कब्ज की प्राकृतिक चिकित्सा: Constipation - A Natural Cure

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Item Code: NZA966
Author: डॉ. राजीव रस्तोगी (Dr. Rajeev Rastogi)
Publisher: Popular Book Depot
Language: Hindi
Edition: 2017
ISBN: 9788186098622
Pages: 47(8 B/W illustrations)
Cover: Paperback
Other Details 8.5 inch X 5.5 inch
Weight 110 gm
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भूमिका

कब्ज एक आम शिकायत है और आधुनिक जीवन के अनेक रोगों का कारण भी है। इससे छुटकारा पाने के लिए दादी माँ के नुस्खे से लेक्स पेट के विशिष्ट विशेषज्ञों (Gastroenterologis) की सेवाएँ ली जाती हैं। लेकिन निदान पाना अना ही कठिन प्रतीत होता है जितना बोतल से निकले हुए जिन्न को वश में करना। कब्ज से पीड़ित व्यक्ति नीम-हकीम, वैद्य, डॉक्टर-सबकी शरण में जाता है; चूर्ण, भस्म, भूसी, दवाईयाँ इत्यादि का प्रयोग करता है। मामूली राहत अवश्य मिलती है लेकिन कोई स्थायी हल नहीं निकलता। महत्वपूर्ण बात यह है कि पेट की यह कोष्ठबद्धता कई जटिल रोगों की जन्मदात्री बन जाती है जिनमें हदय रोग व कैन्सर भी सम्मिलित हैं।

कब्ज के कारणो का आकलन करने पर हम पाएगें कि इसका सीधा सम्बन्ध हमारी जीवन शैली से है। आधुनिक जीवन में क्रियाशीलता का अभाव आँतों की इस निष्क्रियता में परिलक्षित होता है। हमारे दैनिक जीवन में व्यायाम व शुद्ध हवा का सेवन नहीं के बराबर है। अधिक्तर लोगों का व्यवसाय व कार्य उन्हें घण्टों कुर्सी पर बैठाए रखता है। यातायात के साधनों की निरन्तर वृद्धि से पैदल चलने की आवश्यकता समाप्त-सी हो गयी है। कहने का अभिप्राय यह है कि हमारे जीवन में शारीरिक श्रम का स्थान लुप्त होता जा रहा है। दूसरी ओर हमारा भोजन अति गरिष्ठ एवं विषम बन गया है। नित नए होटल व रेस्तराँ खुल रहे हैं। फास्ट प्ल व डिब्बाबंद खाद्यान्नों का चलन बढ़ता जा रहा है। कृत्रिम व रासायनिक पदाथों का प्रयोग आम हो गया है। इस प्रकार अप्राकृतिक व निर्जीव भोजन का सेवन क्य हम स्वयं स्थ्य को निमंत्रण दे रहे हैं।

गति आधुनिक जीवन की विशेषता है। हर कोई दौड़ रहा है और एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में है। प्रतिस्पर्धा व व्यस्तता ने मानसिक तनाव को जन्म दिया है। इसका प्रभाव मुख्य रूप से हमारी पाचन प्रणाली पर पस्ता है। वैज्ञानिक अनुसंधानों द्वारा यह तथ्य उजागर हुआ है कि पाचक रसों का स्राव, आँतों की गतिशीलता आदि क्रियाओं का संचालन मन की स्थिति पर निर्भर है । तनाव ग्रस्त व्यान की ग्रन्थियाँ पूर्ण रूप से सक्रिय नहीं हो पाती और आँतों में शिथिलता आ जाती है । फलस्वरूप अपच की स्थिति उत्पन्न होती है जो कब्ज का रूप धारण क्य लेती है । 'शान्त चित्त से भोजन करना चाहिए' इस कथन में पर्याप्त सच्चाई

डॉ  राजीव रस्तोगी ने इन्हीं बातों को बड़े सुन्दर ढँग से पाठकों के समक्ष रखा है । पुस्तक में कब्ज के विभिन्न कारणों का विस्तारपूर्वक विश्लेषण किया गया है  जिनके मूल में हमारी आधुनिक जीवन शैली को दोषी माना गया है । भोजन कैसा हो, कैसे किया जाए, बनाते समय किन-किन बातों का विशेष ध्यान रखा जाए, जैसे महत्त्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर पुस्तक में दिए गए हैं। अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर लेखक ने प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा कब्ज की जटिल समस्या का सरल ही नहीं वरन् एक स्थायी समाधान प्रस्तुत किया है। पाठकगण अवश्य लाभान्वित होंगे, ऐसा मेरा विश्वास है।

 

अनुक्रम

1

भूमिका

(iii)

2

परिचय

(v)

3

कब्ज सभी रोगों की जड़ है

1-2

4

कब्ज और उनके लक्षण

3-4

5

कब्ज के प्रकार

5

6

कब्ज के लिये जिम्मेदार कारक

6-20

7

कब्ज के प्रभाव एवं परिणाम

21-22

8

कब्ज की प्राकृतिक चिकित्सा

23-35

9

हमारा पाचन तंत्र

36-39

10

क्या खाएँ और क्या न खाएँ

40-42

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