Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Sign In  |  Sign up
Your Cart (0)
Best Deals
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Language and Literature > हिन्दी साहित्य > कुरु - कुरु स्वाहा (Kuru Kuru Swaha)
Subscribe to our newsletter and discounts
कुरु - कुरु स्वाहा (Kuru Kuru Swaha)
Pages from the book
कुरु - कुरु स्वाहा (Kuru Kuru Swaha)
Look Inside the Book
Description

कुरु- कुरु स्वाहा...

 

नाम बेढब, शैली बेडौल, कथानक बेपैंदे का । कुल मिलाकर बेजोड़ बकवास । अब यह पाठक पर है कि 'बकवास' को 'एब्सर्ड' का पर्याय माने या न माने । पहले शॉट से लेकर फाइनल फ्रीज तक यह एक कॉमेडी है, लेकिन इसी के एक पात्र के शब्दों में : ' 'एइसा कॉमेडी कि दर्शिक लोग जानेगा, केतना हास्यास्पद है त्रास अउर केतना त्रासद है हास्य । ''

उपन्यास का नायक है मनोहर श्याम जोशी, जो इस उपन्यास के लेखक मनोहर श्याम जोशी के अनुसार सर्वथा कल्पित पात्र है । यह नायक तिमंजिला है । पहली मंजिल में बसा है मनोहर-श्रद्धालु-भावुक किशोर । दूसरी मंजिल में 'जोशीजी' नामक इंण्टेलेक्चुअल और तीसरी में दुनियादार श्रद्धालु 'मैं' जो इस कथा को सुना रहा है । नायिका है पहुँचेली-एक अनाम और अबूझ पहेली, जो इस तिमंजिला नायक को धराशायी करने के लिए ही अवतरित हुई है ।

नायक-नायिका के चारों ओर है बम्बई का बुद्धिजीवी और अपराधजीवी जगत ।

'कुरु-कुरु स्वाहा' में कई-कई कथानक होते हुए भी कोई कथानक नहीं है, भाषा और शिल्प के कई-कई तेवर होते हुए भी कोई तेवर नहीं है, आधुनिकता और परम्परा की तमाम अनुगूँजें होते हुए भी कहीं कोई वादी-संवादी स्वर नहीं है । यह एक ऐसा उपन्यास है, जो स्वयं को नकारता ही चला जाता है ।.

 

जीवन परिचय

मनोहर श्याम जोशी

9 अगस्त, 1933 को अजमेर में जन्मे, लखनऊ विश्वविद्यालय के विज्ञान स्नातक मनोहर श्याम जोशी 'कल के वैज्ञानिक' की उपाधि पाने के बावजूद रोजी-रोटी की खातिर छात्र- जीवन से ही लेखक और पत्रकार बन गए । अमृतलाल नागर और अज्ञेय-इन दो आचार्यो का आशीर्वाद उन्हें प्राप्त हुआ । स्कूल मास्टरी, क्लर्की और बेरोजगारी के अनुभव बटोरने के बाद 21वे वर्ष से वह पूरी तरह मसिजीवी बन गए ।

प्रेस, रेडियो, टी.वी. वृत्तचित्र, विज्ञापन-सम्प्रेषण का ऐसा कोई माध्यम नहीं जिसके लिए उन्होंने सफलतापूर्वक लेखन-कार्य न किया हो । खेल-कूद से लेकर दर्शनशास्त्र तक कोई ऐसा विषय नहीं जिस पर उन्होंने कलम न उठाई हो । आलसीपन और आत्मसंशय उन्हें रचनाएँ पूरी कर डालने और छपवाने से हमेशा रोकता रहा है । पहली कहानी तब छपी जब वह अठारह वर्ष के थे लेकिन पहली बड़ी साहित्यिक कृति तब प्रकाशित करवाई जब सैंतालीस वर्ष के होने को आए ।

केन्द्रीय सूचना सेवा और टाइम्स ऑफ इंडिया समूह से होते हुए '67 में हिन्दुस्तान टाइम्स प्रकाशन में साप्ताहिक हिन्दुस्तान के सम्पादक बने और वहीं एक अंग्रेजी साप्ताहिक का भी सम्पादन किया । टेलीविजन धारावाहिक 'हम लोग' लिखने के लिए सन् '84 में सम्पादक की कुर्सी छोड़ दी और तब से स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं ।

प्रकाशित पुस्तकें: कुरु-कुरु स्वाहा..., कसप हरिया हरगलीज की हैरानी हमज़ाद ट-टा प्रोफेसर क्याप (उपन्यास); नेताजी कहिन (व्यंग्य संग्रह); बातों-बातों में  (साक्षात्कार); एक दुर्लभ व्यक्तित्व कैसे किस्सागो मन्दिर घाट की पैड़ियाँ (कहानी-संग्रह); पटकथा लेखन एक परिचय (मीडिया) । टेलीविजन धारावाहिक : हम लोग बुनियाद मुंगेरीलाल के हसीन सपने कक्काजी कहिन हमराही जमीन-आसमान और गाथा फिल्म : भ्रष्टाचार अणु राजा हे राम और निर्माणाधीन जमीन ।

आवरण-चित्र: रामकुमार

जन्म:1924, शिक्षा: दिल्ली विश्वविद्यालय; कला शिक्षण : दिल्ली तथा पेरिस में । शिमला, दिल्ली, मुम्बई, प्राग, वारसा, लंदन तथा बुदापेस्त आदि नगरों में एकल तथा विश्व की अनेक प्रतिष्ठित गैलरियों में सामूहिक प्रदर्शनियाँ ।

सम्मान : नेशनल अवार्ड, नई दिल्ली; ओनरेबल मैंशन, साओ पाओलो बाइनेल जे.डी. रॉकफेलर थर्ड फेलोशिप, न्यूयॉर्क; भारत सरकार द्वारा पद्मश्री; कालिदास सम्मान, भोपाल; आदि ।

रामकुमार प्रतिष्ठित कथाकार भी हैं ।

 

Sample Pages


कुरु - कुरु स्वाहा (Kuru Kuru Swaha)

Deal 20% Off
Item Code:
NZA218
Cover:
Paperback
Edition:
2018
ISBN:
9788126708956
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
208
Other Details:
Weight of the Books: 195 gms
Price:
$13.50
Discounted:
$8.10   Shipping Free
You Save:
$5.40 (20% + 25%)
Look Inside the Book
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
कुरु - कुरु स्वाहा (Kuru Kuru Swaha)

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 5049 times since 6th Aug, 2019

कुरु- कुरु स्वाहा...

 

नाम बेढब, शैली बेडौल, कथानक बेपैंदे का । कुल मिलाकर बेजोड़ बकवास । अब यह पाठक पर है कि 'बकवास' को 'एब्सर्ड' का पर्याय माने या न माने । पहले शॉट से लेकर फाइनल फ्रीज तक यह एक कॉमेडी है, लेकिन इसी के एक पात्र के शब्दों में : ' 'एइसा कॉमेडी कि दर्शिक लोग जानेगा, केतना हास्यास्पद है त्रास अउर केतना त्रासद है हास्य । ''

उपन्यास का नायक है मनोहर श्याम जोशी, जो इस उपन्यास के लेखक मनोहर श्याम जोशी के अनुसार सर्वथा कल्पित पात्र है । यह नायक तिमंजिला है । पहली मंजिल में बसा है मनोहर-श्रद्धालु-भावुक किशोर । दूसरी मंजिल में 'जोशीजी' नामक इंण्टेलेक्चुअल और तीसरी में दुनियादार श्रद्धालु 'मैं' जो इस कथा को सुना रहा है । नायिका है पहुँचेली-एक अनाम और अबूझ पहेली, जो इस तिमंजिला नायक को धराशायी करने के लिए ही अवतरित हुई है ।

नायक-नायिका के चारों ओर है बम्बई का बुद्धिजीवी और अपराधजीवी जगत ।

'कुरु-कुरु स्वाहा' में कई-कई कथानक होते हुए भी कोई कथानक नहीं है, भाषा और शिल्प के कई-कई तेवर होते हुए भी कोई तेवर नहीं है, आधुनिकता और परम्परा की तमाम अनुगूँजें होते हुए भी कहीं कोई वादी-संवादी स्वर नहीं है । यह एक ऐसा उपन्यास है, जो स्वयं को नकारता ही चला जाता है ।.

 

जीवन परिचय

मनोहर श्याम जोशी

9 अगस्त, 1933 को अजमेर में जन्मे, लखनऊ विश्वविद्यालय के विज्ञान स्नातक मनोहर श्याम जोशी 'कल के वैज्ञानिक' की उपाधि पाने के बावजूद रोजी-रोटी की खातिर छात्र- जीवन से ही लेखक और पत्रकार बन गए । अमृतलाल नागर और अज्ञेय-इन दो आचार्यो का आशीर्वाद उन्हें प्राप्त हुआ । स्कूल मास्टरी, क्लर्की और बेरोजगारी के अनुभव बटोरने के बाद 21वे वर्ष से वह पूरी तरह मसिजीवी बन गए ।

प्रेस, रेडियो, टी.वी. वृत्तचित्र, विज्ञापन-सम्प्रेषण का ऐसा कोई माध्यम नहीं जिसके लिए उन्होंने सफलतापूर्वक लेखन-कार्य न किया हो । खेल-कूद से लेकर दर्शनशास्त्र तक कोई ऐसा विषय नहीं जिस पर उन्होंने कलम न उठाई हो । आलसीपन और आत्मसंशय उन्हें रचनाएँ पूरी कर डालने और छपवाने से हमेशा रोकता रहा है । पहली कहानी तब छपी जब वह अठारह वर्ष के थे लेकिन पहली बड़ी साहित्यिक कृति तब प्रकाशित करवाई जब सैंतालीस वर्ष के होने को आए ।

केन्द्रीय सूचना सेवा और टाइम्स ऑफ इंडिया समूह से होते हुए '67 में हिन्दुस्तान टाइम्स प्रकाशन में साप्ताहिक हिन्दुस्तान के सम्पादक बने और वहीं एक अंग्रेजी साप्ताहिक का भी सम्पादन किया । टेलीविजन धारावाहिक 'हम लोग' लिखने के लिए सन् '84 में सम्पादक की कुर्सी छोड़ दी और तब से स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं ।

प्रकाशित पुस्तकें: कुरु-कुरु स्वाहा..., कसप हरिया हरगलीज की हैरानी हमज़ाद ट-टा प्रोफेसर क्याप (उपन्यास); नेताजी कहिन (व्यंग्य संग्रह); बातों-बातों में  (साक्षात्कार); एक दुर्लभ व्यक्तित्व कैसे किस्सागो मन्दिर घाट की पैड़ियाँ (कहानी-संग्रह); पटकथा लेखन एक परिचय (मीडिया) । टेलीविजन धारावाहिक : हम लोग बुनियाद मुंगेरीलाल के हसीन सपने कक्काजी कहिन हमराही जमीन-आसमान और गाथा फिल्म : भ्रष्टाचार अणु राजा हे राम और निर्माणाधीन जमीन ।

आवरण-चित्र: रामकुमार

जन्म:1924, शिक्षा: दिल्ली विश्वविद्यालय; कला शिक्षण : दिल्ली तथा पेरिस में । शिमला, दिल्ली, मुम्बई, प्राग, वारसा, लंदन तथा बुदापेस्त आदि नगरों में एकल तथा विश्व की अनेक प्रतिष्ठित गैलरियों में सामूहिक प्रदर्शनियाँ ।

सम्मान : नेशनल अवार्ड, नई दिल्ली; ओनरेबल मैंशन, साओ पाओलो बाइनेल जे.डी. रॉकफेलर थर्ड फेलोशिप, न्यूयॉर्क; भारत सरकार द्वारा पद्मश्री; कालिदास सम्मान, भोपाल; आदि ।

रामकुमार प्रतिष्ठित कथाकार भी हैं ।

 

Sample Pages


Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy
Based on your browsing history
Loading... Please wait

Items Related to कुरु - कुरु स्वाहा (Kuru Kuru Swaha) (Language and Literature | Books)

T’TA Professor (Winner of the Vodafone Crossword Book Award For Best Work in Indian 

Language Fiction Translation 2008)
Deal 20% Off
by Ira Pande
Paperback (Edition: 2008)
Penguin Books
Item Code: IHL342
$15.00$9.00
You save: $6.00 (20 + 25%)
Add to Cart
Buy Now
The Perplexity of Hariya Hercules
Deal 20% Off
by Robert A. Hueckstedt
Paperback (Edition: 2009)
Penguin Books
Item Code: IHL267
$20.00$12.00
You save: $8.00 (20 + 25%)
SOLD
Inspector Matadeen on the Moon
Deal 20% Off
by Harishankar Parsai
Paperback (Edition: 2003)
Katha
Item Code: NAG706
$13.00$7.80
You save: $5.20 (20 + 25%)
Add to Cart
Buy Now
Selected Bengali One Act Plays
by Ajit Kumar Ghosh and Amar Mudi
PAPERBACK (Edition: 2014)
SAHITYA AKADEMI
Item Code: NAR293
$20.00$15.00
You save: $5.00 (25%)
Add to Cart
Buy Now
Testimonials
appreciate being able to get this hard to find book from this great company Exotic India.
Mohan, USA
Both Om bracelets are amazing. Thanks again !!!
Fotis, Greece
Thank you for your wonderful website.
Jan, USA
Awesome collection! Certainly will recommend this site to friends and relatives. Appreciate quick delivery.
Sunil, UAE
Thank you so much, I'm honoured and grateful to receive such a beautiful piece of art of Lakshmi. Please congratulate the artist for his incredible artwork. Looking forward to receiving her on Haida Gwaii, Canada. I live on an island, surrounded by water, and feel Lakshmi's present all around me.
Kiki, Canada
Nice package, same as in Picture very clean written and understandable, I just want to say Thank you Exotic India Jai Hind.
Jeewan, USA
I received my order today. When I opened the FedEx packet, I did not expect to find such a perfectly wrapped package. The book has arrived in pristine condition and I am very impressed by your excellent customer service. It was my pleasure doing business with you and I look forward to many more transactions with your company. Again, many thanks for your fantastic customer service! Keep up the good work.
Sherry, Canada
I received the package today... Wonderfully wrapped and packaged (beautiful statue)! Please thank all involved for everything they do! I deeply appreciate everyone's efforts!
Frances, USA
I have always been delighted with your excellent service and variety of items.
James, USA
I've been happy with prior purchases from this site!
Priya, USA
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2019 © Exotic India