Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Sign In  |  Sign up
Your Cart (0)
Best Deals
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindu > हिन्दी > विज्ञान धर्म और कला: Science, Religion and Art
Subscribe to our newsletter and discounts
विज्ञान धर्म और कला: Science, Religion and Art
विज्ञान धर्म और कला: Science, Religion and Art
Description

पुस्तक के विषय में

 

विज्ञान, धर्म और कला के अंतर-संबंध को समझाते हुए ओशो कहते है: ये तीन बातें मैंने कहीं। विज्ञान प्रथम चरण है। वह तर्क का पहला कदम है। तर्क जब हार जाता है तो धर्म दूसरा चरण है, वह अनुभूति है। और जब अनुभूति सघन हो जाती है तो वर्षां शुरू हो जाती है, वह कला है। और इस कला की उपलब्धि सिर्फ उन्हें ही होती है जो ध्यान को उपलब्ध होते हैं। ध्यान की बाई-प्रॉडक्ट है। जो ध्यान के पहले कलाकार है, वह किसी न किसी अर्थों में वासना केंद्रित होता है। जो ध्यान के बाद कलाकार है, उसका जीवन, उसका कृत्य, उसका सृजन, सभी परमात्मा को समर्पित और परमात्मामय हो जाता है।

इस पुस्तक के कुछ विषय बिंदु:-

सत्य की खोज, सत्य का अनुभव सत्य की अभिव्यक्ति

सर्विस अबँव सेल्फ, सेवा स्वार्थ के ऊपर

क्या हम ऐसा मनुष्य पैदा कर सकेंगे जो समृद्ध भी हो और शांत भी?

जिसके पास शरीर के सुख भी हों और आत्मा के आनंद भी?

जीवन क्रांति के तीन

सूत्र धर्म का विधायक विज्ञान

प्रवेश के पूर्व

 

विज्ञान ने शक्ति तो दे दी, लेकिन शांति विज्ञान के देने की सामर्थ्य नही है । उसका कोई सवाल ही नहीं है उससे अपेक्षा भी नहीं करनी चाहिए । उससे मांग भी नहीं करनी चाहिए वह कोई प्रश्न ही नहीं है वह तो ऐसा है जैसे कोई गणित से कहने लगे कि कविता भी आप ही हमें दो तो गणित कविता केंसे देगा? गणित गणित देगा, गणित की अपनी जरूरत है । लेकिन गणित कविता नहीं दे सकता । या कोई कविता से कहने लगे कि हमे फैक्ट्री बना दो तो कविता फैक्ट्री कैसे कविता गीत दे सकती है प्रेम दे सकती है आनंद की पलक दे सकती है नृत्य दे सकती है लेकिन फैक्ट्री कैसे देगी ये तो पागलपन की बात है कोई कान से कहने लगे कि देखो, और कोई आंख से कहने लगे कि सुनो-वैसी ही बातें है विज्ञान से अपेक्षा भी नहीं करने का सवाल है।

शानि तो देगा धर्म शांति का विज्ञान धर्म है और शक्ति का विज्ञान विज्ञान है अंतस-चेतना कैसे शांत होती चली जाए,कितनी निर्विकार कितनी आनंद को उपलब्ध होती चली जाए, इसकी जो चेष्टा और साधना है वह धर्म है लेकिन धर्म केवल शांति दे सकता है शक्ति नहीं दे सकता।

अकेली शांति निर्बल कर देती है, कमजोर कर देती है अकेली शांति एक तरह की इपोटेस पैदा करती है, एक तरह की नपुंसकता पैदा करती है भारत जो इतना इंपोटेंट हो गया, उसका कोई और कारण नहीं है भारत की इतनी दीनता दरिद्रता और कमजोरी मे भारत के उन धार्मिक लोगों का हाथ है जिन्होंने विज्ञान का निषेध करके धर्म को विकसित किया कमजोर हो ही जाएगा। और शांत आदमी कमजोर हो जाए, यह उतना ही खतरनाक है जितना अशांत आदमी शक्तिशाली हो जाए एक सी बातें है ये दोनो शांत आदमी कमजोर हो जाए यह सारी दुनिया के लिए खतरनाक है । क्योंकि तब शांत आदमी दुनिया में परिवर्तन की सारी सामर्थ्य खो देता है। तब अच्छा आदमी भला आदमी दुनिया को बदलने की सारी हिम्मत खो देता है तब उसके पास एक ही काम रह जाता है कि अपने मंदिरों में बैठ जाए और भगवान की प्रार्थनाएं करता रहे । और वह भी तभी तक, जब तक कोई ताकतवर आदमी आकर उसके भगवान की मूर्ति को तोड़ फोड़ कर न फेंक दे, तभी तक प्रार्थनाएं करता रहे।

और जब कोई धीरे-धीरे कमजोर होता चला जाता है तो यह भी खयाल मे लें लें कि कमजोर आदमी बहुत दिन तक शांत भी नहीं रह सकता दीन-हीन आदमी बहुत दिन तक शांत भी नहीं रह सकता कष्ट में पड़ा हुआ आदमी बहुत दिन तक शांत भी नहीं रह सकता । तब फिर अशांति का जन्म शुरू हो जाएगा । और एक चक्कर शुरू होगा । अशांति का जन्म होगा तो विज्ञान की खोज शुरू हो जाएंगी । और विज्ञान शक्ति लाएगा, और अशांत आदमी के हाथो में शक्ति आ जाएंगी । यह चक्कर आज तक पूरी मनुष्यता को पीड़ित किए रहा है । एक विसियस सर्किल है। एक दुष्चक्र है। जिसमें आदमी पड़ गया । जैसे ही आदमी के हाथ में ताकत आती है, वह शात होने की कोशिश शुरू कर देता है ।

हिदुस्तान में जब शांति की और धर्म की लहर चली, उस वक्त हिदुस्तान बहुत समृद्ध था । बुद्ध और महावीर का वक्त हिदुस्तान मे स्वर्ण-वक्त था । बहुत समृद्ध था । एकदम सोने की चिडिया थी उस वक्त शांति की लहर और धर्म की बाते थी ।

शक्तिशाली आदमी शांत होने की कोशिश मे लग जाए तो धीरे-धीरे निर्बल हो जाता है । और निर्बल आदमी अशांत होता है तो अशांत होते से ही शक्ति की खोज मे लग जाता है ।

पूरब समृद्ध था, शांति की खोज की, दरिद्र हो गया । पश्चिम दरिद्र था, शक्ति की खोज की, समृद्ध हो गया । लेकिन अब तक शक्ति और शांति एक साथ निर्मित नही की जा सकी है । दोनो प्रयोग असफल हो गए। विज्ञान भी असफल हुआ, उससे हिरोशिमा और नागासाकी पैदा हुए । और अब तीसरा महायुद्ध पैदा होगा । धर्म भी अकेला असफल हो गया, उससे यह भारत के दीन-हीन, दरिद्र, भिखारी पैदा हुए, गुलाम पैदा हुए, बडे से बडा देश छोटे-छोटे देशो के हाथो मे गुलाम बन गया । उनके चरण अता रहा, वे उसकी छाती पर जूते रख कर चलते रहे, वह पड़ा रहा । वह राम-राम जपता रहा, वह ओम ओम करता रहा।

 ये दोनो प्रयोग असफल हो गए, जो अब तक आदमी ने किए है । एक तीसरे प्रयोग में सारी सभावना और सारा भविष्य है । और वह तीसरा प्रयोग है कि धर्म और विज्ञान के बीच सारा विरोध समाप्त हो । विरोध का कोई कारण भी नहीं है, कोई जगह भी नहीं है, कोई वजह भी नही है । धर्म और विज्ञान एक संस्कृति के अग बने । यह कब होगा और कैसे होगा?

अनुक्रम

1

विज्ञान, धर्म और कला

1

2

धर्म है बिलकुल वैयक्तिक

17

3

सेवा स्वार्थ के ऊपर

33

4

निर्विचार होने की कला

47

5

प्रेम और अपरिग्रह

65

6

मृत्यु का बोध

81

7

धर्म और विज्ञान का समन्वय

101

8

विधायक विज्ञान

115

9

विज्ञान स्मृति है और धर्म शान

133

10

धर्म को वैज्ञानिकता देनी जरूरी है

149

11

नया मनुष्य

159

ओशो एक परिचय

177

ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन रिजॉर्ट

178

ओशो का हिंदी साहित्य

179

 

 

 

विज्ञान धर्म और कला: Science, Religion and Art

Item Code:
NZA627
Cover:
Hardcover
Edition:
2011
ISBN:
9788172612313
Language:
Hindi
Size:
9.0 inch X 7.0 inch
Pages:
186 (1 B/W illustrations)
Other Details:
Weight of the Book: 470 gms
Price:
$25.00
Discounted:
$20.00   Shipping Free
You Save:
$5.00 (20%)
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
विज्ञान धर्म और कला: Science, Religion and Art

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 3641 times since 8th Jan, 2017

पुस्तक के विषय में

 

विज्ञान, धर्म और कला के अंतर-संबंध को समझाते हुए ओशो कहते है: ये तीन बातें मैंने कहीं। विज्ञान प्रथम चरण है। वह तर्क का पहला कदम है। तर्क जब हार जाता है तो धर्म दूसरा चरण है, वह अनुभूति है। और जब अनुभूति सघन हो जाती है तो वर्षां शुरू हो जाती है, वह कला है। और इस कला की उपलब्धि सिर्फ उन्हें ही होती है जो ध्यान को उपलब्ध होते हैं। ध्यान की बाई-प्रॉडक्ट है। जो ध्यान के पहले कलाकार है, वह किसी न किसी अर्थों में वासना केंद्रित होता है। जो ध्यान के बाद कलाकार है, उसका जीवन, उसका कृत्य, उसका सृजन, सभी परमात्मा को समर्पित और परमात्मामय हो जाता है।

इस पुस्तक के कुछ विषय बिंदु:-

सत्य की खोज, सत्य का अनुभव सत्य की अभिव्यक्ति

सर्विस अबँव सेल्फ, सेवा स्वार्थ के ऊपर

क्या हम ऐसा मनुष्य पैदा कर सकेंगे जो समृद्ध भी हो और शांत भी?

जिसके पास शरीर के सुख भी हों और आत्मा के आनंद भी?

जीवन क्रांति के तीन

सूत्र धर्म का विधायक विज्ञान

प्रवेश के पूर्व

 

विज्ञान ने शक्ति तो दे दी, लेकिन शांति विज्ञान के देने की सामर्थ्य नही है । उसका कोई सवाल ही नहीं है उससे अपेक्षा भी नहीं करनी चाहिए । उससे मांग भी नहीं करनी चाहिए वह कोई प्रश्न ही नहीं है वह तो ऐसा है जैसे कोई गणित से कहने लगे कि कविता भी आप ही हमें दो तो गणित कविता केंसे देगा? गणित गणित देगा, गणित की अपनी जरूरत है । लेकिन गणित कविता नहीं दे सकता । या कोई कविता से कहने लगे कि हमे फैक्ट्री बना दो तो कविता फैक्ट्री कैसे कविता गीत दे सकती है प्रेम दे सकती है आनंद की पलक दे सकती है नृत्य दे सकती है लेकिन फैक्ट्री कैसे देगी ये तो पागलपन की बात है कोई कान से कहने लगे कि देखो, और कोई आंख से कहने लगे कि सुनो-वैसी ही बातें है विज्ञान से अपेक्षा भी नहीं करने का सवाल है।

शानि तो देगा धर्म शांति का विज्ञान धर्म है और शक्ति का विज्ञान विज्ञान है अंतस-चेतना कैसे शांत होती चली जाए,कितनी निर्विकार कितनी आनंद को उपलब्ध होती चली जाए, इसकी जो चेष्टा और साधना है वह धर्म है लेकिन धर्म केवल शांति दे सकता है शक्ति नहीं दे सकता।

अकेली शांति निर्बल कर देती है, कमजोर कर देती है अकेली शांति एक तरह की इपोटेस पैदा करती है, एक तरह की नपुंसकता पैदा करती है भारत जो इतना इंपोटेंट हो गया, उसका कोई और कारण नहीं है भारत की इतनी दीनता दरिद्रता और कमजोरी मे भारत के उन धार्मिक लोगों का हाथ है जिन्होंने विज्ञान का निषेध करके धर्म को विकसित किया कमजोर हो ही जाएगा। और शांत आदमी कमजोर हो जाए, यह उतना ही खतरनाक है जितना अशांत आदमी शक्तिशाली हो जाए एक सी बातें है ये दोनो शांत आदमी कमजोर हो जाए यह सारी दुनिया के लिए खतरनाक है । क्योंकि तब शांत आदमी दुनिया में परिवर्तन की सारी सामर्थ्य खो देता है। तब अच्छा आदमी भला आदमी दुनिया को बदलने की सारी हिम्मत खो देता है तब उसके पास एक ही काम रह जाता है कि अपने मंदिरों में बैठ जाए और भगवान की प्रार्थनाएं करता रहे । और वह भी तभी तक, जब तक कोई ताकतवर आदमी आकर उसके भगवान की मूर्ति को तोड़ फोड़ कर न फेंक दे, तभी तक प्रार्थनाएं करता रहे।

और जब कोई धीरे-धीरे कमजोर होता चला जाता है तो यह भी खयाल मे लें लें कि कमजोर आदमी बहुत दिन तक शांत भी नहीं रह सकता दीन-हीन आदमी बहुत दिन तक शांत भी नहीं रह सकता कष्ट में पड़ा हुआ आदमी बहुत दिन तक शांत भी नहीं रह सकता । तब फिर अशांति का जन्म शुरू हो जाएगा । और एक चक्कर शुरू होगा । अशांति का जन्म होगा तो विज्ञान की खोज शुरू हो जाएंगी । और विज्ञान शक्ति लाएगा, और अशांत आदमी के हाथो में शक्ति आ जाएंगी । यह चक्कर आज तक पूरी मनुष्यता को पीड़ित किए रहा है । एक विसियस सर्किल है। एक दुष्चक्र है। जिसमें आदमी पड़ गया । जैसे ही आदमी के हाथ में ताकत आती है, वह शात होने की कोशिश शुरू कर देता है ।

हिदुस्तान में जब शांति की और धर्म की लहर चली, उस वक्त हिदुस्तान बहुत समृद्ध था । बुद्ध और महावीर का वक्त हिदुस्तान मे स्वर्ण-वक्त था । बहुत समृद्ध था । एकदम सोने की चिडिया थी उस वक्त शांति की लहर और धर्म की बाते थी ।

शक्तिशाली आदमी शांत होने की कोशिश मे लग जाए तो धीरे-धीरे निर्बल हो जाता है । और निर्बल आदमी अशांत होता है तो अशांत होते से ही शक्ति की खोज मे लग जाता है ।

पूरब समृद्ध था, शांति की खोज की, दरिद्र हो गया । पश्चिम दरिद्र था, शक्ति की खोज की, समृद्ध हो गया । लेकिन अब तक शक्ति और शांति एक साथ निर्मित नही की जा सकी है । दोनो प्रयोग असफल हो गए। विज्ञान भी असफल हुआ, उससे हिरोशिमा और नागासाकी पैदा हुए । और अब तीसरा महायुद्ध पैदा होगा । धर्म भी अकेला असफल हो गया, उससे यह भारत के दीन-हीन, दरिद्र, भिखारी पैदा हुए, गुलाम पैदा हुए, बडे से बडा देश छोटे-छोटे देशो के हाथो मे गुलाम बन गया । उनके चरण अता रहा, वे उसकी छाती पर जूते रख कर चलते रहे, वह पड़ा रहा । वह राम-राम जपता रहा, वह ओम ओम करता रहा।

 ये दोनो प्रयोग असफल हो गए, जो अब तक आदमी ने किए है । एक तीसरे प्रयोग में सारी सभावना और सारा भविष्य है । और वह तीसरा प्रयोग है कि धर्म और विज्ञान के बीच सारा विरोध समाप्त हो । विरोध का कोई कारण भी नहीं है, कोई जगह भी नहीं है, कोई वजह भी नही है । धर्म और विज्ञान एक संस्कृति के अग बने । यह कब होगा और कैसे होगा?

अनुक्रम

1

विज्ञान, धर्म और कला

1

2

धर्म है बिलकुल वैयक्तिक

17

3

सेवा स्वार्थ के ऊपर

33

4

निर्विचार होने की कला

47

5

प्रेम और अपरिग्रह

65

6

मृत्यु का बोध

81

7

धर्म और विज्ञान का समन्वय

101

8

विधायक विज्ञान

115

9

विज्ञान स्मृति है और धर्म शान

133

10

धर्म को वैज्ञानिकता देनी जरूरी है

149

11

नया मनुष्य

159

ओशो एक परिचय

177

ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन रिजॉर्ट

178

ओशो का हिंदी साहित्य

179

 

 

 

Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy
Based on your browsing history
Loading... Please wait

Items Related to विज्ञान धर्म और कला: Science,... (Hindu | Books)

मरौ हे जोगी मरौ: Osho on Gorakhnath
by ओशो (Osho)
Hardcover (Edition: 2013)
OSHO Media International
Item Code: NZA633
$40.00$32.00
You save: $8.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
ओशो अष्टावक्र महागीता: Osho Ashtavakra Mahageeta (Set of 9 Volumes)
by Osho
Paperback (Edition: 2015)
Diamond Pocket Books Pvt. Ltd.
Item Code: NZL732
$125.00$100.00
You save: $25.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
अध्यात्म उपनिषद (ओशो): Adhyatma Upanishad (Osho)
by Osho
Hardcover (Edition: 2015)
Osho Media International
Item Code: HAA273
$40.00$32.00
You save: $8.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
दरिया कहै सब्द निरबाना: Osho on Dariya
by ओशो (Osho)
Hardcover (Edition: 2016)
Osho Media International
Item Code: NZL302
$40.00$32.00
You save: $8.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
सत भाषै रैदास: Osho on Raidas
Item Code: NZE219
$25.00$20.00
You save: $5.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
चित चकमल लागै नहीं: Discourses by Osho
by ओशो (Osho)
Paperback (Edition: 2012)
Osho Media International
Item Code: NZA889
$12.00$9.60
You save: $2.40 (20%)
Add to Cart
Buy Now
ध्यान-सूत्र: Dhyana Sutra by Osho
by ओशो (Osho)
Paperback (Edition: 2012)
Osho Media International
Item Code: NZA890
$20.00$16.00
You save: $4.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
मैं मृत्यु सिखाता हूं: I Teach Death
by ओशो (Osho)
Hardcover (Edition: 2012)
OSHO Media International
Item Code: NZA644
$35.00$28.00
You save: $7.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
कन थोरे कांकर घने: The Voice of Malukdas
by ओशो (Osho)
Hardcover (Edition: 2015)
Osho Media International
Item Code: NZL301
$45.00$36.00
You save: $9.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
ध्यान दर्शन: Dhyan Darshan
by ओशो (Osho)
Hardcover (Edition: 2016)
Osho Media International
Item Code: NZL304
$25.00$20.00
You save: $5.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
जीवन दर्शन: Philosophy of Life
by ओशो (Osho)
Hardcover (Edition: 2016)
Osho Media International
Item Code: NZL303
$30.00$24.00
You save: $6.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Testimonials
Kailash Raj’s art, as always, is marvelous. We are so grateful to you for allowing your team to do these special canvases for us. Rarely do we see this caliber of art in modern times. Kailash Ji has taken the Swaminaryan monks’ suggestions to heart and executed each one with accuracy and a spiritual touch.
Sadasivanathaswami, Hawaii
Good selections. and ease of ordering. Thank you
Kris, USA
Thank you for having books on such rare topics as Samudrika Vidya, keep up the good work of finding these treasures and making them available.
Tulsi, USA
Received awesome customer service from Raje. Thank You very much.
Victor, USA
Just wanted to let you know the books arrived on Friday February 22nd. I could not believe how quickly my order arrived, 4 days from India. Wow! Seeing the post mark, touching and smelling the books made me long for your country. Reminded me it is time to visit again. Thank you again.
Patricia, Canada
Thank you for beautiful, devotional pieces.
Ms. Shantida, USA
Received doll safely and gift pack was a pleasant surprise. Keep up the good job.
Vidya, India
Thank you very much. Such a beautiful selection! I am very pleased with my chosen piece. I love just looking at the picture. Praise Mother Kali! I'm excited to see it in person
Michael, USA
Hello! I just wanted to say that I received my statues of Krishna and Shiva Nataraja today, which I have been eagerly awaiting, and they are FANTASTIC! Thank you so much, I am so happy with them and the service you have provided. I am sure I will place more orders in the future!
Nick, USA
Excellent products and efficient delivery.
R. Maharaj, Trinidad and Tobago
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2019 © Exotic India