हिन्दी साहित्य अकादमी ने अपने स्थापना-समय से ही गुजराती की उत्तम कृतियों का हिन्दी अनुवाद सम्पन्न कराने के लिए स्तुत्य प्रयास किए हैं। कविता, कहानी, निबंध, नाटक आदि गुजराती की साहित्यिक विधाओं के सुन्दर और उत्कृष्ट अनुवाद अकादमी ने हिन्दी-जगत के सामने रखे हैं। इसी क्रम में डॉ. रंजना हरीश की गुजराती कृति निजी आकाश का डॉ. शशि अरोरा द्वारा किया गया हिन्दी अनुवाद 'आकाश अपना-अपना' आपके समक्ष है।
डॉ. रंजना हरीश अंग्रेजी और गुजराती की सुपरिचित महिलावादी लेखिका हैं। महिलाओं के अन्तर्मन को उन्होंने परिभाषित ही नहीं, झंकृत भी किया है। उन्होंने गुजरात विश्वविद्यालय से 'मास्टर डिग्री' प्राप्त करने के पश्चात् कनेडा और यू. एस. ए. में रहकर अंग्रेजी भाषा-साहित्य का गंभीर अध्ययन किया है। आत्मकथा साहित्य की वे विशेषज्ञा हैं। महिलावादी लेखिका होने के नाते वे महिलाओं की समस्याओं को उद्घाटित करने में सिद्धहस्त है। उनकी ऑटो बायोग्राफीज़ रिटन बाइ इण्डियन वीमेन इन इंगलिश और फिमेल फुट प्रिन्ट्स पुस्तकों से अंग्रेजी पाठक सुपरिचित है। अंग्रेजी की तरह गुजराती में भी वे साधिकार लिखती हैं। गुजराती साहित्य को भी उन्होंने चार स्तरीय पुस्तकों से समृद्ध किया है। ये चारों पुस्तकें साहित्य जगत में खूब चर्चित और प्रशंसित हुई हैं। इनमें अछूत, कंबन और पोतानो ओरडो अंग्रेजी से अनूदित है। चौथी पुस्तक निजी आकाश मौलिक और सर्वाधिक लोकप्रिय रचना है। इस रचना में लेखिका ने विश्वविख्यात महिलाओं के अन्तर्जगत में गहरे पैठकर उसे उजागर किया है।
मुझे यह देखकर प्रसन्ना हुई कि डॉ. रंजना हरीश की इस सुन्दर और मनोयोग से लिख गई कृति का हिन्दी साहित्य अकादमी ने गुजराती में अनुवाद उपलब्ध करने का स्तुत्य प्रयत्न किया है और खुशी है कि अनुवादिका डॉ. शशि अरोरा ने भी पूरे उत्साह और लगन से इसका हिन्दी में अनुवाद कर अकादमी के संकल्प को पूरा किया है। मैं लेखिका एवं अनुवादिका को अकादमी की ओर से बधाई देता हूँ, मुझे विश्वास है, इस अनुवाद का हिन्दी-जगत में यथोचित आदर होगा।
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