प्रस्तावना
सरदार बल्लभभाई पटेल को सार्वजनिक रूप से सरदार पटेल के नाम से भी जानते है। जिन्होंने संपूर्ण रूप से भारतीय गणतंत्र के प्रति अपने आपको समर्पित किया। आधुनिक इतिहास में कोई भी इस तरह का नायक नहीं दिखाई देता जो सरदार पटेल की तुलना में इस देश की और अधिक सही ढंग से देखभाल कर सकें।' सरदार पटेल एक ऐसे व्यक्ति रहे जिनकों उनके योगदानों के लिए एक संध्या के रूप में जाना जाता है। भारत के मानचित्र पर हमें उनके निशान मिल जाते है जो आज भी लोगों के मनमस्तिष्क में मौजूद है। शायद उनके पास पहले से ही एकीकृत भारत का विचार रहा होगा। सरदार पटेल को 'संयुक्त भारत के निर्माता के नाम से भी जानते है। हमारे बीच में लोकप्रिय रूप से 'लौह पुरुष' के नाम से विख्यात है। सरदार पटेल भारतीय गणतंत्र के सर्वाधिक महत्वपूर्ण संस्थापकों में से एक रहे। भारत को आजादी दिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वे एक गरीब ग्रामीण किसान परिवार से संबंधित रहे। व्यवसायिक रूप से वे एक बैरिस्टर रहे और बाद में इस देश के शीर्षस्थ नेताओं में प्रमुख रहे। इसमें कोई शक नहीं कि वे अपने कद में और बेहतरी में अग्रणी रहे। उनमें संगठन क्षमता, दृढ़ संकल्प, बहादुरी और साहस जैसे दिव्य गुण विद्यमान रहें, जो किसी नेता के लिए अनिवार्य है। सरदार पटेल वाकई में एक अनूठे किस्म के राजनेता रहे। उनके व्यक्तित्व में तीन महत्वपूर्ण गुण वचन बद्धता, आत्म समर्पण और जिम्मेदारी विद्यमान रहे। उन्होंने विविध लेकिन समृद्ध भारत का सपना संजोया था जिसकी वैश्विक विषयों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बुलंद आवाज सुनाई दें। वे एक महान सामाजिक नेता रहे, जो किसी देश में बिरले ही पैदा होते हैं। उनकी राजनीतिक प्रतिमा उनके महत्वपूर्ण योगदानों में प्रतिध्वनित होती है, विशेष रूप से ब्रिटिश शासकों के खिलाफ आजादी की लड़ाई में उनकी असली प्रतिमा निखर कर सामने आई। यहां यह उल्लेख करना वाजिब होगा कि आजादी के संघर्ष में उनकी भूमिका यही खत्म नहीं होती है. इसके बाद भी अनवरत रूप से स्वतंत्र राष्ट्र के निमित्त जारी रहती है, वे सरदार कहे जाते रहे जिसका मतलब मुखिया होता है। यह उनका दुर्लभ गुण था कि वे भीड़ का नेतृत्व अति नियंत्रित तरीके से करते थे और इसीलिए उनको सरदार कहा भी गया। उनके कानून के व्यवसाय में भी कई तरह के मोड़ आए। किसानों के नेता के रूप में उन्होंने ब्रिटिश सेनाओं को हार स्वीकार करने के लिए बाध्य किया। आजाद भारत के उपप्रध् नमंत्री के रूप में उनका सर्वाधिक बेहतर योगदान सैकड़ों शाही रियासतों के भारत संघ में विलय के रूप में जाना जाता है। भारत के एकीकरण के उनके अथक प्रयास की वजह से ही उनको अखंड़ भारत के निर्माता के रूप में देखा जाता है। वे अपने वचन और कर्म से अत्यंत ईमानदार रहे। वे नायकों के नायक रहे। वे नेताओं के बीच में शेर की हैसियत से रहे और शायद इसीलिए उन्हें लौह पुरूष कहा गया। वे महात्मा गाँधी के कार्यों से अत्यंत प्रभावित रहा करते थे जिससे प्रेरणा पाकर उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन को स्वतंत्रता के परम उद्देश्य के लिए न्यौछावर कर दिया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता के रूप में उन्होंने अपने गृहराज्य गुजरात के लिए बेहतर योगदान किया जिसमें ग्रामीण किसानों के लिए दमनकारी नीतियों का विरोध प्रमुख रूप से शामिल है। इसके लिए उन्होंने नागरिक अवज्ञा आन्दोलन जैसे सामाजिक तकनीकों का सहारा लिया। वे महात्मा गाँधी के समर्पित अनुयायी रहे| इस विचार श्रृंखला में यह भी चर्चा करना उचित होगा कि राजनीति में उनका प्रवेश कोई आकस्मिक घटना नहीं रही, वरन् परिस्थितियों ने उन्हें निजी से राज्य और फिर राष्ट्रीय स्तर का नेता बना दिया। यह उद् विकास धीरे-धीरे हुआ। वे बकवास में थोड़ा भी यकीन नहीं रखते थे।
लेखक परिचय
डॉ० अभय नाथ सिंह जन्म-01 जुलाई सन् 1971 ई० (संवरा-बलिया) शिक्षा- हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट की शिक्षा अमर शहीद भगत सिंह इण्टर कालेज, रसड़ा बलिया से, सतीश चन्द्र कालेज, बलिया से स्नातक व श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलिया से एम० ए० हिन्दी की परीक्षा उत्तीर्ण की। तनंतर अध्यापन कार्य करते हुए शोधकार्य में संलग्न हुए तथा सन् 1998 ई० में वीर बहादुर सिंह पूर्वाचल विश्वविद्यालय जौनपुर में पी-एच०डी० हेतु पंजीकरण कराया। सन् 2003 में विश्वविद्यालय ने पी-एच०डी० की उपाधि से विभूषित किया। अकादमिक कार्यशैली- तीस राष्ट्रीय / अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में सहभागिता व शोध लेख प्रस्तुतीकरण। राष्ट्रीय / अन्तर्राष्ट्रीय पत्रिका (जर्नल्स) में 15 शोध लेख प्रकाशित ।
कोविड-19 काल में 75 राष्ट्रीय / अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार में सहभागिता
पुस्तक लेखन- 1. भारतीय संस्कृति में भोजपुरी लोकगीत। 2. भोजपुरी जन जीवन शैली। 3. नागार्जुन की विद्रोही चेतना का कटु यथार्थ। 4. थर्ड जेन्डर : साहित्य की दृष्टि में
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