तिब्बत में बुौद्ध धर्म: Budhism in Tibet

तिब्बत में बुौद्ध धर्म: Budhism in Tibet

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Item Code: NZA744
Author: राहुल सांकृत्यायन (Rahul Sankrityayan)
Publisher: Kitab Mahal
Language: Hindi
Edition: 2012
ISBN: 812250325X
Pages: 76
Cover: Paperback
Other Details 8.5 inch X 5.5 inch
Weight 100 gm

प्रकाशकीय

हिन्दी साहित्य में महापंडित राहुल सांकृत्यायन का नाम इतिहास प्रसिद्ध और अमर विभूतियों में गिना जाता है इनका पितृग्राम कनैला तथा ननिहाल पन्दहा ग्राम है यह दोनों ग्राम आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) जनपद में आते हैं इनके पूर्वज सरयूपार गोरखपुर जनपद के मलांव के पाण्डेय थे जो कभी आजमगढ़ के इस अंचल में बसे थे स्वशिक्षित राहुल नियमित पाठशाला पाठ्यक्रम को तिलांजलि देकर संस्कृत से अरबी, फारसी से अंग्रेजी, सिंहली से तिब्बती भाषाओं में भ्रमण करते रहे उनमे अद्भुत ग्रहण शक्ति थी जिससे उन्होंने इन भाषाओं के ज्ञान भण्डार से घिसी पिटी बातों को छोड्कर उनकी मेधावी प्रज्ञा के सबसे जटिल सार तत्वों का मधु संचय निचोड़ निकाला

बौद्ध धर्म से तो इतना प्रभावित हुये कि स्वयं बौद्ध हो गये अपने वास्तविक नाम केदारनाथ पाण्डे तक को बदलकर राहुल नाम रखा ' सांकृत्य' गोत्रीय होने के कारण उन्हें राहुल सांकृत्यायन कहा जाने लगा उनका समूचा जीवन घुमक्कड़ी का था घुमक्कड़ जीवन के मूल में अध्ययन की प्रवृत्ति ही सर्वोपरि रही राहुल जी के साहित्यिक जीवन की शुरुआत सन् 1927 ई० से हुई तथा उनकी लेखनी उनके जीवन तक (अप्रैल 1963) चलती रही अब तव. उनके 130 से भी अधिक ग्रंथ प्रकाशित हो चुके हैं लेखों निबन्धों एवं भाषणों की गणना एक मुश्किल काम है राहुल जी के साहित्य के विविध पक्षों को देखने से ज्ञात होता है कि उनकी पैठ केवल प्राचीन-नवीन भारतीय साहित्य में थी अपितु तिब्बती, सिंहली, अंग्रेज़ी, चीनी, रुसी, जापानी आदि भाषाओं की जानकारी करते हुए तत्तत् साहित्य को भी उन्होंने मथ डाला

बौद्ध दर्शन के वे मान्य विद्वान् और व्याख्याता थे - त्रिपिटकाचार्य उनकी अन्य सभी बातों को यदि हम अलग कर दें तो हम यह पाते हैं कि तिब्बत से प्राचीन ग्रंथों की जो थाती राहुल जी भारत ले आये वे ही उनको अमरता प्रदान करने के लिये पर्याप्त है

बौद्ध धर्म के मानने वाले उन्हें गौतम बुद्ध का अवतार मानते हैं प्रो० सिल्वा लेवी ने उनकी गणना बौद्धधर्म के सर्वश्रेष्ठ विद्वानों में की है तथा उन्हें चौदह आदर्शों का प्रतिनिधि माना है उन्हें देशी-विदेशी 36 भाषाओं का ज्ञान था

वर्ष 1929 में बौद्ध धर्म ग्रंथों की खोज में वे नेपाल होते हुये तिब्बत गये जहाँ घोषण कष्टों एवं बाधाओं को सहते हुये भी अनेक दुर्लभ बौद्ध ग्रंथों की खोज की वर्ष 1934 में दूसरी बार, वर्ष 1936 में तीसरी बार तथा वर्ष 1938 में चौथी बार उन्हें तिब्बत जाना पड़ा धर्मशास्र पर लिखित उनकी आठ प्रमुख रचनावलियो में से एक प्रमुख रचनावली ''तिब्बत में बौद्ध धर्म'' है जो उन्होंने वर्ष 1935 में लिखा अपनी मूल्यवत्ता और शोध की सरल एवं मनोरम शैली के कारण यह पुस्तक विद्वानों में अत्यंत सराही और ग्राह्य की गई

प्रस्तुत पुस्तक '' तिब्बत में बौद्ध धर्म'' राहुल जी की अलभ्य पांडित्यपूर्ण कृतियों में से एक है। जिसे उन्होंने पाँच विभिन्न काल खंडों में 640 ई० से 1664 ई० तक क्रमश: लिपिबद्ध किया है जिसका वर्गीकरण इस प्रकार है-

आरंभ युग (640-823ई०)

शांतरक्षित युग (823-1042ई०)

दीपंकर युग (1042-1102 ई०)

-सक्य युग (1102-1376 ई०)

चोङ्---युग (1376-1664 ई०)

अंतिम युग (1664 ई०)

विद्वान् लेखक ने इस पुस्तक मे उन विशेष कारणों पर प्रकाश डाला है जिनके फलस्वरूप बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार तिब्बत में 640 ई० से पूर्व मंदगति से हुआ-जबकि यह धर्म तीसरी शताब्दी से ही पहले भारत की सीमा से बाहर फैलने लगा था तथा 640 ई० तथा उसके बाद के वर्षों में इस धर्म को किन महानुभावों ने इसे प्रतिस्थापित तथा सम्मानित किया

इस पुस्तक में तिब्बत में बौद्ध धर्म के उन्नयन के साथ-साथ उन ऐतिहासिक राजनैतिक घटना क्रमों का भी सविस्तार वर्णन किया गया है तथा तिब्बत देश की विस्तृत जानकारी भी दी गई है विभिन्न घटनाक्रमों में संवहित करके पाठकों को अपने साथ बाँधे रखने का प्रयास अलभ्य और अनूठा है तथा उन्हें ' तिब्बत में बौद्ध धर्म '' के विषय में संपूर्ण जानकारी दी गई है। यह पुस्तक राहुल जी की अमर कृतियों में से एक है।

 

विषय-सूची

 

1

आरंभ युग (640-823ई०)

3

2

शांतरक्षित युग (823-1042ई०)

6

3

दीपंकर युग (1042-1102 ई०)

19

4

-सक्य युग (1102-1376 ई०)

26

5

चोङ्---युग (1376-1664 ई०)

31

6

अंतिम युग (1664 ई०)

38

 

परिशिष्ट

 

1

भोटदेशीय संवत्सर चक्र (रब् ऽब्युङ्) का आरम्भ

42

2

भोटदेशीय संवत्सर चक्र (रब् - ऽब्युङ्)

43

3

भोटेदेशीय मासों के नाम

45

4

प्रत्येक रब्- ऽब्सुङ् में अधि-मास वाले वर्ष और मास

46

5

-सक्य मठ (स्थापित 1073 ई०) के संघराज

47

6

कर-म संघराज

48

7

चोड् ख-प की गद्दी के मालिक द्गऽलदन्-संघराज

49

8

बौद्ध विद्वान् और उनके आश्रयदाता आदि

51

9

तिब्बत में भारतीय ग्रंथों के कुछ प्रधान अनुवादक, उनके सहायक

 
 

और ग्रंथ

61

 

10 से 18 तक चार्ट

 
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