Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Sign In  |  Sign up
Your Cart (0)
Best Deals
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Language and Literature > हिन्दी साहित्य > उर्दू की बेहतरीन ग़ज़लें: Best Urdu Ghazals
Subscribe to our newsletter and discounts
उर्दू की बेहतरीन ग़ज़लें: Best Urdu Ghazals
Pages from the book
उर्दू की बेहतरीन ग़ज़लें: Best Urdu Ghazals
Look Inside the Book
Description

पुस्तक के विषय में

उर्दू की बेहतरीन ग़ज़लें

जहाँ तक ग़ज़ल का सम्बन्ध है, वह भी भारत में सार्वभाषिक विधा के रूप में विकसित हो रही है। आज ग़ज़ल के पाठक उर्दू से कहीं अधिक हिन्दी में हैं। ग़ालिब को ही लें, अब तक उनके दीवान की हिन्दी में अनेक टीकाएँ लिखी जा चुकी हैं और लिखी जा रही हैं। शायद ही हिन्दी का कोई कवि होगा, जिसने ग़ालिब का अध्ययन न किया हो, मीर को न पढ़ा हो, ज़ौक का नाम न सुना हो। हिन्दी में पचास के दशक में प्रकाश पंडित के सम्पादन में उर्दू शायरों की एक श्रृंखला प्रकाशित हुई थी, जिसने हिन्दी के आम पाठकों का ध्यान खींचा था और देखते ही देखते उसके अनेक संस्करण प्रकाशित हो गये। आज हिन्दी के लगभग समस्त प्रकाशकों ने ग़ज़लों के संकलन प्रकाशित किये हैं जो पाठकों में खूब लोकप्रिय हैं। अक्सर कुछ उच्चभ्रू लोग यह कह कर ग़ज़ल से पल्ला झाडू लेते हैं कि ग़ज़ल हुस्नो इश्क़ पर केन्द्रित एक रोमांटिक विधा है; जबकि सचाई यह नहीं है। ग़ज़ल की रवायत ही कुछ ऐसी है कि हर बात, वह चाहे कितनी भी गहरी क्यों न हो, प्रिय या प्रियतम के माध्यम से ही कही जाती है। यह ग़ज़ल की सीमा भी है और शक्ति भी। यह शायर की प्रतिभा पर निर्भर करता है कि वह किस युक्ति से हुस्न और इश्क़ की सीमा में रहते हुए उसमें जिन्दगी के रंग भरता है और फ़लसफ़े हयात की बात करता है, जीवन और मृत्यु के दर्शन को समझने की कोशिश करता है :

अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जाएँगे

मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएँगे

जटिल रहस्यवादी चिन्तन को सहज सरल ढंग से अभिव्यक्त करना ग़ज़ल में ही सम्भव है।

कुछ लोग ग़ज़ल के विन्यास को देखते हुए उस पर शब्द क्रीड़ा का भी आरोप लगाते हैं, मगर यह उन कवियों के लिए कहा जा सकता है, जो ग़ज़ल के नाम पर शब्दों के साथ खेलते हैं और शब्द क्रीड़ा को ही अपनी उपलब्धि मान लेते हैं। ऐसे कवियों की संख्या भी कम नहीं है। ग़ज़ल में ही क्यों, शब्दों की बाज़ीगिरी किसी भी विधा में दिखाई जा सकती है। बड़ा शायर उसी को माना गया है, जो बहर, काफ़िए और रदीफ़ के अनुशासन के भीतर रह कर सिर्फ़ भाषा के चमत्कार दिखाने में ही नहीं रम जाता, बल्कि आम आदमी के संघर्षों, उम्मीदों, निराशाओं, सपनों को वाणी देता है । धीरे-धीरे ग़ज़ल ने संगीत के क्षेत्र में भी अपने लिए जगह महफूज कर ली। कुछ गायक ग़ज़ल का हाथ थाम कर लोकप्रियता के शिखर तक पहुँचे । बेग़म अख्तर, मेहदी हसन, गुलाम अली और जगजीत सिंह ग़ज़ल गायकी के जगमगाते सितारे हैं।

यह पुस्तक ग़ज़ल का ऐसा संकलन है जिसमें आपको उस्तादों के कलाम भी पढ़ने को मिलेंगे और ग़ज़ल के शुरुआती दौर से अब तक के सफर का एक जायजा भी मिल जाएगा। इसके लिए हमारा यह प्रयास कहाँ तक सफल रहा है, यह तो पाठक ही बताएँगे।

भूमिका

गज़ल उर्दू की एक लोकप्रिय साहित्यिक विधा है । पूछा जा सकता है कि अचानक यह गज़ल विशेषाक क्यों प्रकाशित किया जा रहा है, इसका औचित्य क्या है? वस्तुत साहित्य की किसी भी विधापर किक भाषा या देश का एकाधिकार नहीं होता। आज के कथा साहित्य का अवलोकन करें तो हम पाएगें, उस पर भी कई भाषाओं और कई देशें। का प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष प्रभाव है । आज हिन्दी कहानी का वह रूप नहीं है जो हितोपदेश अथवा कथा सरित्सागर का था। आज कहानी में कई अन्य भाषाओं के कथाकारों की प्रतिध्वनियाँ सुनी वा सकती हैं । किसी भी देश या भाषा की कहानी हो, उस पर चेखव, मोपासाँ, ओ हेनरी हेमिग्वे सामरसेट मॉम, काफ़्ता दास्तोएवस्की, मटो, शरच्चन्द्र. प्रेमचन्द, लू-शुन की प्रतिध्वनियाँ सुनी जा सकती हँ । जहाँ तक गज़ल का सम्बन्ध है, वह भी भारत में सार्वभाषिक विधा के रूप में विकसित हो रही है आज गज़ल के पाठक उर्दू से कहीं अधिक हिन्दी में हैं। गालिब को ही लें, अब तक उनके दीवान की हिन्दी में अनेक टीकाएं लिखी जा चुकी हैं और लिखी जा रही हैं। शायद ही हिन्दी का कोई कवि होगा, जिसने गालिब का अध्ययन न किया हो, मीर को न पड़ा हो, ज़ौक का नाम न सुना हो। हिन्दी में पचास के दशक में प्रकाश पंडित के सम्पादन में उर्दू शायरों की एक शृंखला प्रकाशित हुई थी जिसने हिन्दी के आम पाठकों का ध्यान खींचा था और देखते ही देखते उसके अनेक संस्करण प्रकाशित हो गये।आज हिन्दी के लगभग समस्त प्रकाशकों ने गज़लों के संकलन प्रकाशित किये हैंजो पाठकों में खूब लोकप्रिय है। अक्सर लोग यह कह कर गजल से पल्ला झाड लेते हैं कि गज़ल हुस्नों इश्कपर केन्द्रित एक रोमांटिक विधा है, जबकि सचाई यह नहीं है। गजल की रवायत ही कुछ ऐसी है कि हर बात, वह चाहे कितनी भी गहरी क्यो न हो प्रिय या प्रियतम के माध्यम से ही कही जाती है। यह गज़ल की सीमा भी है और शक्ति भी। यह शायर की प्रतिभा पर निर्भर करता है कि वह किस युक्ति से हुस और इश्क्र की सीमा में रहते हुए उसमे जिन्दगी के रग भरता हे और फ़लसफ़े हयात की बात करता है, जीवन और मृत्यु के दर्शन को समझने की कोशिश करता है :

अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जाएँगे

मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएँगे

जटिल रहस्यवादी चिन्तन को सहज सरल ढंग से अभिव्यक्त करना ग़ज़ल में ही सम्भव है ।

कुछ लोग ग़ज़ल के विन्यास को देखते हुए उस पर शब्द क्रीड़ा का भी आरोप लगाते हैं, मगर यह उन कवियों के लिए कहा जा सकता है, जो ग़ज़ल के नाम पर शब्दों के साथ खेलते हैं और शब्द क्रीड़ा को ही अपनी उपलब्धि मान लेते हैं । ऐसे कवियों की संख्या भी कम नहीं है । ग़ज़ल में ही क्यों, शब्दों की बाज़ीगिरी किसी भी विधा में दिखाई जा सकती है । बड़ा शायर उसी को माना गया है, जो बहर, काफ़िए और रदीफ़ के अनुशासन के भीतर रह कर सिर्फ़ भाषा के चमत्कार दिखाने में ही नहीं रम जाता, बल्कि आम आदमी के संघर्षों, उम्मीदों, निराशाओं, सपनों को वाणी देता है। धीरे-धीरे ग़ज़ल ने संगीत के क्षेत्र में भी अपने लिए जगह महफूज कर ली। कुछ गायक ग़ज़ल का हाथ थाम कर लोकप्रियता के शिखर तक पहुँचे । बेग़म अख्तर, मेहदी हसन, गुलाम अली और जगजीत सिंह ग़ज़ल गायकी के जगमगाते सितारे हैं ।

यह पुस्तक ग़ज़ल का ऐसा संकलन है जिसमें आपको उस्तादों के कलाम भी पढ़ने को मिलेंगे और ग़ज़ल के शुरुआती दौर से अब तक के सफर का एक जायजा भी मिल जाएगा । इसके लिए हमारा यह प्रयास कहाँ तक सफल रहा है, यह तो पाठक ही बताएँगे ।

 

अनुक्रम

1

अमीर ख़ुसरो

9

2

मुहम्मद कुली 'कुतुब' शाह

10

3

शम्मुद्दीन वली दकनी

11

4

मो. रफी सौदा

12

5

सिराज औरंगाबादी

13

6

ख्वाजा मीर दर्द

14

7

मीर मुहम्मद तक़ी 'मीर'

15

8

शैख गुलाम हम्दानी 'मुसहफ़ी'

17

9

सय्यद ईशा अल्लाह खाँ 'ईशा'

18

10

इमामबख़्श नासिख

19

11

बहादुर शाह जफर

20

12

ख्वाजा हैदर अली 'आतिश'

21

13

शेख इब्राहीम ज़ौक़

22

14

मिज़8असद-उल्लाह खाँ 'ग़ालिब'

23

15

मोमिन खाँ 'मोमिन'

26

16

नवाब मिर्ज़ा खाँ 'दाग़' देहलवी

28

17

मौलाना अलाफ़ हुसैन हाली

30

18

अकबर इलाहाबादी

31

19

अल्लामा मुहम्मद इक़बाल

32

20

शौकत अली खाँ 'फ़ानी' बदायूँनी

33

21

सैयद फ़ज़लुल हसन 'हसरत मोहानी'

34

22

ब्रजनारायण 'चकबस्त'

36

23

'यास', 'यगान: ' चंगेज़ी, अज़ीमाबादी

37

24

जिगर मुरादाबादी

38

25

'फिराक़' गोरखपुरी

39

26

शब्बीर हसन ख़ाँ जोश मलीहाबादी

40

27

बिस्मिल अज़ीमाबादी

42

28

हफ़ीज़ जालन्धरी

43

29

आनन्द नारायण मुल्ला

44

30

जमील मज़हरी

45

31

मख़्दूम मोहिउद्दीन

47

32

असरारुल हक़ 'मजाज़' लखनवी

49

33

खुमार बराबंकवी

50

34

नजीर बनारसी

52

35

नुशूर वाहिदी

53

36

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

55

37

मीराजी

58

38

अली सरदार जाफ़री

59

39

जांनिसार अख्तर

60

40

एहसान दानिश

61

41

अहमद नदीम क़ासमी

62

42

शकील बदायूँनी

64

43

जगन्नाथ आज़ाद

65

44

मज़रूह सुलानपुरी

66

45

कैफ़ी आज़मी

67

46

क़तील शिफ़ाई

70

47

साहिर लुधियानवी

72

48

नासिर काज़मी

73

49

कृष्य बिहारी 'नूर'

75

50

कलीम आजिज़

76

51

नरेश कुमार 'शाद'

77

52

राही मासूम रज़ा

78

53

इने इंशा

79

54

कुँवर महेन्द्र सिंह बेदी 'सहर'

80

55

मज़हर इमाम

81

56

मुनीर नियाज़ी

83

57

गुलज़ार

84

58

जॉन एलिया

87

59

अहमद फ़राज़

89

60

मनचन्दा 'बानी'

92

61

फ़ज़ल ताबिश

95

62

कृष्ण कुमार 'तूर'

96

63

शकेब जलाली

98

64

सुदर्शन फ़ाकिर

101

65

बशीर बद्र

103

66

शहरयार

105

67

मुज़फ़्फर हनफ़ी

108

68

नाज़िर सिद्दीक़ी

109

69

निदा फाज़ली

111

70

ज़हीर ग़ाज़ीपुरी

113

71

वसीम बरेलवी

114

72

जावेद अख़्तर

117

73

अमीर आग़ा क़ज़लबाश

119

74

अज़हर इनायती

121

75

शुजाम्-ख़ावर

122

76

शाहिद मीर

123

77

परवीन शाकिर

124

78

राहत इन्दौरी

126

79

मुनव्वर राना

128

80

नवाज देवबन्दी

130

81

शकील जमाली

131

82

अख्तर नज़्मी

132

83

कृष्ण अदीब

135

84

क़ैसर-उल-जाफ़री

137

85

प्रेम बारबर्टनी

140

86

कुमार 'पाशी'

141

87

राज इलाहाबादी

142

88

क़मी जलालाबादी

143

89

शमीम जयपुरी

144

90

शकील जमाली

145

91

शीन काफ़ निज़ाम

146

92

अहमद कमाल हाश्मी

149

93

शम्मी शम्स वारसी

150

94

सदा अम्बालवी

151

 

 

Sample Page


उर्दू की बेहतरीन ग़ज़लें: Best Urdu Ghazals

Item Code:
NZD138
Cover:
Hardcover
Edition:
2014
Publisher:
ISBN:
9789326351645
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
151
Other Details:
Weight of the Book: 270 gms
Price:
$15.00   Shipping Free
Look Inside the Book
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
उर्दू की बेहतरीन ग़ज़लें: Best Urdu Ghazals

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 7907 times since 13th Aug, 2015

पुस्तक के विषय में

उर्दू की बेहतरीन ग़ज़लें

जहाँ तक ग़ज़ल का सम्बन्ध है, वह भी भारत में सार्वभाषिक विधा के रूप में विकसित हो रही है। आज ग़ज़ल के पाठक उर्दू से कहीं अधिक हिन्दी में हैं। ग़ालिब को ही लें, अब तक उनके दीवान की हिन्दी में अनेक टीकाएँ लिखी जा चुकी हैं और लिखी जा रही हैं। शायद ही हिन्दी का कोई कवि होगा, जिसने ग़ालिब का अध्ययन न किया हो, मीर को न पढ़ा हो, ज़ौक का नाम न सुना हो। हिन्दी में पचास के दशक में प्रकाश पंडित के सम्पादन में उर्दू शायरों की एक श्रृंखला प्रकाशित हुई थी, जिसने हिन्दी के आम पाठकों का ध्यान खींचा था और देखते ही देखते उसके अनेक संस्करण प्रकाशित हो गये। आज हिन्दी के लगभग समस्त प्रकाशकों ने ग़ज़लों के संकलन प्रकाशित किये हैं जो पाठकों में खूब लोकप्रिय हैं। अक्सर कुछ उच्चभ्रू लोग यह कह कर ग़ज़ल से पल्ला झाडू लेते हैं कि ग़ज़ल हुस्नो इश्क़ पर केन्द्रित एक रोमांटिक विधा है; जबकि सचाई यह नहीं है। ग़ज़ल की रवायत ही कुछ ऐसी है कि हर बात, वह चाहे कितनी भी गहरी क्यों न हो, प्रिय या प्रियतम के माध्यम से ही कही जाती है। यह ग़ज़ल की सीमा भी है और शक्ति भी। यह शायर की प्रतिभा पर निर्भर करता है कि वह किस युक्ति से हुस्न और इश्क़ की सीमा में रहते हुए उसमें जिन्दगी के रंग भरता है और फ़लसफ़े हयात की बात करता है, जीवन और मृत्यु के दर्शन को समझने की कोशिश करता है :

अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जाएँगे

मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएँगे

जटिल रहस्यवादी चिन्तन को सहज सरल ढंग से अभिव्यक्त करना ग़ज़ल में ही सम्भव है।

कुछ लोग ग़ज़ल के विन्यास को देखते हुए उस पर शब्द क्रीड़ा का भी आरोप लगाते हैं, मगर यह उन कवियों के लिए कहा जा सकता है, जो ग़ज़ल के नाम पर शब्दों के साथ खेलते हैं और शब्द क्रीड़ा को ही अपनी उपलब्धि मान लेते हैं। ऐसे कवियों की संख्या भी कम नहीं है। ग़ज़ल में ही क्यों, शब्दों की बाज़ीगिरी किसी भी विधा में दिखाई जा सकती है। बड़ा शायर उसी को माना गया है, जो बहर, काफ़िए और रदीफ़ के अनुशासन के भीतर रह कर सिर्फ़ भाषा के चमत्कार दिखाने में ही नहीं रम जाता, बल्कि आम आदमी के संघर्षों, उम्मीदों, निराशाओं, सपनों को वाणी देता है । धीरे-धीरे ग़ज़ल ने संगीत के क्षेत्र में भी अपने लिए जगह महफूज कर ली। कुछ गायक ग़ज़ल का हाथ थाम कर लोकप्रियता के शिखर तक पहुँचे । बेग़म अख्तर, मेहदी हसन, गुलाम अली और जगजीत सिंह ग़ज़ल गायकी के जगमगाते सितारे हैं।

यह पुस्तक ग़ज़ल का ऐसा संकलन है जिसमें आपको उस्तादों के कलाम भी पढ़ने को मिलेंगे और ग़ज़ल के शुरुआती दौर से अब तक के सफर का एक जायजा भी मिल जाएगा। इसके लिए हमारा यह प्रयास कहाँ तक सफल रहा है, यह तो पाठक ही बताएँगे।

भूमिका

गज़ल उर्दू की एक लोकप्रिय साहित्यिक विधा है । पूछा जा सकता है कि अचानक यह गज़ल विशेषाक क्यों प्रकाशित किया जा रहा है, इसका औचित्य क्या है? वस्तुत साहित्य की किसी भी विधापर किक भाषा या देश का एकाधिकार नहीं होता। आज के कथा साहित्य का अवलोकन करें तो हम पाएगें, उस पर भी कई भाषाओं और कई देशें। का प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष प्रभाव है । आज हिन्दी कहानी का वह रूप नहीं है जो हितोपदेश अथवा कथा सरित्सागर का था। आज कहानी में कई अन्य भाषाओं के कथाकारों की प्रतिध्वनियाँ सुनी वा सकती हैं । किसी भी देश या भाषा की कहानी हो, उस पर चेखव, मोपासाँ, ओ हेनरी हेमिग्वे सामरसेट मॉम, काफ़्ता दास्तोएवस्की, मटो, शरच्चन्द्र. प्रेमचन्द, लू-शुन की प्रतिध्वनियाँ सुनी जा सकती हँ । जहाँ तक गज़ल का सम्बन्ध है, वह भी भारत में सार्वभाषिक विधा के रूप में विकसित हो रही है आज गज़ल के पाठक उर्दू से कहीं अधिक हिन्दी में हैं। गालिब को ही लें, अब तक उनके दीवान की हिन्दी में अनेक टीकाएं लिखी जा चुकी हैं और लिखी जा रही हैं। शायद ही हिन्दी का कोई कवि होगा, जिसने गालिब का अध्ययन न किया हो, मीर को न पड़ा हो, ज़ौक का नाम न सुना हो। हिन्दी में पचास के दशक में प्रकाश पंडित के सम्पादन में उर्दू शायरों की एक शृंखला प्रकाशित हुई थी जिसने हिन्दी के आम पाठकों का ध्यान खींचा था और देखते ही देखते उसके अनेक संस्करण प्रकाशित हो गये।आज हिन्दी के लगभग समस्त प्रकाशकों ने गज़लों के संकलन प्रकाशित किये हैंजो पाठकों में खूब लोकप्रिय है। अक्सर लोग यह कह कर गजल से पल्ला झाड लेते हैं कि गज़ल हुस्नों इश्कपर केन्द्रित एक रोमांटिक विधा है, जबकि सचाई यह नहीं है। गजल की रवायत ही कुछ ऐसी है कि हर बात, वह चाहे कितनी भी गहरी क्यो न हो प्रिय या प्रियतम के माध्यम से ही कही जाती है। यह गज़ल की सीमा भी है और शक्ति भी। यह शायर की प्रतिभा पर निर्भर करता है कि वह किस युक्ति से हुस और इश्क्र की सीमा में रहते हुए उसमे जिन्दगी के रग भरता हे और फ़लसफ़े हयात की बात करता है, जीवन और मृत्यु के दर्शन को समझने की कोशिश करता है :

अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जाएँगे

मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएँगे

जटिल रहस्यवादी चिन्तन को सहज सरल ढंग से अभिव्यक्त करना ग़ज़ल में ही सम्भव है ।

कुछ लोग ग़ज़ल के विन्यास को देखते हुए उस पर शब्द क्रीड़ा का भी आरोप लगाते हैं, मगर यह उन कवियों के लिए कहा जा सकता है, जो ग़ज़ल के नाम पर शब्दों के साथ खेलते हैं और शब्द क्रीड़ा को ही अपनी उपलब्धि मान लेते हैं । ऐसे कवियों की संख्या भी कम नहीं है । ग़ज़ल में ही क्यों, शब्दों की बाज़ीगिरी किसी भी विधा में दिखाई जा सकती है । बड़ा शायर उसी को माना गया है, जो बहर, काफ़िए और रदीफ़ के अनुशासन के भीतर रह कर सिर्फ़ भाषा के चमत्कार दिखाने में ही नहीं रम जाता, बल्कि आम आदमी के संघर्षों, उम्मीदों, निराशाओं, सपनों को वाणी देता है। धीरे-धीरे ग़ज़ल ने संगीत के क्षेत्र में भी अपने लिए जगह महफूज कर ली। कुछ गायक ग़ज़ल का हाथ थाम कर लोकप्रियता के शिखर तक पहुँचे । बेग़म अख्तर, मेहदी हसन, गुलाम अली और जगजीत सिंह ग़ज़ल गायकी के जगमगाते सितारे हैं ।

यह पुस्तक ग़ज़ल का ऐसा संकलन है जिसमें आपको उस्तादों के कलाम भी पढ़ने को मिलेंगे और ग़ज़ल के शुरुआती दौर से अब तक के सफर का एक जायजा भी मिल जाएगा । इसके लिए हमारा यह प्रयास कहाँ तक सफल रहा है, यह तो पाठक ही बताएँगे ।

 

अनुक्रम

1

अमीर ख़ुसरो

9

2

मुहम्मद कुली 'कुतुब' शाह

10

3

शम्मुद्दीन वली दकनी

11

4

मो. रफी सौदा

12

5

सिराज औरंगाबादी

13

6

ख्वाजा मीर दर्द

14

7

मीर मुहम्मद तक़ी 'मीर'

15

8

शैख गुलाम हम्दानी 'मुसहफ़ी'

17

9

सय्यद ईशा अल्लाह खाँ 'ईशा'

18

10

इमामबख़्श नासिख

19

11

बहादुर शाह जफर

20

12

ख्वाजा हैदर अली 'आतिश'

21

13

शेख इब्राहीम ज़ौक़

22

14

मिज़8असद-उल्लाह खाँ 'ग़ालिब'

23

15

मोमिन खाँ 'मोमिन'

26

16

नवाब मिर्ज़ा खाँ 'दाग़' देहलवी

28

17

मौलाना अलाफ़ हुसैन हाली

30

18

अकबर इलाहाबादी

31

19

अल्लामा मुहम्मद इक़बाल

32

20

शौकत अली खाँ 'फ़ानी' बदायूँनी

33

21

सैयद फ़ज़लुल हसन 'हसरत मोहानी'

34

22

ब्रजनारायण 'चकबस्त'

36

23

'यास', 'यगान: ' चंगेज़ी, अज़ीमाबादी

37

24

जिगर मुरादाबादी

38

25

'फिराक़' गोरखपुरी

39

26

शब्बीर हसन ख़ाँ जोश मलीहाबादी

40

27

बिस्मिल अज़ीमाबादी

42

28

हफ़ीज़ जालन्धरी

43

29

आनन्द नारायण मुल्ला

44

30

जमील मज़हरी

45

31

मख़्दूम मोहिउद्दीन

47

32

असरारुल हक़ 'मजाज़' लखनवी

49

33

खुमार बराबंकवी

50

34

नजीर बनारसी

52

35

नुशूर वाहिदी

53

36

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

55

37

मीराजी

58

38

अली सरदार जाफ़री

59

39

जांनिसार अख्तर

60

40

एहसान दानिश

61

41

अहमद नदीम क़ासमी

62

42

शकील बदायूँनी

64

43

जगन्नाथ आज़ाद

65

44

मज़रूह सुलानपुरी

66

45

कैफ़ी आज़मी

67

46

क़तील शिफ़ाई

70

47

साहिर लुधियानवी

72

48

नासिर काज़मी

73

49

कृष्य बिहारी 'नूर'

75

50

कलीम आजिज़

76

51

नरेश कुमार 'शाद'

77

52

राही मासूम रज़ा

78

53

इने इंशा

79

54

कुँवर महेन्द्र सिंह बेदी 'सहर'

80

55

मज़हर इमाम

81

56

मुनीर नियाज़ी

83

57

गुलज़ार

84

58

जॉन एलिया

87

59

अहमद फ़राज़

89

60

मनचन्दा 'बानी'

92

61

फ़ज़ल ताबिश

95

62

कृष्ण कुमार 'तूर'

96

63

शकेब जलाली

98

64

सुदर्शन फ़ाकिर

101

65

बशीर बद्र

103

66

शहरयार

105

67

मुज़फ़्फर हनफ़ी

108

68

नाज़िर सिद्दीक़ी

109

69

निदा फाज़ली

111

70

ज़हीर ग़ाज़ीपुरी

113

71

वसीम बरेलवी

114

72

जावेद अख़्तर

117

73

अमीर आग़ा क़ज़लबाश

119

74

अज़हर इनायती

121

75

शुजाम्-ख़ावर

122

76

शाहिद मीर

123

77

परवीन शाकिर

124

78

राहत इन्दौरी

126

79

मुनव्वर राना

128

80

नवाज देवबन्दी

130

81

शकील जमाली

131

82

अख्तर नज़्मी

132

83

कृष्ण अदीब

135

84

क़ैसर-उल-जाफ़री

137

85

प्रेम बारबर्टनी

140

86

कुमार 'पाशी'

141

87

राज इलाहाबादी

142

88

क़मी जलालाबादी

143

89

शमीम जयपुरी

144

90

शकील जमाली

145

91

शीन काफ़ निज़ाम

146

92

अहमद कमाल हाश्मी

149

93

शम्मी शम्स वारसी

150

94

सदा अम्बालवी

151

 

 

Sample Page


Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy
Based on your browsing history
Loading... Please wait

Items Related to उर्दू की बेहतरीन ग़ज़लें:... (Language and Literature | Books)

Masterpieces of URDU GHAZALS: From the 17th to the 20th Century
by K. C. Kanda
Paperback (Edition: 2004)
Sterling Publishers Pvt. Ltd.
Item Code: IDG272
$25.00
Add to Cart
Buy Now
 A Treasury Of Urdu Poetry (From Mir to Faiz) - Ghazals with English Renderings
by Kuldip Salil
Hardcover (Edition: 2010)
Rajpal & Sons
Item Code: NAE418
$30.00
Add to Cart
Buy Now
Master Couplets of Urdu Poetry (Urdu Text, Transliteration and Translation)
by K.C. Kanda
Paperback (Edition: 2009)
Sterling Publishers Pvt. Ltd.
Item Code: NAE669
$35.00
Add to Cart
Buy Now
Ghazals of Ghalib
by Aijaz Ahmad

Paperback (Edition: 2004)
Oxford University Press
Item Code: IDF216
$25.00
Add to Cart
Buy Now
THE OXFORD INDIA GHALIB (Life, Letters and Ghazals)
by Ed. by. RALPH RUSSELL
Hardcover (Edition: 2003)
Oxford University Press
Item Code: IDD646
$52.50
Add to Cart
Buy Now
Persian Ghazals of GHALIB
by Yusuf Husain
Hardcover (Edition: 2010)
Ghalib Institute
Item Code: IDG250
$27.50
Add to Cart
Buy Now
Mirza Ghalib: 100 Famous Ghazals (Text, Transliteration and Translation)
by Dr. Sarvat Rahman
Hardcover (Edition: 2011)
Abhinav Publications
Item Code: NAC331
$30.00
Add to Cart
Buy Now
Silvers of a Mirror – Glimpses of the Ghazal
by Shama Futehally
Hardcover (Edition: 2005)
Mapinlit Publishers
Item Code: IHL833
$20.00
Add to Cart
Buy Now
Quiver (Poems and Ghazals)
Item Code: NAG361
$20.00
Add to Cart
Buy Now
Ghazals of Ghalib
by Aijaz Ahmad
Paperback (Edition: 2012)
Oxford University Press
Item Code: NAF317
$25.00
Add to Cart
Buy Now
Testimonials
Thank you very much. Your sale prices are wonderful.
Michael, USA
Kailash Raj’s art, as always, is marvelous. We are so grateful to you for allowing your team to do these special canvases for us. Rarely do we see this caliber of art in modern times. Kailash Ji has taken the Swaminaryan monks’ suggestions to heart and executed each one with accuracy and a spiritual touch.
Sadasivanathaswami, Hawaii
Good selections. and ease of ordering. Thank you
Kris, USA
Thank you for having books on such rare topics as Samudrika Vidya, keep up the good work of finding these treasures and making them available.
Tulsi, USA
Received awesome customer service from Raje. Thank You very much.
Victor, USA
Just wanted to let you know the books arrived on Friday February 22nd. I could not believe how quickly my order arrived, 4 days from India. Wow! Seeing the post mark, touching and smelling the books made me long for your country. Reminded me it is time to visit again. Thank you again.
Patricia, Canada
Thank you for beautiful, devotional pieces.
Ms. Shantida, USA
Received doll safely and gift pack was a pleasant surprise. Keep up the good job.
Vidya, India
Thank you very much. Such a beautiful selection! I am very pleased with my chosen piece. I love just looking at the picture. Praise Mother Kali! I'm excited to see it in person
Michael, USA
Hello! I just wanted to say that I received my statues of Krishna and Shiva Nataraja today, which I have been eagerly awaiting, and they are FANTASTIC! Thank you so much, I am so happy with them and the service you have provided. I am sure I will place more orders in the future!
Nick, USA
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2019 © Exotic India