Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Sign In  |  Sign up
Your Cart (0)
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindu > हिन्दी > भक्त भगवन्त चरितावली एवं चरितामृत: Stories of Bhaktas
Displaying 1 of 7350         Previous  |  NextSubscribe to our newsletter and discounts
भक्त भगवन्त चरितावली एवं चरितामृत: Stories of Bhaktas
Pages from the book
भक्त भगवन्त चरितावली एवं चरितामृत: Stories of Bhaktas
Look Inside the Book
Description

संत शिरोमणि

अनंत श्री परमहंस राम मंगल दास जी

(1२.२.1893 - 31 .12.1984)

विश्व के एक आदित्य ब्रह्मलीन संत थे जिनके समक्ष देवी -देवता, हर धर्म के पैगम्बर व सिद्ध-संत नित्य ध्यान में तथा प्रत्यक्ष प्रकट होकर बातें करते तथा आध्यात्मिक पद लिखवाते थे | उन्होंने अपने गुरुदेव की अत्यंत कठिन सेवा की पांच आज्ञाओं (महावाक्यों) का आजीवन पालन किया : 'अयोध्या में रहना, चाहे तहा पर | कोई जमीन दे तो न लेना | मरे पर पास में कफ़न को पैसा न निकले | कोई मारे तो हाथ न चलाना | किसी से बैर न करना |'अनेक वर्षो से सोये नहीं, वे सदा अनहद नाद को सुनते रहते थे | अतः भक्तजन स्लेट अथवा कागज़ पर लिखकर प्रश्न पूछते | तत्पश्चात गुरुदेव अपने श्रीमुख से उनकी शंका समाधान करते व उपदेश देते |

वे करुणा के सागर थे तथा सदा नंगे पैर चलते थे की कही कोई जीव मर न जाए | उनका जीवन अत्यंत ही सरल व सादा था | सिर्फ एक अचला धोती पहने, बारहो मास एक सादी लकड़ी के तखत पर सुबह से रात तक बैठते तथा भक्तो को कल्याण मार्ग बताते |

श्री परमहंस राममंगल दास जी सभी धर्मो को मानते थे | उनके भक्त हर धर्म व जाति के थे | कोई भेद भाव नहीं था | हिन्दुओ को देवी -देवताओ के मंत्र , मुसलमानो को कलमा व नमाज पढ़ना, सिक्खो को उनकी गुरु परंपरा के अनुसार उपदेश व ईसाईओ को उनकी धर्म के अनुरूप मार्ग बताते थे | वे कहते थे की भगवान भाव व प्रेम के भूखे है, आडम्बर के नहीं |

उनका मुख्य उपदेश था : ' सादा भोजन , सादा कपड़ा, अपनी सच्ची कमाई का अन्न तथा अपने को सबसे नीचा मान लेना | कोई बेखता बेकसूर गाली दे , धक्का दे उसके हाथ जोड़ देना |' वे कहते थे 'मान अपमान फूंक दो तब भगवान की गोद में जाकर बैठ जाओगे | जो भगवान को सब कुछ सौप देता है, भगवान उससे बड़े खुश रहते है |जिसको भगवान का सच्चा भरोसा है उसे तकलीफ कैसे हो सकती है |'

'सेवा धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं है | बिना बुलाये जाकर सेवा कर आओ, जितनी शक्ति हो, बस भजन हो गया | बुलाकर जाने से सब कट जाता है |'

















Sample Page


भक्त भगवन्त चरितावली एवं चरितामृत: Stories of Bhaktas

Item Code:
NZE803
Cover:
Hardcover
Edition:
2012
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
575
Other Details:
Weight of the Book: 850 gms
Price:
$30.00
Discounted:
$24.00   Shipping Free
You Save:
$6.00 (20%)
Look Inside the Book
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
भक्त भगवन्त चरितावली एवं चरितामृत: Stories of Bhaktas

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 3349 times since 17th Jun, 2017

संत शिरोमणि

अनंत श्री परमहंस राम मंगल दास जी

(1२.२.1893 - 31 .12.1984)

विश्व के एक आदित्य ब्रह्मलीन संत थे जिनके समक्ष देवी -देवता, हर धर्म के पैगम्बर व सिद्ध-संत नित्य ध्यान में तथा प्रत्यक्ष प्रकट होकर बातें करते तथा आध्यात्मिक पद लिखवाते थे | उन्होंने अपने गुरुदेव की अत्यंत कठिन सेवा की पांच आज्ञाओं (महावाक्यों) का आजीवन पालन किया : 'अयोध्या में रहना, चाहे तहा पर | कोई जमीन दे तो न लेना | मरे पर पास में कफ़न को पैसा न निकले | कोई मारे तो हाथ न चलाना | किसी से बैर न करना |'अनेक वर्षो से सोये नहीं, वे सदा अनहद नाद को सुनते रहते थे | अतः भक्तजन स्लेट अथवा कागज़ पर लिखकर प्रश्न पूछते | तत्पश्चात गुरुदेव अपने श्रीमुख से उनकी शंका समाधान करते व उपदेश देते |

वे करुणा के सागर थे तथा सदा नंगे पैर चलते थे की कही कोई जीव मर न जाए | उनका जीवन अत्यंत ही सरल व सादा था | सिर्फ एक अचला धोती पहने, बारहो मास एक सादी लकड़ी के तखत पर सुबह से रात तक बैठते तथा भक्तो को कल्याण मार्ग बताते |

श्री परमहंस राममंगल दास जी सभी धर्मो को मानते थे | उनके भक्त हर धर्म व जाति के थे | कोई भेद भाव नहीं था | हिन्दुओ को देवी -देवताओ के मंत्र , मुसलमानो को कलमा व नमाज पढ़ना, सिक्खो को उनकी गुरु परंपरा के अनुसार उपदेश व ईसाईओ को उनकी धर्म के अनुरूप मार्ग बताते थे | वे कहते थे की भगवान भाव व प्रेम के भूखे है, आडम्बर के नहीं |

उनका मुख्य उपदेश था : ' सादा भोजन , सादा कपड़ा, अपनी सच्ची कमाई का अन्न तथा अपने को सबसे नीचा मान लेना | कोई बेखता बेकसूर गाली दे , धक्का दे उसके हाथ जोड़ देना |' वे कहते थे 'मान अपमान फूंक दो तब भगवान की गोद में जाकर बैठ जाओगे | जो भगवान को सब कुछ सौप देता है, भगवान उससे बड़े खुश रहते है |जिसको भगवान का सच्चा भरोसा है उसे तकलीफ कैसे हो सकती है |'

'सेवा धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं है | बिना बुलाये जाकर सेवा कर आओ, जितनी शक्ति हो, बस भजन हो गया | बुलाकर जाने से सब कट जाता है |'

















Sample Page


Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Based on your browsing history

Loading... Please wait

Related Items

भक्त नरसिंह मेहता:  Bhakta Narsi Mehta (An Ideal Bhakta)
by मंगल: (Mangal)
Paperback (Edition: 2015)
Gita Press, Gorakhpur
Item Code: GPA157
$7.00$5.60
You save: $1.40 (20%)
Add to Cart
Buy Now
ब्रज नव भक्तमाल: Vraja Nava Bhakt Mala
by अनुरागी (Anuragi)
Hardcover (Edition: 2011)
Anuragi Baba
Item Code: HAA463
$20.00$16.00
You save: $4.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
भक्त प्रह्लाद: Bhakt Prahlad
Item Code: NZD298
$10.00$8.00
You save: $2.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
श्री एकनाथ चरित्र: Life and Thought of the Great Bhakta Eknath
Paperback (Edition: 2013)
Gita Press, Gorakhpur
Item Code: GPA053
$5.00$4.00
You save: $1.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
भक्त प्रह्लाद: Bhakt Prahlad
Item Code: NZF833
$6.00$4.80
You save: $1.20 (20%)
Add to Cart
Buy Now
भक्तत्रयी: Bhakta Trayi
Item Code: NZE884
$25.00$20.00
You save: $5.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now

Testimonials

Keep up the good work.
Harihar, Canada
I have bought Ganesh Bell in past and every visitors at my home has appreciated very much. You have quality product and good service. Keep it up with good business. This time I am buying Ganesh-Laxmi bells.
Kanu, USA
I am a long-time customer of Exotic India for gifts for me and friends and family. We are never disappointed. Your jewelry craftspeople are very skilled artists. You must treasure them. And we always look forward to the beautifully decorated boxes you use to ship your jewelry.
Diane, USA
I have always enjoyed browsing through the website. I was recently in south India, and was amazed to note that the bronze statues made in Kumbakonam and Thanjavur had similar pricing as Exotic India.
Heramba, USA
Thank you very much for your services. I ordered a Dhanvantari Deity from this site and it came quickly and in good condition. Now Sri Dhanvantari ji is worshipped regularly before seeing each client and in the offering of our medicinal products. Thanks again.
Max, USA
Thank you for shipping my 2 Books! Absolutli a great job in this short time, 3 working days from India to Switzerland it`s fantastic!!! You have won some new clients!
Ruedi, Switzerland
I am overwhelmed with the amount of hard-to-find Hindu scriptural texts that I have been able to locate on the Exotic India website as well as other authentic cultural items from India. I am impressed with your fast and reliable shipping methods.
Lee Scott, USA
Your service is excellent.
Shambhu, USA
Exotic India has the best selection of Hindu/Buddhist statues at the best prices and best shipping that I know of.I have bought many statues from them.I am thankful for their online presence.
Michael, USA
Thanks for sharpening our skills with wisdom and sense of humor.The torchbearers of the ancient deity religion are spread around the world and the books of wisdom from India bridges the gap between east and west.
Kaushiki, USA
TRUSTe
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2018 © Exotic India