Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Your Cart (0)
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindi > भारतीय ज्योतिष का इतिहास: History of Indian Astrology
Displaying 3832 of 11391         Previous  |  NextSubscribe to our newsletter and discounts
भारतीय ज्योतिष का इतिहास: History of Indian Astrology
भारतीय ज्योतिष का इतिहास: History of Indian Astrology
Description

प्रकाशकीय

भले ही आज ज्योतिष को भविष्य जानने की मनुष्य की स्वाभाविक उत्सुकता के साथ जोड कर अधिक देखा जाता हो आदि काल से यह क्षेत्र समूचे ब्रह्माण्ड की स्थितियों पृथ्वी से उनके सम्बन्ध और पडने वालों प्रभावों तथा कालगणना आदि के सन्दर्भ में अत्यत गंभीर चिंतन-मनन व शोध से जुडा रहा है । प्रारम्भ में काल गणना में सूर्य को निकलने-डूबने के कारण दिन को मान्यता मिली। इसकी परिधि बढी. तो चन्द्रमा की गतिशीलता के आधार पर माह की अवधारणा सामने आयी और फिर वर्ष' के रूप में विभिन्न मौसमों को हमारे पुरखों ने अपनाया। वर्षा और शरद इत्यादि ऋतुए (जीवेत शरद. शतम्) उसकी प्रेरक बनीं। यो इनका भी मूल आधार एक साल में पूरी होने वाली सूर्य की पृथ्वी-परिक्रमा ही है। भारत में समय-समय पर ऐसे विभिन्न क्षेत्रों में आर्यभट्ट वाराहमिहिर, भास्कर व जयसिह जैसे मनीषियों ने अत्यत महत्वपूर्ण कार्य किये. जिनके चलते अनेक पुस्तकों और उनकी टीकाओं के माध्यम से इस अत्यत प्राचीन विज्ञान में न केवल जानकारियॉ जुड़ती गयी, अपितु उसने विशेष रूप से अरबी चीनी ओर यूनानी संस्कृतियों का भी मार्गदर्शन किया।

यह पुस्तक 'भारतीय ज्योतिष का इतिहास इसी सुदीर्ध, सुविचारित और सर्वांगीण ज्ञान-परम्परा को सक्षिप्त रूप से ही सही, सुव्यवस्थित ढंग से समेटने और उसे शब्द देने का सफल प्रयास है। इसके लेखक डॉ० गोरखप्रसाद इस क्षेत्र के जाने-माने विद्वान थे। उन्होंने इस पुस्तक को 18 अध्यायों में बाटा है और इनके अन्तर्गत प्राचीनतम ज्योतिष से लेकर अब तक की उसकी विकास परम्परा महान भारतीय खगोलविदों के व्यक्तित्व और कृतित्व तथा विशेषताओं को इस ढग से प्रस्तुत किया है कि यह पुस्तक शोधार्थियों से लेकर जिज्ञासु पाठकों तक. सभी के लिए. अत्यत उपयोगी रूप हमारे सामने आती है। इसी के चलते इसकी लोकाप्रियता लगभग छ दशक बाद आज भी अक्षुण्ण है। हमारे हिन्दी समिति प्रभाग का यह पहला प्रकाशन हैष अत:इसके प्रति विशेष अनुराग और चतुर्थ संस्करण के प्रकाशन की असाधारण प्रसन्नता स्वाभाविक है प्रख्यात खगोलविद और ज्योतिषाचार्य डॉ० गोरखप्रसाद को नमन के साथ हम इस पुस्तक का यह पुनर्प्रकाशन हिन्दी समिति प्रभाग की प्रकाशन योजना के अन्तर्गत कर रहे है।

आशा है, भारतीय सस्कृति के अत्यत विकसित क्षेत्र ज्योतिष के सम्बन्ध में अधिकतम एवं महत्वपूर्ण जानकारी के लिए ज्योतिष प्रेमियों एवं अध्येताओं के बीच इसकी उपादेयता आगे बनी रहेगी।

हिन्दी समिति प्रभाग का यह पहला प्रकाशन है, अत: इसके प्रति विशेष अनुराग और चतुर्थ संस्करण के प्रकाशन की असाधारण प्रसन्नता स्वाभाविक है। प्रख्यात खगोलविद और ज्योतिषाचार्य डॉ० गोरखप्रसाद को नमन के साथ हम इस पुस्तक का यह पुनर्प्रकाशन हिन्दी समिति प्रभाग की प्रकाशन योजना के अन्तर्गत कर रहे हैं।

आशा है, भारतीय संस्कृति के अत्यंत विकसित क्षेत्र ज्योतिष के सम्बन्ध में अधिकतम एवं महत्वपूर्ण जानकारी के लिए ज्योतिष प्रेमियों एवं अध्येताओं के बीच इसकी उपादेयता आगे बनी रहेगी।

 

विषय-सूची

1

प्रारंभिक बातें

1

2

प्राचीनतम ज्योतिष

10

3

मासों के नये नाम

19

4

वैदिक काल में दिन, नक्षत्र, आदि

29

5

वेदांग-ज्योतिष

37

6

वेद और बेदाग का काल

49

7

महाभारत में ज्योतिष

70

8

आर्यभट

79

9

वराहमिहिर

93

10

पाश्चात्य ज्योतिष का इतिहास

117

11

सूर्य-सिद्धात

128

12

भारतीय और यवन ज्योतिष

165

13

लाटदेव से भास्कराचार्य तक

173

14

सिद्धात-शिरोमणि और करण-कुतूहल

193

15

भास्कराचार्य के बाद

204

16

जयसिंह और उनकी वेधशालाएँ

217

17

जयसिंह के बाद

235

18

भारतीय पचांग

262

भारतीय ज्योति संबंधी संस्कृत ग्रंथ

273

अनुक्रमणिका

277

भारतीय ज्योतिष का इतिहास: History of Indian Astrology

Item Code:
NZA849
Cover:
Paperback
Edition:
2010
ISBN:
9788189989569
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
290(8B/W illustrations)
Other Details:
Weight of the Book: 320 gms
Price:
$25.00
Discounted:
$20.00   Shipping Free
You Save:
$5.00 (20%)
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
भारतीय ज्योतिष का इतिहास: History of Indian Astrology

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 2129 times since 17th Dec, 2016

प्रकाशकीय

भले ही आज ज्योतिष को भविष्य जानने की मनुष्य की स्वाभाविक उत्सुकता के साथ जोड कर अधिक देखा जाता हो आदि काल से यह क्षेत्र समूचे ब्रह्माण्ड की स्थितियों पृथ्वी से उनके सम्बन्ध और पडने वालों प्रभावों तथा कालगणना आदि के सन्दर्भ में अत्यत गंभीर चिंतन-मनन व शोध से जुडा रहा है । प्रारम्भ में काल गणना में सूर्य को निकलने-डूबने के कारण दिन को मान्यता मिली। इसकी परिधि बढी. तो चन्द्रमा की गतिशीलता के आधार पर माह की अवधारणा सामने आयी और फिर वर्ष' के रूप में विभिन्न मौसमों को हमारे पुरखों ने अपनाया। वर्षा और शरद इत्यादि ऋतुए (जीवेत शरद. शतम्) उसकी प्रेरक बनीं। यो इनका भी मूल आधार एक साल में पूरी होने वाली सूर्य की पृथ्वी-परिक्रमा ही है। भारत में समय-समय पर ऐसे विभिन्न क्षेत्रों में आर्यभट्ट वाराहमिहिर, भास्कर व जयसिह जैसे मनीषियों ने अत्यत महत्वपूर्ण कार्य किये. जिनके चलते अनेक पुस्तकों और उनकी टीकाओं के माध्यम से इस अत्यत प्राचीन विज्ञान में न केवल जानकारियॉ जुड़ती गयी, अपितु उसने विशेष रूप से अरबी चीनी ओर यूनानी संस्कृतियों का भी मार्गदर्शन किया।

यह पुस्तक 'भारतीय ज्योतिष का इतिहास इसी सुदीर्ध, सुविचारित और सर्वांगीण ज्ञान-परम्परा को सक्षिप्त रूप से ही सही, सुव्यवस्थित ढंग से समेटने और उसे शब्द देने का सफल प्रयास है। इसके लेखक डॉ० गोरखप्रसाद इस क्षेत्र के जाने-माने विद्वान थे। उन्होंने इस पुस्तक को 18 अध्यायों में बाटा है और इनके अन्तर्गत प्राचीनतम ज्योतिष से लेकर अब तक की उसकी विकास परम्परा महान भारतीय खगोलविदों के व्यक्तित्व और कृतित्व तथा विशेषताओं को इस ढग से प्रस्तुत किया है कि यह पुस्तक शोधार्थियों से लेकर जिज्ञासु पाठकों तक. सभी के लिए. अत्यत उपयोगी रूप हमारे सामने आती है। इसी के चलते इसकी लोकाप्रियता लगभग छ दशक बाद आज भी अक्षुण्ण है। हमारे हिन्दी समिति प्रभाग का यह पहला प्रकाशन हैष अत:इसके प्रति विशेष अनुराग और चतुर्थ संस्करण के प्रकाशन की असाधारण प्रसन्नता स्वाभाविक है प्रख्यात खगोलविद और ज्योतिषाचार्य डॉ० गोरखप्रसाद को नमन के साथ हम इस पुस्तक का यह पुनर्प्रकाशन हिन्दी समिति प्रभाग की प्रकाशन योजना के अन्तर्गत कर रहे है।

आशा है, भारतीय सस्कृति के अत्यत विकसित क्षेत्र ज्योतिष के सम्बन्ध में अधिकतम एवं महत्वपूर्ण जानकारी के लिए ज्योतिष प्रेमियों एवं अध्येताओं के बीच इसकी उपादेयता आगे बनी रहेगी।

हिन्दी समिति प्रभाग का यह पहला प्रकाशन है, अत: इसके प्रति विशेष अनुराग और चतुर्थ संस्करण के प्रकाशन की असाधारण प्रसन्नता स्वाभाविक है। प्रख्यात खगोलविद और ज्योतिषाचार्य डॉ० गोरखप्रसाद को नमन के साथ हम इस पुस्तक का यह पुनर्प्रकाशन हिन्दी समिति प्रभाग की प्रकाशन योजना के अन्तर्गत कर रहे हैं।

आशा है, भारतीय संस्कृति के अत्यंत विकसित क्षेत्र ज्योतिष के सम्बन्ध में अधिकतम एवं महत्वपूर्ण जानकारी के लिए ज्योतिष प्रेमियों एवं अध्येताओं के बीच इसकी उपादेयता आगे बनी रहेगी।

 

विषय-सूची

1

प्रारंभिक बातें

1

2

प्राचीनतम ज्योतिष

10

3

मासों के नये नाम

19

4

वैदिक काल में दिन, नक्षत्र, आदि

29

5

वेदांग-ज्योतिष

37

6

वेद और बेदाग का काल

49

7

महाभारत में ज्योतिष

70

8

आर्यभट

79

9

वराहमिहिर

93

10

पाश्चात्य ज्योतिष का इतिहास

117

11

सूर्य-सिद्धात

128

12

भारतीय और यवन ज्योतिष

165

13

लाटदेव से भास्कराचार्य तक

173

14

सिद्धात-शिरोमणि और करण-कुतूहल

193

15

भास्कराचार्य के बाद

204

16

जयसिंह और उनकी वेधशालाएँ

217

17

जयसिंह के बाद

235

18

भारतीय पचांग

262

भारतीय ज्योति संबंधी संस्कृत ग्रंथ

273

अनुक्रमणिका

277

Post a Comment
 
Post Review
  • I want to purchase this book in Hindi medium.
    by nitendra rajput on 12th Jan 2016
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Related Items

Astrological Analysis of Indian Affairs (1947-2050)
Deal 12% Off
Item Code: IDK206
$55.00$38.72
You save: $16.28 (12 + 20%)
Add to Cart
Buy Now
Encyclopaedia of Indian Astrology (In Two Volumes)
Item Code: IDL171
$125.00$100.00
You save: $25.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Astrology And Religion In Indian Art
by Swami Sivapriyananda
Hardcover (Edition: 1990)
Abhinav Publications
Item Code: IDE056
$32.00$25.60
You save: $6.40 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Indian Astrology An Appraisal
by V.S. Kalyanraman
Paperback (Edition: 2007)
CBH Publications
Item Code: IDL038
$22.50$18.00
You save: $4.50 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Hindu Astrology and the West
Item Code: NAD411
$16.00$12.80
You save: $3.20 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Karma and Rebirth in Hindu Astrology (Explained Illustratively With Many Horoscopes)
by K. N. Rao
Paperback (Edition: 2015)
Vani Publications
Item Code: NAE058
$20.00$16.00
You save: $4.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Time Tested Techniques of Mundane Astrology (With Over 100 Illustration)
by Shri K.N. Rao
Paperback (Edition: 2009)
Vani Publications
Item Code: NAE171
$27.50$22.00
You save: $5.50 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Fundamentals of Astrology
Item Code: NAC349
$25.00$20.00
You save: $5.00 (20%)
SOLD
God Goddess The Astrologer (Soul, Karma and Reincarnation How we Continually Create our own Destiny)
Item Code: IDI136
$22.00$17.60
You save: $4.40 (20%)
Add to Cart
Buy Now
A Nation's Prophecy (Inclusive Methodology of Mundane Astrology by Dr. Ravi Rao)
by Dr. Ravi Rao
Paperback (Edition: 2014)
Star Publication House
Item Code: NAG144
$37.50$30.00
You save: $7.50 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Longevity and Un-Natural Deaths (An Astrological Study on Natal Charts)
by M.K. Viswannath
Paperback (Edition: 2013)
Sagar Publications
Item Code: NAE934
$23.50$18.80
You save: $4.70 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Mundane Astrology
by M. N. Kedar
Paperback (Edition: 2010)
K. V. R. Publishers
Item Code: NAD209
$27.50$22.00
You save: $5.50 (20%)
Add to Cart
Buy Now
The Textbook of Astrology
by Umang Taneja
Paperback (Edition: 2013)
Umang Taneja
Item Code: NAJ580
$30.00$24.00
You save: $6.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Tried Technique of Predictions and Some Memoirs of an Astrologer
by K.N. Rao
Paperback (Edition: 2009)
Vani Publications
Item Code: NAD990
$12.00$9.60
You save: $2.40 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Astrology Destiny and the Wheel of Time (Techniques and Predictions)
by K.N.Rao
Paperback (Edition: 2011)
Vani Publications
Item Code: NAG029
$20.00$16.00
You save: $4.00 (20%)
SOLD

Testimonials

Very grateful for this service, of making this precious treasure of Haveli Sangeet for ThakurJi so easily in the US. Appreciate the fact that notation is provided.
Leena, USA.
The Bhairava painting I ordered by Sri Kailash Raj is excellent. I have been purchasing from Exotic India for well over a decade and am always beyond delighted with my extraordinary purchases and customer service. Thank you.
Marc, UK
I have been buying from Exotic India for years and am always pleased and excited to receive my packages. Thanks for the quality products.
Delia, USA
As ever, brilliant price and service.
Howard, UK.
The best and fastest service worldwide - I am in Australia and I put in a big order of books (14 items) on a Wednesday; it was sent on Friday and arrived at my doorstep early on Monday morning - amazing! All very securely packed in a very strong cardboard box. I have bought several times from Exotic India and the service is always exceptionally good. THANK YOU and NAMASTE!
Charles (Rudra)
I just wanted to say that this is I think my 3rd (big) order from you, and the last two times I received immaculate service, the books arrived well and it has been a very pleasant experience. Just wanted to say thanks for your efficient service.
Shantala, Belgium
Thank you so much EXOTIC INDIA for the wonderfull packaging!! I received my order today and it was gift wrapped with so much love and taste in a beautiful golden gift wrap and everything was neat and beautifully packed. Also my order came very fast... i am impressed! Besides selling fantastic items, you provide an exceptional customer service and i will surely purchase again from you! I am very glad and happy :) Thank you, Salma
Salma, Canada.
Artwork received today. Very pleased both with the product quality and speed of delivery. Many thanks for your help.
Carl, UK.
I wanted to let you know how happy we are with our framed pieces of Shree Durga and Shree Kali. Thank you and thank your framers for us. By the way, this month we offered a Puja and Yagna to the Ardhanarishwara murti we purchased from you last November. The Brahmin priest, Shree Vivek Godbol, who was visiting LA preformed the rites. He really loved our murti and thought it very paka. I am so happy to have found your site , it is very paka and trustworthy. Plus such great packing and quick shipping. Thanks for your service Vipin, it is a pleasure.
Gina, USA
My marble statue of Durga arrived today in perfect condition, it's such a beautiful statue. Thanks again for giving me a discount on it, I'm always very pleased with the items I order from you. You always have the best quality items.
Charles, Tennessee
TRUSTe
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2017 © Exotic India