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सती सुकला: Sati Sukala

सती सुकला: Sati Sukala
$4.00$5.00  [ 20% off ]
Item Code: GPA327
Author: श्रीरामनाथ 'सुमन' (Shri Ramnath Suman)
Publisher: Gita Press, Gorakhpur
Language: Hindi
Edition: 2013
Pages: 48
Cover: Paperback
Other Details: 8.0 inch X 5.0 inch
weight of the book: 50 gms

निवेदन

भारतवर्ष सतियों और पतिव्रताओं पुण्यभूमि है। यहाँ महान् पतिव्रताएँ हो गयी हैं; उन्हींमेंसे सती सुकला एक हैं। पतिकी अनुपस्थितिमें इनकी बड़ी कड़ी-कड़ी परीक्षाएँ हुईं, परंतु ये अपने पातिव्रत्यके बलसे सभीमें सफलतापूर्वक उत्तीर्ण हो गयीं।

इस इतिहाससे एक शिक्षा यह मिलती है कि पुरुष यदि पतिव्रता पत्नीका परित्याग करके किसी धर्म-कार्यमें प्रवृत्त होता है तो उसे सफलता नहीं मिलती। देवता नाराज होते हैं, पितरोंकी दुर्गति होती है । अतएव पलीको साथ लेकर ही तीर्थयात्रादि धर्म-कार्य करने चाहिये।

इस छोटी-सी पुस्तिकासे हमारे भाई-बहिन लाभ उठावें, यही निवेदन है।

 

विषय-सूची

1

कृकलकी तीर्थयात्रा और सुकलासे सखियोंकी बातचीत

5

2

शूकरोंसे महाराज इक्ष्वाकुका युद्ध

10

3

शूकरके पूर्वजन्मकी कथा

16

4

शूकरीके पूर्वजन्मकी कथा

19

5

कंसमाता पद्मावतीकी कथा

22

6

पातिव्रत्यके त्यागका कुपरिणाम

29

7

इन्द्रके द्वारा सुकलाके पातिव्रत्यकी परीक्षाका आयोजन

32

8

इन्द्र और कामदेवपर सुकलाकी विजय

38

9

कृकलका घर लौटना और सुकलाके पातिव्रत्यकी महिमा

46

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