धुमक्कड़ स्वामी: Ghumakkad Swami

धुमक्कड़ स्वामी: Ghumakkad Swami

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Item Code: NZA720
Author: राहुल सांकृत्यायन: Rahul Sankrityayan
Publisher: Kitab Mahal
Language: Hindi
Edition: 2014
ISBN: 8122501877
Pages: 125
Cover: Paperback
Other Details: 8.5 inch X 5.5 inch
Weight 150 gm

प्रकाशकीय

हिन्दी साहित्य में महापंडित राहुल सांकृत्यायन का नाम इतिहास-प्रसिद्ध और अमर विभूतियों में गिना जाता है। राहुल जी की जन्मतिथि 9 अप्रैल, 1893 और मृत्युतिथि 14 अप्रैल, 1963 है राहुल जी का बचपन का नाम केदारनाथ पाण्डे था बौद्ध दर्शन से इतना प्रभावित हुए कि स्वय बौद्ध हो गये। 'राहुल' नाम तो बाद मैं पड़ा-बौद्ध हो जाने के बाद 'साकत्य' गोत्रीय होने के कारण उन्हें राहुल सास्मायन कहा जाने लगा।

राहुल जी का समूचा जीवन घूमक्कड़ी का था। भिन्न-भिन्न भाषा साहित्य एव प्राचीन संस्कृत-पाली-प्राकृत-अपभ्रंश आदि भाषाओं का अनवरत अध्ययन-मनन करने का अपूर्व वैशिष्ट्य उनमें था। प्राचीन और नवीन साहित्य-दृष्टि की जितनी पकड और गहरी पैठ राहुल जी की थी-ऐसा योग कम ही देखने को मिलता है घुमक्कड जीवन के मूल में अध्ययन की प्रवृत्ति ही सर्वोपरि रही। राहुल जी के साहित्यिक जीवन की शुरुआत सन् 1927 में होती है। वास्तविक्ता यह है कि जिस प्रकार उनके पाँव नही रुके, उसी प्रकार उनकी लेखनी भी निरन्तर चलती रही। विभिन्न विषयों पर उन्होने 150 से अधिक ग्रंथों का प्रणयन किया हैं अब तक उनक 130 से भी अधिक ग्रंथ प्रकाशित हौ चुके है लेखा, निबन्धों एव भाषणों की गणना एक मुश्किल काम है।

राहुल जी के साहित्य के विविध पक्षी का देखने से ज्ञात होता है कि उनकी पैठ केवल प्राचीन-नवीन भारतीय साहित्य में थी, अपितु तिब्बती, सिंहली, अग्रेजी, चीनी, रूसी, जापानी आदि भाषाओं की जानकारी करते हुए तत्तत् साहित्य को भी उन्होंने मथ डाला। राहुल जी जब जिसके सम्पर्क मे गये, उसकी पूरी जानकारी हासिल की जब वे साम्यवाद के क्षेत्र में गये, तो कार्ल मार्क्स लेनिन, स्तालिन आदि के राजनातिक दर्शन की पूरी जानकारी प्राप्त की यही कारण है कि उनके साहित्य में जनता, जनता का राज्य और मेहनतकश मजदूरों का स्वर प्रबल और प्रधान है।

राहुल जी बहुमुखी प्रतिभा-सम्पन्न विचारक हैं धर्म, दर्शन, लोकसाहित्य, यात्रासाहित्य इतिहास, राजनीति, जीवनी, कोश, प्राचीन तालपोथियो का सम्पादन आदि विविध सत्रों मे स्तुत्य कार्य किया है। राहुल जी ने प्राचीन के खण्डहरों गे गणतंत्रीय प्रणाली की खोज की। सिंह सेनापति जैसी कुछ कृतियों मैं उनकी यह अन्वेषी वृत्ति देखी जा सकती है उनकी रचनाओं मे प्राचीन के प्रति आस्था, इतिहास के प्रति गौरव और वर्तमान के प्रति सधी हुई दृष्टि का समन्वय देखने को मिलता है। यह केवल राहुल जी जिहोंने प्राचीन और वर्तमान भारतीय साहित्य-चिन्तन को समग्रत आत्मसात् कर हमे मौलिक दृष्टि देने का निरन्तर प्रयास किया है चाहे साम्यवादी साहित्य हो या बौद्ध दर्शन, इतिहास-सम्मत उपन्यास हो या 'वोल्गा से गंगा की कहानियाँ-हर जगह राहुल जा की चिन्तक वृत्ति और अन्वेषी सूक्ष्म दृष्टि का प्रमाण गिनता जाता है उनके उपन्यास और कहानियाँ बिलकुल एक नये दृष्टिकोण को हमारे सामने रखते हैं।

समग्रत: यह कहा जा सक्ता है कि राहुल जी केवल हिन्दी साहित्य अपितु समूल भारतीय वाङमय के एक ऐसे महारथी है जिन्होंने प्राचीन और नवीन, पौर्वात्य एवं पाश्चात्य, दर्शन स्वं राजनीति और जीवन के उन अछूते तथ्यों पर प्रकाश डाला है जिन पर साधारणत: लोगों की दृष्टि नहीं गई थी सर्वहारा के प्रति विशेष मोह होने के कारण अपनी साम्यवादी कृतियों में किसानों, मजदूरों और मेहनतकश लोगों की बराबर हिमायत करते दीखते है।

विषय के अनुसार राहुल जी की भाषा- शैली अपना स्वरुप निधारित करती है। उन्होंने सामान्यत: सीधी-सादी सरल शैली का ही सहारा लिया है जिससे उनका सम्पूर्ण साहित्य विशेषकर कथा-साहित्य-साधारण पाठकों के लिए भी पठनीय और सुबोध है।

प्रस्तुत ग्रन्थ 'घुमक्कड़ स्वामी' राहुल जी की एक अनुपम कृति है यह एक आम जहाँ यात्रा-वृत्तान्त है, वहीं हरिशरणानंद की जीवन कथा भी है एक ऐसी अद्भुत कृति जिसमें यात्रा और जीवनी-दोनों विधाओं का एक अलौकिक घोल-मेल वर्तमान है।

एक साधारण गृहस्थ-घर का बालक जो एक बाबा के सम्पर्क में आकर योगी हो गया और युवावस्था में ही गृहत्यागी हो कर अध्यात्म के प्रभाव में हिमालय चला गया और योग- साधना करने लगा। योगियों की खोज में भटकता रहा। आध्यात्मिक गुरुओं से औषधि- शास्त्र सीख कर वैद्य बना; देश की आजादी के लिए संघर्ष भी किया आगे चलकर विज्ञान का प्रेमी बना और प्रौढ़ावस्था में गृहस्थ-जीवन को अंगीकार किया ऐसा अद्भुत चरित्र देखने को नहीं मिलता।

इन्हीं हरिशरणानंद को माध्यम बना कर राहुल जी ने अत्यन्त रोचक जीवनी और उससे संबंधित यात्रा-वृत्तान्त को यहां प्रस्तुत किया है।

 

अनुक्रम

1

बाल्य

1

2

गृह-त्याग

7

3

योगियों की खोज

17

4

योग का चक्कर

28

5

मानसरोवर-यात्रा

32

6

योगाभ्यास

39

7

साधना में विघ्न

51

8

वैद्य घुमक्कड़

57

9

देश की आग में

71

10

वैद्यक रूढ़िवाद के खिलाफ

82

11

विज्ञान के प्रेमी

95

12

गृहस्थ

104

13

परिशिष्ट

113

 

 

 

 

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