques and Predictions)
by K.N.Rao
Paperback (Edition: 2011)
Vani Publications
Item Code: NAG029
$20.00$16.00
You save: $4.00 (20%)
SOLD
The Science of Numerology (Let the Numbers Guide You)
by Shiv Charan Singh
Paperback (Edition: 2010)
Jaico Publishing House
Item Code: NAD175
$23.50$18.80
You save: $4.70 (20%)
SOLD
Celestial Matrix in Naadi Astrology – Includes Prashna Sastra Based 

on Naadi Hora
Item Code: IHL050
$11.50$9.20
You save: $2.30 (20%)
Add to Cart
Buy Now

Testimonials

I have been buying from Exotic India for years and am always pleased and excited to receive my packages. Thanks for the quality products.
Delia, USA
As ever, brilliant price and service.
Howard, UK.
The best and fastest service worldwide - I am in Australia and I put in a big order of books (14 items) on a Wednesday; it was sent on Friday and arrived at my doorstep early on Monday morning - amazing! All very securely packed in a very strong cardboard box. I have bought several times from Exotic India and the service is always exceptionally good. THANK YOU and NAMASTE!
Charles (Rudra)
I just wanted to say that this is I think my 3rd (big) order from you, and the last two times I received immaculate service, the books arrived well and it has been a very pleasant experience. Just wanted to say thanks for your efficient service.
Shantala, Belgium
Thank you so much EXOTIC INDIA for the wonderfull packaging!! I received my order today and it was gift wrapped with so much love and taste in a beautiful golden gift wrap and everything was neat and beautifully packed. Also my order came very fast... i am impressed! Besides selling fantastic items, you provide an exceptional customer service and i will surely purchase again from you! I am very glad and happy :) Thank you, Salma
Salma, Canada.
Artwork received today. Very pleased both with the product quality and speed of delivery. Many thanks for your help.
Carl, UK.
I wanted to let you know how happy we are with our framed pieces of Shree Durga and Shree Kali. Thank you and thank your framers for us. By the way, this month we offered a Puja and Yagna to the Ardhanarishwara murti we purchased from you last November. The Brahmin priest, Shree Vivek Godbol, who was visiting LA preformed the rites. He really loved our murti and thought it very paka. I am so happy to have found your site , it is very paka and trustworthy. Plus such great packing and quick shipping. Thanks for your service Vipin, it is a pleasure.
Gina, USA
My marble statue of Durga arrived today in perfect condition, it's such a beautiful statue. Thanks again for giving me a discount on it, I'm always very pleased with the items I order from you. You always have the best quality items.
Charles, Tennessee
Jay Shree Krishna Shrimud Bhagavatam Mahapurana in Sanskrat Parayana is very very thankful to you we are so gratefully to your seva
Mrs. Darbar, UK.
Its a very efficient website and questions queries are responded promptly. very reliable website. Thank you.
Kailash, Australia.
TRUSTe
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2017 © Exotic India