Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Your Cart (0)
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Astrology > हिन्दू ज्योतिष में कर्म और पुनर्जन्म: Karma and Rebirth in Hindu Astrology
Displaying 273 of 1024         Previous  |  NextSubscribe to our newsletter and discounts
हिन्दू ज्योतिष में कर्म और पुनर्जन्म: Karma and Rebirth in Hindu Astrology
हिन्दू ज्योतिष में कर्म और पुनर्जन्म: Karma and Rebirth in Hindu Astrology
Description

लेखक परिचय

के. एन. राव

 

भारतीय लेखा तथा परीक्षण सेवा से महानिदेशक के तौर पर सेवानिवृत्तश्री के०एन० राव (कोट्टमराजू नारायण राव) प्रतिष्ठित पत्रकार तथा नेशनल हेराल्ड के संस्थापक-संपादक स्व० के० रामा राव के पुत्र हैं । पिता के कार्य क्षेत्र से अलग ज्योतिष में श्री राव के रुझान की प्रेरणा बनीं उनकी श्रद्धेय मां के० सरसवाणी देवी । मां के संरक्षण में राव बारह वर्ष की आयु से ही ज्योतिष सीखने लगे । पारंपरिक ज्योतिष में सिद्धहस्त श्रीमती सरसवाणी देवी की ' विवाह संतान ' और ' प्रश्न शास्त्र ' जैसे विषयों में गहरी पैठ थी ।

 

प्रशासनिक सेवा में आने से पूर्व कुछ समय तक श्री राव अंग्रेजी साहित्य के प्राध्यापक रहे । 1957 में अखिल भारतीय परीक्षा के जरिये प्रशासनिक सेवा में प्रवेश करने वाले श्री राव की आरंभिक रुचि खेलों में थी और युवावस्था में उन्होंने शतरंज और ब्रिज जैसे खेलों में राज्य स्तरीय पुरस्कार भी जीते थे । वह कई अन्य खेलों में भी सक्रिय रहे । यही वजह है कि उनके ज्योतिषीय लेखन में खेलों का बारम्बार उल्लेख मिलता है ।

 

प्रशासनिक सेवा काल में बतौर सह-निदेशक और निदेशक श्री राव ने तीन अंतर्राष्ट्रीय पाठयक्रमों का नियोजन निरूपण और संचालन किया । काम कै सिलसिले में संपर्क में आए विदेशियों से ज्योतिषीय आधार पर उनके सम्बन्ध निजी और प्रगाढ़ होते गए और इससे उनके विदेशी मित्रों की संख्या में भारी इजाफा हुआ ।

 

सरकारी सेवा काल के दौरान श्री राव ने हजारों जन्म कुंडलियां संकलित की । आज भी उनके पास पचास हजार से ज्यादा ऐसी कुंडलियों का संग्रह हैं जिससे हर जातक के जीवन की कम से कम दस प्रमुख घटनाएं दर्ज हैं । संभवतया यह दुनिया का सबसे बड़ा निजी शोध संग्रह है । जीवन लक्ष्य की तरह ज्योतिष साधना का तनाव उन्हें कई बार इससे दूर भी ले गया । मगर दिसम्बर 1981 में दिल्ली में आयोजित एक तीन-दिवसीय सेमिनार में भागीदारी ने उनके इस अलगाव को पाटने में काफी हद तक मदद की । सेमिनार में सरल व रोचक धाराप्रवाह व्याख्यान् के बाद उनके शोध प्रधान ज्योतिषीय लेखन की मांग निरंतर बढ़ती गई और तभी से श्री राव द्वारा अपने मौलिक शोध प्रबधो को पाठकों के साथ बांटने का सतत सिलसिला शुरू हुआ ।

 

ज्योतिष जैसे गूढ़ तथा परम्परावादी विषय में श्री राव की शैक्षिक तथा बैद्धिक पहल का सुखद परिणाम है कि आज भारत में हजारों और अमेरिका में दो सौ से भी ज्यादा शिष्य हैं । वह भारतीय विद्या भवन दिल्ली में ज्योतिष पाठयक्रम के सलाहकार हैं । उन्हीं की प्ररेणा से भवन की ज्योतिष संकाय के अन्य प्रशिक्षक भी अवैतनिक काम करते हैं ।

 

जीविका के तौर पर ज्योतिष की साधना में स्वार्थ और धनलोलुपता ने इसे पर्याप्त अपयश ही दिया है । इसलिए व्यवसायिक ज्योतिष से दूर रहने की श्री राव की आकांक्षा ने उन्हें हजारों हितैषी और मित्र दिए तो कुछ शत्रु भी । बेवजह उनके शत्रु बने लोग वे थे जो बरसों से आधे- अधूरे ज्ञान व लालच के अधीन लोगों को बेवकूफ बना छलने का काम करते आ रहे थे । मगर दूसरी ओर श्री राव के प्रयासों के चलते उनके आस-पास दो सौ से ज्यादा ऐसे काबिल ज्योतिषियों की टीम तैयार हुई जिनके लिए ज्योतिष आजीविका न होकर ऐसा पराविज्ञान था जिसमें मानव जीवन का अर्थ ओर उद्देश्य छुपा था । वेदांग के रूप में ज्योतिष ऐसी ही विधा होनी चाहिए।

 

कोई भी जिज्ञासु जानना चाहेगा कि किस बात ने श्री राव को जीवन का इतना गान उद्देश्य दिया । श्री राव की कुंडली में लग्नेश व दशमेश की लग्न में युति है जवकि दशम भाव में उच्चस्थ बृहस्पति है । उनके ज्योतिष गुरु योगी भास्करानन्द यह जानते थे । उन्होंने कहा था कि हिंदू ज्योतिष को प्रतिष्ठा पहचान और गरिमा प्रदान करने के लिए राव को अनेक बार विदेश जाना पड़ेगा । ( 1993 में श्री राव की प्रथम अमरिका यात्रा के प्रभाव पर एक अमेरिकी ने यहां तक लिख दिया - हिन्दू ज्योतिष- राव से पूर्व तथा राव के पश्चात् ।)1993 से 1995 के बीच श्री राव पांच बार अमेरिका गए । 1993 में वह अमेरिकन कउंसिल ऑफ हिन्दू एस्ट्रालॉजी की दूसरी कॉन्फ्रेंस में मुख्य अतिथि थे । उनसे 1994 में आयोजित तीसरी कॉन्फ्रेंस में भी उपस्थित रहने का अनुरोध किया गया क्योंकि आयोजक उनकी भीड़ जुटाने की क्षमता से वाकिफ हो चुके थे । काउंसिल की चौथी कॉनफ्रेंस में श्री राव के मना करने के बावजूद आयोजको ने उनके नाम को भुनाने की न्यप्ति कोशिश की जून 1998 से श्री राव पांच बार रूस (मास्को) गये जहां दुभाषये की मदद से इन्होनें ज्योतिष पढाई जो एक सफलतम कार्यक्रमों में से एक रहा ।

 

श्री राव के नवीनतम शोध प्रबंधों का संकलन उनकी दी गई पुस्तकों' जैमिनी चर दशा से भविष्य कथन '' तथा '' कारकांश और मंडूक दशा '' में दिया गया है। श्री राव के ज्योतिष गुरु ने बताया था कि ज्योतिष में पुस्तकों से ज्यादा ज्ञान परम्परा न् मिलेगा क्योंकि पुस्तकों का सिर्फ शाब्दिक अनुवाद हुआ है जिनमें व्यावहारिक करने की कोशिश की है । वेदांग के रूप में ज्योतिष पर विभिन्न योगियों के विचार श्री राव की पुस्तक ''योगीज डेस्टिनी एंड व्हील ऑफ टाइम '' में उद्धृत किए गए हैं । मंत्र गुरुस्वामी परमानंद सरस्वती और ज्योतिष गुरु योगी भास्करानंद ने श्री राव को आध्यात्मिक ज्योतिष के कुछ गंभीर रहस्य बताए थे जिनका प्राय : किसी ज्योतिष मथ में उल्लेख नहीं मिलता ।

 

श्री राव की इस पुस्तक में ऐसे कुछ गूढ़ तत्वों का निरूपण किया गयाहै । श्री राव की प्रथम ज्योतिष गुरु उनकी माता भी ऐसे अनेक पारम्परिक रहस्य । जानती थीं जिनमें से कुछ का खुलासा इसी किताब में है । अन्य कुछ बातें उनकी पुस्तकों '' अप्स एण्ड डाउन इन कैरियर '' तथा '' प्लेनेट्स एण्ड चिल्ड्रन '' में दी गई??मंत्र गुरु स्वामी परमानंद सरस्वती ने पहली बार श्री राव को ज्योतिष न छोड़ने काआग्रह किया था क्योंकि भविष्य में यही उनकी साधना का अहम हिस्सा बनने वाली । थी । बाद में एक महान योगी मूर्खानंदजी ने 1982 में भविष्यवाणी की कि राव एक महान ज्योतिषीय पुनरूत्थान के पुरोधा होंगे । यह बात कहां तक सच हुई इसके प्रमाण में श्री के०एन० राव के गहन शोध अध्ययन और महती लेखन को रखा जा सकता है ।

 

विषय-सूची

भाग - 1 हिन्दू ज्योतिष में कर्म

1

कृतज्ञता ज्ञापन

4

2

पु्स्तक आयोजन

7

3

लेखक परिचय

7

4

प्रशस्तियाँ

11

5

प्रस्तावना

15

6

कर्म क्या है?

20

7

पौराणिक गाथाएं (किम्बदंतियाँ) अर्थ और विषय सामग्री

29

8

कर्मोका वर्गीकरण

49

9

जन्म समय प्रारब्ध का पहला प्रकाश स्तंभ है

56

10

जन्म-कालीन चन्द्र और नक्षत्रमण्डल प्रारब्ध के अन्य प्रकाश स्तंभ

60

11

सन्तान से सुख -पूर्व जन्मों के ऋण

65

12

बच्चो के जन्म की ज्योतिष-अनुवांशिक 'एस्ट्रो-जेनेटिक्स 'अध्ययन की प्रक्रिया - एक अनोखा अध्ययन

74

13

समयचक्र

81

14

प्रारब्ध पर विश्वास करने के लाभ

93

15

निष्कर्ष

99

 

भाग - 2 ज्योतिष में पुनर्जन्म

 

1

प्रस्तावना

115

2

शास्त्रीय परंम्परा और पुर्नजन्म

120

3

ईश्वर और देवताओं के अवतार

127

4

पुनर्जन्म के बारे में एक परिवार की कहानी

137

5

दूसरी पारिवारिक कहानी

145

6

तीसरी परिवारिक कहानी

147

7

पुस्तकों में ज्योतिषीय मापदण्ड

148

8

विगत जीवन या जीवनों की याद किसे आती है?

151

9

वैयक्तिक अध्ययन

154

10

कुछ अन्य ऑकड़ों के प्रयोग की आवश्यकता

177

 

 

हिन्दू ज्योतिष में कर्म और पुनर्जन्म: Karma and Rebirth in Hindu Astrology

Item Code:
NZA231
Cover:
Paperback
Edition:
2011
Publisher:
ISBN:
8189221167
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch x 5.5 inch
Pages:
208
Other Details:
Weight of the Book: 235 gms
Price:
$13.00   Shipping Free
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
हिन्दू ज्योतिष में कर्म और पुनर्जन्म: Karma and Rebirth in Hindu Astrology

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 4399 times since 24th Dec, 2016

लेखक परिचय

के. एन. राव

 

भारतीय लेखा तथा परीक्षण सेवा से महानिदेशक के तौर पर सेवानिवृत्तश्री के०एन० राव (कोट्टमराजू नारायण राव) प्रतिष्ठित पत्रकार तथा नेशनल हेराल्ड के संस्थापक-संपादक स्व० के० रामा राव के पुत्र हैं । पिता के कार्य क्षेत्र से अलग ज्योतिष में श्री राव के रुझान की प्रेरणा बनीं उनकी श्रद्धेय मां के० सरसवाणी देवी । मां के संरक्षण में राव बारह वर्ष की आयु से ही ज्योतिष सीखने लगे । पारंपरिक ज्योतिष में सिद्धहस्त श्रीमती सरसवाणी देवी की ' विवाह संतान ' और ' प्रश्न शास्त्र ' जैसे विषयों में गहरी पैठ थी ।

 

प्रशासनिक सेवा में आने से पूर्व कुछ समय तक श्री राव अंग्रेजी साहित्य के प्राध्यापक रहे । 1957 में अखिल भारतीय परीक्षा के जरिये प्रशासनिक सेवा में प्रवेश करने वाले श्री राव की आरंभिक रुचि खेलों में थी और युवावस्था में उन्होंने शतरंज और ब्रिज जैसे खेलों में राज्य स्तरीय पुरस्कार भी जीते थे । वह कई अन्य खेलों में भी सक्रिय रहे । यही वजह है कि उनके ज्योतिषीय लेखन में खेलों का बारम्बार उल्लेख मिलता है ।

 

प्रशासनिक सेवा काल में बतौर सह-निदेशक और निदेशक श्री राव ने तीन अंतर्राष्ट्रीय पाठयक्रमों का नियोजन निरूपण और संचालन किया । काम कै सिलसिले में संपर्क में आए विदेशियों से ज्योतिषीय आधार पर उनके सम्बन्ध निजी और प्रगाढ़ होते गए और इससे उनके विदेशी मित्रों की संख्या में भारी इजाफा हुआ ।

 

सरकारी सेवा काल के दौरान श्री राव ने हजारों जन्म कुंडलियां संकलित की । आज भी उनके पास पचास हजार से ज्यादा ऐसी कुंडलियों का संग्रह हैं जिससे हर जातक के जीवन की कम से कम दस प्रमुख घटनाएं दर्ज हैं । संभवतया यह दुनिया का सबसे बड़ा निजी शोध संग्रह है । जीवन लक्ष्य की तरह ज्योतिष साधना का तनाव उन्हें कई बार इससे दूर भी ले गया । मगर दिसम्बर 1981 में दिल्ली में आयोजित एक तीन-दिवसीय सेमिनार में भागीदारी ने उनके इस अलगाव को पाटने में काफी हद तक मदद की । सेमिनार में सरल व रोचक धाराप्रवाह व्याख्यान् के बाद उनके शोध प्रधान ज्योतिषीय लेखन की मांग निरंतर बढ़ती गई और तभी से श्री राव द्वारा अपने मौलिक शोध प्रबधो को पाठकों के साथ बांटने का सतत सिलसिला शुरू हुआ ।

 

ज्योतिष जैसे गूढ़ तथा परम्परावादी विषय में श्री राव की शैक्षिक तथा बैद्धिक पहल का सुखद परिणाम है कि आज भारत में हजारों और अमेरिका में दो सौ से भी ज्यादा शिष्य हैं । वह भारतीय विद्या भवन दिल्ली में ज्योतिष पाठयक्रम के सलाहकार हैं । उन्हीं की प्ररेणा से भवन की ज्योतिष संकाय के अन्य प्रशिक्षक भी अवैतनिक काम करते हैं ।

 

जीविका के तौर पर ज्योतिष की साधना में स्वार्थ और धनलोलुपता ने इसे पर्याप्त अपयश ही दिया है । इसलिए व्यवसायिक ज्योतिष से दूर रहने की श्री राव की आकांक्षा ने उन्हें हजारों हितैषी और मित्र दिए तो कुछ शत्रु भी । बेवजह उनके शत्रु बने लोग वे थे जो बरसों से आधे- अधूरे ज्ञान व लालच के अधीन लोगों को बेवकूफ बना छलने का काम करते आ रहे थे । मगर दूसरी ओर श्री राव के प्रयासों के चलते उनके आस-पास दो सौ से ज्यादा ऐसे काबिल ज्योतिषियों की टीम तैयार हुई जिनके लिए ज्योतिष आजीविका न होकर ऐसा पराविज्ञान था जिसमें मानव जीवन का अर्थ ओर उद्देश्य छुपा था । वेदांग के रूप में ज्योतिष ऐसी ही विधा होनी चाहिए।

 

कोई भी जिज्ञासु जानना चाहेगा कि किस बात ने श्री राव को जीवन का इतना गान उद्देश्य दिया । श्री राव की कुंडली में लग्नेश व दशमेश की लग्न में युति है जवकि दशम भाव में उच्चस्थ बृहस्पति है । उनके ज्योतिष गुरु योगी भास्करानन्द यह जानते थे । उन्होंने कहा था कि हिंदू ज्योतिष को प्रतिष्ठा पहचान और गरिमा प्रदान करने के लिए राव को अनेक बार विदेश जाना पड़ेगा । ( 1993 में श्री राव की प्रथम अमरिका यात्रा के प्रभाव पर एक अमेरिकी ने यहां तक लिख दिया - हिन्दू ज्योतिष- राव से पूर्व तथा राव के पश्चात् ।)1993 से 1995 के बीच श्री राव पांच बार अमेरिका गए । 1993 में वह अमेरिकन कउंसिल ऑफ हिन्दू एस्ट्रालॉजी की दूसरी कॉन्फ्रेंस में मुख्य अतिथि थे । उनसे 1994 में आयोजित तीसरी कॉन्फ्रेंस में भी उपस्थित रहने का अनुरोध किया गया क्योंकि आयोजक उनकी भीड़ जुटाने की क्षमता से वाकिफ हो चुके थे । काउंसिल की चौथी कॉनफ्रेंस में श्री राव के मना करने के बावजूद आयोजको ने उनके नाम को भुनाने की न्यप्ति कोशिश की जून 1998 से श्री राव पांच बार रूस (मास्को) गये जहां दुभाषये की मदद से इन्होनें ज्योतिष पढाई जो एक सफलतम कार्यक्रमों में से एक रहा ।

 

श्री राव के नवीनतम शोध प्रबंधों का संकलन उनकी दी गई पुस्तकों' जैमिनी चर दशा से भविष्य कथन '' तथा '' कारकांश और मंडूक दशा '' में दिया गया है। श्री राव के ज्योतिष गुरु ने बताया था कि ज्योतिष में पुस्तकों से ज्यादा ज्ञान परम्परा न् मिलेगा क्योंकि पुस्तकों का सिर्फ शाब्दिक अनुवाद हुआ है जिनमें व्यावहारिक करने की कोशिश की है । वेदांग के रूप में ज्योतिष पर विभिन्न योगियों के विचार श्री राव की पुस्तक ''योगीज डेस्टिनी एंड व्हील ऑफ टाइम '' में उद्धृत किए गए हैं । मंत्र गुरुस्वामी परमानंद सरस्वती और ज्योतिष गुरु योगी भास्करानंद ने श्री राव को आध्यात्मिक ज्योतिष के कुछ गंभीर रहस्य बताए थे जिनका प्राय : किसी ज्योतिष मथ में उल्लेख नहीं मिलता ।

 

श्री राव की इस पुस्तक में ऐसे कुछ गूढ़ तत्वों का निरूपण किया गयाहै । श्री राव की प्रथम ज्योतिष गुरु उनकी माता भी ऐसे अनेक पारम्परिक रहस्य । जानती थीं जिनमें से कुछ का खुलासा इसी किताब में है । अन्य कुछ बातें उनकी पुस्तकों '' अप्स एण्ड डाउन इन कैरियर '' तथा '' प्लेनेट्स एण्ड चिल्ड्रन '' में दी गई??मंत्र गुरु स्वामी परमानंद सरस्वती ने पहली बार श्री राव को ज्योतिष न छोड़ने काआग्रह किया था क्योंकि भविष्य में यही उनकी साधना का अहम हिस्सा बनने वाली । थी । बाद में एक महान योगी मूर्खानंदजी ने 1982 में भविष्यवाणी की कि राव एक महान ज्योतिषीय पुनरूत्थान के पुरोधा होंगे । यह बात कहां तक सच हुई इसके प्रमाण में श्री के०एन० राव के गहन शोध अध्ययन और महती लेखन को रखा जा सकता है ।

 

विषय-सूची

भाग - 1 हिन्दू ज्योतिष में कर्म

1

कृतज्ञता ज्ञापन

4

2

पु्स्तक आयोजन

7

3

लेखक परिचय

7

4

प्रशस्तियाँ

11

5

प्रस्तावना

15

6

कर्म क्या है?

20

7

पौराणिक गाथाएं (किम्बदंतियाँ) अर्थ और विषय सामग्री

29

8

कर्मोका वर्गीकरण

49

9

जन्म समय प्रारब्ध का पहला प्रकाश स्तंभ है

56

10

जन्म-कालीन चन्द्र और नक्षत्रमण्डल प्रारब्ध के अन्य प्रकाश स्तंभ

60

11

सन्तान से सुख -पूर्व जन्मों के ऋण

65

12

बच्चो के जन्म की ज्योतिष-अनुवांशिक 'एस्ट्रो-जेनेटिक्स 'अध्ययन की प्रक्रिया - एक अनोखा अध्ययन

74

13

समयचक्र

81

14

प्रारब्ध पर विश्वास करने के लाभ

93

15

निष्कर्ष

99

 

भाग - 2 ज्योतिष में पुनर्जन्म

 

1

प्रस्तावना

115

2

शास्त्रीय परंम्परा और पुर्नजन्म

120

3

ईश्वर और देवताओं के अवतार

127

4

पुनर्जन्म के बारे में एक परिवार की कहानी

137

5

दूसरी पारिवारिक कहानी

145

6

तीसरी परिवारिक कहानी

147

7

पुस्तकों में ज्योतिषीय मापदण्ड

148

8

विगत जीवन या जीवनों की याद किसे आती है?

151

9

वैयक्तिक अध्ययन

154

10

कुछ अन्य ऑकड़ों के प्रयोग की आवश्यकता

177

 

 

Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Related Items

पञ्चाङ्ग:  Hindi Calender
Paperback (Edition: 2015)
Rupesh Thakur Prasad Prakashan
Item Code: NZE521
$12.00
Add to Cart
Buy Now

Testimonials

Nice website..has a collection of rare books.
Srikanth
Beautiful products nicely presented and easy to use website
Amanda, UK.
I received my order, very very beautiful products. I hope to buy something more. Thank you!
Gulnora, Uzbekistan
Thank you very much for the courtesy you showed me for the time I buy my books. The last book is a good book. İt is important in terms of recognizing fine art of İndia.
Suzan, Turkey
Thank You very much Sir. I really like the saree and the blouse fit perfeact. Thank You again.
Sulbha, USA
I have received the parcel yesterday and the shiv-linga idol is sooo beautiful and u have exceeded my expectations...
Guruprasad, Bangalore
Yesterday I received my lost and through you again found order. Very quickly I must say !. Thank you and thank you again for your service. I am very happy with this double CD of Ustad Shujaat Husain Khan. I thought it was lost forever and now I can add it to my CD collection. I hope in the near future to buy again at your online shop. You have wonderful items to offer !
Joke van der Baars, the Netherlands
I recently ordered a hand embroidered stole. It was expensive and I was slightly worried about ordering it on line. It has arrived and is magnificent. I couldn't be happier, I will treasure this stole for ever. Thank you.
Jackie
Today Lord SIVA arrived well in Munich. Thank you for the save packing. Everything fine. Hari Om
Hermann, Munchen
Thank you very much for keeping such an exotic collection of Books. Keep going strong Exotic India!!!
Shweta, Germany
TRUSTe
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2017 © Exotic India