Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Your Cart (0)
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindu > हिन्दी > मैंने राम रतन धन पायो (मीरा दीवानी पर चर्चा सुहानी): Osho on Mirabai
Displaying 1 of 7342         Previous  |  NextSubscribe to our newsletter and discounts
मैंने राम रतन धन पायो (मीरा दीवानी पर चर्चा सुहानी): Osho on Mirabai
मैंने राम रतन धन पायो (मीरा दीवानी पर चर्चा सुहानी): Osho on Mirabai
Description

पुस्तक के विषय में

 

ओशो प्रेम की एक झील में नौका-विहार करें। और ऐसी झील मनुष्य के इतिहास में दूसरी नहीं है, जैसी झील मीरा है। मानसरोवर भी उतना स्वच्छ नहीं। और हंसों की ही गति हो सकेगी मीरा की इस झील में। हंस बनो, तो ही उतर सकोगे इस झील में। हंस न बने तो न उतर पाओगे।

हंस बनने का अर्थ है: मोतियों की पहचान आंख में हो, मोती की आकांक्षा हृदय में हो। हंसा तो मोती चुगे! कुछ और से राजी मत हो जाना। क्षुद्र से जो राजी हो गया, वह विराट को पाने में असमर्थ हो जाता है। नदी-नालों का पानी पीने से जो तृप्त हो गया, वह मानसरोवरों तक नहीं पहुंच पाता; जरूरत ही नहीं रह जाती। मीरा की इस झील में तुम्हें निमंत्रण देता हूं। मीरा नाव बन सकती है। मीरा के शब्द तुम्हें डूबने से बचा सकते हैं। उनके सहारे पर उस पार जा सकते हो।

प्रस्तावना

 

प्रस्तुत कृति ओशो द्वारा मीरा के पदो पर दिए हुए प्रवचनों का सग्रह है । ओशो के अनुसार यह प्रवचन नहीं बल्कि मीरा के प्रेम की झील मे नौका-विहार के लिए निमंत्रण-पत्र है यह प्रेम की झील बडी अदभुत, बड़ी अनुपम है, क्योंकि यह झील पानी की नही, मीरा के आसुओ का मानसरोवर है इस मानसरोवर में जो निर्मलता हैं वह शायद गंगाजल मे भी नही है ।

मीरा को समझना बहुत कठिन है । काव्यशास्त्र की दृष्टि से अथवा तर्क और शान की दृष्टि से यदि आप मीरा को समझना चाहेगे तो चूक जाएंगे, क्योंकि मीरा न कविता है न शास्त्र । वह प्रेम-पीड़ा की एक अदभुत अनुभूति है । मीरा शरीर नही है । मीरा के रूप में भक्ति शरीर धारण करके खड़ी हो गई है ।

निराकार जब तुम्हें दिया आकार

स्वयं साकार हो गया।

प्रेम की इस साकार प्रतिमा की आंखों का एक-एक आंसू एक-एक छंद है और एक-एक पद एक-एक खंड काव्य है । जैसे अपने गिरधर-गोपाल तक पहुचने के लिए मीरा लोक-लाज, कुल-कानि, मान-मर्यादा, घर-द्वार सब कुछ छोड़ चुकी है, उसी प्रकार जब तक शान के सारे सूत्र, तर्क के सारे छल, काव्य की सारी कलाएं आप भूलने के लिए तैयार नहीं है तब तक आप मीरा के पास नहीं पहुंच सकते मीरा के आंसुओं ने प्रेम के जितने रंग बिखेरे हैं उनको आंकने के लिए न तो कोई तूलिका और न कोई काव्यशास्त्र ही समर्थ है प्रेम के रास्ते पर चलते-चलते मीरा वहा जा पहुची है जहा उसे अपने होने का भी होश नहीं है-

हम तेरी चाह में अय यार वहां तक पहुंचे

होश ये भी न जहां है कि वहां तक पहुंचे।

जब तक होनेका होश है तब तक न होनेकी भूमिका मे प्रवेश नही हो सकता ये तभी संभव है-

वो न ज्ञानी, न वो ध्यानी, बिरहम, न वो शेख,

वो कोई और थे जो तेरे मकां तक पहुंचे।

अनुक्रम

 

1

प्रेम की झील में नौका-विहार

9

2

समाधि की अभिव्यक्तियां

37

3

मैं तो गिरधर के घर जाऊं

67

4

मृत्यु का वरण अमृत का स्वाद

95

5

पद घुंघरू बांध मीरा नाची रे

123

6

श्रद्धा है द्वार प्रभु का

153

7

मैने राम रतन धन पायो

187

8

दमन नही-ऊर्ध्वगमन

217

9

राम नाम रस पीजै मनुआं

247

10

फूल खिलता है अपनी निजता से

279

 

मैंने राम रतन धन पायो (मीरा दीवानी पर चर्चा सुहानी): Osho on Mirabai

Item Code:
NZA634
Cover:
Hardcover
Edition:
2010
ISBN:
9788172612498
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 7.0 inch
Pages:
318 (18 B/W illustrations)
Other Details:
Weight of the Book: 660 gms
Price:
$35.00   Shipping Free
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
मैंने राम रतन धन पायो (मीरा दीवानी पर चर्चा सुहानी): Osho on Mirabai

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 5351 times since 12th Feb, 2014

पुस्तक के विषय में

 

ओशो प्रेम की एक झील में नौका-विहार करें। और ऐसी झील मनुष्य के इतिहास में दूसरी नहीं है, जैसी झील मीरा है। मानसरोवर भी उतना स्वच्छ नहीं। और हंसों की ही गति हो सकेगी मीरा की इस झील में। हंस बनो, तो ही उतर सकोगे इस झील में। हंस न बने तो न उतर पाओगे।

हंस बनने का अर्थ है: मोतियों की पहचान आंख में हो, मोती की आकांक्षा हृदय में हो। हंसा तो मोती चुगे! कुछ और से राजी मत हो जाना। क्षुद्र से जो राजी हो गया, वह विराट को पाने में असमर्थ हो जाता है। नदी-नालों का पानी पीने से जो तृप्त हो गया, वह मानसरोवरों तक नहीं पहुंच पाता; जरूरत ही नहीं रह जाती। मीरा की इस झील में तुम्हें निमंत्रण देता हूं। मीरा नाव बन सकती है। मीरा के शब्द तुम्हें डूबने से बचा सकते हैं। उनके सहारे पर उस पार जा सकते हो।

प्रस्तावना

 

प्रस्तुत कृति ओशो द्वारा मीरा के पदो पर दिए हुए प्रवचनों का सग्रह है । ओशो के अनुसार यह प्रवचन नहीं बल्कि मीरा के प्रेम की झील मे नौका-विहार के लिए निमंत्रण-पत्र है यह प्रेम की झील बडी अदभुत, बड़ी अनुपम है, क्योंकि यह झील पानी की नही, मीरा के आसुओ का मानसरोवर है इस मानसरोवर में जो निर्मलता हैं वह शायद गंगाजल मे भी नही है ।

मीरा को समझना बहुत कठिन है । काव्यशास्त्र की दृष्टि से अथवा तर्क और शान की दृष्टि से यदि आप मीरा को समझना चाहेगे तो चूक जाएंगे, क्योंकि मीरा न कविता है न शास्त्र । वह प्रेम-पीड़ा की एक अदभुत अनुभूति है । मीरा शरीर नही है । मीरा के रूप में भक्ति शरीर धारण करके खड़ी हो गई है ।

निराकार जब तुम्हें दिया आकार

स्वयं साकार हो गया।

प्रेम की इस साकार प्रतिमा की आंखों का एक-एक आंसू एक-एक छंद है और एक-एक पद एक-एक खंड काव्य है । जैसे अपने गिरधर-गोपाल तक पहुचने के लिए मीरा लोक-लाज, कुल-कानि, मान-मर्यादा, घर-द्वार सब कुछ छोड़ चुकी है, उसी प्रकार जब तक शान के सारे सूत्र, तर्क के सारे छल, काव्य की सारी कलाएं आप भूलने के लिए तैयार नहीं है तब तक आप मीरा के पास नहीं पहुंच सकते मीरा के आंसुओं ने प्रेम के जितने रंग बिखेरे हैं उनको आंकने के लिए न तो कोई तूलिका और न कोई काव्यशास्त्र ही समर्थ है प्रेम के रास्ते पर चलते-चलते मीरा वहा जा पहुची है जहा उसे अपने होने का भी होश नहीं है-

हम तेरी चाह में अय यार वहां तक पहुंचे

होश ये भी न जहां है कि वहां तक पहुंचे।

जब तक होनेका होश है तब तक न होनेकी भूमिका मे प्रवेश नही हो सकता ये तभी संभव है-

वो न ज्ञानी, न वो ध्यानी, बिरहम, न वो शेख,

वो कोई और थे जो तेरे मकां तक पहुंचे।

अनुक्रम

 

1

प्रेम की झील में नौका-विहार

9

2

समाधि की अभिव्यक्तियां

37

3

मैं तो गिरधर के घर जाऊं

67

4

मृत्यु का वरण अमृत का स्वाद

95

5

पद घुंघरू बांध मीरा नाची रे

123

6

श्रद्धा है द्वार प्रभु का

153

7

मैने राम रतन धन पायो

187

8

दमन नही-ऊर्ध्वगमन

217

9

राम नाम रस पीजै मनुआं

247

10

फूल खिलता है अपनी निजता से

279

 

Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Based on your browsing history

Loading... Please wait

Related Items

Osho: The Luminous Rebel (Life Story of A Maverick Mystic)
by Vasant Joshi
Paperback (Edition: 2010)
Wisdom Tree
Item Code: IHK056
$24.00
Add to Cart
Buy Now
The Path of The Mystic (In Search of The Ultimate Freedom) (Osho)
by Osho
Hardcover (Edition: 2007)
A Rebel Book
Item Code: IHK071
$40.00
Add to Cart
Buy Now
The Osho Upanishad
by Osho
Hardcover (Edition: 2010)
Osho Media International
Item Code: NAE151
$37.50
Add to Cart
Buy Now
Nowhere To Go But In (Unique Answers To Real Questions) (Osho)
by Osho
Hardcover (Edition: 2006)
A Rebel Book
Item Code: IHK070
$35.00
Add to Cart
Buy Now
Zorba (The Buddha)
by Osho
Paperback (Edition: 2013)
Niyogi Books
Item Code: NAI242
$25.00
Add to Cart
Buy Now
The Last Moring Star: Talks on the Enlightened Woman Mystic Daya
by Osho
Hardcover (Edition: 2005)
A Rebel Book
Item Code: IDK583
$30.00
SOLD
In Search of the Miraculous
by Osho
Hardcover (Edition: 2009)
Osho Media International
Item Code: NAD731
$50.00
Add to Cart
Buy Now
Zen: The Quantum Leap From Mind to No-Mind (The World Of Zen)
by Osho
Hardcover (Edition: 2009)
Osho Media International
Item Code: NAE135
$35.00
Add to Cart
Buy Now
The Tantra Experience: Evolution through Love (On The Royal Song of Saraha)
by Osho
Paperback (Edition: 2011)
Osho Media International
Item Code: NAC884
$25.00
Add to Cart
Buy Now
Reflection On Kahlil Gibran’s The Prophet
by Osho
Hardcover (Edition: 2009)
Osho Media International
Item Code: NAE141
$45.00
Add to Cart
Buy Now
The Book of Wisdom: The Heart of Tibetan Buddhism
by Osho
Paperback (Edition: 2005)
Osho Media International
Item Code: IDH509
$55.00
Add to Cart
Buy Now
The Rebellious Spirit
by Osho
Hardcover (Edition: 2012)
Osho Media International
Item Code: NAG718
$50.00
Add to Cart
Buy Now

Testimonials

I am overwhelmed with the amount of hard-to-find Hindu scriptural texts that I have been able to locate on the Exotic India website as well as other authentic cultural items from India. I am impressed with your fast and reliable shipping methods.
Lee Scott, USA
Your service is excellent.
Shambhu, USA
Exotic India has the best selection of Hindu/Buddhist statues at the best prices and best shipping that I know of.I have bought many statues from them.I am thankful for their online presence.
Michael, USA
Thanks for sharpening our skills with wisdom and sense of humor.The torchbearers of the ancient deity religion are spread around the world and the books of wisdom from India bridges the gap between east and west.
Kaushiki, USA
Thank you for this wonderful New Year sale!
Michael, USA
Many Thanks for all Your superb quality Artworks at unbeatable prices. We have been recommending EI to friends & family for over 5 yrs & will continue to do so fervently. Cheers
Dara, Canada
Thank you for your wonderful selection of books and art work. I am a regular customer and always appreciate the excellent items you offer and your great service.
Lars, USA
Colis bien reçu, emballage excellent et statue conforme aux attentes. Du bon travail, je reviendrai sur votre site !
Alain, France
GREAT SITE. SANSKRIT AND HINDI LINGUISTICS IS MY PASSION. AND I THANK YOU FOR THIS SITE.
Madhu, USA
I love your site and although today is my first order, I have been seeing your site for the past several years. Thank you for providing such great art and books to people around the World who can't make it to India as often as we would like.
Rupesh
TRUSTe
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2018 © Exotic India