लेखक परिचय
अरावली अंचल के प्राकृतिक एवं मानवकृत सौन्दर्य के गम्भीर अध्येता बालासहाय गौतम (शर्मा) सदैव इस अंचल की विविधताओं पर शोध, खोज, अनुसन्धान, अन्वेषण में लगे रहे है, अरावली की गोद में कृति उसी का प्रतिफलन है। इस अंचल के बारे में ऐसा विराट् एवं अद्भुत कार्य देश के किसी भी क्षेत्र, प्रक्षेत्र के बारे में किया गया हो, ज्ञात नहीं। एक अप्रैल उन्नीस सौ इक्कीस को साधारण ब्राह्मण परिवार में जन्मे बालासहाय जी ने यद्यपि मैट्रिक तक ही विद्याध्ययन किया किन्तु माता-पिता से प्राप्त सुसंस्कार के वशीभूत आपने ईमानदारी से जीवन का निर्वहन किया। सफल शिक्षक बालासहाय शर्मा की अभिरुचि पर्यटन एवं संगीत में रही है। बालासहाय गौतम जी ग्राम पंचायत टहला में 1977 से 79 तक वार्ड पंच रहे, 1995-99 तक सर्तकता समिति के सदस्य रहे, श्री हनुमान जी महाराज पाण्डुपोल प्रन्यास में 28.2.1987 को सदस्य बने इसके पश्चात 12.6.1990 को मंत्री बने जो आज तक हैं। सीनियर सैकण्डरी स्कूल टहला में विकास समिति के अध्यक्ष रहे, जिला उपखण्ड राजगढ़ की शान्ति, समिति के सदस्य के रुप में ख्याति प्राप्त की। आप बालिका माध्यमिक विद्यालय टहला के विकास समिति के सदस्य रहे हैं।
पुस्तक परिचय
अरावली की उपत्यकाओं ने इस अंचल धरा को रत्न, वनौषधि तथा स्वर्णांकित खनिजों एवं धान्य उपलब्ध करवा कर स्वयं को पुण्यवती बनने का सौभाग्य प्राप्त कर लिया है। राष्ट्रीय उद्यान के अलंकरण से सज्जित 866 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में विस्तृत विश्वविख्यात प्रकृतिदत्त सरिस्का अभयारण्य देशी-विदेशी पर्यटकों का बरबस मन मोह लेता है और विदेशी मुद्रा अर्जन का एक अप्रतिम स्रोत भी है। नीति, श्रृंगार, वैराग्य-त्रिशतक के प्रणयनकर्ता महाराज भृर्तहरि की तपोभूमि से विचरण करते हुए किसे रानी पिंगला और अनन्तसेना तथा महायोगी गोरखनाथ के अमरफल का स्मरण नहीं होता ? जिसे स्मरण नहीं होता वह अभागा ही होगा। रामायणकालीन रामभक्त हनुमान और महाभारतकालीन पाण्डव की पूजा, अर्चना, वन्दना, आराधना, साधना, उपासना करते पीढ़ी दर पीढ़ी कई प्रकार की मन्नतें हैं और आत्मसन्तोष प्राप्त करती हैं। सिलीसेढ़, मंगलसर, मानसरोवर, जयसागर, दर्शकों को विमुग्ध किए बिना नहीं रहते। नीमराणा जैसा किला मंगलामाता, नटणी की हवेली, भैरव हनुमान, गोपीनाथ के मन्दिर, मिश्राला का हीरामन का मन्दिर, बाघेश्वरी माता मन्दिर धर्मप्राण भक्तजनों को अतीन्द्रिय आनन्द का अनुभव कराते हैं। नीलकण्ठ महादेव का मनोहारी मन्दिर, सैन समाज की आस्थाओं का केन्द्रनारायणी माता मन्दिर अपने अद्भुत सौन्दर्य के लिए विख्यात हैं। एक ज़िले पर हिन्दी में लिखी गई ऐसी कोई प्रामाणिक एवं अधिकृत पुस्तक नहीं है और अलवर के बारे में व्यवस्थित रूप से जानने वाले जिज्ञासुओं के लिए 'अरावली की गोद में पुस्तक वरदान सिद्ध होगी, ऐसा हमारा विश्वास हैं।
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