Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Your Cart (0)
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindi > निराले हीरे की खोज: Searching of Rare Diamond
Displaying 11307 of 11372         Previous  |  NextSubscribe to our newsletter and discounts
निराले हीरे की खोज: Searching of Rare Diamond
निराले हीरे की खोज: Searching of Rare Diamond
Description

लेखक परिचय

 

निराले हीरे की खोज, विस्मृति के गर्भ में, सोने की ढाल और जादू का मुल्क, चारों उपन्यासों को स्वान्तः सुखाय के अतिरिक्त अपने नवतरुणों में साहस पैदा करने के ख्याल से भी 1924 में मैंने किन्हीं विस्मृत अंग्रेजी लेखकों के उपन्यासों में बहुत से परिवर्तन के साथ अनुवादित किया था ।

इतने साल पहले जय इन उपन्यासों का कायाकल्प करके मैंने अनुवाद किया था, उस समय हमारे देश के कितने ही समझदार सज्रनों को देश की स्वतन्त्रता दूर की नहीं, स्वप्र की बात मालुम होती थी, उस समय मेरा इन उपन्यासों के पात्रों को एक स्वतन्त्र देश के नागरिक की भाँति चित्रित करना काल तथा स्थान मनौचित्य का काम था, किन्तु अब वह बात नहीं हे और आशा है हमारे तरुण पाठक ज्ञान विज्ञान के परिचय तथा देश विदेश के पर्यटन के लिये अपने को अच्छे साहसी जिज्ञासु घुमकड़ सिद्ध करेंगे ।

 

प्रकाशकीय

 

हिन्दी साहित्य में महापंडित राहुल सांकृत्यायन का नाम इतिहास प्रसिद्ध और अमर विभूतियों में गिना जाता है । राहुल जी की जन्मतिथि 9 अप्रैल, 1893 ई. और मृत्युतिथि 14 अप्रैल, 1963 ई. है । राहुल जी का बचपन का नाम केदारनाथ पाण्डे था । बौद्ध दर्शन से इतना प्रभावित हुए कि स्वयं बौद्ध हो गये । राहुल नाम तो बाद में पड़ा बौद्ध हो जाने के बाद । सांकत्य गोत्रीय होने के कारण उन्हें राहुल सांकृत्यायन कहा जाने लगा ।

राहुल जी का समूचा जीवन घुमक्कड़ी का था । भिन्न भिन्न भाषा साहित्य एवं प्राचीन संस्कृत पाली प्राकृत अपभ्रंश आदि भाषाओं का अनवरत अध्ययन मनन करने का अपूर्व वैशिष्ट्य उनमें था । प्राचीन और नवीन साहित्य दृष्टि की जितनी पकड़ और गहरी पैठ राहुल जी की थी ऐसा योग कम ही देखने को मिलता है । घुमक्कड़ जीवन के मूल में अध्ययन की प्रवृत्ति ही सर्वोपरि रही । राहुल जी के साहित्यिक जीवन की शुरुआत सन् 1927 ई. में होती है । वास्तविक्ता यह है कि जिस प्रकार उनके पाँव नहीं रुके, उसी प्रकार उनकी लेखनी भी निरन्तर चलती रही । विभिन्न विषयों पर उन्होंने 150 से अधिक ग्रंथों का प्रणयन किया है । अब तक उनके 130 से भी अधिक ग्रंथ प्रकाशित हो चुके हैं । लेखों, निबन्धों एवं भाषणों का गणना एक गुल्लि काम है । राहुल जी के साहित्य के विविध पक्षों को देखने से ज्ञात होता है कि उनकी पैठ न केवल प्राचीन नवीन भारतीय साहित्य में थी, अपितु तिब्बती, सिंहली, अंग्रेजी, चीनी, रूसी, जापानी आदि भाषों की जानकारी करते हुए तत्तत् साहित्य को भी उन्होंने मथ डाला । राहुल जी जब जिसके सम्पर्क में गये, उसकी पूरी जानकारी हासिल की । जब वे साम्यवाद के क्षेत्र में गये, तो कार्ल मार्क्स, लेनिन, स्तालिन आदि के राजनीतिक दर्शन की पूरी जानकारी प्राप्त की । यही कारण है कि उनके साहित्य में जनता, जनता का राज्य और मेहनतकश मजदूरों का स्वर प्रबल और प्रधान है ।

राहुल जी बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न विचारक हैं । धर्म, दर्शन, लोकसाहित्य, यात्रासाहित्य, इतिहास, राजनीति, जीवनी, कोश, प्राचीन तालपोथियों का सम्पादन आदि विविध क्षेत्रों में स्तुत्य कार्य किया है । राहुल जी ने प्राचीन के खण्डहरों से गणतंत्रीय प्रणाली की खोज की । सिंह सेनापति जैसी कुछ कृतियों में उनकी यह अन्वेषी वृत्ति देखी जा सकती है । उनकी रचनाओं में प्राचीन के प्रति आस्था, इतिहास के प्रति गौरव और वर्तमान के प्रति सधी हुई दृष्टि का समन्यय देखने को मिलता है । यह केवल राहुल जी थे जिन्होंने प्राचीन और वर्तमान भारतीय साहित्य चिन्तन को समग्रत आत्मसात् कर हमें मौलिक दृष्टि देने का निरन्तर प्रयास किया है । चाहे साम्यवादी साहित्य हो या बौद्ध दर्शन, इतिहास सम्मत उपन्यास हो या वोल्गा से गंगा की कहानियाँ हर जगह राहुल जी की चिन्तक वृत्ति और अन्वेषी सूक्ष्म दृष्टि का प्रमाण मिलता जाता है । उनके उपन्यास और कहानियाँ बिलकुल एक नये दृष्टिकोण को हमारे सामने रखते हैं ।

समग्रत यह कहा जा सकता है कि राहुल जी न केवल हिन्दी साहित्य अपितु समूचे भारतीय वाङ्मय के एक ऐसे महारथी हैं जिन्होंने प्राचीन और नवीन, पौर्वात्य एवं पाश्चात्य, दर्शन एवं राजनीति और जीवन के उन अछूते तथ्यों पर प्रकाश डाला है जिन पर साधारणत लोगों की दृष्टि नहीं गई थी । सर्वहारा के प्रति विशेष मोह होने के कारण अपनी साम्यवादी कृतियों में किसानों, मजदूरों और मेहनतकश लोगों की बराबर हिमायत करते दीखते हैं ।

विषय के अनुसार राहुल जी की भाषा शैली अपना स्वरूप निर्धारित करती है । उन्होंने सामान्यत सीधी सादी सरल शैली का ही सहारा लिया है जिससे उनका समूर्ण साहित्य विशेषकर कथा साहित्य साधारण पाठकों के लिए भी पठनीय और सुबोध है ।

प्रस्तुत कृति निराले हीरे की खोज राहुल जी द्वारा अनूदित कहानियों का रोचक संग्रह है, जिसकी रचना उन्होंने सन् 1923 में की थी । प्रस्तुत संग्रह में बीस कहानियाँ हैं जिनका अनुवाद उन्होंने अपने साहित्यिक जीवन के प्रारम्भ काल में ही किया था । यह सभी कहानियाँ उनके घुमक्कड़ी प्रवृत्ति और ऐतिहासिक खोज की भूख मिटाने में सक्षम हैं । कहानियों का कलेवर अति मानवीय करुणा व रहस्यों से ओत प्रोत है ।

निराले हीरे की खोज की कहानियाँ राहुल जी की चमत्कारी लेखनी का एक नया और आकर्षक स्वरूप है

 

विषय सूची

समुद्र का उपद्रव

1

रेतीली खाड़ी में दो स्टीमर

5

महागर्त का तल

10

बँगले वाला आदमी

14

भगेलू की राम कहानी

19

जेल का भीतरी

25

कप्तान का सन्देश

32

भयंकर बुलबुला

38

महापथ

45

मुर्दों की गुफा

50

मोहनस्वरूप का भूत

59

आँख

67

शैतान की आँख

73

बँगले में क्या देखा सुना

80

पुष्पक का अंत

86

हमारा घनिष्ठ संघ

91

शुभाशा का निर्माण

97

यात्रारम्भ

101

जल भित्तिका

105

आँख का जानकार

110

 

निराले हीरे की खोज: Searching of Rare Diamond

Item Code:
HAA171
Cover:
Paperback
Edition:
2010
Publisher:
ISBN:
8122504043
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
120
Other Details:
Weight of the Book: 120 gms
Price:
$10.00
Discounted:
$8.00   Shipping Free
You Save:
$2.00 (20%)
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
निराले हीरे की खोज: Searching of Rare Diamond

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 1910 times since 13th Feb, 2013

लेखक परिचय

 

निराले हीरे की खोज, विस्मृति के गर्भ में, सोने की ढाल और जादू का मुल्क, चारों उपन्यासों को स्वान्तः सुखाय के अतिरिक्त अपने नवतरुणों में साहस पैदा करने के ख्याल से भी 1924 में मैंने किन्हीं विस्मृत अंग्रेजी लेखकों के उपन्यासों में बहुत से परिवर्तन के साथ अनुवादित किया था ।

इतने साल पहले जय इन उपन्यासों का कायाकल्प करके मैंने अनुवाद किया था, उस समय हमारे देश के कितने ही समझदार सज्रनों को देश की स्वतन्त्रता दूर की नहीं, स्वप्र की बात मालुम होती थी, उस समय मेरा इन उपन्यासों के पात्रों को एक स्वतन्त्र देश के नागरिक की भाँति चित्रित करना काल तथा स्थान मनौचित्य का काम था, किन्तु अब वह बात नहीं हे और आशा है हमारे तरुण पाठक ज्ञान विज्ञान के परिचय तथा देश विदेश के पर्यटन के लिये अपने को अच्छे साहसी जिज्ञासु घुमकड़ सिद्ध करेंगे ।

 

प्रकाशकीय

 

हिन्दी साहित्य में महापंडित राहुल सांकृत्यायन का नाम इतिहास प्रसिद्ध और अमर विभूतियों में गिना जाता है । राहुल जी की जन्मतिथि 9 अप्रैल, 1893 ई. और मृत्युतिथि 14 अप्रैल, 1963 ई. है । राहुल जी का बचपन का नाम केदारनाथ पाण्डे था । बौद्ध दर्शन से इतना प्रभावित हुए कि स्वयं बौद्ध हो गये । राहुल नाम तो बाद में पड़ा बौद्ध हो जाने के बाद । सांकत्य गोत्रीय होने के कारण उन्हें राहुल सांकृत्यायन कहा जाने लगा ।

राहुल जी का समूचा जीवन घुमक्कड़ी का था । भिन्न भिन्न भाषा साहित्य एवं प्राचीन संस्कृत पाली प्राकृत अपभ्रंश आदि भाषाओं का अनवरत अध्ययन मनन करने का अपूर्व वैशिष्ट्य उनमें था । प्राचीन और नवीन साहित्य दृष्टि की जितनी पकड़ और गहरी पैठ राहुल जी की थी ऐसा योग कम ही देखने को मिलता है । घुमक्कड़ जीवन के मूल में अध्ययन की प्रवृत्ति ही सर्वोपरि रही । राहुल जी के साहित्यिक जीवन की शुरुआत सन् 1927 ई. में होती है । वास्तविक्ता यह है कि जिस प्रकार उनके पाँव नहीं रुके, उसी प्रकार उनकी लेखनी भी निरन्तर चलती रही । विभिन्न विषयों पर उन्होंने 150 से अधिक ग्रंथों का प्रणयन किया है । अब तक उनके 130 से भी अधिक ग्रंथ प्रकाशित हो चुके हैं । लेखों, निबन्धों एवं भाषणों का गणना एक गुल्लि काम है । राहुल जी के साहित्य के विविध पक्षों को देखने से ज्ञात होता है कि उनकी पैठ न केवल प्राचीन नवीन भारतीय साहित्य में थी, अपितु तिब्बती, सिंहली, अंग्रेजी, चीनी, रूसी, जापानी आदि भाषों की जानकारी करते हुए तत्तत् साहित्य को भी उन्होंने मथ डाला । राहुल जी जब जिसके सम्पर्क में गये, उसकी पूरी जानकारी हासिल की । जब वे साम्यवाद के क्षेत्र में गये, तो कार्ल मार्क्स, लेनिन, स्तालिन आदि के राजनीतिक दर्शन की पूरी जानकारी प्राप्त की । यही कारण है कि उनके साहित्य में जनता, जनता का राज्य और मेहनतकश मजदूरों का स्वर प्रबल और प्रधान है ।

राहुल जी बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न विचारक हैं । धर्म, दर्शन, लोकसाहित्य, यात्रासाहित्य, इतिहास, राजनीति, जीवनी, कोश, प्राचीन तालपोथियों का सम्पादन आदि विविध क्षेत्रों में स्तुत्य कार्य किया है । राहुल जी ने प्राचीन के खण्डहरों से गणतंत्रीय प्रणाली की खोज की । सिंह सेनापति जैसी कुछ कृतियों में उनकी यह अन्वेषी वृत्ति देखी जा सकती है । उनकी रचनाओं में प्राचीन के प्रति आस्था, इतिहास के प्रति गौरव और वर्तमान के प्रति सधी हुई दृष्टि का समन्यय देखने को मिलता है । यह केवल राहुल जी थे जिन्होंने प्राचीन और वर्तमान भारतीय साहित्य चिन्तन को समग्रत आत्मसात् कर हमें मौलिक दृष्टि देने का निरन्तर प्रयास किया है । चाहे साम्यवादी साहित्य हो या बौद्ध दर्शन, इतिहास सम्मत उपन्यास हो या वोल्गा से गंगा की कहानियाँ हर जगह राहुल जी की चिन्तक वृत्ति और अन्वेषी सूक्ष्म दृष्टि का प्रमाण मिलता जाता है । उनके उपन्यास और कहानियाँ बिलकुल एक नये दृष्टिकोण को हमारे सामने रखते हैं ।

समग्रत यह कहा जा सकता है कि राहुल जी न केवल हिन्दी साहित्य अपितु समूचे भारतीय वाङ्मय के एक ऐसे महारथी हैं जिन्होंने प्राचीन और नवीन, पौर्वात्य एवं पाश्चात्य, दर्शन एवं राजनीति और जीवन के उन अछूते तथ्यों पर प्रकाश डाला है जिन पर साधारणत लोगों की दृष्टि नहीं गई थी । सर्वहारा के प्रति विशेष मोह होने के कारण अपनी साम्यवादी कृतियों में किसानों, मजदूरों और मेहनतकश लोगों की बराबर हिमायत करते दीखते हैं ।

विषय के अनुसार राहुल जी की भाषा शैली अपना स्वरूप निर्धारित करती है । उन्होंने सामान्यत सीधी सादी सरल शैली का ही सहारा लिया है जिससे उनका समूर्ण साहित्य विशेषकर कथा साहित्य साधारण पाठकों के लिए भी पठनीय और सुबोध है ।

प्रस्तुत कृति निराले हीरे की खोज राहुल जी द्वारा अनूदित कहानियों का रोचक संग्रह है, जिसकी रचना उन्होंने सन् 1923 में की थी । प्रस्तुत संग्रह में बीस कहानियाँ हैं जिनका अनुवाद उन्होंने अपने साहित्यिक जीवन के प्रारम्भ काल में ही किया था । यह सभी कहानियाँ उनके घुमक्कड़ी प्रवृत्ति और ऐतिहासिक खोज की भूख मिटाने में सक्षम हैं । कहानियों का कलेवर अति मानवीय करुणा व रहस्यों से ओत प्रोत है ।

निराले हीरे की खोज की कहानियाँ राहुल जी की चमत्कारी लेखनी का एक नया और आकर्षक स्वरूप है

 

विषय सूची

समुद्र का उपद्रव

1

रेतीली खाड़ी में दो स्टीमर

5

महागर्त का तल

10

बँगले वाला आदमी

14

भगेलू की राम कहानी

19

जेल का भीतरी

25

कप्तान का सन्देश

32

भयंकर बुलबुला

38

महापथ

45

मुर्दों की गुफा

50

मोहनस्वरूप का भूत

59

आँख

67

शैतान की आँख

73

बँगले में क्या देखा सुना

80

पुष्पक का अंत

86

हमारा घनिष्ठ संघ

91

शुभाशा का निर्माण

97

यात्रारम्भ

101

जल भित्तिका

105

आँख का जानकार

110

 

Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy

Related Items

अदीना: Adina by Rahul Sankrityayan
Item Code: NZA886
$10.00$8.00
You save: $2.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
अकबर: Akbar by Rahul Sankrityayan
Item Code: NZA901
$20.00$16.00
You save: $4.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Himalayan Buddhism: Past and Present (Mahapandit Rahul Sankrityayan Centenary Volume)
by D.C.Ahir
Hardcover (Edition: 1993)
Sri Satguru Publications
Item Code: NAD713
$25.00$20.00
You save: $5.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
किन्नर देश में: In the Country of Kinnars
Item Code: HAA197
$15.00$12.00
You save: $3.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now

Testimonials

As ever, brilliant price and service.
Howard, UK.
The best and fastest service worldwide - I am in Australia and I put in a big order of books (14 items) on a Wednesday; it was sent on Friday and arrived at my doorstep early on Monday morning - amazing! All very securely packed in a very strong cardboard box. I have bought several times from Exotic India and the service is always exceptionally good. THANK YOU and NAMASTE!
Charles (Rudra)
I just wanted to say that this is I think my 3rd (big) order from you, and the last two times I received immaculate service, the books arrived well and it has been a very pleasant experience. Just wanted to say thanks for your efficient service.
Shantala, Belgium
Thank you so much EXOTIC INDIA for the wonderfull packaging!! I received my order today and it was gift wrapped with so much love and taste in a beautiful golden gift wrap and everything was neat and beautifully packed. Also my order came very fast... i am impressed! Besides selling fantastic items, you provide an exceptional customer service and i will surely purchase again from you! I am very glad and happy :) Thank you, Salma
Salma, Canada.
Artwork received today. Very pleased both with the product quality and speed of delivery. Many thanks for your help.
Carl, UK.
I wanted to let you know how happy we are with our framed pieces of Shree Durga and Shree Kali. Thank you and thank your framers for us. By the way, this month we offered a Puja and Yagna to the Ardhanarishwara murti we purchased from you last November. The Brahmin priest, Shree Vivek Godbol, who was visiting LA preformed the rites. He really loved our murti and thought it very paka. I am so happy to have found your site , it is very paka and trustworthy. Plus such great packing and quick shipping. Thanks for your service Vipin, it is a pleasure.
Gina, USA
My marble statue of Durga arrived today in perfect condition, it's such a beautiful statue. Thanks again for giving me a discount on it, I'm always very pleased with the items I order from you. You always have the best quality items.
Charles, Tennessee
Jay Shree Krishna Shrimud Bhagavatam Mahapurana in Sanskrat Parayana is very very thankful to you we are so gratefully to your seva
Mrs. Darbar, UK.
Its a very efficient website and questions queries are responded promptly. very reliable website. Thank you.
Kailash, Australia.
Beautiful and amazing products. Super quality
Vraja, USA
TRUSTe
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2017 © Exotic India