Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Sign In  |  Sign up
Your Cart (0)
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindu > Vedas > Upanishads > योग दर्शन: Yoga Darshan (Vision of the Yoga Upanishads)
Displaying 1 of 7448         Previous  |  NextSubscribe to our newsletter and discounts
योग दर्शन: Yoga Darshan (Vision of the Yoga Upanishads)
Pages from the book
योग दर्शन: Yoga Darshan (Vision of the Yoga Upanishads)
Look Inside the Book
Description

पुस्तक के विषय में

स्वामी निरंजानान्द सरस्वती द्वारा लिखित 'योग दर्शन' उपनिषदों की एक समकालीन यौगिक विवेचना प्रस्तुत करता है। इसमें योग की समग्र और प्रामाणिक रूपरेखा के साथ-साथ सम्पूर्ण आध्यात्मिक जीवन के व्यावहारिक पक्षों की भी विवेचना की गई है। सैद्धान्तिक भाग में हठ, राज, मन्त्र, कर्म, ज्ञान, लय और गुह्या योग के विस्तृत वर्णन के साथ-साथ योग की विभित्र परम्पओं और दर्शन का उल्लेख किया गया है।

व्यावहारिक भाग में योग उपनिषदों के उत्कुष्ट अभ्यासों, सामान्य बुद्धि योग, समग्रात्मक शरीर विज्ञान, असन्तुलन और रोग के कारण एवं स्वास्थ्य की यौगिक व्याख्या की गई है।

'एक यात्री था जो अनन्त काल से यात्रा करता रहा था उसकी यात्रा का उद्देश्य अपने नगर पहुँचना था पर वह नगर कत दूर था। यात्री धीरे-धीरे अपने पगों को अपने गन्तव्य की ओर बढ़ाते चलता था। नगर का नाम था ब्रह्मपुरी और यात्री का नाम था श्रीमान् आत्माराम सन् 2009 से स्वामी निरंजनानन्द सरस्वती के जीवन का एक नया अध्याय प्रारम्भ हुआ है और मुंगेर में योगदृष्टि सत्संग श्रृंखला के अन्तर्गत योग के विभिन्न पक्षों पर दिये गये प्रबोधक व्याख्यान स्वामीजी की इसी नयी जीवनशैली के अंग हैं।

हिमालय पर्वतों के सुरम्य, एकान्तमय वातावरण में गहन चिंतन करने के बाद स्वामीजी ने गंगा दर्शन लौटकर जून 2010 की योगदृष्टि सत्संग श्रृंखला में प्रवृत्ति एवं निवृत्ति-मार्ग को अपने सत्संगों का विषय चुना उनके विवेचन की शुरुआत एक प्रतीकात्मक कथा से होती है जिसका मुख्य नायक, आत्माराम, अपने गन्तव्य, ब्रह्मपुरी की ओर यात्रा कर रहा है इस कथा को आधार बनाकर स्वामीजी ने बहुत सुन्दर ढंग से प्रवृत्ति तथा निवृत्ति मार्ग के मुख्य लक्षणों, साधनाओं और लक्ष्यों का निरूपण किया है सांसारिक जीवन जीते हुए भी किस प्रकार सुख, सामंजस्य और संतुष्टि का अनुभव किया जा सकता है; जीवन के किस मोड़ पर साधक वास्तविक रूप से आध्यात्मिक मार्ग पर आता है; और साधक की इस यात्रा में मार्गदर्शक की क्या भूमिका होती है - आध्यात्मिक जीवन से सम्बन्धित इन सभी आधारभूत प्रश्नों का उत्तर इन सत्संगों में निहित है।

 

विषय-सूची

 
 

प्रथम खण्ड-सैद्धान्तिक पहलू

 
 

विषय

 

1

योग की वैदिक परम्परा

1

2

सनातन संस्कृति

10

3

विकासशील सजगता

19

4

महत्वपूर्ण यौगिक शब्द

29

5

यौगिक विद्या के विभिन्न पहलू

41

6

कर्म योग

54

7

ज्ञान योग

72

8

हठ योग

80

9

राजयोग (वृत्तियों की भूमिका)

98

10

राजयोग (बहिरंग अवस्थायें)

120

11

राजयोग ( आन्तरिक अवस्थायें)

149

12

मन्त्र योग

204

13

लय योग

222

14

गुह्य योग

229

15

द्वितीय खण्ड-व्यावहारिक पहलू विषय

 

16

आसन

265

17

प्राणायाम

301

18

बन्ध और ग्रन्थियाँ

358

19

मुद्रायें

378

20

समग्रात्मक शरीर विज्ञान

419

21

योग के अनुसार असन्तुलन

425

22

और रोग के कारण

 

23

सामान्य बुद्धि योग

437

24

परिशिष्ट-

446

Sample Page


योग दर्शन: Yoga Darshan (Vision of the Yoga Upanishads)

Item Code:
NZA757
Cover:
Paperback
Edition:
2004
ISBN:
9788185797977
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
483
Other Details:
Weight of the Book: 500 gms
Price:
$25.00   Shipping Free
Look Inside the Book
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
योग दर्शन: Yoga Darshan (Vision of the Yoga Upanishads)

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 4205 times since 22nd Apr, 2018

पुस्तक के विषय में

स्वामी निरंजानान्द सरस्वती द्वारा लिखित 'योग दर्शन' उपनिषदों की एक समकालीन यौगिक विवेचना प्रस्तुत करता है। इसमें योग की समग्र और प्रामाणिक रूपरेखा के साथ-साथ सम्पूर्ण आध्यात्मिक जीवन के व्यावहारिक पक्षों की भी विवेचना की गई है। सैद्धान्तिक भाग में हठ, राज, मन्त्र, कर्म, ज्ञान, लय और गुह्या योग के विस्तृत वर्णन के साथ-साथ योग की विभित्र परम्पओं और दर्शन का उल्लेख किया गया है।

व्यावहारिक भाग में योग उपनिषदों के उत्कुष्ट अभ्यासों, सामान्य बुद्धि योग, समग्रात्मक शरीर विज्ञान, असन्तुलन और रोग के कारण एवं स्वास्थ्य की यौगिक व्याख्या की गई है।

'एक यात्री था जो अनन्त काल से यात्रा करता रहा था उसकी यात्रा का उद्देश्य अपने नगर पहुँचना था पर वह नगर कत दूर था। यात्री धीरे-धीरे अपने पगों को अपने गन्तव्य की ओर बढ़ाते चलता था। नगर का नाम था ब्रह्मपुरी और यात्री का नाम था श्रीमान् आत्माराम सन् 2009 से स्वामी निरंजनानन्द सरस्वती के जीवन का एक नया अध्याय प्रारम्भ हुआ है और मुंगेर में योगदृष्टि सत्संग श्रृंखला के अन्तर्गत योग के विभिन्न पक्षों पर दिये गये प्रबोधक व्याख्यान स्वामीजी की इसी नयी जीवनशैली के अंग हैं।

हिमालय पर्वतों के सुरम्य, एकान्तमय वातावरण में गहन चिंतन करने के बाद स्वामीजी ने गंगा दर्शन लौटकर जून 2010 की योगदृष्टि सत्संग श्रृंखला में प्रवृत्ति एवं निवृत्ति-मार्ग को अपने सत्संगों का विषय चुना उनके विवेचन की शुरुआत एक प्रतीकात्मक कथा से होती है जिसका मुख्य नायक, आत्माराम, अपने गन्तव्य, ब्रह्मपुरी की ओर यात्रा कर रहा है इस कथा को आधार बनाकर स्वामीजी ने बहुत सुन्दर ढंग से प्रवृत्ति तथा निवृत्ति मार्ग के मुख्य लक्षणों, साधनाओं और लक्ष्यों का निरूपण किया है सांसारिक जीवन जीते हुए भी किस प्रकार सुख, सामंजस्य और संतुष्टि का अनुभव किया जा सकता है; जीवन के किस मोड़ पर साधक वास्तविक रूप से आध्यात्मिक मार्ग पर आता है; और साधक की इस यात्रा में मार्गदर्शक की क्या भूमिका होती है - आध्यात्मिक जीवन से सम्बन्धित इन सभी आधारभूत प्रश्नों का उत्तर इन सत्संगों में निहित है।

 

विषय-सूची

 
 

प्रथम खण्ड-सैद्धान्तिक पहलू

 
 

विषय

 

1

योग की वैदिक परम्परा

1

2

सनातन संस्कृति

10

3

विकासशील सजगता

19

4

महत्वपूर्ण यौगिक शब्द

29

5

यौगिक विद्या के विभिन्न पहलू

41

6

कर्म योग

54

7

ज्ञान योग

72

8

हठ योग

80

9

राजयोग (वृत्तियों की भूमिका)

98

10

राजयोग (बहिरंग अवस्थायें)

120

11

राजयोग ( आन्तरिक अवस्थायें)

149

12

मन्त्र योग

204

13

लय योग

222

14

गुह्य योग

229

15

द्वितीय खण्ड-व्यावहारिक पहलू विषय

 

16

आसन

265

17

प्राणायाम

301

18

बन्ध और ग्रन्थियाँ

358

19

मुद्रायें

378

20

समग्रात्मक शरीर विज्ञान

419

21

योग के अनुसार असन्तुलन

425

22

और रोग के कारण

 

23

सामान्य बुद्धि योग

437

24

परिशिष्ट-

446

Sample Page


Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Based on your browsing history

Loading... Please wait

Related Items

Yoga Darshan: Vision of the Yoga Upanishads
Item Code: IDE239
$36.50
Add to Cart
Buy Now
The Integrity of the Yoga Darsana - A Reconsideration of Classical Yoga
by Ian Whicher
Hardcover (Edition: 2000)
D. K. Printworld Pvt. Ltd.
Item Code: IDE065
$32.50
Add to Cart
Buy Now
Yoga Darsana (Sutras of Patanjali With Bhasya of Vyasa)
by Ganganatha Jha
Paperback (Edition: 2011)
Dev Publishers and Distributors
Item Code: NAB900
$23.50
Add to Cart
Buy Now

Testimonials

Fast and reliable service.
Dharma Rao, Canada
You always have a great selection of books on Hindu topics. Thank you!
Gayatri, USA
Excellent e-commerce website with the most exceptional, rare and sought after authentic India items. Thank you!
Cabot, USA
Excellent service and fast shipping. An excellent supplier of Indian philosophical texts
Libero, Italy.
I am your old customer. You have got a wonderful collection of all products, books etc.... I am very happy to shop from you.
Usha, UK
I appreciate the books offered by your website, dealing with Shiva sutra theme.
Antonio, Brazil
I love Exotic India!
Jai, USA
Superzoom delivery and beautiful packaging! Thanks! Very impressed.
Susana
Great service. Keep on helping the people
Armando, Australia
I bought DVs supposed to receive 55 in the set instead got 48 and was in bad condition appears used and dusty. I contacted the seller to return the product and the gave 100% credit with apologies. I am very grateful because I had bought and will continue to buy products here and have never received defective product until now. I bought paintings saris..etc and always pleased with my purchase until now. But I want to say a public thank you to whom it may concern for giving me the credit. Thank you. Navieta.
Navieta N Bhudu
TRUSTe
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2018 © Exotic India