Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Sign In  |  Sign up
Your Cart (0)
Best Deals
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindu > हिन्दी > संत रैदास: Sant Raidas
Subscribe to our newsletter and discounts
संत रैदास:  Sant Raidas
संत रैदास: Sant Raidas
Description

संत रैदास

 

संत रैदास की वाणी में दीन-हीन और शोषितों के प्रति एक विकल पीड़ा,अपमान के विरुद्ध समाधान में प्रतिपल घुटन और समस्याओं के प्रतिएक जागरूक दृष्टि थी तथा वे यह भली प्रकार जानते थे कि पुरातनता से किस प्रकार ग्रहण किया जाए, परम्परा को किस स्थान तक सुरक्षित रखा जाए और नवीन परिस्थितियों के अनुरूप किस प्रकार मार्ग बनाया जाए । उनकी वाणी की इन्हीं विशेषताओं ने उनको अपने युग का ही नहीं, सदा-सर्वदा के लिए एक महान विचारक, चिन्तक तथा समाज सुधारक के रूप में प्रतिष्ठित कर दिया है

 

प्रस्तुत' संस्करण की भूमिका

 

प्रस्तुत पुस्तक ' सन्त रैदास ' का द्वितीय. संस्करण आपके हाथ मैं है । मूलत: यह पुस्तक कानपुर विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति माननीय श्री राधाकृष्ण के आग्रह कानपुर विश्वविद्यालय के सम्पूर्ण उपाधि धारकों को वितरित करने के लिये तैयार की जानी थी, किन्तु किन्हीं कारणों वश इस पुस्तक को मैंने एक चुनौती रूप में स्वीकार किया और सारे भारतवर्ष में घूमकर सन्त रैदासजी की सम्पूर्ण कृतियों का संकलन कर डाला । इन कृतियों के विभिन्न पाठभेद भी सामने आये (जिनका यथासम्भव इस पुस्तक में समावेश भी कर दिया गया है) । उपलब्ध सामग्री के प्रकाश में सन्त प्रवर के उपलब्ध साहित्य का संक्षिप्त आकलन भी करने की चेष्टा की गई किन्तु चूँकि यह: पुस्तक उस समय दीक्षान्त समारोह में वितरण हेतु लिखी जानी थी अत : पुस्तक का आकार सीमित ही रह सकता था । अत प्रत्येक पक्ष को संक्षिप्त करके प्रस्तुत करने का चेष्टा की गई और कहीं -कहीं तो इस प्रयास में समास--शैली ग्रहण करने के कारण पुस्तक के समीक्षा भाग के कुछ अंश दुरूह भी लगने लगते हैं । अस्तु पुस्तक प्रकाशित होकर दीक्षान्त समारोह मे वितरित हुई और मुझे यह. कहने में कोई संकोच नहीं है कि पुस्तक को हिन्दी जगत में हो नहीं विदेशों में भी पर्याप्त स्वागत । पुस्तक प्रकाशित होकर देश के विभित्र विश्वविद्यालयों के स्नातक राव स्नातकोत्तर स्तर पर हिंदी साहित्य के पाठ्यक्रम में सम्मिलित हुई. विदेशों की अनेक सम्बधित कृतियों में सन्दर्भितहुइ और इंग्लैण्ड की एक सस्था ने इस पुस्तक का अंग्रेजी अनुवाद भी करवाने की अनुमति मांग ली । जब यह संस्करण प्रैस में जा चुका था तब भी मनोहर पब्लिशर्स द्वारा प्रकाशित Life & of Raidas लेखक Caltoear तथा Friedlander में 'सन्त' रैदासले० योगेन्द्र सिंह के सन्दर्भ दृष्टिगोचर हुए ।

 

इधर सन्त साहित्य के प्रति हिन्दी साहित्य जगत में जो उपेसशा का भाव पूर्व में वह क्रमश कम होता जा रहा है । इस घटाटोप को तोड्ने का प्रथम प्रयास बंगला मेंसर्वप्रथम गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर तथा श्री क्षितिमोहन सेन ने किया थाहिन्दी क्षेत्र मैं इस प्रयास का श्रेय पद्यभूषण डॉ० रामकुमार वर्मा को जोता है और अब तो सन्त साहिस्य हिन्दी साहित्य के क्षेत्र की न केवल एक सशक्त विधा स्थापित हो चुकी है वरन् सामान्य जन की पीड़ा, निम्नतम दुखी व्यक्ति के उद्धार प्रयास को -अभिव्यक्ति देने के कारण, वर्तमान सामाजिक चेतना के प्रयास' के साथ शायद यह साहित्य विधा ही अधिक तालमेल में बैठती है । इसीलिये विभित्र अब सन्त साहित्य के अध्ययन को प्रमुखता दी जा रही है. जिसमें विभिन सन्तों का साहित्य अलग - अलग रूप से विशेष अध्ययन का विषय बन रहा है । जहाँ तक मेरी जानकारी में आया है. ' सन्त रैदास ' जी भी विभिन विश्वविद्यालयों में अध्ययन कै संत रैदास विषय बने हैं और कतिपय विश्वविद्यालयों में तो ' सन्त रैदास ' के साहित्य का विशेष अध्ययन करने के लिये विशेष पीठ (चेयर) स्थापित किये गये हैं ।

 

प्रस्तुत पुस्तक ' सन्त रैदास ' का प्रथम संस्करण बाजार में समाप्त हो चुका है । मैं इधर जहाँ भी जाता लेखक के नाते विद्वत् समाज मुझसे पुस्तक के द्वितीय संस्करण का आग्रह करता था । प्रस्तुत विषय ''सन्त रैदास, उनका उपलब्ध साहित्य, विभिन्न पाठभेद तथा समीक्षात्मक अध्ययन '' पर पुस्तक के प्रथम प्रकाशन तक जहाँ तक मेरी जानकारी थी. यह पहली पुस्तक थी । अभी भी इस प्रकार से समीक्षा तथा विभिन्न पाठभेद प्रस्तुत करते हुए शायद अब तक यह अन्तिम पुस्तक भी है । (यदि कोई अन्य पुस्तक उपलब्ध है तो विद्वत् समाज तथा माननीय पाठकगण मेरी ना जानकारी के लिये मुझे क्षमा कर दें) अत. मांग बराबर बढ़ती गई । इधर कुछ मेरा अन्य कार्यों में लगाते। ९ व्यस्त रहना या यों कहें कि कुछ प्रमाद पुस्तक का पुन : प्रकाशन विलम्बित करता रहा । सन्त समाज के आदेश, विद्वत् मण्डल के आग्रह तथा बहन राजलक्ष्मी वर्मा की लगातार स्नेहिल झिड़कियों ने पुन : इस ओर ध्यान देने को विवश किया और प्रस्तुत पुस्तक का वर्तमान संस्करण आपके । हाथ में है । पुस्तक प्रकाशन में भाई दिनेश कुमार जी गुप्त का मार्गदर्शन तथा लोकभारती. प्रकाशन के श्री दिनेश व रमेशजी मेरे आभार के विशेष पात्र हैं ।

 

अनुक्रम

प्रथम खण्ड: व्यक्तित्व

सन्त रैदास के विभिन्न नाम तथा व्यक्तित्व का निर्णय

१३

सन्त रैदास का जीवन-वृत्त

१५

सन्त रैदास का आधिकारिक जीवन-वृत्त

१९

द्वितीय खण्ड: रैदास की विचारधारा

पृष्ठभूमि

३४

उत्तरार्द्ध-विचारधारा

४६

(क)

दार्शनिक विचार

४६

(ख)

सन्त रैदास की साधना

६३

(ग)

रैदास और समाज-कल्याण

१००

तृतीय खण्ड: रैदास का साहित्य

रैदास के काव्य में कलात्मक सौन्दर्य

१०३

उपसंहार : रैदास का मूल्यांकन

११५

चतुर्थ खण्ड: रैदास की बानियों

वानियाँ (पाद-टिप्पणियों में पाठ-भेद सहित)

११८

परिशिष्ट

संत रैदास के जीवन से सम्बन्धित कुछ जनश्रुतियों

१७५

सहायक पुस्तकों की सूची

१८१

 

संत रैदास: Sant Raidas

Item Code:
NZA239
Cover:
Paperback
Edition:
2010
ISBN:
9788180312335
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
186
Other Details:
Weight of the Book: 200 gms
Price:
$10.00   Shipping Free
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
संत रैदास:  Sant Raidas

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 4406 times since 29th Nov, 2014

संत रैदास

 

संत रैदास की वाणी में दीन-हीन और शोषितों के प्रति एक विकल पीड़ा,अपमान के विरुद्ध समाधान में प्रतिपल घुटन और समस्याओं के प्रतिएक जागरूक दृष्टि थी तथा वे यह भली प्रकार जानते थे कि पुरातनता से किस प्रकार ग्रहण किया जाए, परम्परा को किस स्थान तक सुरक्षित रखा जाए और नवीन परिस्थितियों के अनुरूप किस प्रकार मार्ग बनाया जाए । उनकी वाणी की इन्हीं विशेषताओं ने उनको अपने युग का ही नहीं, सदा-सर्वदा के लिए एक महान विचारक, चिन्तक तथा समाज सुधारक के रूप में प्रतिष्ठित कर दिया है

 

प्रस्तुत' संस्करण की भूमिका

 

प्रस्तुत पुस्तक ' सन्त रैदास ' का द्वितीय. संस्करण आपके हाथ मैं है । मूलत: यह पुस्तक कानपुर विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति माननीय श्री राधाकृष्ण के आग्रह कानपुर विश्वविद्यालय के सम्पूर्ण उपाधि धारकों को वितरित करने के लिये तैयार की जानी थी, किन्तु किन्हीं कारणों वश इस पुस्तक को मैंने एक चुनौती रूप में स्वीकार किया और सारे भारतवर्ष में घूमकर सन्त रैदासजी की सम्पूर्ण कृतियों का संकलन कर डाला । इन कृतियों के विभिन्न पाठभेद भी सामने आये (जिनका यथासम्भव इस पुस्तक में समावेश भी कर दिया गया है) । उपलब्ध सामग्री के प्रकाश में सन्त प्रवर के उपलब्ध साहित्य का संक्षिप्त आकलन भी करने की चेष्टा की गई किन्तु चूँकि यह: पुस्तक उस समय दीक्षान्त समारोह में वितरण हेतु लिखी जानी थी अत : पुस्तक का आकार सीमित ही रह सकता था । अत प्रत्येक पक्ष को संक्षिप्त करके प्रस्तुत करने का चेष्टा की गई और कहीं -कहीं तो इस प्रयास में समास--शैली ग्रहण करने के कारण पुस्तक के समीक्षा भाग के कुछ अंश दुरूह भी लगने लगते हैं । अस्तु पुस्तक प्रकाशित होकर दीक्षान्त समारोह मे वितरित हुई और मुझे यह. कहने में कोई संकोच नहीं है कि पुस्तक को हिन्दी जगत में हो नहीं विदेशों में भी पर्याप्त स्वागत । पुस्तक प्रकाशित होकर देश के विभित्र विश्वविद्यालयों के स्नातक राव स्नातकोत्तर स्तर पर हिंदी साहित्य के पाठ्यक्रम में सम्मिलित हुई. विदेशों की अनेक सम्बधित कृतियों में सन्दर्भितहुइ और इंग्लैण्ड की एक सस्था ने इस पुस्तक का अंग्रेजी अनुवाद भी करवाने की अनुमति मांग ली । जब यह संस्करण प्रैस में जा चुका था तब भी मनोहर पब्लिशर्स द्वारा प्रकाशित Life & of Raidas लेखक Caltoear तथा Friedlander में 'सन्त' रैदासले० योगेन्द्र सिंह के सन्दर्भ दृष्टिगोचर हुए ।

 

इधर सन्त साहित्य के प्रति हिन्दी साहित्य जगत में जो उपेसशा का भाव पूर्व में वह क्रमश कम होता जा रहा है । इस घटाटोप को तोड्ने का प्रथम प्रयास बंगला मेंसर्वप्रथम गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर तथा श्री क्षितिमोहन सेन ने किया थाहिन्दी क्षेत्र मैं इस प्रयास का श्रेय पद्यभूषण डॉ० रामकुमार वर्मा को जोता है और अब तो सन्त साहिस्य हिन्दी साहित्य के क्षेत्र की न केवल एक सशक्त विधा स्थापित हो चुकी है वरन् सामान्य जन की पीड़ा, निम्नतम दुखी व्यक्ति के उद्धार प्रयास को -अभिव्यक्ति देने के कारण, वर्तमान सामाजिक चेतना के प्रयास' के साथ शायद यह साहित्य विधा ही अधिक तालमेल में बैठती है । इसीलिये विभित्र अब सन्त साहित्य के अध्ययन को प्रमुखता दी जा रही है. जिसमें विभिन सन्तों का साहित्य अलग - अलग रूप से विशेष अध्ययन का विषय बन रहा है । जहाँ तक मेरी जानकारी में आया है. ' सन्त रैदास ' जी भी विभिन विश्वविद्यालयों में अध्ययन कै संत रैदास विषय बने हैं और कतिपय विश्वविद्यालयों में तो ' सन्त रैदास ' के साहित्य का विशेष अध्ययन करने के लिये विशेष पीठ (चेयर) स्थापित किये गये हैं ।

 

प्रस्तुत पुस्तक ' सन्त रैदास ' का प्रथम संस्करण बाजार में समाप्त हो चुका है । मैं इधर जहाँ भी जाता लेखक के नाते विद्वत् समाज मुझसे पुस्तक के द्वितीय संस्करण का आग्रह करता था । प्रस्तुत विषय ''सन्त रैदास, उनका उपलब्ध साहित्य, विभिन्न पाठभेद तथा समीक्षात्मक अध्ययन '' पर पुस्तक के प्रथम प्रकाशन तक जहाँ तक मेरी जानकारी थी. यह पहली पुस्तक थी । अभी भी इस प्रकार से समीक्षा तथा विभिन्न पाठभेद प्रस्तुत करते हुए शायद अब तक यह अन्तिम पुस्तक भी है । (यदि कोई अन्य पुस्तक उपलब्ध है तो विद्वत् समाज तथा माननीय पाठकगण मेरी ना जानकारी के लिये मुझे क्षमा कर दें) अत. मांग बराबर बढ़ती गई । इधर कुछ मेरा अन्य कार्यों में लगाते। ९ व्यस्त रहना या यों कहें कि कुछ प्रमाद पुस्तक का पुन : प्रकाशन विलम्बित करता रहा । सन्त समाज के आदेश, विद्वत् मण्डल के आग्रह तथा बहन राजलक्ष्मी वर्मा की लगातार स्नेहिल झिड़कियों ने पुन : इस ओर ध्यान देने को विवश किया और प्रस्तुत पुस्तक का वर्तमान संस्करण आपके । हाथ में है । पुस्तक प्रकाशन में भाई दिनेश कुमार जी गुप्त का मार्गदर्शन तथा लोकभारती. प्रकाशन के श्री दिनेश व रमेशजी मेरे आभार के विशेष पात्र हैं ।

 

अनुक्रम

प्रथम खण्ड: व्यक्तित्व

सन्त रैदास के विभिन्न नाम तथा व्यक्तित्व का निर्णय

१३

सन्त रैदास का जीवन-वृत्त

१५

सन्त रैदास का आधिकारिक जीवन-वृत्त

१९

द्वितीय खण्ड: रैदास की विचारधारा

पृष्ठभूमि

३४

उत्तरार्द्ध-विचारधारा

४६

(क)

दार्शनिक विचार

४६

(ख)

सन्त रैदास की साधना

६३

(ग)

रैदास और समाज-कल्याण

१००

तृतीय खण्ड: रैदास का साहित्य

रैदास के काव्य में कलात्मक सौन्दर्य

१०३

उपसंहार : रैदास का मूल्यांकन

११५

चतुर्थ खण्ड: रैदास की बानियों

वानियाँ (पाद-टिप्पणियों में पाठ-भेद सहित)

११८

परिशिष्ट

संत रैदास के जीवन से सम्बन्धित कुछ जनश्रुतियों

१७५

सहायक पुस्तकों की सूची

१८१

 

Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy
Based on your browsing history
Loading... Please wait

Items Related to संत रैदास: Sant Raidas (Hindu | Books)

Praises to a Formless God: Nirguni Texts from North India
by David N. Lorenzen
Hardcover (Edition: 1997)
Sri Satguru Publications
Item Code: IDE340
$32.00
Add to Cart
Buy Now
Sacred Songs of India (Set of 10 Volumes)
by V.K. Subramanian
Hardcover (Edition: 1996)
Abhinav Publications
Item Code: NAG121
$175.00
Add to Cart
Buy Now
The Making of The Goddess (Karravai Durga in the Tamil Traditions)
by R. Mahalakshmi
Paperback (Edition: 2011)
Penguin Books India Pvt. Ltd.
Item Code: NAE967
$30.00
Add to Cart
Buy Now
Rosary of Saints
by Meera S. Sashital
Paperback (Edition: 2004)
Bharatiya Vidya Bhavan
Item Code: IHL251
$25.00
Add to Cart
Buy Now
Mystic Songs of Meera
by V.K. Subramanian
Paperback (Edition: 2010)
Hind Pocket Books
Item Code: NAC639
$30.00
Add to Cart
Buy Now
The Satapatha Brahmana (In Five Volumes)
Item Code: NAC457
$125.00
Add to Cart
Buy Now
Srimad Bhagavata Purana - In Two Volumes
Hardcover (Edition: 2014)
Gita Press, Gorakhpur
Item Code: IDD791
$65.00
Add to Cart
Buy Now
Devotional Songs of Narsi Mehta
Item Code: IDE749
$19.00
Add to Cart
Buy Now
101 Mystics of India
Item Code: IDI074
$25.00
Add to Cart
Buy Now
Feeding The Dead (Ancestor Worship in Ancient India)
by Matthew R. Sayers
Paperback (Edition: 2013)
Oxford University Press
Item Code: NAF746
$35.00
Add to Cart
Buy Now
Masculinity, Asceticism, Hinduism (Past and Present Imaginings of India)
by Chandrima Chakraborty
Hardcover (Edition: 2011)
Permanent Black
Item Code: NAH135
$40.00
Add to Cart
Buy Now
Testimonials
Thank you very much. It was very easy ordering from the website. I hope to do future purchases from you. Thanks again.
Santiago, USA
Thank you for great service in the past. I am a returning customer and have purchased many Puranas from your firm. Please continue the great service on this order also.
Raghavan, USA
Excellent service. I feel that there is genuine concern for the welfare of customers and there orders. Many thanks
Jones, United Kingdom
I got the rare Pt Raju's book with a very speedy and positive service from Exotic India. Thanks a lot Exotic India family for such a fantabulous response.
Dr. A. K. Srivastava, Allahabad
It is with great pleasure to let you know that I did receive both books now and am really touched by your customer service. You developed great confidence in me. Will again purchase books from you.
Amrut, USA.
Thank you for existing and sharing India's wonderful heritage and legacy to the world.
Angela, UK
Dear sir/sirs, Thanks a million for the two books I ordered on your website. I have got both of them and they are very much helpful for my paper writing.
Sprinna, China
Exotic India has excellent and speedy service.
M Sherman, USA
Your selection of books is impressive and unique in USA. Thank you.
Jaganath, USA
Exotic India has the best selection of Hindu/Buddhist Gods and Goddesses in sculptures and books of anywhere I know.
Michael, USA
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2018 © Exotic India