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चित्रलेखा: Chitralekha

पुस्तक परिचय

चित्रलेखा न केवल भगवतीचरण वर्मा को एक उपन्यासकार के रूप में प्रतिष्ठा दिलानेवाला पहला उपन्यास है बल्कि हिंदी के उन विरले उपन्यासों में भी गणनीय है, जिनकी लोकप्रियता बराबर काल की सीमा को लाँधती रही है ।

चित्रलेखाकी कथा पाप और पुण्य की समस्या पर आधारित है । पाप क्या है उसका निवास कहीं है? इन प्रश्नों का उत्तर खोजने के लिए महाप्रभु रत्नांबर के दो शिष्य, श्वेतांक और विशालदेव, क्रमश सामत बीजगुप्त और योगी कुमारगिरि की शरण में जाते हैं इनके साथ रहते हुए श्वेतांक और विशालदेव नितांत भिन्न जीवनानुभवों से गुजरते हैं । और उनके निष्कर्षों पर महाप्रभु रत्नांबर की टिप्पणी है, संसार में पाप कुछ भी नहीं है, यह केवल मनुष्य के दृष्टिकोण की विषमता का दूसरा नाम है । हम न पाप करते हैं और न पुण्य करते हैं, हम केवल वह करते हैं जो हमें करना पड़ता है ।

 

लेखक परिचय

जन्म 30 अगस्त, 1903

जन्मस्थान उन्नाव जिले (उप्र ) का शफीपुर गाँव, इलाहाबाद से बी ए , एल एल बी । प्रारंभ में कविता लेखन । फिर उपन्यासकार के नाते विख्यात । 1933 के करीब प्रतापगढ़ के राजा साहब भदरी के साथ रहे । 1936 के लगभग फिल्म कार्पोरशन, कलकत्ता में कार्य । कुछ दिनों विचार नामक साप्ताहिक का प्रकाशन संपादन । इसके बाद बंबई में फिल्म कथालेखन तथा दैनिक नवजीवन का संपादन। फिर आकाशवाणी के कई केन्द्रों में कार्य । बाद में, 1957 में मृत्यु पर्यंत स्वतंत्र साहित्यकार के रूप में लेखन । चित्रलेखा उपन्यास पर दो बार फिल्म निर्माण औंर भूले विसरे चित्र साहित्य अकादमी से सम्मानित । पद्मभूषण तथा राज्यसभा की मानद सदस्यता प्राप्त ।

प्रकाशित पुस्तकें अपने खिलौने पतन तीन वर्ष चित्रलेखा भूले बिसरे चित्र टेढ़े मेढ़े रास्ते सीधी सच्ची बातें सामर्थ्य और सीमा रेखा दह फिर नहीं आई सबहिं नचावत म गोसाई प्रश्न और मरीचिका युवराज चूण्डा हुमल (उपन्यास) प्रतिनिधि कहानियाँ मेरी कहानियाँ मोर्चाबदी तथा समूर्ण कहानियाँ (कहानी संग्रह) मेरी कविताएँ सविनय और एक नाराज क्तवइता (कविता संग्रह) मेरे नाटक बसीयत (नाटक) अतीत के गर्त है कहि न जाय का कहिए (संस्मरण) साहित्य के सिद्धात तया रूप (साहित्यालोचन)

निधन 5 अक्तूबर, 1981

आवरण व रेखांकन विक्रम नायक

मार्च 1971 में जन्मे विक्रम नायक ने एम ए (पेंटिंग) के साथ साथ वरिष्ठ चित्रकार श्री रामेश्वर बरूटा के मार्गदर्शन में त्रिवेणी कला संगम में कला की शिक्षा पाई । कई राष्ट्रीय एवं जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका सहित कई अन्तर्राष्ट्रीय दीर्घाओं में प्रदर्शनी । 1996 से व्यावसायिक चित्रकार व कार्टूनिस्ट के रूप में कार्यरत । कला के क्षेत्र में कई राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित । चित्रकला के अलावा फिल्म व नाटक निर्देशन एवं लेखन मैं विशेष रुचि ।

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