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अंतर्नाद सुर और साज़: Antarnad - Interviews with Famous Singers and Musicans

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अंतर्नाद सुर और साज़: Antarnad - Interviews with Famous Singers and Musicans
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Item Code: NZJ146
Author: पं. विजयशंकर मिश्र (Pt. Vijayashankar Mishra)
Publisher: Kanishka Publishers
Language: Hindi
Edition: 2012
ISBN: 9788173916942
Pages: 471
Cover: Hardcover
Other Details: 9.0 inch X 6.0 inch
weight of the book: 620 gms

लेखक परिचय

पंडित विजयशंकर मिश्र का जन्म भारत के एक ऐसे प्रतिष्ठि संगीतज्ञ परिवार में हुआ है जिसमें संगीत की गंगा विगत ३०० वर्षों से लगातार प्रवाहित होती आ रही है! इनके पूर्वज बनारस घराने के तबला सम्राट पं. रामशरणजी मिश्र (मस्तराम), प्रपितामह संगीत नायक पं. दरगाही मिश्र, पितामह खलीफा पं. बिक्कु महाराज एवं पिता तबला शिरोमणि, संगीत सम्राट पं. गामा महाराज की संगीत सेवाओं से संगीत जगत, पूरी तरह परिचित है ! विद्याधर देवो, सिध्देश्वरी देवी, जद्दन बाई, पं. भोलानाथ पाठक पं. सांता प्रसाद उर्फ़ गुदाई महाराज, मन्नू जी मृदंगाचार्य, लल्लन बाबू उर्फ़ शत्रुंजय प्रसाद सिंह एवं गिरिजा देवी जैसी अनेक महान विभूतियां इसी संगीत परंपरा की देन है!

पं. मिश्र १९७७ से शिक्षण कर्म जुड़े है, वर्त्तमान में मातृकाला मंदिर, अरविन्द आश्रम, दिल्ली दिल्ली में वरिष्ठ गुरु पद पर कार्यरत पं. मिश्र अनेक संस्थाओं , विश्वविद्यालयों से एम. ए. एवं शोध स्टार के परीक्षक के रूप में जुड़े है!

हिंदी के लगभग सभी राष्ट्रीय पत्र, पत्रिकाओं के लिए, आकाशवाणी और दूरदर्शन के लिए विभिन्न विषयों पर ४००० से अधिक रचनाओं का लेखन कर चुके है! संगीत और नृत्य के २०० से अधिक कलाकारों से व पत्र, पत्रिकाओं आकाशवाणी और दूरदर्शन के लिए बातचीत कर चुके है! उनकी अनेक रचनायें विभिन्न भाषाओँ में अनूदित और प्रकाशित हो चुकी है!

इन्होनें आकाशवाणी के लिए १३ अंकों का संगीत धारावाहिक तबले का जन्म और उसकी विकास यात्रा का लेख, निर्देशन एवं निर्माण किया है१ देश के विभिन्न भागों में आयोजित अनेक विचार गोष्ठियों के माध्यम से अपने सारगर्भित विचार प्रकट कर चुके बहुमुखी प्रतिभा के धनि पं. मिश्र की ख्याति कई रूपों में है !

पं. मिश्र की कला प्रतिभा का सम्मान कर हुए-
मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार नें इन्हें जूनियर एवं सीनियर फेलोशिप प्रदान की है! संगम कला ग्रुप (दिल्ली) नें इन्हें वर्ष के सर्श्रेष्ठ लेखक, समीक्षक के रूप में सम्मानित किया है, तो संगीत साधना संस्थान ( गाज़ियाबाद, उ.प्र.) ने सफल मंच सञ्चालन हेतु संगीत साधक-प्रचारक. की उपाधि से विभूषित किया है! किशोर मंच सांस्कृतिक कला संस्थान ने मंचालंकार की उपाधि से विभूषित किया है! तांतरंग सम्मान, विशिष्ट लेखनी सम्मान, आचार्य अभिनव गुप्त सम्मान, संगीत भूषण, बाबा अल्लाउद्दीन खां सम्मान प्राप्त कर चुके पं. मिश्र का हंसध्वनि ने अभिनन्दन किया है!

 











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