Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Your Cart (0)
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Language and Literature > हिन्दी साहित्य > अशोक के फूल (Flowers of the Ashoka Tree)
Displaying 1 of 4544         Previous  |  NextSubscribe to our newsletter and discounts
अशोक के फूल (Flowers of the Ashoka Tree)
अशोक के फूल (Flowers of the Ashoka Tree)
Description

अशोक के फूल

हजारी प्रसाद द्विवेदी

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी भारतीय मनीषा और साहित्य एवं संस्कृति के अप्रतिक व्याख्याकार माने जाते है और उनकी मूल निष्ठा भारत की पुरान संस्कृति में है लेकिन उनकी रचनाओं में आधुनिकता के साथ आश्चर्य सामंजस्य पाया जाता है।

हिन्दी साहित्य की भूमिका और बाणभट् की आत्मकथा जैसी यशस्वी कृतियों के प्रणेता आचार्य द्विवेदी को उनके निबन्धों के लिए भी विशेष ख्याति मिली। निबन्धों में विषयानुसार शैली का प्रयोग करने में इन्हें अद्भुत क्षमता प्राप्त है। तत्सम शब्दों के साथ ठेठ ग्रामीण जीवन के शब्दों का सार्थक प्रयोग इनकी शैली का विशेष गुण है।

भारतीय संस्कृति, इतिहास, साहित्य, ज्योतिष और विभित्र धर्मों का उन्होंने गम्भीर अध्ययन किया है। जिसकी झलक पुस्तक में संकलित इन निबन्धों में मिलती है। छोटी-छोटी चीजों, विषयों का सूक्ष्मतापूर्वक अवलोकन और विश्लेषण-विवेचन उनकी निबन्धकला का विशिष्ट  व मौलिक गुण है।

निश्चय ही उनके निबन्धों का यह संग्रह पाठकों को न केवल पठनीय लगेगा बल्कि उनकी सोच को एक रचनात्मक आयाम प्रदान करेगा।

 

जीवन परिचय

हजारीप्रसाद दिूवेदी

बचपन का नाम : बैजनाथ दिूवेदी

जन्म : श्रावणशुक्ल एकादशी संवत् 1964(1907 .)

जन्मस्थान : आरत दुबे का छपरा, ओझवलिया, बलिया (उत्तर प्रदेश)

शिक्षा : संस्कृत महाविद्यालय, काशी में । 1929 . में संस्कृत साहित्य में शास्त्री और  1930 में ज्योतिष विषय लेकर शास्त्राचार्य की उपाधि ।

गतिविधियों: 8 नवम्बर, 1930 को हिन्दी शिक्षक के रूप में शान्तिनिकेतन में कार्यारम्भ वहीं 1930 से 1950 तक अध्यापन; सन् 1950 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हिन्दी प्राध्यापक और हिन्दी विभागाध्यक्ष; सन् 1960-67 में पंजाब विश्वविद्यालय चण्डीगढ़ में हिन्दी प्राध्यापक और विभागाध्यक्ष; 1967 के बाद पुन: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में; कुछ दिनों तक रेक्टर पद पर भी।

हिन्दी भवन, विश्वभारती के संचालक 1945 - 50; 'विश्व-भारती' विश्वविद्यालय की एक्जीक्यूटिव काउन्सिल के सदस्य 1950 - 53; काशी नागरी प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष 1952-53 साहित्य अकादमी, दिल्ली की साधारण सभा और प्रबन्ध-समिति के सदस्य; राजभाषा आयोग के राष्ट्रपति मनोनीत सदस्य 1955 .; जीवन के अन्तिम दिनों में उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के उपाध्यक्ष रहे। नागरी प्रचारिणी सभा, काशी के हस्तलेखों की खोज (1952) तथा साहित्य अकादमी से प्रकाशित नेशनल बिब्लियोग्राफी (1954) के निरीक्षक ।

सम्मान : लखनऊ विश्वविद्यालय से सम्मानार्थ डॉक्टर ऑफ उपाधि ( 1949) पद्यभूषण (1957), पश्चिम बैग साहित्य अकादमी क टगोर पुरस्कार तथा केन्द्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार (1973)

निधन : 19 मई, 1979

 

प्रकाशकीय

प्रस्तुत पुस्तक के विषय में विशेष कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है । श्री हजारीप्रसाद द्विवेदी उनइने-गिने चिंतकों में से हैं, जिनकी मूल निष्ठा भारत की पुरानी संस्कृति में है, लेकिन साथ ही नूतनता का आश्चर्यजनक सामंजस्य भी उनमें पाया जाता है । भारतीय संस्कृति, इतिहास, साहित्य, ज्योतिष और विभिन्न धर्मों का उन्होंने गहराई के साथ अध्ययन किया है । उनकी विद्वत्ता की झलक इस पुस्तक के निबंधों में स्पष्ट दिखाई देती है । लेखक की एक 'और विशेषता है । वह यह कि छोटी-से-छोटी चीज को भी वह सूक्ष्म दृष्टि से देखते हैं । ' वसंत आता है, हमारे आस-पास की वनस्थली रंग-बिरंगे पुष्पों से आच्छादित हो उठती है, लेकिन हममें से कितने हैं, जो उसके आकर्षक रूप को देख और पसंद कर पाते हैं? अपनी जन्मभूमि का इतिहास हममें से कितने जानते हैं? पर द्विवेदीजी की पैनी आँखें उन छोटी, पर महत्त्वपूर्ण चीजों को बिना देखे नहीं रह सकीं ।

शिक्षा और साहित्य के बारे में द्विवेदीजी का दृष्टिकोण बहुत ही स्वस्थ है । पाठक देखेंगे कि तद्विषयक निबन्धों में साहित्य एवं शिक्षा को जनहित की दृष्टि से ढालने की उन्होंने एक नवीन दिशा सुझाई है । यदि उसका अनुसरण किया जा सके तो राष्ट्र -उत्थान के लिए बड़ा काम हो सकता है ।

पुस्तक की भाषा और शैली के बारे में तो कहना ही क्या? भाषा चुस्त और शैली प्रवाहयुक्त है ।कहीं-कहीं पर कठिन शब्दों का प्रयोग सामान्य पाठक को खटक सकता है; लेकिन प्रत्येक शब्द के साथ कुछ ऐसा वातावरण रहता है कि कभी-कभी कठिन शब्दों के प्रयोग से बचा नहीं जा सकता ।

'हमें आशा है कि पाठक इस संग्रह से अधिकाधिक लाभ उठाएँगे और दिूवेदीजी की अन्य रचनाओं को भी यथासमय प्रकाशित करने का हमें अवसर देंगे ।

 

 

अट्ठाईसवाँ संस्करण

इस पुस्तक का अट्ठाईसवाँ संस्करण प्रस्तुत करते हुए हमें हर्ष हो रहा है । इतनी जल्दी सत्ताईसवाँ संस्करण निकल जाना इस बात का द्योतक है कि पुस्तक पाठकों को पसंद आई है। कई शिक्षण-संस्थानों ने इसे अपने पावयक्रम में सम्मिलित कर लिया है। ऐसे स्वस्थ साहित्य का अधिक-से-अधिक प्रसार होना चाहिए । यदि हम चाहते हैं कि हमारे आज के नवयुवक जिम्मेदार नागरिक बनकर समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्त्तव्य का । सुचारु रूप से पालन करें, तो उन्हें ऐसी पुस्तकें अधिकाधिक संख्या में मिलनी चाहिए ।हमें विश्वास है पुस्तक की लोकप्रियता आगे और बढ़ेगी । 

 

अनुक्रम

 

1

अशोक के फूल

9

2

वसंत आ गया है

17

3

प्रायश्चित्त की घड़ी

20

4

घर जोड्ने की माया

28

5

मेरी जन्मभूमि

33

6

सावधानी की आवश्यकता

39

7

आपने मेरी रचना पढ़ी

47

8

हमारी राष्ट्रीय शिक्षा-प्रणाली

51

9

भारतवर्ष की सांस्कृतिक समस्या

57

10

भारतीय संस्कृति की देन

67

11

हमारे पुराने साहित्य के इतिहास की सामग्री

78

12

संस्कृत का साहित्य ।

84

13

पुरानी पोथियाँ

90

14

काव्य-माला

99

15

रवींद्रनाथ के राष्ट्रीय गान

108

16

एक कुत्ता और एक मैना

122

17

आलोचना का स्वतन्त्र मान

127

18

साहित्यकारों का दायित्व

132

19

मनुष्य ही साहित्य का लक्ष्य है

143

20

नव वर्ष गया

160

21

भारतीय फलित ज्योतिष...

166

 

अशोक के फूल (Flowers of the Ashoka Tree)

Item Code:
NZA221
Cover:
Paperback
Edition:
2013
ISBN:
9788180315503
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
176
Other Details:
Weight of the Books: 160 gms
Price:
$11.00   Shipping Free
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
अशोक के फूल (Flowers of the Ashoka Tree)

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 6056 times since 5th Nov, 2013

अशोक के फूल

हजारी प्रसाद द्विवेदी

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी भारतीय मनीषा और साहित्य एवं संस्कृति के अप्रतिक व्याख्याकार माने जाते है और उनकी मूल निष्ठा भारत की पुरान संस्कृति में है लेकिन उनकी रचनाओं में आधुनिकता के साथ आश्चर्य सामंजस्य पाया जाता है।

हिन्दी साहित्य की भूमिका और बाणभट् की आत्मकथा जैसी यशस्वी कृतियों के प्रणेता आचार्य द्विवेदी को उनके निबन्धों के लिए भी विशेष ख्याति मिली। निबन्धों में विषयानुसार शैली का प्रयोग करने में इन्हें अद्भुत क्षमता प्राप्त है। तत्सम शब्दों के साथ ठेठ ग्रामीण जीवन के शब्दों का सार्थक प्रयोग इनकी शैली का विशेष गुण है।

भारतीय संस्कृति, इतिहास, साहित्य, ज्योतिष और विभित्र धर्मों का उन्होंने गम्भीर अध्ययन किया है। जिसकी झलक पुस्तक में संकलित इन निबन्धों में मिलती है। छोटी-छोटी चीजों, विषयों का सूक्ष्मतापूर्वक अवलोकन और विश्लेषण-विवेचन उनकी निबन्धकला का विशिष्ट  व मौलिक गुण है।

निश्चय ही उनके निबन्धों का यह संग्रह पाठकों को न केवल पठनीय लगेगा बल्कि उनकी सोच को एक रचनात्मक आयाम प्रदान करेगा।

 

जीवन परिचय

हजारीप्रसाद दिूवेदी

बचपन का नाम : बैजनाथ दिूवेदी

जन्म : श्रावणशुक्ल एकादशी संवत् 1964(1907 .)

जन्मस्थान : आरत दुबे का छपरा, ओझवलिया, बलिया (उत्तर प्रदेश)

शिक्षा : संस्कृत महाविद्यालय, काशी में । 1929 . में संस्कृत साहित्य में शास्त्री और  1930 में ज्योतिष विषय लेकर शास्त्राचार्य की उपाधि ।

गतिविधियों: 8 नवम्बर, 1930 को हिन्दी शिक्षक के रूप में शान्तिनिकेतन में कार्यारम्भ वहीं 1930 से 1950 तक अध्यापन; सन् 1950 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हिन्दी प्राध्यापक और हिन्दी विभागाध्यक्ष; सन् 1960-67 में पंजाब विश्वविद्यालय चण्डीगढ़ में हिन्दी प्राध्यापक और विभागाध्यक्ष; 1967 के बाद पुन: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में; कुछ दिनों तक रेक्टर पद पर भी।

हिन्दी भवन, विश्वभारती के संचालक 1945 - 50; 'विश्व-भारती' विश्वविद्यालय की एक्जीक्यूटिव काउन्सिल के सदस्य 1950 - 53; काशी नागरी प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष 1952-53 साहित्य अकादमी, दिल्ली की साधारण सभा और प्रबन्ध-समिति के सदस्य; राजभाषा आयोग के राष्ट्रपति मनोनीत सदस्य 1955 .; जीवन के अन्तिम दिनों में उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के उपाध्यक्ष रहे। नागरी प्रचारिणी सभा, काशी के हस्तलेखों की खोज (1952) तथा साहित्य अकादमी से प्रकाशित नेशनल बिब्लियोग्राफी (1954) के निरीक्षक ।

सम्मान : लखनऊ विश्वविद्यालय से सम्मानार्थ डॉक्टर ऑफ उपाधि ( 1949) पद्यभूषण (1957), पश्चिम बैग साहित्य अकादमी क टगोर पुरस्कार तथा केन्द्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार (1973)

निधन : 19 मई, 1979

 

प्रकाशकीय

प्रस्तुत पुस्तक के विषय में विशेष कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है । श्री हजारीप्रसाद द्विवेदी उनइने-गिने चिंतकों में से हैं, जिनकी मूल निष्ठा भारत की पुरानी संस्कृति में है, लेकिन साथ ही नूतनता का आश्चर्यजनक सामंजस्य भी उनमें पाया जाता है । भारतीय संस्कृति, इतिहास, साहित्य, ज्योतिष और विभिन्न धर्मों का उन्होंने गहराई के साथ अध्ययन किया है । उनकी विद्वत्ता की झलक इस पुस्तक के निबंधों में स्पष्ट दिखाई देती है । लेखक की एक 'और विशेषता है । वह यह कि छोटी-से-छोटी चीज को भी वह सूक्ष्म दृष्टि से देखते हैं । ' वसंत आता है, हमारे आस-पास की वनस्थली रंग-बिरंगे पुष्पों से आच्छादित हो उठती है, लेकिन हममें से कितने हैं, जो उसके आकर्षक रूप को देख और पसंद कर पाते हैं? अपनी जन्मभूमि का इतिहास हममें से कितने जानते हैं? पर द्विवेदीजी की पैनी आँखें उन छोटी, पर महत्त्वपूर्ण चीजों को बिना देखे नहीं रह सकीं ।

शिक्षा और साहित्य के बारे में द्विवेदीजी का दृष्टिकोण बहुत ही स्वस्थ है । पाठक देखेंगे कि तद्विषयक निबन्धों में साहित्य एवं शिक्षा को जनहित की दृष्टि से ढालने की उन्होंने एक नवीन दिशा सुझाई है । यदि उसका अनुसरण किया जा सके तो राष्ट्र -उत्थान के लिए बड़ा काम हो सकता है ।

पुस्तक की भाषा और शैली के बारे में तो कहना ही क्या? भाषा चुस्त और शैली प्रवाहयुक्त है ।कहीं-कहीं पर कठिन शब्दों का प्रयोग सामान्य पाठक को खटक सकता है; लेकिन प्रत्येक शब्द के साथ कुछ ऐसा वातावरण रहता है कि कभी-कभी कठिन शब्दों के प्रयोग से बचा नहीं जा सकता ।

'हमें आशा है कि पाठक इस संग्रह से अधिकाधिक लाभ उठाएँगे और दिूवेदीजी की अन्य रचनाओं को भी यथासमय प्रकाशित करने का हमें अवसर देंगे ।

 

 

अट्ठाईसवाँ संस्करण

इस पुस्तक का अट्ठाईसवाँ संस्करण प्रस्तुत करते हुए हमें हर्ष हो रहा है । इतनी जल्दी सत्ताईसवाँ संस्करण निकल जाना इस बात का द्योतक है कि पुस्तक पाठकों को पसंद आई है। कई शिक्षण-संस्थानों ने इसे अपने पावयक्रम में सम्मिलित कर लिया है। ऐसे स्वस्थ साहित्य का अधिक-से-अधिक प्रसार होना चाहिए । यदि हम चाहते हैं कि हमारे आज के नवयुवक जिम्मेदार नागरिक बनकर समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्त्तव्य का । सुचारु रूप से पालन करें, तो उन्हें ऐसी पुस्तकें अधिकाधिक संख्या में मिलनी चाहिए ।हमें विश्वास है पुस्तक की लोकप्रियता आगे और बढ़ेगी । 

 

अनुक्रम

 

1

अशोक के फूल

9

2

वसंत आ गया है

17

3

प्रायश्चित्त की घड़ी

20

4

घर जोड्ने की माया

28

5

मेरी जन्मभूमि

33

6

सावधानी की आवश्यकता

39

7

आपने मेरी रचना पढ़ी

47

8

हमारी राष्ट्रीय शिक्षा-प्रणाली

51

9

भारतवर्ष की सांस्कृतिक समस्या

57

10

भारतीय संस्कृति की देन

67

11

हमारे पुराने साहित्य के इतिहास की सामग्री

78

12

संस्कृत का साहित्य ।

84

13

पुरानी पोथियाँ

90

14

काव्य-माला

99

15

रवींद्रनाथ के राष्ट्रीय गान

108

16

एक कुत्ता और एक मैना

122

17

आलोचना का स्वतन्त्र मान

127

18

साहित्यकारों का दायित्व

132

19

मनुष्य ही साहित्य का लक्ष्य है

143

20

नव वर्ष गया

160

21

भारतीय फलित ज्योतिष...

166

 

Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Based on your browsing history

Loading... Please wait

Related Items

The Oxford India Anthology of Bengali Literature: 1861-1941 and 1941-1991 (Set of Two Volumes)
Deal 12% Off
by Kalpana Bardhan
Hardcover (Edition: 2010)
Oxford University Press
Item Code: IHJ004
$95.00$83.60
You save: $11.40 (12%)
Add to Cart
Buy Now
Couplets from Kabir (Kabir Dohe)
Item Code: IDD885
$13.00
Add to Cart
Buy Now
The Cultural Heritage of India (Set of 9 Volumes)
Item Code: NAF605
$450.00
Add to Cart
Buy Now
Famous Great Indian Authors and Poets
by Shyam Dua
Paperback (Edition: 2007)
Tiny Tot Publications
Item Code: NAF095
$15.00
Add to Cart
Buy Now
The Wandering Sufis (Qalandars and Their Path)
by Kumkum Srivastava
Hardcover (Edition: 2009)
Aryan Books International
Item Code: IDK971
$50.00
Add to Cart
Buy Now
The Structure of Indian Mind
Item Code: IHL155
$25.00
Add to Cart
Buy Now
Couplets from Kabir (Kabir Dohe)
Item Code: IDD884
$19.00
Add to Cart
Buy Now
The Bijak of Kabir
Item Code: NAD088
$20.00
Add to Cart
Buy Now
Popular Tales of Rajasthan
by L.N. Birla
Paperback (Edition: 2001)
Bharatiya Vidya Bhavan
Item Code: IHL615
$12.50
Add to Cart
Buy Now
Temple And Legends Of Bengal
by P.C. Roy Choudhury
Paperback (Edition: 1988)
Bharatiya Vidya Bhavan
Item Code: IDG622
$10.00
Add to Cart
Buy Now
Shock Therapy
by Subodh Ghose
Paperback (Edition: 2001)
Orient Longman Pvt. Ltd.
Item Code: NAI398
$18.00
Add to Cart
Buy Now
Temple And Legends of Bihar
by P.C. Roy Choudhury
Paperback (Edition: 1988)
Bharatiya Vidya Bhavan
Item Code: IDG621
$7.50
Add to Cart
Buy Now

Testimonials

I am overwhelmed with the amount of hard-to-find Hindu scriptural texts that I have been able to locate on the Exotic India website as well as other authentic cultural items from India. I am impressed with your fast and reliable shipping methods.
Lee Scott, USA
Your service is excellent.
Shambhu, USA
Exotic India has the best selection of Hindu/Buddhist statues at the best prices and best shipping that I know of.I have bought many statues from them.I am thankful for their online presence.
Michael, USA
Thanks for sharpening our skills with wisdom and sense of humor.The torchbearers of the ancient deity religion are spread around the world and the books of wisdom from India bridges the gap between east and west.
Kaushiki, USA
Thank you for this wonderful New Year sale!
Michael, USA
Many Thanks for all Your superb quality Artworks at unbeatable prices. We have been recommending EI to friends & family for over 5 yrs & will continue to do so fervently. Cheers
Dara, Canada
Thank you for your wonderful selection of books and art work. I am a regular customer and always appreciate the excellent items you offer and your great service.
Lars, USA
Colis bien reçu, emballage excellent et statue conforme aux attentes. Du bon travail, je reviendrai sur votre site !
Alain, France
GREAT SITE. SANSKRIT AND HINDI LINGUISTICS IS MY PASSION. AND I THANK YOU FOR THIS SITE.
Madhu, USA
I love your site and although today is my first order, I have been seeing your site for the past several years. Thank you for providing such great art and books to people around the World who can't make it to India as often as we would like.
Rupesh
TRUSTe
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2018 © Exotic India