पुस्तक परिचय
कोसी अंचल की एक अदम्य प्रतिभा का नाम है- ध्रुव नारायण सिंह राई। राई जी के भीतर सागर-सी अनुभूति-प्रवणता और पहाड़ जैसी अभिव्यक्ति-आकुलता है। संवेदना समृद्ध होने के कारण ही वे मूलतः कचि है और विशेषतः प्रबंधकार। यद्यपि निबंधकार और आलोचक के रूप में भी उनके प्रयास मौजूद है, लेकिन यह उनका अतिरिक्त कुछ है। वस्तुतः कविता ही उनकी आत्म-भाषा है। पाठकीय संवेदना को झकझोरने में पूर्णतः सक्षम 'द्वरपर गाथा प्रबंधकाव्य संतोषजनक ही नहीं, सफल एवं सराहनीय है। अठारह सर्गों में निबद्ध यह प्रबंधकाव्य राई को सिद्ध कवि और सक्षम प्रबंधकार प्रमाणित करने में समर्थ है। अष्टादश पुराणेषु व्यासस्यवचनम् द्वयम की भौति अठारह सर्ग-पुराणों वाले द्वापर गाथा काव्य में व्यास कवि राई ने निष्कर्षात्मक रूप से दो बातें कहीं हैं: एक तो यह कि राजा जैसे शीर्ष पद का अधिकारी होना बड़ी बात होकर भी बड़ी नहीं है अगर उसके पार्श्व में विपन्नता क्रन्दन कर रही हो और दूसरी बात कि आदमीयत से युक्त आदमी ही वरेण्य है।
लेखक परिचय
नामः ध्रुव नारायण सिंह राई, जन्म तिथिः 15 जनवरी 1954, जन्म स्थानः ग्राम निपनियाँ, थाना- त्रिवेणीगंज, जिला-सुपौल (बिहार), 852139, शिक्षाः एम. ए. (हिन्दी), एम. ए. (अंग्रेजी) सम्मान / पुरस्कारः कविवर मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, गजल-सम्राट (हिन्दी विकास सेवा संस्थान कुशीनगर उ.प्र.), बिहार काव्यरत्न (अखिल भारतीय कला सम्मान परिषद कुशीनगर उ.प्र.), राष्ट्रभाषा आचार्य (हिन्दी विकास सेवा संस्थान कप्तानगंज उ.प्र.), न्यू ऋतंभरा साहित्य मणि सम्मान (छ. ग). काव्य गौरव सम्मान (आकृति प्रकाशन, पीलीभीत उ.प्र.), साहित्य कमल सम्मान (आकृति प्रकाशन, पीलीभीत उ.प्र.) काव्य श्री सम्मान (तरूणोदय सांस्कृतिक विकास परिषद्, खगहा पूर्णियाँ, बिहार), साहित्य सेवा सम्मान (महिमा प्रकाशन एवं छत्तीसगढ़ शिक्षक साहित्यकार मंच), देवभूमि साहित्य रत्न (देवभूमि साहित्यकार मंच, पिथौरागढ़), भारत गौरव सम्मान (ऋचा प्रकाशन, कटनी म. प्र.), न्यू ऋतंभरा भारत भारती साहित्य सम्मान 2010 (छ.ग). साहित्य रत्न सम्मान (तरुणोदय सांस्कृतिक विकास परिषद्, खगहा पूर्णियाँ, विहार), साहित्य सत्यम् (साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक वाग्वैचित्र्य मंच, अररिया, बिहार) प्रकाशित कृतिः अँगूठा बोलता है (खण्डकाव्य), द्वापर गाथा (महाकाव्य), Face of The Mirror (Subjective Essays), टुकड़ा-दुकड़ा सच (कविता संग्रह) संपादित कृतिः निरालाः व्यक्ति और साहित्य, जन-तरंग (पत्रिका), वरीय संपादकः क्षणदा (त्रैमासिक पत्रिका), प्रधान संपादकः चौरासी Journal of Mini Khambuwan, Flying with words (Stories).