Booksचि...

चित चकमल लागै नहीं: Discourses by Osho

Description Read Full Description
पुस्तक के विषय में विचार समझ से महत्वपूर्ण गए हैं, क्योंकि बहुत ममत्व हमने उनको दिया है। इस ममत्व को एकदम तोड़ देना जरुरी है। और तोड़ना कठिन नहीं है, क्योंकि यह बिलकुल काल्पनिक है। यह जंज...

पुस्तक के विषय में

विचार समझ से महत्वपूर्ण गए हैं, क्योंकि बहुत ममत्व हमने उनको दिया है। इस ममत्व को एकदम तोड़ देना जरुरी है। और तोड़ना कठिन नहीं है, क्योंकि यह बिलकुल काल्पनिक है। यह जंजीर कहीं है नहीं, केवल कल्पना में है। विचार के प्रति ममत्व का त्याग जरूरी है। पहली बात: विचार के प्रति अपरिग्रह का बोध। दूसरी बात: विचार के प्रति ममत्व का त्याग। और तीसरी बात: विचार की प्रति तटस्थ साक्षी की स्थिति।

पुस्तक के कुछ मुख्य विषय बिंदु:

जीवन की खोज और मृत्यु का बोध

क्या हमारे मन स्वतंत्र हैं या परतंत्र ?

कहां है इस सारे जगत का जीवन स्रोत ?

निर्विचार द्वार है सत्य का

प्रवेश के पूर्व

सामान्यत: मनुष्य अविचार में ही जीता है । एक तो वासनाओं की परतंत्रता है और दूसरी श्रद्धा और विश्वास की । शरीर के तल पर भी मनुष्य परतंत्र है और मन के तल पर भी। शरीर के तल पर स्वतंत्र होना संभव नहीं है, लेकिन मन के तल पर स्वतंत्र होना संभव है। ...मन के तल पर मनुष्य कैसे स्वतंत्र हो सकता है? कैसे उसके भीतर विचार का जन्म हो सकता है? विचार का जन्म न हो तो मनुष्य के जीवन में वस्तुत: न तो कुछ अनुभूति हो सकती है, न कुछ सृजन हो सकता है । तब हम व्यर्थ ही जीएंगे और मरेंगे । जीवन एक निष्फल श्रम होगा। क्योंकि जहां विचार नहीं, वहा आंख नहीं; जहां विचार नहीं, वहां स्वयं के देखने और चलने की कोई शक्ति ही नहीं है । और जो व्यक्ति स्वयं नहीं देखता, स्वयं नहीं चलता, स्वयं नहीं जीता, उसे कोई अनुभूति जो उसे मुक्त कर सके, कोई अनुभूति जो उसके हृदय को प्रेम से भर सके, कोई अनुभूति जो उसके प्राणों को आलोकित कर सके, असंभव है । जीवन में कुछ भी हो उस होने के पहले आखों का होना जरूरी है।

विचार से मेरा अर्थ है : दृष्टि। विचार से मेरा अर्थ है : स्वयं की सोचने की क्षमता । विचार से मेरा अर्थ विचारों की भीड़ नहीं है। विचारों की जो भीड़ है वह हम सबके भीतर है, लेकिन विचार हमारे भीतर नहीं है। विचार तो बहुत हमारे भीतर घूमते हैं, लेकिन विचार की शक्ति हमारे भीतर जाग्रत नहीं है।

और यह बहुत आश्चर्य की बात है कि जिसके भीतर जितने ज्यादा विचार घूमते है उसके भीतर विचार की क्षमता उतनी ही कम होती है । जिसके भीतर विचारों का बहुत ऊहापोह, विचारों का बहुत आंदोलन, बहुत भीड़ है, उसके भीतर विचार की शक्ति सोई रहती है। केवल वही व्यक्ति विचार की शक्ति को उपलब्ध होता है जो विचारों की भीड़ को विदा देने में समर्थ हो जाता है। इसलिए बहुत विचार आपके मन में चलते हों, तो यह मत समझ लेना कि आप विचार करने में समर्थ हो गए है ।

बहुत विचार चलते भी इसीलिए हैं कि आप विचार करने में समर्थ नहीं हैं । एक अंधा आदमी किसी भवन के बाहर जाना चाहे, तो उसके भीतर पच्चीस विचार चलते हें-कैसे जाऊं, किस द्वार से जाऊं, कैसे उठूं किससे पूछूं? लेकिन जिसके पास आंख है, उसे बाहर जाना है, वह उठता है और बाहर हो जाता है। और उसके भीतर विचार नहीं चलते हैं । वह उठता है और बाहर हो जाता है। उसे दिखाई पड़ रहा है।

विचार की शक्ति दर्शन की क्षमता है। जीवन में दिखाई पड़ना शुरू होता है । लेकिन विचारों की भीड़ से कोई दर्शन की क्षमता नहीं होती, बल्कि विचारों की भीड़ मे दर्शन की, देखने की क्षमता छिप जाती है, ढंक जाती है।

विचार करना क्या है? विचार करने का अर्थ है : जीवन की समस्या के प्रति स्वयं की चेतना का जागना। जीवन की समस्या का समाधान स्वयं की चेतना से उठना । जीवन जब प्रश्न खड़े करे, तो उधार उत्तर न हो, उत्तर अपना जागे । अभी भी जीवन तो रोज समस्याएं खड़ी करता है, लेकिन उत्तर हमारे उधार होते है। इसलिए जीवन की कोई समस्या कभी हल नहीं होती।

समस्या हमारी, समाधान दूसरों के। उनका कहीं कोई मेल नहीं होता है । जीवन रोज प्रश्न खड़े करता है, जीवन रोज समस्याएं खड़ी करता है, लेकिन हमारे पास रेडीमेड तैयार उत्तर है जो दूसरों ने दिए है। उन उत्तरों को लेकर हम जीवन के सामने खड़े होते हैं । समस्याएं जीत जाती हैं, समाधान गिर जाते हैं।

 

अनुक्रम

1

जीवन की खोज

1

2

अविचार

17

3

स्वतंत्रता और आत्म-क्रांति

35

4

विचार

53

5

विचार एक आत्मानुभूति

69

6

निर्विचार

87

 

ओशो एक परिचय

107

 

ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन रिजॉर्ट

108

 

ओशो का हिंदी साहित्य

110

 

अधिक जानकारी के लिए

115

sample Page

Item Code: NZA889 Author: ओशो (Osho) Cover: Paperback Edition: 2012 Publisher: Osho Media International ISBN: 9788172612689 Language: Hindi Size: 8.5 inch X 5.5 inch Pages: 122 Other Details: Weight of the Book: 150gms
Price: $13.00
Shipping Free
Be the first to review this product
Viewed 5644 times since 4th Mar, 2019
Based on your browsing history
Loading... Please wait

Items Related to चित चकमल लागै नहीं: Discourses by Osho (Hindu | Books)

अध्यात्म उपनिषद (ओशो): Adhyatma Upanishad (Osho)
दरिया कहै सब्द निरबाना: Osho on Dariya
मरौ हे जोगी मरौ: Osho on Gorakhnath
ओशो अष्टावक्र महागीता: Osho Ashtavakra Mahageeta (Set of 9 Volumes)
मैंने राम रतन धन पायो (मीरा दीवानी पर चर्चा सुहानी): Osho on Mirabai
सत भाषै रैदास: Osho on Raidas
ध्यान-सूत्र: Dhyana Sutra by Osho
जिन सूत्र: Jin Sutra (Set of 4 Volumes)
कृष्ण स्मृति (हीरे जो कभी परखे ही न गए): In Krishna's Memory....
झुक आयी बदरिया सावन की (मीरा दीवानी पर चर्चा सुहानी) - Jhuk Aai Badariya Savan ki (Meera Diwani Par Charcha Suhani)
शून्य के पार: Beyond the Void
मैं मृत्यु सिखाता हूं: I Teach Death
नहीं सांझ नहीं भोर (चरण दास वाणी पर प्रवचन) : Nahin Sanjh Nahin Bhor (Discourse on Charnadas Vani)
ध्यान विज्ञान (ध्यान में प्रवेश की 115 सहज विधियां): Science of Meditation
Testimonials
Thank you guys! I got the book! Your relentless effort to set this order right is much appreciated!!
Utpal, USA
You guys always provide the best customer care. Thank you so much for this.
Devin, USA
On the 4th of January I received the ordered Peacock Bell Lamps in excellent condition. Thank you very much. 
Alexander, Moscow
Gracias por todo, Parvati es preciosa, ya le he recibido.
Joan Carlos, Spain
We received the item in good shape without any damage. It is simply gorgeous. Look forward to more business with you. Thank you.
Sarabjit, USA
Your sculpture is truly beautiful and of inspiring quality!  I wish you continuous great success so that you may always be able to offer such beauty to all people throughout the world! Thank you for caring about your customers as well as the standard of your products.  It is extremely appreciated!! Sending you much love.
Deborah, USA
I’m glad you guys understand my side, well you guys have one of the best international store,  And I will probably continue being pleased costumer Thank you guys so much.
Renato, Brazil
I'm always so appreciative of Exotic India. You have such a terrific website, and great customer service. I wish you all the best, and hope you have a happy new year!
Eric, USA
A Statue was ordered on Dec 22nd and Paid 194.25 including FREE DELIVERY for me as a GIFT for Christmas and they Confirmed that it will be there in 4-5 days but it NEVER arrived till 30th of December and inspite of my various emails they only replied that it is being finished and will be shipped in 24hrs but that was a LIE and no further delivery information was every sent to me. I called and left a message on the phone number listed on their website which is a NY number but no one answered that phone and I left messages but no reply or update on my Statue was sent to me inspite of my daily emails to know the status. I still await this Statue but NO RESPONSIBLE REPLY.
Rita Wason
I got my order today. It was well packed and looks lovely.
Nirmaladevi, USA