Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Your Cart (0)
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindi > प्रसाद के सम्पूर्ण नाटक एवं एकांकी: (The Complete Plays of Jai Shanker Prasad)
Displaying 964 of 11191         Previous  |  NextSubscribe to our newsletter and discounts
प्रसाद के सम्पूर्ण नाटक एवं एकांकी: (The Complete Plays of Jai Shanker Prasad)
प्रसाद के सम्पूर्ण नाटक एवं एकांकी: (The Complete Plays of Jai Shanker Prasad)
Description

लेखक परिचय

 

हिन्दी नाटक साहित्य में प्रसाद जी का एक विशिष्ट स्थान है । इतिहास, पुराण कथा और अर्द्धमिथकीय वस्तु के भीतर से प्रसाद ने राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय सुरक्षा के सवाल को पहली बार अपने नाटकों के माध्यम से उठाया । दरअसल उनके नाटक अतीत कथा चित्रों के द्वारा तत्कालीन राष्ट्रीय संकट को पहचानने और सुलझाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं । 'चन्द्रगुप्त' 'स्कन्दगुप्त' और 'ध्रुवस्वामिनी' का सत्ता संघर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रश्न से जुड़ा हुआ है ।

प्रसाद ने अपने नाटकों की रचना द्वारा भारतेन्दुकालीन रंगमंच से बेहतर और संश्लिष्ट रंगमंच की माँग उठायी । उन्होंने नाटकों की अन्तर्वस्तु के महत्व को रेखांकित करते हुए रंगमंच को लिखित नाटक का अनुवर्ती बनाया । इस तरह नाटक के पाठ्य होने के महत्त्व को उन्होंने नजरअन्दाज नहीं किया । नाट्य रचना और रंगमंच के परस्पर सम्बन्ध के बारे में उनका यह निजी दृष्टिकोण काफी महत्वपूर्ण और मौलिक है ।

प्रसाद जी के नाटक निश्चय ही एक नयी नाट्य भाषा के आलोक के चमचमाते हुए दिखते हैं । अभिनय, हरकत और एक गहरी काव्यमयता से परिपूर्ण रोमांसल भाषा प्रसाद की नाट्य भाषा की विशेषताएँ हैं । इसी नाट्य भाषा के माध्यम से प्रसाद अपने नाटकों में राष्ट्रीय चिन्ता के संग प्रेम के कोमल संस्पर्श का कारुणिक संस्कार देते है ।

 







अनुक्रम

प्राक्कथन

 

उर्वशी चम्पू

1 से 36

सज्जन

37 से 52

प्रायश्चित

53 से 64

कल्याणो परिणय

65 से 84

करुणालय

85 105

राज्यश्री

107 से 146

विशाख

147 से 196

अजातशत्रु

197 283

जन्मेजय का नाग यज्ञ

287 से 362

कामना

393 से 431

स्कन्दगुप्त विक्रमादित्य

433 से 558

एक त्रूंट

559 से 583

चन्द्रगुप्त

585 739

ध्रुवस्वामिनो

741 से 782

अग्निमित्र

783 से 792

 

Sample Pages

























प्रसाद के सम्पूर्ण नाटक एवं एकांकी: (The Complete Plays of Jai Shanker Prasad)

Item Code:
HAA140
Cover:
Paperback
Edition:
2013
ISBN:
9788180313455
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
820
Other Details:
Weight of the Book: 830 gms
Price:
$30.00
Discounted:
$24.00   Shipping Free
You Save:
$6.00 (20%)
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
प्रसाद के सम्पूर्ण नाटक एवं एकांकी: (The Complete Plays of Jai Shanker Prasad)

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 1823 times since 29th Apr, 2017

लेखक परिचय

 

हिन्दी नाटक साहित्य में प्रसाद जी का एक विशिष्ट स्थान है । इतिहास, पुराण कथा और अर्द्धमिथकीय वस्तु के भीतर से प्रसाद ने राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय सुरक्षा के सवाल को पहली बार अपने नाटकों के माध्यम से उठाया । दरअसल उनके नाटक अतीत कथा चित्रों के द्वारा तत्कालीन राष्ट्रीय संकट को पहचानने और सुलझाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं । 'चन्द्रगुप्त' 'स्कन्दगुप्त' और 'ध्रुवस्वामिनी' का सत्ता संघर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रश्न से जुड़ा हुआ है ।

प्रसाद ने अपने नाटकों की रचना द्वारा भारतेन्दुकालीन रंगमंच से बेहतर और संश्लिष्ट रंगमंच की माँग उठायी । उन्होंने नाटकों की अन्तर्वस्तु के महत्व को रेखांकित करते हुए रंगमंच को लिखित नाटक का अनुवर्ती बनाया । इस तरह नाटक के पाठ्य होने के महत्त्व को उन्होंने नजरअन्दाज नहीं किया । नाट्य रचना और रंगमंच के परस्पर सम्बन्ध के बारे में उनका यह निजी दृष्टिकोण काफी महत्वपूर्ण और मौलिक है ।

प्रसाद जी के नाटक निश्चय ही एक नयी नाट्य भाषा के आलोक के चमचमाते हुए दिखते हैं । अभिनय, हरकत और एक गहरी काव्यमयता से परिपूर्ण रोमांसल भाषा प्रसाद की नाट्य भाषा की विशेषताएँ हैं । इसी नाट्य भाषा के माध्यम से प्रसाद अपने नाटकों में राष्ट्रीय चिन्ता के संग प्रेम के कोमल संस्पर्श का कारुणिक संस्कार देते है ।

 







अनुक्रम

प्राक्कथन

 

उर्वशी चम्पू

1 से 36

सज्जन

37 से 52

प्रायश्चित

53 से 64

कल्याणो परिणय

65 से 84

करुणालय

85 105

राज्यश्री

107 से 146

विशाख

147 से 196

अजातशत्रु

197 283

जन्मेजय का नाग यज्ञ

287 से 362

कामना

393 से 431

स्कन्दगुप्त विक्रमादित्य

433 से 558

एक त्रूंट

559 से 583

चन्द्रगुप्त

585 739

ध्रुवस्वामिनो

741 से 782

अग्निमित्र

783 से 792

 

Sample Pages

























Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Related Items

गुरु प्रसाद: Guru Prasad (Bhajan)
Item Code: NZJ460
$15.00$12.00
You save: $3.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now

Testimonials

I love this web site and love coming to see what you have online.
Glenn, Australia
Received package today, thank you! Love how everything was packed, I especially enjoyed the fabric covering! Thank you for all you do!
Frances, Austin, Texas
Hi, just got my order! Wow! Soooooo beautiful!!! I'm so happy! You rock, thank you!
Amy, Malibu, USA
Nice website..has a collection of rare books.
Srikanth
Beautiful products nicely presented and easy to use website
Amanda, UK.
I received my order, very very beautiful products. I hope to buy something more. Thank you!
Gulnora, Uzbekistan
Thank you very much for the courtesy you showed me for the time I buy my books. The last book is a good book. İt is important in terms of recognizing fine art of İndia.
Suzan, Turkey
Thank You very much Sir. I really like the saree and the blouse fit perfeact. Thank You again.
Sulbha, USA
I have received the parcel yesterday and the shiv-linga idol is sooo beautiful and u have exceeded my expectations...
Guruprasad, Bangalore
Yesterday I received my lost and through you again found order. Very quickly I must say !. Thank you and thank you again for your service. I am very happy with this double CD of Ustad Shujaat Husain Khan. I thought it was lost forever and now I can add it to my CD collection. I hope in the near future to buy again at your online shop. You have wonderful items to offer !
Joke van der Baars, the Netherlands
TRUSTe
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2017 © Exotic India