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Books > Language and Literature > हिन्दी साहित्य > हिन्दी साहित्य का सरल इतिहास: A Simple History of Hindi Literature
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हिन्दी साहित्य का सरल इतिहास: A Simple History of Hindi Literature
हिन्दी साहित्य का सरल इतिहास: A Simple History of Hindi Literature
Description

पुस्तक के विषय में

प्रस्तुत पुस्तक में सरल और सुबोध भाषा में हिंदी साहित्य के इतिहास का अद्यावधि ब्यौरा प्रस्तुत किया गया है इस इतिहास के चार काल-खंडों के अलावा इसमें स्वातंत्रयोत्तर हिंदी साहित्य की अलग से विवेचना की गई है जिसमें हिंदी साहित्य पर हाल के वर्षो में भूमंडलीकरण दलित-चेतना नारी-चेतना उत्तर- आधुनिकता जैसी अत्याधुनिक प्रवृत्तियों का प्रभाव लक्षित हुआ है

इसमें हर कालखंड के प्रतिनिधि हिंदी रचनाकारों और उनकी प्रतिनिधि रचनाओं का सम्यक् परिचय उपलब्ध है साहित्य और इतिहास का परस्पर संबंध विषय की विवेचना में कभी भी लेखक की दृष्टि से ओझल नहीं होता विशेषकर मध्यकाल के साहित्य पर मध्यकालीन भारत के इतिहास से संबंधित नवीनतम जानकारी के आलोक में विचार किया गया है पुस्तक की संक्षिप्तता इसकी विशिष्टता है जो पुस्तक को परीक्षोपयोगी भी बनाती है प्रोफेसर विश्वनाथ त्रिपाठी को हिंदी साहित्य और उसके इतिहास के अध्ययन एवं अध्यापन का लंबा अनुभव रहा है। प्रस्तुत पुस्तक इसका प्रमाण है वे गोकुलचन्द्र शुक्ल आलोचना पुरस्कार डॉ. रामविलास शर्मा सम्मान और सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार (साहित्य सम्मान) से सम्मानित हो चुके हैं

आमुख

हिंदी साहित्य का इतिहास हिंदीभाषी जनता की आशाओं-आकांक्षाओं, उसके सुख-दुख, उल्लास और निराशा तथा अन्य मन स्थितियों का शब्द-दर्पण है कहने की आवश्यकता नहीं कि इसका परिचय प्राप्त करना अनेक दृष्टियों से आवश्यक और उपयोगी है इसीलिए देश के विद्यार्थियों को हिंदी साहित्य के इतिहास का परिचय शिक्षा के विविध स्तरों पर अनुकूल पद्धति से दिया जाता है यह काम जितना आवश्यक है उतना ही कठिन, क्योंकि हिंदी साहित्य के इतिहास के विकास की रेखा सरल और सीधी नहीं है उसमें जटिलताएँ हैं और मोड़ हैं इस पुस्तक में प्रयास किया गया है कि हिंदी साहित्य के सामान्य विद्यार्थी को हिंदी साहित्य के इतिहास का ऐसा परिचय कराया जाए कि इस विषय का उसे उपयोगी ज्ञान प्राप्त हो जाए भाषा ऐसी हो जिसे विद्यार्थी आसानी से समझ सके और उसे विषय की निर्भ्रांत जानकारी हो जाए इसके साथ ही यह जानकारी ऐसे स्तर की हो कि वह प्रारंभिक कक्षाओं से लेकर उच्च कक्षाओं की परीक्षाओं में भी अच्छे अंक प्राप्त कर सके विद्यार्थी को विषय में सीधा प्रवेश मिले, उसे व्यर्थ में इधर-उधर उलझना और भटकना पड़े साथ ही, हिंदी साहित्य के महत्त्वपूर्ण सूत्रों, कार्य-कारण संबंधों, विभिन्न काल-खंडों की प्रधान और अप्रधान प्रवृत्तियों की सम्यक् जानकारी मिल जाए, जिसके आधार गर वह साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर अपनी स्पष्ट अवधारणा प्रस्तुत कर सके

आधुनिक साहित्य पर लिखते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि हमारे समय में भारतीय और विदेशी वैचारिक प्रवृत्तियों का परिचय पाठकों को वैज्ञानिक पद्धति से मिल जाए और वे भूमंडलीय आधुनिकता-बोध से भली- भांति ऐसा परिचित हो जाएँ कि विभिन्न सामाजिक प्रश्नों पर मौलिक विचार करते समय भी उसका उपयोग कर सकें

आशा है कि इन सब बातों को ध्यान में रखकर लिखी गई हिंदी साहित्य का सरल इतिहास नामक यह पुस्तक सामान्य एवं विशिष्ट, दोनों स्तरों के पाठकों के लिए उपयोगी होगी

इस पुस्तक को लिखने और तैयार करने की योजना-प्रक्रिया में डॉ. वेदप्रकाश, श्री सीताराम शरण और श्री संजयनाथ ने उपयोगी परामर्श एवं सहयोग दिया है

 

विषय-क्रम

आमुख

v vi

विषय प्रवेश

ix xii

1 आदिकाल

1-10

2. भक्तिकाल

11-53

3. रीतिकाल

54 - 6

4. आधुनिक काल

143

5. स्वातंत्रोत्तर हिंदी साहित्य

144 -18

सहायक ग्रंथ

179

हिन्दी साहित्य का सरल इतिहास: A Simple History of Hindi Literature

Item Code:
NZA752
Cover:
Paperback
Edition:
2012
Publisher:
ISBN:
9788125032335
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
192
Other Details:
Weight of the Book:200 gms
Price:
$20.00   Shipping Free
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हिन्दी साहित्य का सरल इतिहास: A Simple History of Hindi Literature

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पुस्तक के विषय में

प्रस्तुत पुस्तक में सरल और सुबोध भाषा में हिंदी साहित्य के इतिहास का अद्यावधि ब्यौरा प्रस्तुत किया गया है इस इतिहास के चार काल-खंडों के अलावा इसमें स्वातंत्रयोत्तर हिंदी साहित्य की अलग से विवेचना की गई है जिसमें हिंदी साहित्य पर हाल के वर्षो में भूमंडलीकरण दलित-चेतना नारी-चेतना उत्तर- आधुनिकता जैसी अत्याधुनिक प्रवृत्तियों का प्रभाव लक्षित हुआ है

इसमें हर कालखंड के प्रतिनिधि हिंदी रचनाकारों और उनकी प्रतिनिधि रचनाओं का सम्यक् परिचय उपलब्ध है साहित्य और इतिहास का परस्पर संबंध विषय की विवेचना में कभी भी लेखक की दृष्टि से ओझल नहीं होता विशेषकर मध्यकाल के साहित्य पर मध्यकालीन भारत के इतिहास से संबंधित नवीनतम जानकारी के आलोक में विचार किया गया है पुस्तक की संक्षिप्तता इसकी विशिष्टता है जो पुस्तक को परीक्षोपयोगी भी बनाती है प्रोफेसर विश्वनाथ त्रिपाठी को हिंदी साहित्य और उसके इतिहास के अध्ययन एवं अध्यापन का लंबा अनुभव रहा है। प्रस्तुत पुस्तक इसका प्रमाण है वे गोकुलचन्द्र शुक्ल आलोचना पुरस्कार डॉ. रामविलास शर्मा सम्मान और सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार (साहित्य सम्मान) से सम्मानित हो चुके हैं

आमुख

हिंदी साहित्य का इतिहास हिंदीभाषी जनता की आशाओं-आकांक्षाओं, उसके सुख-दुख, उल्लास और निराशा तथा अन्य मन स्थितियों का शब्द-दर्पण है कहने की आवश्यकता नहीं कि इसका परिचय प्राप्त करना अनेक दृष्टियों से आवश्यक और उपयोगी है इसीलिए देश के विद्यार्थियों को हिंदी साहित्य के इतिहास का परिचय शिक्षा के विविध स्तरों पर अनुकूल पद्धति से दिया जाता है यह काम जितना आवश्यक है उतना ही कठिन, क्योंकि हिंदी साहित्य के इतिहास के विकास की रेखा सरल और सीधी नहीं है उसमें जटिलताएँ हैं और मोड़ हैं इस पुस्तक में प्रयास किया गया है कि हिंदी साहित्य के सामान्य विद्यार्थी को हिंदी साहित्य के इतिहास का ऐसा परिचय कराया जाए कि इस विषय का उसे उपयोगी ज्ञान प्राप्त हो जाए भाषा ऐसी हो जिसे विद्यार्थी आसानी से समझ सके और उसे विषय की निर्भ्रांत जानकारी हो जाए इसके साथ ही यह जानकारी ऐसे स्तर की हो कि वह प्रारंभिक कक्षाओं से लेकर उच्च कक्षाओं की परीक्षाओं में भी अच्छे अंक प्राप्त कर सके विद्यार्थी को विषय में सीधा प्रवेश मिले, उसे व्यर्थ में इधर-उधर उलझना और भटकना पड़े साथ ही, हिंदी साहित्य के महत्त्वपूर्ण सूत्रों, कार्य-कारण संबंधों, विभिन्न काल-खंडों की प्रधान और अप्रधान प्रवृत्तियों की सम्यक् जानकारी मिल जाए, जिसके आधार गर वह साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर अपनी स्पष्ट अवधारणा प्रस्तुत कर सके

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इस पुस्तक को लिखने और तैयार करने की योजना-प्रक्रिया में डॉ. वेदप्रकाश, श्री सीताराम शरण और श्री संजयनाथ ने उपयोगी परामर्श एवं सहयोग दिया है

 

विषय-क्रम

आमुख

v vi

विषय प्रवेश

ix xii

1 आदिकाल

1-10

2. भक्तिकाल

11-53

3. रीतिकाल

54 - 6

4. आधुनिक काल

143

5. स्वातंत्रोत्तर हिंदी साहित्य

144 -18

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