| Specifications |
| Publisher: RADHA PUBLICATIONS, DELHI | |
| Author Rambai Tekam | |
| Language: Hindi | |
| Pages: 115 | |
| Cover: HARDCOVER | |
| 9.0x6.0 Inch | |
| Weight 290 gm | |
| Edition: 2025 | |
| ISBN: 9789391014766 | |
| HCF795 |
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श्रीमती राम
बाई तेकाम पिता श्री वैरागी सिंह भवेदी माता - श्रीमती सुहनिंया बाई जन्म 23 नवम्बर
1951 ग्राम-भारवा (विकास खंड अमरपुर) जिला डिंडौरी (मध्यप्रदेश) पति - स्व. श्री बुद्ध
सिंह तेकाम शिक्षा - एम.ए. (समाजशास्त्र, मध्य कालीन इतिहास) बी.एड. प्रकाशन - दैनिक
पत्रों एवं शालेय पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित शासकीय सेवा 1981 से 2013 तक शिक्षा
विभाग में विभिन्न शैक्षणिक पदों पर रहकर 2013 में सेवा निवृत्त सम्मान - शिक्षक दिवसों
में अनेको बार सम्मानित अभिरुचि - 1 स्वाधीनता संग्राम के अमर सेनानियों की जानकारियां
संकलित करना । 2. लोक साहित्य, लोक परम्पराओं 3. लोक संस्कृति में सहभागिता । 1. संग्रहालय
स्थापना का लक्ष्य । 2. सांस्कृतिक उपकरणों का संकलन ।
मध्य प्रदेश
के मंडला और डिंडौरी जिले की अपर्याप्त जानकारी के कारण उन्हें पिछड़े जिले कहा जाता
है। अतः हमारा प्रथम दायित्व है उसके पिछडेपन के कलंक को मिटायें। उसकी विशेषताओं को
सभी के सम्मुख प्रस्तुत करें। क्षेत्र में निर्धनता है। समृद्धि की प्रतिस्पर्धा नहीं
है न भूतकाल की सोच, न भविष्य की चिन्ता। केवल वर्तमान से सरोकार। किसी सन्यासी की
भाति। श्रम और ईमानदारी उसकी पहिचान है। प्रदर्शन और छलावा से दूर रहकर जीने की कला
में क्षेत्र के निवासी पारंगत है। इसलिये वे जिले के बाहर किसी भी क्षेत्र में जायें,
अलग पहिचाने जाते हैं। जिस क्षेत्र में चार पांच महाकाव्यों के प्रणेता हुए हो जहां
की पुरातात्विक धरोहर अत्यन्त प्राचीन है। जहां का इतिहास त्याग और बलिदान से सुसज्जित
हो जहां की परम्पराओं में, लोक कथाओं और लोक गीतों में कला और संगीत की अद्भुत झलक
मिलती है। वह जीवन विलक्षण है। ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो राजा शंकर साहि और रघुनाथ
साहि के जैसे बलिदानी अंगुलियों में गिनने लायक मिलेंगे। आजादी के इन दीवानों को फांसी
में लटकाने वालों ने इस पिछड़े कहे जाने वाले क्षेत्र के तीन दर्जन की संख्या पार कर
दी बलिदानियों की। स्वतंत्रता संघर्ष में किसी एक क्षेत्र में इतने बलिदान कम मिलते
है। आवश्यकता हैं इन बलिदानियों, त्यागवीरों और समर्पित देशभक्तों की जानकारी सार्वजनिक
की जाये। श्रीमती राम बाई तेकाम ने इस कार्य को विषम परिस्थितियों में रहते हुए भी
प्रारंभ किया। दूर दराज के ग्रामों तक पहुंचना और स्वतंत्रता संग्राम के सैनिकों की
जानकारी प्राप्त करना सरल कार्य नहीं है। जो सामग्री उन्होंने संग्रहीत की वह बहुत
कम शोधकर्ताओं ने किया है। बड़ी पुत्री और पति के साथ छोड़ देने के बाद भी मन मार कर
अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती रही। इस चुनौती पूर्ण, श्रम साध्य कार्य को जिस उत्साह से
उन्होंने किया उसके लिये वे बधाई की पात्र हैं। मैं अपेक्षा करता हूं कि इस अभियान
को वे निरन्तर आगे बढ़ाती रहेंगी। स्वास्थ्य के साथ न देने के बाद भी प्रयासरत है।
ईश्वर उन्हें स्वस्थ रखें। विश्वास है उनके इस सार्थक प्रयास का यथोचित सम्मान और मूल्यांकन
होगा।
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