Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Sign In  |  Sign up
Your Cart (0)
Best Deals
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindu > हिन्दी > बुद्धि, भावना और कर्म: Intellect, Feeling and Karma
Subscribe to our newsletter and discounts
बुद्धि, भावना और कर्म: Intellect, Feeling and Karma
बुद्धि, भावना और कर्म: Intellect, Feeling and Karma
Description

पुस्तक के विषय में

बुद्धि भावना और कर्म के जागरण का तात्पर्य एक बेहतर मनुष्य के अन्वेषण और विकास से है। बेहतर बनने की सम्भावना मनुष्य में पहले से निहित है। यदि तुम आशावादी सकारात्मक और सृजनात्मक बने रह सको अपने विचारों और भावनाओं में संतुलन और सामजंस्य बनाये रख सको तो तुम्हारे व्यक्तित्व का कायाकल्प हो जाएगा तुम्हारे पुराने व्यक्तित्व की राख से एक नया प्रकाशमान् व्यक्तित्व प्रकट होगा वह नया व्यक्तित्व एक योगी का होगा। यही वह योग यात्रा है जिसके बारे में स्वामी शिवानन्द जी कहा करते थे और यही वह योग- यात्रा है। जिस पर स्वामी सत्यानन्द जी ने हम सब को अग्रसर किया है।

सन् 2009 से स्वामी निरंजनानन्द सरस्वती के जीवन का एक नया अध्याय प्रारम्भ हुआ है और मुंगेर में योगदृष्टि सत्संग शृंखला के अन्तर्गत योग के विभिन्न पक्षों पर दिये गये प्रबोधक व्याख्यान स्वामीजी की इसी नयी जीवनशैली के अंग हैं।

बुद्धि, भावना और कर्म का समग्र योग, स्वामीजी द्वारा गंगा दर्शन में अक्टूबर 2010 में दिये सत्संगों का विषय था इन सत्संगों में स्वामीजी ने सरस एवं सुबोध शैली में समझाया कि किस प्रकार इन प्रतिभाओं की प्रकृति को समझकर और एक क्रमबद्ध प्रणाली द्वारा इन्हें परिष्कृत एवं रूपान्तरित कर, हम अपने मन और भावनाओं में सामंजस्य ला सकते हैं और अपने कर्मों के प्रति नवीन दृष्टिकोण अपना सकते हैं ऐसी स्थिति में हमारे व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास सुलभता से हो सकता है।

स्वामी निरंजनानन्द सरस्वती

'एक यात्री था जो अनन्त काल से यात्रा करता रहा था उसकी यात्रा का उद्देश्य अपने नगर पहुँचना था पर वह नगर कत दूर था। यात्री धीरे- धीरे अपने पगों को अपने गन्तव्य की ओर बढ़ाते चलता था। नगर का नाम था ब्रह्मपुरी और यात्री का नाम था श्रीमान् आत्माराम सन् 2009 से स्वामी निरंजनानन्द सरस्वती के जीवन का एक नया अध्याय प्रारम्भ हुआ है और मुंगेर में योगदृष्टि सत्संग शृंखला के अन्तर्गत योग के विभिन्न पक्षों पर दिये गये प्रबोधक व्याख्यान स्वामीजी की इसी नयी जीवनशैली के अंग हैं।

हिमालय पर्वतों के सुरम्य, एकान्तमय वातावरण में गहन चिंतन करने के बाद स्वामीजी ने गंगा दर्शन लौटकर जून 2010 की योगदृष्टि सत्संग शृंखला में प्रवृत्ति एवं निवृत्ति-मार्ग को अपने सत्संगों का विषय चुना। उनके विवेचन की शुरुआत एक प्रतीकात्मक कथा से होती है जिसका मुख्य नायक, आत्माराम, अपने गन्तव्य, ब्रह्मपुरी की ओर यात्रा कर रहा है। इस कथा को आधार बनाकर स्वामीजी ने बहुत सुन्दर ढंग से प्रवृत्ति तथा निवृत्ति मार्ग के मुख्य लक्षणों, साधनाओं और लक्ष्यों का निरूपण किया है। सांसारिक जीवन जीते हुए भी किस प्रकार सुख, सामंजस्य और संतुष्टि का अनुभव किया जा सकता है; जीवन के किस मोड़ पर साधक वास्तविक रूप से आध्यात्मिक मार्ग पर आता है; और साधक की इस यात्रा में मार्गदर्शक की क्या भूमिका होती है-आध्यात्मिक जीवन से सम्बन्धित इन सभी आधारभूत प्रश्नों का उत्तर इन सत्संगों में निहित है।

 

विषय-सूची

 

1

सृष्टि और आध्यात्मिकता

1

 2

योग - जीवन का सम्पोषक

15

3

मन का प्रबंधन, हृदय की शल्यक्रिया

29

4

परिष्कृत भावना, रचनात्मक कर्म

40

बुद्धि, भावना और कर्म: Intellect, Feeling and Karma

Item Code:
NZA780
Cover:
Paperback
Edition:
2011
ISBN:
9789381620076
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
65 (8 Color & 20 B/W illustrations)
Other Details:
Weight of the Book:110gms
Price:
$15.00   Shipping Free
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
बुद्धि, भावना और कर्म: Intellect, Feeling and Karma

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 2868 times since 29th Nov, 2014

पुस्तक के विषय में

बुद्धि भावना और कर्म के जागरण का तात्पर्य एक बेहतर मनुष्य के अन्वेषण और विकास से है। बेहतर बनने की सम्भावना मनुष्य में पहले से निहित है। यदि तुम आशावादी सकारात्मक और सृजनात्मक बने रह सको अपने विचारों और भावनाओं में संतुलन और सामजंस्य बनाये रख सको तो तुम्हारे व्यक्तित्व का कायाकल्प हो जाएगा तुम्हारे पुराने व्यक्तित्व की राख से एक नया प्रकाशमान् व्यक्तित्व प्रकट होगा वह नया व्यक्तित्व एक योगी का होगा। यही वह योग यात्रा है जिसके बारे में स्वामी शिवानन्द जी कहा करते थे और यही वह योग- यात्रा है। जिस पर स्वामी सत्यानन्द जी ने हम सब को अग्रसर किया है।

सन् 2009 से स्वामी निरंजनानन्द सरस्वती के जीवन का एक नया अध्याय प्रारम्भ हुआ है और मुंगेर में योगदृष्टि सत्संग शृंखला के अन्तर्गत योग के विभिन्न पक्षों पर दिये गये प्रबोधक व्याख्यान स्वामीजी की इसी नयी जीवनशैली के अंग हैं।

बुद्धि, भावना और कर्म का समग्र योग, स्वामीजी द्वारा गंगा दर्शन में अक्टूबर 2010 में दिये सत्संगों का विषय था इन सत्संगों में स्वामीजी ने सरस एवं सुबोध शैली में समझाया कि किस प्रकार इन प्रतिभाओं की प्रकृति को समझकर और एक क्रमबद्ध प्रणाली द्वारा इन्हें परिष्कृत एवं रूपान्तरित कर, हम अपने मन और भावनाओं में सामंजस्य ला सकते हैं और अपने कर्मों के प्रति नवीन दृष्टिकोण अपना सकते हैं ऐसी स्थिति में हमारे व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास सुलभता से हो सकता है।

स्वामी निरंजनानन्द सरस्वती

'एक यात्री था जो अनन्त काल से यात्रा करता रहा था उसकी यात्रा का उद्देश्य अपने नगर पहुँचना था पर वह नगर कत दूर था। यात्री धीरे- धीरे अपने पगों को अपने गन्तव्य की ओर बढ़ाते चलता था। नगर का नाम था ब्रह्मपुरी और यात्री का नाम था श्रीमान् आत्माराम सन् 2009 से स्वामी निरंजनानन्द सरस्वती के जीवन का एक नया अध्याय प्रारम्भ हुआ है और मुंगेर में योगदृष्टि सत्संग शृंखला के अन्तर्गत योग के विभिन्न पक्षों पर दिये गये प्रबोधक व्याख्यान स्वामीजी की इसी नयी जीवनशैली के अंग हैं।

हिमालय पर्वतों के सुरम्य, एकान्तमय वातावरण में गहन चिंतन करने के बाद स्वामीजी ने गंगा दर्शन लौटकर जून 2010 की योगदृष्टि सत्संग शृंखला में प्रवृत्ति एवं निवृत्ति-मार्ग को अपने सत्संगों का विषय चुना। उनके विवेचन की शुरुआत एक प्रतीकात्मक कथा से होती है जिसका मुख्य नायक, आत्माराम, अपने गन्तव्य, ब्रह्मपुरी की ओर यात्रा कर रहा है। इस कथा को आधार बनाकर स्वामीजी ने बहुत सुन्दर ढंग से प्रवृत्ति तथा निवृत्ति मार्ग के मुख्य लक्षणों, साधनाओं और लक्ष्यों का निरूपण किया है। सांसारिक जीवन जीते हुए भी किस प्रकार सुख, सामंजस्य और संतुष्टि का अनुभव किया जा सकता है; जीवन के किस मोड़ पर साधक वास्तविक रूप से आध्यात्मिक मार्ग पर आता है; और साधक की इस यात्रा में मार्गदर्शक की क्या भूमिका होती है-आध्यात्मिक जीवन से सम्बन्धित इन सभी आधारभूत प्रश्नों का उत्तर इन सत्संगों में निहित है।

 

विषय-सूची

 

1

सृष्टि और आध्यात्मिकता

1

 2

योग - जीवन का सम्पोषक

15

3

मन का प्रबंधन, हृदय की शल्यक्रिया

29

4

परिष्कृत भावना, रचनात्मक कर्म

40

Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy
Based on your browsing history
Loading... Please wait

Items Related to बुद्धि, भावना और कर्म: Intellect,... (Hindu | Books)

Prana and Pranayama
Item Code: IHL188
$30.00
Add to Cart
Buy Now
Mind, Mind Management and Raja Yoga
Item Code: NAC973
$22.50
Add to Cart
Buy Now
The Yoga of Sage Vasishtha
Item Code: NAF259
$15.00
Add to Cart
Buy Now
Head, Heart and Hands
Item Code: NAC972
$11.50
Add to Cart
Buy Now
On The Wings of The Swan (Set of 8 Volumes)
Deal 10% Off
Item Code: NAF018
$165.00$148.50
You save: $16.50 (10%)
Add to Cart
Buy Now
The Yoga of Sri Krishna
Item Code: NAF230
$20.00
Add to Cart
Buy Now
Mantra and Yantra
Item Code: NAF450
$20.00
Add to Cart
Buy Now
Yoga Darshan: Vision of the Yoga Upanishads
Item Code: IDE239
$36.50
Add to Cart
Buy Now
Yoga Education for Children (Volume Two )
by Swami Niranjanananda
Paperback (Edition: 2012)
Yoga Publications Trust
Item Code: IDE259
$32.50
Add to Cart
Buy Now
The Paths of Pravritti and Nivritti
Item Code: NAC974
$12.50
Add to Cart
Buy Now
Yoga Sadhana Panorama (Volume Five)
Item Code: NAE499
$32.50
Add to Cart
Buy Now
Testimonials
Thank you very much. It was very easy ordering from the website. I hope to do future purchases from you. Thanks again.
Santiago, USA
Thank you for great service in the past. I am a returning customer and have purchased many Puranas from your firm. Please continue the great service on this order also.
Raghavan, USA
Excellent service. I feel that there is genuine concern for the welfare of customers and there orders. Many thanks
Jones, United Kingdom
I got the rare Pt Raju's book with a very speedy and positive service from Exotic India. Thanks a lot Exotic India family for such a fantabulous response.
Dr. A. K. Srivastava, Allahabad
It is with great pleasure to let you know that I did receive both books now and am really touched by your customer service. You developed great confidence in me. Will again purchase books from you.
Amrut, USA.
Thank you for existing and sharing India's wonderful heritage and legacy to the world.
Angela, UK
Dear sir/sirs, Thanks a million for the two books I ordered on your website. I have got both of them and they are very much helpful for my paper writing.
Sprinna, China
Exotic India has excellent and speedy service.
M Sherman, USA
Your selection of books is impressive and unique in USA. Thank you.
Jaganath, USA
Exotic India has the best selection of Hindu/Buddhist Gods and Goddesses in sculptures and books of anywhere I know.
Michael, USA
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2018 © Exotic India