Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Your Cart (0)
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindi > वनौषधि शतक: One Hundred Herbs from the Forest
Displaying 8964 of 11426         Previous  |  NextSubscribe to our newsletter and discounts
वनौषधि शतक: One Hundred Herbs from the Forest
वनौषधि शतक: One Hundred Herbs from the Forest
Description

लेखक के दो शब्द

गत धन्वतरि-जयन्ती के अवसर पर ही श्री बैद्यनाथ आयुवेंद भवन प्रा० लि० के प्रकाशन-विभाग का प्रस्ताव हुआ कि बिहार-राज्य आयुर्वेद-यूनानी अधिकाय के दीक्षान्त-समारोह के अवसर पर 'वनौषधि-शतक' 'नामक' पुस्तक प्रकाशित कर दी जाय । यों मेरा तो पहले से ही यह विचार था कि इस प्रकार की एक पुस्तक लिखी और प्रकाशित की जानी चाहिए । यह स्वाभाविक है कि ऐसी पुस्तक वैद्य-समाज एवं जन-समाज दो नो ही के लिए उपयोगी हो सकती है । किन्तु मेरा विशेष ध्यान इस पुस्तक को जनोपयोगी बनाने का ही था, क्योंकि हमारी जनता अपनी वनौषधियों को तथा उनके महत्व को भूलती जा रही है । प्राय: आयुर्वेद के विद्यार्थियों को भी यह शिकायत रही है कि उन्हें वनौषधियों के सचित्र परिचय प्राय: उपलब्ध नहीं हो पाते । और, देश में जो थोड़े-से वनौषधि-उद्यान हैं वे भी नाम मात्र के ही हैं क्योंकि उनमें बहुत थोड़ी-सी वनौषधियाँ मिल पाती हैं ।

समय कम था और मेरी व्यस्तता भी बहुत थी । इसी बीच बिहार-राज्य आयुर्वेद-यूनानी अधिकाय का अध्यक्ष होने के नाते मुझे दीक्षान्त-समारोह की तैयारी में भी व्यस्त हो जाना पड़ा । परन्तु 'वनौषधि-शतक सम्बन्धी' कुछ काम मैंने पहले से ही कर रक्खा था और कुछ चित्र भी बने हुए थे ।

किसी विशिट विचारक ने ठीक ही कहा है कि संसार के बड़े-से-बड़े काम भी प्राय: जल्दबाजी में ही होते हैं और इतमीनान की माँग प्राय: आलसी लोग ही करते हैं । अत: मैं कृतसंकल्प हो गया कि निर्धारित अवधि के भीतर इस कार्य को कर ही डालना है । परिश्रम को असाधारणरूप से करना पड़ा और प्राय: कठिन परिश्रम करना पड़ा । किन्तु मुझे स्व० पिताजी, पूजनीया माताजी, श्रद्वेय विद्वान् चाचाजी वैद्यराज पं० रामनारायणजी शर्मा, अनुभवी तथा स्वस्थ चिन्तक अग्रज पं० हजारी लाल जी शर्मा एवं समस्त गुरुजनों के आशीर्वादों का बड़ा भरोसा था । और मुझे प्रसन्नता है कि निर्धारित अवधि के भीतर संकल्प पूरा हो गया। जो कुछ भी और जैसा कुछ भी बन पड़ा वह कृपालु पाठकों के समक्ष प्रस्तुत है ।

चित्रों के सम्बन्ध में तो काफी कठिनाई हुई । मेरा विचार था कि प्रत्येक वनौषधि के प्राकृतिक चित्र दिए जायँ, जिनमें उन के सभी रंग यथास्थान आ जायँ । अवश्य ही बहुत-सी वनस्पतियों के इस प्रकार के पूर्ण एवं स्वाभाविक चित्र इस पुस्तक में प्रकाशित हो सके है । परन्तु शीघ्रता एवं समयाभाव के कारण कई वनौषधियों के इकरंगे चित्र ही सम्भव हो सके है । और थोड़ी-सी वनस्पतियों के चित्रों के तो ब्लॉक ही समय पर न वनसके जिसके कारण उन्हें अचित्र ही प्रकाशित करना पड़ा । समयाभाव तथा चित्र-सम्बन्धी कठिनाइयों के कारण वनौषधियों के चयन में भी चित्रों की सुलभता-दुर्लभता का ध्यान रखना पड़ा ।

किन्तु हमारे सदय पाठक देखेंगे कि इस पुस्तक की खास लोक-सार्थकता है, वनौषधि-सम्बन्यी अन्य पुस्तकों की अपेक्षा चित्रों का अनुपात भी अधिक है ओंर बहुरंगे चित्रों का अनुपात तो और भी अधिक है । फिर भी, समयाभाव के कारण जो चित्र इकरंगे रह गए अथवा जो प्रकाशित ही न हो सके उनके लिए मैं दु:खी हूँ और सहृदय पाठकों से, इस त्रुटि के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ ।

इसी प्रकार, जल्दबाजी में लेखन-मुद्रण के जो दोष रह गए हैं उनके लिए भी मैं उदार पाठकों से क्षमायाचना करता हूँ । 'गणा: दर्शनीया: न तु दोषा: 'अतएव मैं आश्वस्त हूँ कि विचारवान पाठक पुस्तक की उपयोगिता एवं विशेषताओं की दृष्टि सै इस पर विचार करेंगे न कि त्रुटियों की दृष्टि से ।

मैं कविराज पं० सभाकान्त झा शास्री जी का बहुत ही आभारी हूँ कि उन्होंने पुस्तक के मुद्रण एवं चित्रांकन में पर्याप्त तत्परता दिखायी है । इसी प्रकार मैं जनवाणी प्रिंटर्स एण्ड पब्लिशर्स के व्यवस्थापक श्री ज्ञानेन्द्र शर्मा जी का भी अतिशय कृतज्ञ हूँ कि उन्होंने इस पुस्तक को यथासाध्य तत्परता एवं सुन्दरता से मुद्रित कराया है और महीनों का काम सप्ताहों में ही पूरा कर दिया है ।

यत्साधितं तत्समर्पितं-बहुजनहिताय बहुजनसुखाय 'कथमधिकं 'विज्ञेभ्य:'

जय वनौषधि! जय आयुर्वेद

विषय-सूची

1

अकरकरा

1

2

अगस्त

3

3

अजवायन

4

4

असगन्ध

8

5

अडूसा

9

6

अमलतास

10

7

अनन्तमूल (सारिवा)

11

8

अंकोल

12

9

अशोक

13

10

अतीस

14

11

अर्जुन

15

12

आम

16

13

इमली

21

14

ईसबगोल (ईषद्रोल)

24

15

एरण्ड

26

16

कचनार

27

17

काकमाची (मकोय)

29

18

काली मरिच

32

19

कालमेघ

33

20

कासनी

34

21

कीडामारी

35

22

कुटज

38

23

कुचला

42

24

कालिहारी

46

25

कण्टकारी (छोटी)

47

26

कण्टकारी (बड़ी)

48

27

कट्फल (कायफल)

49

28

कपूर

50

29

काकड़ासिंगी

51

30

कालादाना

52

31

गम्भारी

54

32

गाजर

54

33

गुड़मार

59

34

गुडूची

62

35

गुलतुर्रा

66

36

गेन्दा

70

37

घृतकुमारी

72

38

चालमोगरा

73

39

चित्रक

74

40

चिरायता

75

41

चोपचीनी

76

42

छतिवन (सप्तपर्ण)

77

43

जमालगोटा

78

44

जवासा

79

45

जलधनियाँ

81

46

जामुन

84

47

जायफल

88

48

जीरा सफेद

89

49

जीरा स्याह

90

50

टमाटर

91

51

ढाक (पलाश)

92

52

तालमखाना

93

53

तालीस पत्र

94

54

ताम्बूल (पान)

94

55

तिल

96

56

तिलपुष्पी

97

57

तीसी (अलसी)

103

58

तुलसी

104

59

थूहर

105

60

दालचीनी

106

61

दुद्धी

108

62

द्रोणपुष्पी

116

63

धतूरा

116

64

धनिया

119

65

धात्रीफल (आँवला)

120

66

धातकी (धाय)

121

67

नरगिस

121

68

नीम

124

69

नीम्बू

130

70

पाषाणभेद

133

71

पुष्करमूल

134

72

रक्त पुनर्नवा

135

73

पुदीना

143

74

पुदीना के फूल

143

75

बब्बूल

144

76

वरुण

147

77

बहेड़ा

148

78

बादाम

148

79

ब्राह्मी

154

80

भाँग

160

81

भाँगरा

166

82

मुस्तक (मोथा)

168

83

मूली

176

84

रास्ना

179

85

रेबन्दचीनी

184

86

लज्जालू (लजबिज्ली)

187

87

शंखपुष्पी

190

88

शतावरी

191

89

शाहतरा

192

90

सनाय

195

91

सत्यानासी

196

92

सरफोंका

200

93

सर्पगन्धा

201

94

सेव

206

95

सौंफ

207

96

हरड़

212

97

हरमल

216

98

हल्दी

218

99

हिरनपदी

219

100

नकछिकनी

220

101

हींग

223

 

वनौषधि शतक: One Hundred Herbs from the Forest

Item Code:
NZA666
Cover:
Paperback
Edition:
2013
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
236 ( 68 Color & 4 B/W illustrations)
Other Details:
Weight of the Book: 320 gms
Price:
$10.50
Discounted:
$7.88   Shipping Free
You Save:
$2.62 (25%)
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
वनौषधि शतक: One Hundred Herbs from the Forest

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 4585 times since 13th Oct, 2014

लेखक के दो शब्द

गत धन्वतरि-जयन्ती के अवसर पर ही श्री बैद्यनाथ आयुवेंद भवन प्रा० लि० के प्रकाशन-विभाग का प्रस्ताव हुआ कि बिहार-राज्य आयुर्वेद-यूनानी अधिकाय के दीक्षान्त-समारोह के अवसर पर 'वनौषधि-शतक' 'नामक' पुस्तक प्रकाशित कर दी जाय । यों मेरा तो पहले से ही यह विचार था कि इस प्रकार की एक पुस्तक लिखी और प्रकाशित की जानी चाहिए । यह स्वाभाविक है कि ऐसी पुस्तक वैद्य-समाज एवं जन-समाज दो नो ही के लिए उपयोगी हो सकती है । किन्तु मेरा विशेष ध्यान इस पुस्तक को जनोपयोगी बनाने का ही था, क्योंकि हमारी जनता अपनी वनौषधियों को तथा उनके महत्व को भूलती जा रही है । प्राय: आयुर्वेद के विद्यार्थियों को भी यह शिकायत रही है कि उन्हें वनौषधियों के सचित्र परिचय प्राय: उपलब्ध नहीं हो पाते । और, देश में जो थोड़े-से वनौषधि-उद्यान हैं वे भी नाम मात्र के ही हैं क्योंकि उनमें बहुत थोड़ी-सी वनौषधियाँ मिल पाती हैं ।

समय कम था और मेरी व्यस्तता भी बहुत थी । इसी बीच बिहार-राज्य आयुर्वेद-यूनानी अधिकाय का अध्यक्ष होने के नाते मुझे दीक्षान्त-समारोह की तैयारी में भी व्यस्त हो जाना पड़ा । परन्तु 'वनौषधि-शतक सम्बन्धी' कुछ काम मैंने पहले से ही कर रक्खा था और कुछ चित्र भी बने हुए थे ।

किसी विशिट विचारक ने ठीक ही कहा है कि संसार के बड़े-से-बड़े काम भी प्राय: जल्दबाजी में ही होते हैं और इतमीनान की माँग प्राय: आलसी लोग ही करते हैं । अत: मैं कृतसंकल्प हो गया कि निर्धारित अवधि के भीतर इस कार्य को कर ही डालना है । परिश्रम को असाधारणरूप से करना पड़ा और प्राय: कठिन परिश्रम करना पड़ा । किन्तु मुझे स्व० पिताजी, पूजनीया माताजी, श्रद्वेय विद्वान् चाचाजी वैद्यराज पं० रामनारायणजी शर्मा, अनुभवी तथा स्वस्थ चिन्तक अग्रज पं० हजारी लाल जी शर्मा एवं समस्त गुरुजनों के आशीर्वादों का बड़ा भरोसा था । और मुझे प्रसन्नता है कि निर्धारित अवधि के भीतर संकल्प पूरा हो गया। जो कुछ भी और जैसा कुछ भी बन पड़ा वह कृपालु पाठकों के समक्ष प्रस्तुत है ।

चित्रों के सम्बन्ध में तो काफी कठिनाई हुई । मेरा विचार था कि प्रत्येक वनौषधि के प्राकृतिक चित्र दिए जायँ, जिनमें उन के सभी रंग यथास्थान आ जायँ । अवश्य ही बहुत-सी वनस्पतियों के इस प्रकार के पूर्ण एवं स्वाभाविक चित्र इस पुस्तक में प्रकाशित हो सके है । परन्तु शीघ्रता एवं समयाभाव के कारण कई वनौषधियों के इकरंगे चित्र ही सम्भव हो सके है । और थोड़ी-सी वनस्पतियों के चित्रों के तो ब्लॉक ही समय पर न वनसके जिसके कारण उन्हें अचित्र ही प्रकाशित करना पड़ा । समयाभाव तथा चित्र-सम्बन्धी कठिनाइयों के कारण वनौषधियों के चयन में भी चित्रों की सुलभता-दुर्लभता का ध्यान रखना पड़ा ।

किन्तु हमारे सदय पाठक देखेंगे कि इस पुस्तक की खास लोक-सार्थकता है, वनौषधि-सम्बन्यी अन्य पुस्तकों की अपेक्षा चित्रों का अनुपात भी अधिक है ओंर बहुरंगे चित्रों का अनुपात तो और भी अधिक है । फिर भी, समयाभाव के कारण जो चित्र इकरंगे रह गए अथवा जो प्रकाशित ही न हो सके उनके लिए मैं दु:खी हूँ और सहृदय पाठकों से, इस त्रुटि के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ ।

इसी प्रकार, जल्दबाजी में लेखन-मुद्रण के जो दोष रह गए हैं उनके लिए भी मैं उदार पाठकों से क्षमायाचना करता हूँ । 'गणा: दर्शनीया: न तु दोषा: 'अतएव मैं आश्वस्त हूँ कि विचारवान पाठक पुस्तक की उपयोगिता एवं विशेषताओं की दृष्टि सै इस पर विचार करेंगे न कि त्रुटियों की दृष्टि से ।

मैं कविराज पं० सभाकान्त झा शास्री जी का बहुत ही आभारी हूँ कि उन्होंने पुस्तक के मुद्रण एवं चित्रांकन में पर्याप्त तत्परता दिखायी है । इसी प्रकार मैं जनवाणी प्रिंटर्स एण्ड पब्लिशर्स के व्यवस्थापक श्री ज्ञानेन्द्र शर्मा जी का भी अतिशय कृतज्ञ हूँ कि उन्होंने इस पुस्तक को यथासाध्य तत्परता एवं सुन्दरता से मुद्रित कराया है और महीनों का काम सप्ताहों में ही पूरा कर दिया है ।

यत्साधितं तत्समर्पितं-बहुजनहिताय बहुजनसुखाय 'कथमधिकं 'विज्ञेभ्य:'

जय वनौषधि! जय आयुर्वेद

विषय-सूची

1

अकरकरा

1

2

अगस्त

3

3

अजवायन

4

4

असगन्ध

8

5

अडूसा

9

6

अमलतास

10

7

अनन्तमूल (सारिवा)

11

8

अंकोल

12

9

अशोक

13

10

अतीस

14

11

अर्जुन

15

12

आम

16

13

इमली

21

14

ईसबगोल (ईषद्रोल)

24

15

एरण्ड

26

16

कचनार

27

17

काकमाची (मकोय)

29

18

काली मरिच

32

19

कालमेघ

33

20

कासनी

34

21

कीडामारी

35

22

कुटज

38

23

कुचला

42

24

कालिहारी

46

25

कण्टकारी (छोटी)

47

26

कण्टकारी (बड़ी)

48

27

कट्फल (कायफल)

49

28

कपूर

50

29

काकड़ासिंगी

51

30

कालादाना

52

31

गम्भारी

54

32

गाजर

54

33

गुड़मार

59

34

गुडूची

62

35

गुलतुर्रा

66

36

गेन्दा

70

37

घृतकुमारी

72

38

चालमोगरा

73

39

चित्रक

74

40

चिरायता

75

41

चोपचीनी

76

42

छतिवन (सप्तपर्ण)

77

43

जमालगोटा

78

44

जवासा

79

45

जलधनियाँ

81

46

जामुन

84

47

जायफल

88

48

जीरा सफेद

89

49

जीरा स्याह

90

50

टमाटर

91

51

ढाक (पलाश)

92

52

तालमखाना

93

53

तालीस पत्र

94

54

ताम्बूल (पान)

94

55

तिल

96

56

तिलपुष्पी

97

57

तीसी (अलसी)

103

58

तुलसी

104

59

थूहर

105

60

दालचीनी

106

61

दुद्धी

108

62

द्रोणपुष्पी

116

63

धतूरा

116

64

धनिया

119

65

धात्रीफल (आँवला)

120

66

धातकी (धाय)

121

67

नरगिस

121

68

नीम

124

69

नीम्बू

130

70

पाषाणभेद

133

71

पुष्करमूल

134

72

रक्त पुनर्नवा

135

73

पुदीना

143

74

पुदीना के फूल

143

75

बब्बूल

144

76

वरुण

147

77

बहेड़ा

148

78

बादाम

148

79

ब्राह्मी

154

80

भाँग

160

81

भाँगरा

166

82

मुस्तक (मोथा)

168

83

मूली

176

84

रास्ना

179

85

रेबन्दचीनी

184

86

लज्जालू (लजबिज्ली)

187

87

शंखपुष्पी

190

88

शतावरी

191

89

शाहतरा

192

90

सनाय

195

91

सत्यानासी

196

92

सरफोंका

200

93

सर्पगन्धा

201

94

सेव

206

95

सौंफ

207

96

हरड़

212

97

हरमल

216

98

हल्दी

218

99

हिरनपदी

219

100

नकछिकनी

220

101

हींग

223

 

Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Based on your browsing history

Loading... Please wait

Related Items

Indian Medicinal Plants: Forgotten Healers (A Guide to Ayurvedic Herbal Medicine)
Item Code: IDE206
$105.00$78.75
You save: $26.25 (25%)
SOLD
Skin Diseases and Its Treatment through Ayurvedic and Herbal Medicines
Item Code: IDF362
$16.50$12.38
You save: $4.12 (25%)
Add to Cart
Buy Now
Preparation and Uses of Asava and Arishta (Ayurvedic and Herbal Medicines)
Item Code: NAD590
$15.00$11.25
You save: $3.75 (25%)
Add to Cart
Buy Now
Respiratory Diseases and Its Treatment Through Ayurvedic & Herbal Medicines
Item Code: NAI147
$20.00$15.00
You save: $5.00 (25%)
Add to Cart
Buy Now
Diseases of Nervous System & Psychiatry (Ayurvedic & Herbal Medicines)
Item Code: NAI148
$16.00$12.00
You save: $4.00 (25%)
Add to Cart
Buy Now
Fundamentals of Herbal Medicine (Science of Nutrition, Human Anatomy and Body Systems)
by Dr. Ashok Kumar
Hardcover (Edition: 2014)
Chaukhambha Orientalia
Item Code: NAJ955
$100.00$75.00
You save: $25.00 (25%)
Add to Cart
Buy Now
Herbal Medicine (Based on Vrindamadhava)
Item Code: NAK096
$35.00$26.25
You save: $8.75 (25%)
Add to Cart
Buy Now
ENCYCLOPAEDIA OF INDIAN MEDICINE (Volume Four - Materia Medica - Herbal Drugs)
Item Code: IDF736
$37.50$28.12
You save: $9.38 (25%)
Add to Cart
Buy Now
Home Made Herbal Cosmetics (Easy to prepare Beauty Recipes, Beauty Secrets From Your Kitchen, Herbal Solutions That Work)
by Dr.S.Suresh Babu
Paperback (Edition: 2012)
Pustak Mahal
Item Code: NAD845
$12.50$9.38
You save: $3.12 (25%)
Add to Cart
Buy Now
Herbal Beauty and Body Care (Exotic Herbal Secrets to enhance Your Beauty at Home)
by Rashmi Sharma
Paperback (Edition: 2009)
Pustak Mahal
Item Code: NAD846
$15.00$11.25
You save: $3.75 (25%)
Add to Cart
Buy Now
Traditional Medicine and Globalization- The Future of Ancient Systems of Medicine
by Pulok K. Mukherjee
Hardcover (Edition: 2014)
Maven Publishers, Kolkata
Item Code: NAL646
$75.00$56.25
You save: $18.75 (25%)
Add to Cart
Buy Now

Testimonials

Heramba Ganapati arrived safely today and was shipped promptly. Another fantastic find from Exotic India with perfect customer service. Thank you. Jai Ganesha Deva
Marc, UK
I ordered Padmapani Statue. I have received my statue. The delivering process was very fast and the statue looks so beautiful. Thank you exoticindia, Mr. Vipin (customer care). I am very satisfied.
Hartono, Indonesia
Very easy to buy, great site! Thanks
Ilda, Brazil
Our Nandi sculpture arrived today and it surpasses all expectations - it is wonderful. We are not only pleasantly surprised by the speed of international delivery but also are extremely grateful for the care of your packaging. Our sculpture needed to travel to an off-lying island of New Zealand but it arrived safely because of how well it had been packaged. Based upon my experience of all aspects of your service, I have no hesitation in recommending Exotic India.
BWM, NZ
Best web site to shop on line.
Suman, USA
Thank you for having such a great website. I have given your site to all the people I get compliments on your merchandise.
Pat, Canada.
Love the website and the breadth of selection. Thanks for assembling such a great collection of art and sculpture.
Richard, USA
Another three books arrived during the last weeks, all of them diligently packed. Excellent reading for the the quieter days at the end of the year. Greetings to Vipin K. and his team.
Walter
Your products are uncommon yet have advanced my knowledge and devotion to Sanatana Dharma. Also, they are reasonably priced and ship quickly. Thank you for all you do.
Gregory, USA
Thank you kindly for the Cobra Ganesha from Mahabalipuram. The sculpture is exquisite quality and the service is excellent. I would not hesitate to order again or refer people to your business. Thanks again.
Shankar, UK
TRUSTe
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2017 © Exotic India