Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Sign In  |  Sign up
Your Cart (0)
Best Deals
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Language and Literature > हिन्दी साहित्य > उर्दू शायरी-एक चयन: Urdu Shayari- A Selection
Subscribe to our newsletter and discounts
उर्दू शायरी-एक चयन: Urdu Shayari- A Selection
Pages from the book
उर्दू शायरी-एक चयन: Urdu Shayari- A Selection
Look Inside the Book
Description

 

लेखिका के विषय में

डॉ. शाहीना तबस्सुम

जन्म: दिल्ली

शिक्षा: एम ए., एम फिल पीएच डी, दिल्ली विश्वविद्यालय उर्दू पुस्तकें फरहग--कलाम--मीर (आलोचनात्मक भूमिका सहित), उर्दू में जदीद शेअरी रिवायत तसलसुल और इन्हिराफ़ (आलोचना) इक्कीसवीं सदी की शायरी (संपादन), मिस्टर जिनाह (अनुवाद) शेअर--अदब के बाब में (आलोचना), मेवे के पेड़ (अनुवाद) हिंदी पुस्तकें कुर्रतुल-ऐन-हैदर की श्रेष्ठ कहानियाँ (अनुवाद) उड़ान की शर्त, हिंदी कहानियाँ (संपादन), ज़ाफ़री की शायरी (संपादन), कुछ गजलें कुछ गीत (संपादन) पुरस्कार' मिर्जा गालिब प्रोईज़ (दिल्ली विश्वविद्यालय), दिल्ली, उर्दू अकादमी तथा उतर प्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा पुस्तकों पर पुरस्कार ।

संप्रति: असिस्टेंट प्रोफेसर, जाकिर हुसैन पोस्ट ग्रेजुएट इवनिंग कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) दिल्ली।

लेखक के विषय में

डॉ. कुलदीप सलिल

जन्म: 30 दिसंबर, 1938, सियालकोट (पाकिस्तान)

कुलदीप सलिल का पहला कवितासंग्रह 'बीस साल का सफर' सन् 1979 में प्रकाशित हुआ था कवि-समीक्षक सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने जो उन दिनों सारिका के संपादक थे, अपनी वार्षिक समीक्षा में इसकी गणना वर्ष के सर्वश्रेष्ठ पुस्तकों में की यह संग्रह काफी चर्चित रहा । कुलदीप सलिल की दूसरी काव्य पुस्तक 'हवस के शहर में' जो कि एक गजल सग्रह है सन् 1987 में सामने आया पुस्तकाकार होने से पहले इस पूरे सग्रह को 'दीर्घा' ने अपने एक विशेषांक में प्रकाशित किया। दिल्ली हिंदी अकादमी ने 'साहित्यिक कृति पुरस्कार' के अंतर्गत इस सग्रहको सम्मानित किया । 'हवस के शहर में' से एक ग़ज़लकार के रूप में कुलदीप सलिल की पहचान बन गई। इनकी तीसरी पुस्तक ( और द्वय ग़ज़ल संग्रह) 'जो कह न सके' सर 2000 में प्रकाशित हुआ। और सन् 2004 में 'आवाज का रिश्ता' शीर्षक से तीसरा ग़ज़ल संग्रहवाणी प्रकाशन से सामने आया सन् 2005 में 20 अंग्रेज़ी काइयों का हिंदी काव्यानुवाद अग्रेजी के श्रेष्ठ कवि और उनकी श्रेष्ठ 'कविताएँ' के नाम से छपा हिंदी के अलावा अनेक पत्र-पत्रिकाओं मे इनकी अंग्रेज़ी कविताएँ हिंदी काव्यानुवाद सहित नियमित रूप मे कई वर्षों से प्रकाशित हो रही हैं । हाल में ही कुलदीप सलिल के ग़ालिब, फ़ैज, इक़बाल और अहमद फ़राज़ की कविता के अंग्रेज़ी काव्यानुवाद सामने आए हैं इस अनुवाद के लिए इन्हें साहित्य अकादमी और डी. . वी. लिटरेरी अवार्डसे कमेटी ने पुरस्कृत किया।

कुलदीप सलिल ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र और अंग्रेज़ी में एम. . किया वे दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से अंग्रेज़ी विभाग से रीडर के पद से सेवामुक्त हुए हैं।

प्रकाशकीय

यह प्रसन्नता का विषय है कि नई पीढी में उर्दू शायरों को पढने-समझने का शौक बढ़ रहा है हम सभी का अनुभव यही है कि एक नया पाठकसमाज सामने आ रहा है और इस समाज की जड़ीभूत सौंदर्याभिरुचियाँ टूटी हैं रोजमर्रा की जिदगी में उर्दू-शायरी का बोलबाला बढा है और प्रबुद्ध वर्ग भाषणों-वार्ताओं में उर्दू शेर बोलता है उर्दूकी सबसे कीमती चीज है-उर्दू-ग़ज़ल उर्दू-ग़ज़ल का चस्का हिंदी-पाठकों कवियों को ऐसा लग गया है कि हिंदी के अनेक कवि उर्दू गजल की तर्ज पर हिंदी में ग़ज़ल लिख रहे हैं और हिंदी कवि सम्मेलनों में उर्दू ग़ज़ल की धूम रहती है । हिंदी के कवि उर्दू-ग़ज़ल मे नए-नए प्रयोग कर रहे हैं और इसमें नया भाव-बोध आ रहा है उर्दू जानने वालों की सख्या कम हो रही हे, लेकिन उर्दू शायरी के संकलन भारतीय भाषाओं के बाजार में खूब बिक रहे हैं इसका कारण है कि खडी बोली में हिंदी उर्दू दोनों भाषाओं के शब्द एकखास रग और लय का आनंद बढ़ा रहे हैं यह बात कितनी दिलचस्प है कि खड़ी बोली का पहला नमूना अमीर खुसरो में मिलता है।

आज उर्दू शायरी के नाम पर केवल जाम--मीना का, कोरे इश्क-मुहब्बत की सात खत्म हो चुकी है भारत में उर्दू सांस्कृतिक नवजागरण में सहयोग देनेवाली भाषा रही है आजादी के आंदोलन का एक बड़ा देशभक्ति, प्रकृति प्रेम का अरमान उर्दू-कविता में मिलता है। उर्दू में हिंदी की तरह हमारी जातीय अस्मिता निखरकर सामने आती है। सौंदर्य-बोध का नया गुलदस्ता उर्दू सजाती-सँवारती है । इस संकलन में वली दकनी से लेकर फ़ैज अहमद फ़ैज, बशीर बद्र, निदा फ़ाज़ली तक को आप एक साथ पाएँगे । मैं हिंदी-उर्दू-अंग्रेजी के विद्वान प्रो. कुलदीप सलिल के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ जिन्होंने एक विशिष्ट भूमिका के साथ यह संकलन पाठकों तक पहुँचाने का अविस्मरणीय श्रम किया है । हमें विश्वास है कि इस संकलन का पाठक खुले दिल से स्वागत करेंगे।

 

अनुक्रम

1

दो शब्द

13

2

वली दकनी

27

3

जिसे इश्क का तीर कारी लगे

28

4

कूच: ए-यार ऐन कासी है

29

5

मीर तक़ी मीर

30

6

यारो, मुझे मुआफ रखो, मैं नशे में हूँ

32

7

ग़फ़िल हैं ऐसे सोते हैं गोया जहाँ के लोग

33

8

फ़क़ीराना आए सदा कर चले

34

9

उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया

35

10

पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा हाल हमारा जाने है

36

11

सोज़िशे-दिल से मुफ्त गलते हैं

37

12

आ जाएँ हम नज़र कोई दम ये बहुत है याँ

38

13

नजीर अकबराबादी

39

14

बुढ़ापा

40

15

मुहम्मद रफ़ी 'सौदा'

42

16

गुल फेंके हैं औरों की तरफ बल्कि समर भी

44

17

बदला तेरे सितम का कोई तुझसे क्या करे

45

18

ख़्वाजा मीर दर्द

46

19

तोहमतें चंद अपने जिम्मे धर चले

47

20

हम तुझसे किस हवस की फलक जुस्तजू करें

48

21

इन्शा अल्लाह ख़ाँ 'इन्शा'

49

22

कमर बाँधे हुए चलने को याँ सब यार बैठे हैं

50

23

असद उल्लाह ख़ाँ 'ग़ालिब'

51

24

ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाले-यार होता

53

25

आह को चाहिए इक उम्र, असर होने तक

54

26

किसी को देके दिल कोई नवा संजे-फुग़ाँ क्यों हो

55

27

वो फ़िराक़ और वो विसाल कहाँ

56

28

नुक्ताचीं है ग़मे-दिल उसको सुनाए न बने

57

29

दिल ही तो है, न संगो-ख़िश्त दर्द से भर न आए क्यों

58

30

बाज़ीच-ए- अत्फ़ाल है दुनिया, मिरे आगे

59

31

सब कहाँ-कुछ लाला- ओ-गुल में नुमायाँ हो गईं

60

32

शेख़ मोहम्मद इब्राहीम ज़ौक

61

33

लाई हयात आए क़ज़ा ले चली, चले

63

34

अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जाएँगे

64

35

मोमिन ख़ाँ मोमिन

65

36

वो जो हम में तुम में क़रार था, तुम्हें याद हो कि न याद हो

67

37

नावक-अंदाज़ जिधर दीद:-ए-जानाँ होंगे

68

38

बहादुर शाह ज़फ़र

69

39

न किसी की आख का नूर हूँ न किसी के दिल का क़रार हूँ

71

40

लगता नहीं है दिल मेरा, उजड़े दयार में

72

41

दाग़ देहलवी

73

42

ख़ातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया

75

43

दिल गया, तुमने लिया हम क्या करें

76

44

हसरत मोहानी

77

45

भुलाता लाख हूँ लेकिन बराबर याद आते हैं

78

46

मोहम्मद इक़बाल

79

47

साक़ी नामा

81

48

सितारों से आगे जहाँ और भी हैं

84

49

तराना-ए-हिंदी

85

50

नया शिवाला

87

51

तस्वीरे-दर्द

89

52

अकबर इलाहाबादी

92

53

दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ

94

54

फ़लसफ़ी को बहस के अंदर खुदा मिलता नहीं

95

55

एक फ़रज़ी लतीफ़ा

96

56

हंगामा है क्यों बरपा

97

57

अख़्तर शीरानी

98

58

ओ देस से आनेवाले बता

99

59

मजाज़ लखनवी

101

60

जमाले-इश्क़ में दीवाना

103

61

आवारा

104

62

नौजवान ख़ातून से

107

63

जुनूने-शौक़ अब भी कम नहीं है

109

64

इज़्मे-ख़िराम लेते हुए आस्माँ से हम

110

65

जोश मलीहाबादी

111

66

शिकस्ते-ज़िंदाँ

113

67

एक गीत

114

68

सोज़े-ग़म दे के मुझे उसने ये इर्शाद किया

116

69

गुंचे! तेरी सादगी पे दिल हिलता है

117

70

जिगर मुरादाबादी

118

71

इक लफ़्ज़-ए-मुहब्बत का अदना यह फ़साना है

120

72

मोहब्बत में क्या-क्या मुक़ाम आ रहे हैं

121

73

साक़ी की हर निगाह पे बल खा के पी गया

122

74

दुनिया के सितम याद, न अपनी ही वफ़ा याद

123

75

हफ़ीज़ जालंधरी

124

76

अभी तो मैं जवान हूँ

126

77

हम ही में थी न कोई बात याद न तुम को आ सके

130

78

फ़िराक़ गोरखपुरी

131

79

किसी का यूँ तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी

133

80

सितारों से उलझता जा रहा हूँ

134

81

सुकूते-शाम मिटाओ, बहुत अँधेरा है

135

82

शाम भी थी बुआ धुआँ? हुस्न भी था उदास उदास

136

83

शामे-ग़म कुछ उस निगाहे-नाज़ की बातें करो

137

84

सर में सौदा भी नहीं, दिल में तमन्ना भी नहीं

138

85

शकील बदायूनी

139

86

ग़म-ए-आशिक़ी से कह दो रह-ए- आम तक न पहुँचे

140

87

आज वो भी इश्क़ के मारे नज़र आने लगे

141

88

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

142

89

शामे-फ़िराक़ अब न पूछ, आई और आके टल गई

144

90

मुझसे पहली-सी मोहब्बत मेरी महबूब न माँग

145

91

गुलों में रंग भरे बादे-नौबहार चले

146

92

मेरे हमदम मेरे दोस्त

147

93

निसार मैं तेरी गलियों पे

149

94

अब वही हर्फ़े-जुनूँ सब की ज़बाँ ठहरी है

151

95

जाँ निसार अख़्तर

152

96

आख़िरी मुलाक़ात

154

97

हर एक रूह में इक ग़म छिपा लगे है मुझे

157

98

साहिर लुधियानवी

158

99

ताजमहल

160

100

मादाम

162

101

जब कभी उनकी तवज्जोह में कमी पाई गई

164

102

चंद कलियाँ निशात की चुनकर

165

103

अख़तर-उल-ईमान

166

104

उम्रे-गुरेज़ाँ के नाम

168

105

एक सवाल

170

106

कैफ़ी आज़मी

171

107

सोमनाथ

173

108

एक लम्हा

174

109

ख़ारो-ख़स तो उठे, रास्ता तो चले

175

110

अली सरदार ज़ाफ़री

176

111

सुबहे-फ़रदा

178

112

मेरा सफ़र

180

113

मजरूह सुलतानपुरी

183

114

मुझे सहल हो गईं मंजिलें वो हवा के रुख भी बदल गए

184

115

जब हुआ इरफ़ाँ तो ग़म आराम-ए-जाँ बनता गया

185

116

नासिर काज़मी

186

117

गए दिनों का सुराग़ लेकर किधर से आया किधर गया वो

188

118

दयारे-दिल की रात में चिराग़-सा जला गया

189

119

नुशूर वाहिदी

190

120

नई दुनिया मुजस्सम दिलकशी

191

121

क़तील शिफ़ाई

192

122

ये मोजिज़ा भी मुहब्बत कभी दिखाए मुझे

194

123

उस अदा से भी हूँ मैं आशना, तुझे जिस पे इतना ग़रुर है

195

124

अहमद फ़राज़

196

125

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख्वाबों में मिलें

198

126

रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ

199

127

अब के ऋतु बदली तो खुशबू का सफ़र देखेगा कौन

200

128

परवीन शाकिर

201

129

बारिश हुई तो फूलों के तन चाक हो गए

203

130

चेहरा मेरा था निगाहें उसकी

204

131

शहरयार

205

132

तुम्हारे शहर में कुछ भी हुआ नहीं है क्या

207

133

तेरे सिवा भी मुझे कोई याद आनेवाला था

208

134

कुछ शे'

209

135

बशीर बद्र

211

136

कोई फूल धूप की पत्तियों में हरे रिबन से बँधा हुआ

213

137

यूँ ही बेसबब न फिरा करो, कोई शाम घर भी रहा करो

214

138

निदा फ़ाज़ली

215

139

दुनिया जिसे कहते हैं, जादू का खिलौना है

217

140

ऐलान

218

141

सादिक़

219

142

तुम्हें क्या पता है

220

143

बिछड़ा हर एक फ़र्द भरे ख़ानदान का

222

144

कुलदीप सलिल

223

145

इस क़दर कोई बड़ा हो, मुझे मंज़ूर नहीं

225

146

दिन फ़ुर्सतों के, चाँदनी की रात बेचकर

226

147

है जो कुछ पास अपने सब लिए सरकार बैठे हैं

227

उर्दू शायरी-एक चयन: Urdu Shayari- A Selection

Item Code:
NZA949
Cover:
Paperback
Edition:
2013
ISBN:
9788173095801
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
227
Other Details:
Weight of the Book: 250 gms
Price:
$16.00   Shipping Free
Look Inside the Book
Be the first to rate this product
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
उर्दू शायरी-एक चयन: Urdu Shayari- A Selection
From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 8909 times since 14th Jan, 2019

 

लेखिका के विषय में

डॉ. शाहीना तबस्सुम

जन्म: दिल्ली

शिक्षा: एम ए., एम फिल पीएच डी, दिल्ली विश्वविद्यालय उर्दू पुस्तकें फरहग--कलाम--मीर (आलोचनात्मक भूमिका सहित), उर्दू में जदीद शेअरी रिवायत तसलसुल और इन्हिराफ़ (आलोचना) इक्कीसवीं सदी की शायरी (संपादन), मिस्टर जिनाह (अनुवाद) शेअर--अदब के बाब में (आलोचना), मेवे के पेड़ (अनुवाद) हिंदी पुस्तकें कुर्रतुल-ऐन-हैदर की श्रेष्ठ कहानियाँ (अनुवाद) उड़ान की शर्त, हिंदी कहानियाँ (संपादन), ज़ाफ़री की शायरी (संपादन), कुछ गजलें कुछ गीत (संपादन) पुरस्कार' मिर्जा गालिब प्रोईज़ (दिल्ली विश्वविद्यालय), दिल्ली, उर्दू अकादमी तथा उतर प्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा पुस्तकों पर पुरस्कार ।

संप्रति: असिस्टेंट प्रोफेसर, जाकिर हुसैन पोस्ट ग्रेजुएट इवनिंग कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) दिल्ली।

लेखक के विषय में

डॉ. कुलदीप सलिल

जन्म: 30 दिसंबर, 1938, सियालकोट (पाकिस्तान)

कुलदीप सलिल का पहला कवितासंग्रह 'बीस साल का सफर' सन् 1979 में प्रकाशित हुआ था कवि-समीक्षक सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने जो उन दिनों सारिका के संपादक थे, अपनी वार्षिक समीक्षा में इसकी गणना वर्ष के सर्वश्रेष्ठ पुस्तकों में की यह संग्रह काफी चर्चित रहा । कुलदीप सलिल की दूसरी काव्य पुस्तक 'हवस के शहर में' जो कि एक गजल सग्रह है सन् 1987 में सामने आया पुस्तकाकार होने से पहले इस पूरे सग्रह को 'दीर्घा' ने अपने एक विशेषांक में प्रकाशित किया। दिल्ली हिंदी अकादमी ने 'साहित्यिक कृति पुरस्कार' के अंतर्गत इस सग्रहको सम्मानित किया । 'हवस के शहर में' से एक ग़ज़लकार के रूप में कुलदीप सलिल की पहचान बन गई। इनकी तीसरी पुस्तक ( और द्वय ग़ज़ल संग्रह) 'जो कह न सके' सर 2000 में प्रकाशित हुआ। और सन् 2004 में 'आवाज का रिश्ता' शीर्षक से तीसरा ग़ज़ल संग्रहवाणी प्रकाशन से सामने आया सन् 2005 में 20 अंग्रेज़ी काइयों का हिंदी काव्यानुवाद अग्रेजी के श्रेष्ठ कवि और उनकी श्रेष्ठ 'कविताएँ' के नाम से छपा हिंदी के अलावा अनेक पत्र-पत्रिकाओं मे इनकी अंग्रेज़ी कविताएँ हिंदी काव्यानुवाद सहित नियमित रूप मे कई वर्षों से प्रकाशित हो रही हैं । हाल में ही कुलदीप सलिल के ग़ालिब, फ़ैज, इक़बाल और अहमद फ़राज़ की कविता के अंग्रेज़ी काव्यानुवाद सामने आए हैं इस अनुवाद के लिए इन्हें साहित्य अकादमी और डी. . वी. लिटरेरी अवार्डसे कमेटी ने पुरस्कृत किया।

कुलदीप सलिल ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र और अंग्रेज़ी में एम. . किया वे दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से अंग्रेज़ी विभाग से रीडर के पद से सेवामुक्त हुए हैं।

प्रकाशकीय

यह प्रसन्नता का विषय है कि नई पीढी में उर्दू शायरों को पढने-समझने का शौक बढ़ रहा है हम सभी का अनुभव यही है कि एक नया पाठकसमाज सामने आ रहा है और इस समाज की जड़ीभूत सौंदर्याभिरुचियाँ टूटी हैं रोजमर्रा की जिदगी में उर्दू-शायरी का बोलबाला बढा है और प्रबुद्ध वर्ग भाषणों-वार्ताओं में उर्दू शेर बोलता है उर्दूकी सबसे कीमती चीज है-उर्दू-ग़ज़ल उर्दू-ग़ज़ल का चस्का हिंदी-पाठकों कवियों को ऐसा लग गया है कि हिंदी के अनेक कवि उर्दू गजल की तर्ज पर हिंदी में ग़ज़ल लिख रहे हैं और हिंदी कवि सम्मेलनों में उर्दू ग़ज़ल की धूम रहती है । हिंदी के कवि उर्दू-ग़ज़ल मे नए-नए प्रयोग कर रहे हैं और इसमें नया भाव-बोध आ रहा है उर्दू जानने वालों की सख्या कम हो रही हे, लेकिन उर्दू शायरी के संकलन भारतीय भाषाओं के बाजार में खूब बिक रहे हैं इसका कारण है कि खडी बोली में हिंदी उर्दू दोनों भाषाओं के शब्द एकखास रग और लय का आनंद बढ़ा रहे हैं यह बात कितनी दिलचस्प है कि खड़ी बोली का पहला नमूना अमीर खुसरो में मिलता है।

आज उर्दू शायरी के नाम पर केवल जाम--मीना का, कोरे इश्क-मुहब्बत की सात खत्म हो चुकी है भारत में उर्दू सांस्कृतिक नवजागरण में सहयोग देनेवाली भाषा रही है आजादी के आंदोलन का एक बड़ा देशभक्ति, प्रकृति प्रेम का अरमान उर्दू-कविता में मिलता है। उर्दू में हिंदी की तरह हमारी जातीय अस्मिता निखरकर सामने आती है। सौंदर्य-बोध का नया गुलदस्ता उर्दू सजाती-सँवारती है । इस संकलन में वली दकनी से लेकर फ़ैज अहमद फ़ैज, बशीर बद्र, निदा फ़ाज़ली तक को आप एक साथ पाएँगे । मैं हिंदी-उर्दू-अंग्रेजी के विद्वान प्रो. कुलदीप सलिल के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ जिन्होंने एक विशिष्ट भूमिका के साथ यह संकलन पाठकों तक पहुँचाने का अविस्मरणीय श्रम किया है । हमें विश्वास है कि इस संकलन का पाठक खुले दिल से स्वागत करेंगे।

 

अनुक्रम

1

दो शब्द

13

2

वली दकनी

27

3

जिसे इश्क का तीर कारी लगे

28

4

कूच: ए-यार ऐन कासी है

29

5

मीर तक़ी मीर

30

6

यारो, मुझे मुआफ रखो, मैं नशे में हूँ

32

7

ग़फ़िल हैं ऐसे सोते हैं गोया जहाँ के लोग

33

8

फ़क़ीराना आए सदा कर चले

34

9

उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया

35

10

पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा हाल हमारा जाने है

36

11

सोज़िशे-दिल से मुफ्त गलते हैं

37

12

आ जाएँ हम नज़र कोई दम ये बहुत है याँ

38

13

नजीर अकबराबादी

39

14

बुढ़ापा

40

15

मुहम्मद रफ़ी 'सौदा'

42

16

गुल फेंके हैं औरों की तरफ बल्कि समर भी

44

17

बदला तेरे सितम का कोई तुझसे क्या करे

45

18

ख़्वाजा मीर दर्द

46

19

तोहमतें चंद अपने जिम्मे धर चले

47

20

हम तुझसे किस हवस की फलक जुस्तजू करें

48

21

इन्शा अल्लाह ख़ाँ 'इन्शा'

49

22

कमर बाँधे हुए चलने को याँ सब यार बैठे हैं

50

23

असद उल्लाह ख़ाँ 'ग़ालिब'

51

24

ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाले-यार होता

53

25

आह को चाहिए इक उम्र, असर होने तक

54

26

किसी को देके दिल कोई नवा संजे-फुग़ाँ क्यों हो

55

27

वो फ़िराक़ और वो विसाल कहाँ

56

28

नुक्ताचीं है ग़मे-दिल उसको सुनाए न बने

57

29

दिल ही तो है, न संगो-ख़िश्त दर्द से भर न आए क्यों

58

30

बाज़ीच-ए- अत्फ़ाल है दुनिया, मिरे आगे

59

31

सब कहाँ-कुछ लाला- ओ-गुल में नुमायाँ हो गईं

60

32

शेख़ मोहम्मद इब्राहीम ज़ौक

61

33

लाई हयात आए क़ज़ा ले चली, चले

63

34

अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जाएँगे

64

35

मोमिन ख़ाँ मोमिन

65

36

वो जो हम में तुम में क़रार था, तुम्हें याद हो कि न याद हो

67

37

नावक-अंदाज़ जिधर दीद:-ए-जानाँ होंगे

68

38

बहादुर शाह ज़फ़र

69

39

न किसी की आख का नूर हूँ न किसी के दिल का क़रार हूँ

71

40

लगता नहीं है दिल मेरा, उजड़े दयार में

72

41

दाग़ देहलवी

73

42

ख़ातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया

75

43

दिल गया, तुमने लिया हम क्या करें

76

44

हसरत मोहानी

77

45

भुलाता लाख हूँ लेकिन बराबर याद आते हैं

78

46

मोहम्मद इक़बाल

79

47

साक़ी नामा

81

48

सितारों से आगे जहाँ और भी हैं

84

49

तराना-ए-हिंदी

85

50

नया शिवाला

87

51

तस्वीरे-दर्द

89

52

अकबर इलाहाबादी

92

53

दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ

94

54

फ़लसफ़ी को बहस के अंदर खुदा मिलता नहीं

95

55

एक फ़रज़ी लतीफ़ा

96

56

हंगामा है क्यों बरपा

97

57

अख़्तर शीरानी

98

58

ओ देस से आनेवाले बता

99

59

मजाज़ लखनवी

101

60

जमाले-इश्क़ में दीवाना

103

61

आवारा

104

62

नौजवान ख़ातून से

107

63

जुनूने-शौक़ अब भी कम नहीं है

109

64

इज़्मे-ख़िराम लेते हुए आस्माँ से हम

110

65

जोश मलीहाबादी

111

66

शिकस्ते-ज़िंदाँ

113

67

एक गीत

114

68

सोज़े-ग़म दे के मुझे उसने ये इर्शाद किया

116

69

गुंचे! तेरी सादगी पे दिल हिलता है

117

70

जिगर मुरादाबादी

118

71

इक लफ़्ज़-ए-मुहब्बत का अदना यह फ़साना है

120

72

मोहब्बत में क्या-क्या मुक़ाम आ रहे हैं

121

73

साक़ी की हर निगाह पे बल खा के पी गया

122

74

दुनिया के सितम याद, न अपनी ही वफ़ा याद

123

75

हफ़ीज़ जालंधरी

124

76

अभी तो मैं जवान हूँ

126

77

हम ही में थी न कोई बात याद न तुम को आ सके

130

78

फ़िराक़ गोरखपुरी

131

79

किसी का यूँ तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी

133

80

सितारों से उलझता जा रहा हूँ

134

81

सुकूते-शाम मिटाओ, बहुत अँधेरा है

135

82

शाम भी थी बुआ धुआँ? हुस्न भी था उदास उदास

136

83

शामे-ग़म कुछ उस निगाहे-नाज़ की बातें करो

137

84

सर में सौदा भी नहीं, दिल में तमन्ना भी नहीं

138

85

शकील बदायूनी

139

86

ग़म-ए-आशिक़ी से कह दो रह-ए- आम तक न पहुँचे

140

87

आज वो भी इश्क़ के मारे नज़र आने लगे

141

88

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

142

89

शामे-फ़िराक़ अब न पूछ, आई और आके टल गई

144

90

मुझसे पहली-सी मोहब्बत मेरी महबूब न माँग

145

91

गुलों में रंग भरे बादे-नौबहार चले

146

92

मेरे हमदम मेरे दोस्त

147

93

निसार मैं तेरी गलियों पे

149

94

अब वही हर्फ़े-जुनूँ सब की ज़बाँ ठहरी है

151

95

जाँ निसार अख़्तर

152

96

आख़िरी मुलाक़ात

154

97

हर एक रूह में इक ग़म छिपा लगे है मुझे

157

98

साहिर लुधियानवी

158

99

ताजमहल

160

100

मादाम

162

101

जब कभी उनकी तवज्जोह में कमी पाई गई

164

102

चंद कलियाँ निशात की चुनकर

165

103

अख़तर-उल-ईमान

166

104

उम्रे-गुरेज़ाँ के नाम

168

105

एक सवाल

170

106

कैफ़ी आज़मी

171

107

सोमनाथ

173

108

एक लम्हा

174

109

ख़ारो-ख़स तो उठे, रास्ता तो चले

175

110

अली सरदार ज़ाफ़री

176

111

सुबहे-फ़रदा

178

112

मेरा सफ़र

180

113

मजरूह सुलतानपुरी

183

114

मुझे सहल हो गईं मंजिलें वो हवा के रुख भी बदल गए

184

115

जब हुआ इरफ़ाँ तो ग़म आराम-ए-जाँ बनता गया

185

116

नासिर काज़मी

186

117

गए दिनों का सुराग़ लेकर किधर से आया किधर गया वो

188

118

दयारे-दिल की रात में चिराग़-सा जला गया

189

119

नुशूर वाहिदी

190

120

नई दुनिया मुजस्सम दिलकशी

191

121

क़तील शिफ़ाई

192

122

ये मोजिज़ा भी मुहब्बत कभी दिखाए मुझे

194

123

उस अदा से भी हूँ मैं आशना, तुझे जिस पे इतना ग़रुर है

195

124

अहमद फ़राज़

196

125

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख्वाबों में मिलें

198

126

रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ

199

127

अब के ऋतु बदली तो खुशबू का सफ़र देखेगा कौन

200

128

परवीन शाकिर

201

129

बारिश हुई तो फूलों के तन चाक हो गए

203

130

चेहरा मेरा था निगाहें उसकी

204

131

शहरयार

205

132

तुम्हारे शहर में कुछ भी हुआ नहीं है क्या

207

133

तेरे सिवा भी मुझे कोई याद आनेवाला था

208

134

कुछ शे'

209

135

बशीर बद्र

211

136

कोई फूल धूप की पत्तियों में हरे रिबन से बँधा हुआ

213

137

यूँ ही बेसबब न फिरा करो, कोई शाम घर भी रहा करो

214

138

निदा फ़ाज़ली

215

139

दुनिया जिसे कहते हैं, जादू का खिलौना है

217

140

ऐलान

218

141

सादिक़

219

142

तुम्हें क्या पता है

220

143

बिछड़ा हर एक फ़र्द भरे ख़ानदान का

222

144

कुलदीप सलिल

223

145

इस क़दर कोई बड़ा हो, मुझे मंज़ूर नहीं

225

146

दिन फ़ुर्सतों के, चाँदनी की रात बेचकर

226

147

है जो कुछ पास अपने सब लिए सरकार बैठे हैं

227

Post a Comment
 
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy
Based on your browsing history
Loading... Please wait

Items Related to उर्दू शायरी-एक चयन: Urdu Shayari- A... (Language and Literature | Books)

Master Couplets of Urdu Poetry (Urdu Text, Transliteration and Translation)
by K.C. Kanda
Paperback (Edition: 2009)
Sterling Publishers Pvt. Ltd.
Item Code: NAE669
$35.00
Add to Cart
Buy Now
A Thousand Yearnings (A Book of Urdu Poetry and Prose)
Item Code: NAQ906
$29.00
Add to Cart
Buy Now
Ehsas O Izhar (Urdu Poetry)
by Ashwani Kumar
Hardcover (Edition: 2018)
Niyogi Books
Item Code: NAP623
$43.00
Add to Cart
Buy Now
The Taste of Words: An Introduction to Urdu Poetry
by Raza Mir
Paperback (Edition: 2014)
Penguin Books India Pvt. Ltd.
Item Code: NAJ946
$29.00
Add to Cart
Buy Now
Celebrating the Best of Urdu Poetry
Item Code: NAN734
$21.00
Add to Cart
Buy Now
Masterpieces of Humorous Urdu Poetry
Item Code: IDE424
$29.00
Add to Cart
Buy Now
The Noble Science of The Ghazal: The Urdu Poetry of Mirza Ghalib
Deal 20% Off
Item Code: NAM993
$43.00$34.40
You save: $8.60 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Nets of Awareness Urdu Poetry and Its Critics
by Frances W. Pritchett
Paperback (Edition: 2004)
Katha
Item Code: NAI416
$24.50
Add to Cart
Buy Now
 A Treasury Of Urdu Poetry (From Mir to Faiz) - Ghazals with English Renderings
by Kuldip Salil
Hardcover (Edition: 2010)
Rajpal and Sons
Item Code: NAE418
$31.00
Add to Cart
Buy Now
Best of Faiz (Selected Poetry of Faiz Ahmed Faiz) (Urdu text,transliteration and English translation)
Deal 20% Off
by Kuldeep Salil
Hardcover (Edition: 2016)
Rajpal and Sons
Item Code: NAD235
$21.00$16.80
You save: $4.20 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Iqbal  - A Selection of his Urdu and Persian Verse
Item Code: NAQ380
$31.00
Add to Cart
Buy Now
Testimonials
Thank you so much. Your service is amazing. 
Kiran, USA
I received the two books today from my order. The package was intact, and the books arrived in excellent condition. Thank you very much and hope you have a great day. Stay safe, stay healthy,
Smitha, USA
Over the years, I have purchased several statues, wooden, bronze and brass, from Exotic India. The artists have shown exquisite attention to details. These deities are truly awe-inspiring. I have been very pleased with the purchases.
Heramba, USA
The Green Tara that I ordered on 10/12 arrived today.  I am very pleased with it.
William USA
Excellent!!! Excellent!!!
Fotis, Greece
Amazing how fast your order arrived, beautifully packed, just as described.  Thank you very much !
Verena, UK
I just received my package. It was just on time. I truly appreciate all your work Exotic India. The packaging is excellent. I love all my 3 orders. Admire the craftsmanship in all 3 orders. Thanks so much.
Rajalakshmi, USA
Your books arrived in good order and I am very pleased.
Christine, the Netherlands
Thank you very much for the Shri Yantra with Navaratna which has arrived here safely. I noticed that you seem to have had some difficulty in posting it so thank you...Posting anything these days is difficult because the ordinary postal services are either closed or functioning weakly.   I wish the best to Exotic India which is an excellent company...
Mary, Australia
Love your website and the emails
John, USA
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2020 © Exotic India