भूमिका
यह पुस्तक जीवन के अनुभवों का एक ऐसा दस्तावेज़ है, जिसमें सच्चाई है, संघर्ष है और सामाजिक संबंधों की खट्टी-मीठी यादें हैं। इसमें वैचारिक बोझिलता या तथाकथित आदर्शों की गूढ़ बातें नहीं हैं। बात है तो सिर्फ एक साधारण इंसान की ज़िंदगी और उससे जुड़े उतार-चढ़ाव की। जीवन की बदलती परिस्थितियों और नई-नई चुनौतियों से जूझते हुए आगे बढ़ते रहने की। सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री भीष्म सहानी जी ने लिखा था- 'मानव इतिहास इस बात का साक्षी है कि मानव जाति का विकास मनुष्य के संघर्ष द्वारा हुआ है, व्यक्तिगत स्तर पर भी और सामूहिक स्तर पर भी।' वह आगे लिखते है 'प्रत्येक लेखक की जहाँ अपनी शैली और अभिव्यक्ति की अपनी विशिष्टता होती है, वहाँ उसकी अपनी दृष्टि भी होती है। विचार और मान्यताएं और जीवनमूल्य इसी दृष्टि के अभिन्न अंग होते हैं।' इस पुस्तक में रोजमर्रा के साधारण जीवन की कुछ जानी-पहचानी रोचक छवियां संजोने की कोशिश की गई है। इसमें कोई गम्भीर बात नहीं है, फिर भी गतिशील जीवन की बदलती परिस्थितियों में एक साधारण इंसान के सुख-दुख और उसकी जीत-हार की मात्र कुछ छवियां हैं। यादों के ऐसे चिराग हैं, जो पस्तहिम्मती, अवसाद और अंधेरे को कुछ कम करने में सहायक हो सकते हैं। इस पुस्तक के सभी लेख हमारी पारिवारिक पत्रिका 'सचेतक' से संग्रहित किए गए हैं। इस पत्रिका का प्रकाशन श्री रामशरण शर्मा 'मुंशी' (पिताजी) द्वारा 1980 में शुरू किया गया था, जिसे डॉ. कादम्बरी शर्मा द्वारा अभी भी जारी रखा जा रहा है। अपने नाम के अनुसार यह पत्रिका सबको सजग रखने, ताज़गी से लैस रखने, अनेकता में एकता को सुदृढ़ करने में दशकों से अपनी भूमिका निभाती रही है। इस पत्रिका की विशेषता रही है अ-लेखकों को लेखन के ज़रिए अपनी भावनाओं, अनुभवों की सहज, सरल भाषा में अभिव्यक्ति का अवसर देना। याद आता है कि साहित्यकार श्री योगेश गुप्त जी ने कहा था-'व्यक्ति को अपने अनुभवों और अपने यथार्थ के प्रति प्रतिबद्ध होना चाहिए। ज़िंदगी खुल कर जिये और स्वतंत्रता से चित्रित करे।' इसी भावना से प्रेरित कुछ संस्मरण और रेखाचित्र संजोए गए हैं इस पुस्तक में; जो व्यक्ति को उसके एकाकीपन से निकाल कर उसके आस-पास की रंग-बिरंगी दुनिया और सामाजिक परिदृष्य से जोड़ते हैं। श्री नितिन गर्ग जी की मैं हृदय से आभारी हूं, जिन्होंने इस पुस्तक को प्रकाशित करके इस छोटे से प्रयास को सार्थक बनाया है। मैं अपने पिता श्री रामशरण शर्मा, माँ धनवंत कुमारी शर्मा, डॉ. रामविलास शर्मा (ताऊजी) और कथाकार कमलेश्वर जी की कृतज्ञ हूं, जिन्होंने मेरा मार्गदर्शन करते हुए मुझे प्रोत्साहित किया है। इसके साथ ही अशोक शर्मा, मेरे पति ने भी हमेशा मुझे पूरा सहयोग दिया है। मुझे आशा है इस पुस्तक को सहृदय पाठकों का आशीर्वाद मिलेगा।
लेखक परिचय
: डॉ. सोना शर्मा जन्म तिथि: 25 मई, 1955 शैक्षणिक योग्यता: पी-एच.डी (हिंदी), वनस्थली विद्यापीठ, राजस्थान। कार्यक्षेत्र: भारतीय अनुवाद परिषद की 'अनुवाद' पत्रिका एवं यूनाइटिड इंडिया पीरियाडिकल्स की 'गंगा' मासिक पत्रिका में उप. सम्पादक (कुल 8 वर्ष) तथा 'दैनिक जागरण' में सांस्कृतिक संवाददाता के पद पर कार्य। इसके अतिरिक्त एनएचपीसी (भारत सरकार के उद्यम) में 24 वर्ष तक कार्य। 'दैनिक जागरण', 'साप्ताहिक हिंदुस्तान', 'बाल भारती', 'समाज कल्याण', 'राजभाषा ज्योति' आदि विभिन्न पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित । प्रकाशन: 1. जिंदगी यह भी (रेखाचित्र)। 2. आधुनिक मूल्य संस्कृति और समाज । 3. सीधी-सच्ची बात संप्रति : वरिष्ठ प्रबंधक (राजभाषा) के पद से सेवानिवृत्त ।
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