मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड अंचल का जिला छतरपुर प्रदेश का सर्वाधिक सांस्कृतिक विरासत वाला जिला यदि कहा जाये तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। जिस भू-भाग को बुन्देला शासकों ने नवीन पहचान व नाम दिया, वह पाषाणकाल से ही आदि मानव की कार्यस्थली रहा है। यद्यपि यह भू-भाग वन्य क्षेत्र से भरा हुआ है, किन्तु पौराणिक काल ही चेदि शासकों की कर्मभूमि रहा। इस युग में ही गुफाओं में निवास करने वाले, आखेट से जीविकोपार्जन पर निर्भर लोगों ने पशुओं को पालने के साथ न केवल कृषि कार्य प्रारंभ किया अपितु बस्तियां भी बसाई।
भारतीय इतिहास का बौद्ध युग (ई.पू. 600) परिवर्तनकारी युग था, जिसमें चार बड़े महाजनपदों में से एक चेदि आधुनिक बुन्देलखण्ड का भाग था, जो कालान्तर में मगध साम्राज्य का अंग बना। मौर्य, शुंग, सातवाहन, कुषाण, गुप्तों के काल तक यह भू-भाग राजनीतिक, आर्थिक व धार्मिक गतिविधियों का केन्द्र रहा। सागर जिले का एरण बाद में समुन्द्रगुप्त का स्वभोग नगर बना। गुप्तोत्तरकाल में कलचुरि, धार्मिक व राजनैतिक केन्द्र के रूप में विकसित हुआ। चन्देल शासकों को आधुनिक बुन्देलखण्ड भू-भाग को जेजाभुक्ति नाम दिया, जो बुन्देलकाल के पूर्व इसी नाम से जाना जाता था।
छतरपुर जिले में चन्देल काल से लेकर बुन्देलों के शासनकाल में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य हुए। विश्व धरोहर के रूप में विख्यात खजुराहो के मंदिर प्रमुख उदाहरण है। इसके अतिरिक्त जिले के कई स्थलों पर मंदिर, मठ, किले, गढ़ी, छत्री, मकबरा, तालाब, बावड़ी आदि का बड़े पैमाने पर निर्माण हुआ। जिले के सुदूर अंचलों में बिखरी हुई पुरासम्पदा, स्मारकों एवं प्राचीन स्थलों को चिन्हित करने एवं डाक्युमेन्टेशन करने के लिये संचालनालय पुरातत्व द्वारा 'ग्राम से ग्राम' सर्वेक्षण कार्य सम्पन्न कराया गया। सर्वेक्षण प्रतिवेदन के आधार पर इस पुस्तक को तैयार कराया गया है।
सर्वेक्षण प्रतिवेदनों के आधार पर सामग्री संकलन का कार्य श्री नरेश कुमार पाठक, सेवानिवृत्त संग्रहाध्यक्ष महाराजा छत्रसाल संग्रहालय धुबेला जिला छतरपुर द्वारा किया गया। श्री पाठक के अथक परिश्रम से पुस्तक की पाण्डुलिपि तैयार की, जिसे प्रकाशन योग्य बनाने में संचालनालय पुरातत्व के प्रभारी अधिकारी डॉ. रमेश यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय द्वारा जिलेवार पुरातत्व पुस्तक प्रकाशित करायी जा रही है। पूर्व में प्रकाशित पुस्तकों के समान यह पुस्तक भी विद्यार्थियों, शोधार्थियों, इतिहासकारों एवं इतिहास-पुरातत्व के जिज्ञासु पाठक के लिये निश्चय ही उपयोगी होगी, ऐसी मुझे आशा है।
Hindu (हिंदू धर्म) (13516)
Tantra (तन्त्र) (1007)
Vedas (वेद) (716)
Ayurveda (आयुर्वेद) (2083)
Chaukhamba | चौखंबा (3186)
Jyotish (ज्योतिष) (1554)
Yoga (योग) (1159)
Ramayana (रामायण) (1338)
Gita Press (गीता प्रेस) (724)
Sahitya (साहित्य) (24646)
History (इतिहास) (8976)
Philosophy (दर्शन) (3611)
Santvani (सन्त वाणी) (2621)
Vedanta (वेदांत) (116)
Send as free online greeting card
Email a Friend
Visual Search
Manage Wishlist