माण्डूक्यकारिका: Discourses on Mandukya Karika by Swami Akhandananda Saraswati (Set of 4 Volumes)
Look Inside

माण्डूक्यकारिका: Discourses on Mandukya Karika by Swami Akhandananda Saraswati (Set of 4 Volumes)

Bestseller
FREE Delivery
$95
Quantity
Ships in 1-3 days
Item Code: HAA843
Author: स्वामीश्री अरवण्डानन्द सरस्वती (Swami Shri Akhandananda Saraswati)
Publisher: Sat Sahitya Prakashan Trust
Language: Sanskrit Text with Hindi Translation
Edition: 2015
Pages: 2310
Cover: Hardcover
Other Details: 8.5 inch X 5.5 inch
Weight 2.8 kg
Part I







Part II



Part III



Part IV

अलातशान्ति-प्रकरणका क्या अभिप्राय है?

एक लकड़ी में एक ओर या दोनों ओर मशाल की तरह, घास-फूस बाँध करके या कपड़ा बाँध करके, किरासन का तेल डाल करके आग जला देते हैं और उस लकड़ी को बीच में-से पकड़कर घुमाते हैं तो कभी वह लम्बी मालूम पड़े-गोल मालूम पड़े, कभी चौड़ी मालूम पड़े उसको घुमाने  से तरह-तरहकी शक्ल मालूम पड़े। यद्यपि उस 'लूक' में, उस 'अलाव' में किसी प्रकारकी आकृति नहीं है-न लम्बी, न चौड़ी, न गोल, न उसमें हाथी है, न उसमें घोड़ा है, न उसमें रथ है, परन्तु उसको ऐसा घुमाते हैं कि उसमें सब आकृतियाँ मालूम पड़ती हैं। इसी प्रकार  वह ज्ञानदेव ऐसी-ऐसी आकृतियाँ बनाते हैं कि उन आकृतियों की शान्ति, उन आकृतियों के बाधके लिए अलातशान्ति प्रकरण प्रारम्भ करते हैं।

 

Sample Page

Add a review
Have A Question

For privacy concerns, please view our Privacy Policy

CATEGORIES