इस पुस्तक का उद्देश्य उस त्रासदी तथा दुःख से भरी कहानी के सत्य को सामने लाना है, जिसमें हम देखेंगे कि किस तरह 70 लाख हिन्दू तथा सिखों को पश्चिमी पंजाब, उत्तर-पश्चिमी सीमा-प्रांत, सिंध तथा अधिकृत कश्मीर के अपने घरों से विस्थापित होना पड़ा। इस कहानी की रूपरेखा सम्पूर्ण विश्व के संज्ञान में है तथा संयुक्त राष्ट्र में मानवता के अधिकांश हलकों के प्रतिनिधियों के सम्मुख यह चर्चा का विषय रहा है। यह मानवता के इतिहास का सबसे बड़ा सामूहिक विस्थापन था जो अत्यंत दबाव की स्थिति में हुआ तथा शेष भारत से इसे सक्रिय संवेदना मिली एवं इस संघटना ने वहाँ के लोगों का ध्यान आकृष्ट किया। विश्व कोअपने 'घर से बेघर' हुई इस विशद मानवता का भली-भाँति संज्ञान है।
तथापि, जो बात ठीक से ज्ञात नहीं है अथवा अच्छी तरह से समझ नहीं आई है, यह है कि यह कष्टप्रद उत्प्रवास उस षड्यन्त्र का अंतिम व चरम अध्याय था, जिसकी योजना एक दशक से चल रही थी। यह षड्यन्त्र मुस्लिम लीग का था जो भारत में एक मुस्लिम राज्य की स्थापना करना चाहती थी, जहाँ किसी भी प्रकार की गैर-मुस्लिम जनसंख्या का बोझ न हो तथा जो इसके विशुद्ध मुस्लिम चरित्र को दुर्बल न कर सके।' यह अनिवार्य है कि इंडियन मुस्लिम लीग के उस इतिहास को खंगाला जाए तथा उसे अनावृत किया जाए जिसमें इसके प्रादुर्भाव तथा विकास की अवधि शामिल हो ताकि इस त्रासदी का उत्तरदायित्व यथोचित रूप से सुनिश्चित किया जा सके।
मुस्लिम लीग का मिथ्या प्रचार, 1947 में पंजाब की दुर्घटनाओं के लिए मुख्यतः सिखों को तथा उसके बाद हिन्दुओं को उत्तरदायी दिखाने की चेष्टा कर रहा है। एक विकृत टूटा-फूटा चित्र खींचा गया जो मिथ्या से भरा हुआ था जिसमें विश्व को यह दिखाने की चेष्टा की गई थी कि 'सिखों की योजना' पंजाब में मुस्लिमों पर आक्रमण करके उन्हें वहाँ से भगाने की थी। कुछ समय के लिए विश्व ने इस झूठ को पचा लिया तथा सिखों की एक बदनाम छवि सबके सामने रखी गई। परंतु वैश्विक विचारधारा धीरे-धीरे सही दिशा में लौटने लगी तथा सिखों का नाम अब मुस्लिमों के विरुद्ध कथित योजना के अपराध से पूरी तरह मुक्त हो चुका है। अब इस तथ्य को हर निष्पक्ष व्यक्ति ने स्वीकार कर लिया है कि पूर्वी पंजाब में मुस्लिमों पर सिखों तथा हिन्दुओं का आक्रमण वीभत्स तथा असहनीय उकसावे वाले कृत्यों का प्रतिशोध था। यद्यपि यह प्रत्येक स्थान पर ज्ञात नहीं है कि दिसम्बर 1946 से आरंभ होकर अनेकों कष्टप्रद महीनों तक मुसलमानों द्वारा सिखों को उकसाने के लिए किए गए कृत्यः कितने भयावह थे, कितनी अवधि तक चले तथा उनका चरित्र कितना पैशाचिक था। यह पंजाब की मुस्लिम जनसंख्या द्वारा छेड़ा गया युद्ध था ताकि सिखों की कमर तोड़ी जा सके तथा इसके निमित्त सिखों के मध्य जाकर हत्या, आगजनी, लूट तथा खियों का अपहरण किया जा सके। एक जनसमुदाय के रूप में सिखों ने इस युद्ध की विभीषिका का अनुभव महीनों तक किया तथा हजारों नहीं वरन दसों लाख सिख सुरक्षा के लिए अपना घरबार छोड़ने पर विवश हुए। कहानी के इस पहलू की सही जानकारी न होने पर परिस्थिति का एक न्यायोचित तथा संतुलित आकलन नहीं हो सकता।
इन पृष्ठों में, सिखों तथा हिन्दुओं के ऊपर हुए अत्याचार परिपूर्ण नहीं हैं और न ही वह वास्तविक घटनाओं के परिमाण का अधिकांश है। यह पूरे पश्चिमी पंजाब तथा पश्चिमी पाकिस्तान के अन्य क्षेत्रों के कुछ ग्रामों तथा उपनगरों में जो कुछ भी घटित हुआ, उनके द्योतक प्रकरण मात्र हैं। आप यदि कल्पना करें कि ऐसा हजारों ग्रामों तथा हज़ारों उपनगरों में हो रहा है तो ही आप यह समझ सकते हैं कि वास्तव में किस हद तक यह सब कुछ हुआ होगा तथापि इसे अंतिम रूप से अपने पूरे वीभत्स यथार्थ के साथ व्यक्त नहीं किया जा सकता। इन उत्पीड़नों को झेलने वाले लोगों के वक्तव्यों, प्रशासन को लिखी गई शिकायतों, विश्वसनीय प्रेसरिपोर्ट्स तथा पूर्वी पंजाब के शरणार्थी शिविरों में लिए गए शपथपूर्वक हस्ताक्षरित वक्तव्यों के आधार पर तथ्य लिखे गए हैं। सिखों ने, पाकिस्तान के आतंक व दबाव के चलते, अपना निवास, पंजाब की सर्वाधिक उर्वर भूमि, अपने कारखाने तथा समृद्ध व्यापार, अपने पवित्र तीर्थ-स्थान, विद्यालय इत्यादि सब कुछ पीछे छोड़ दिया, जिसके कारण अनुमानित (एक निष्पक्ष अनुमान के आधार पर) तौर पर लगभग 40% लोग (जो संभवतः समुदाय के सर्वाधिक उद्यमशील व्यक्ति थे) शरणार्थी हो गए। वे अपने घर से निकलकर लुटे-पिटे अंतहीन कारवाओं में घिसटते हुए जा रहे थे। यह महती मानव त्रासदी इतनी व्यापक है कि कल्पनातीत प्रतीत होती है जब तक कि तथ्यों की सहायता से इसे भावप्रवण रूप से वर्णित नहीं किया जाता।
इस विवरण का प्रथम उद्देश्य सिखों के नाम की ख्याति की पुनर्स्थापना करना है जिसे पाकिस्तानी प्रेस तथा पाकिस्तान के नेताओं के मिथ्या-प्रचार से दूषित किया गया है तथा द्वितीय उद्देश्य उस व्यक्ति के लिए तथ्य प्रस्तुत करना है जो 1947 के भयावह महीनों के पूरे इतिवृत्त को लिखना चाहता है।
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