आयुर्वेद पर यह बाईसवीं पुस्तक लिखकर डॉ. टी. एल. देवराज ने प्रशंसनीय कार्य किया है। उनका विस्तृत अनुभव और ज्ञान लोगों तथा समाज के लिए अत्यंत लाभप्रद है। जैसी कि कहावत है- 'ज्ञान एक घोड़ा है और अनुभव सवार।'
'आयुर्वेद और स्वस्थ जीवन' नामक यह पुस्तक पठनीय है और सरल शैली में लिखी गई है। यह इतनी स्पष्ट और सुबोध है कि आम व्यक्ति भी इसे पढ़ और समझ सकता है। पुस्तक की विषय-वस्तु में रोगों से बचाव के उपायों और उपचार, दोनों पक्षों पर ध्यान दिया गया है। यह पुस्तक विश्व स्तर पर प्रासंगिक है, विशेषकर इसलिए कि एलोपैथी दवाओं के विपरीत आयुर्वेदिक दवाओं का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता।
जैसा लेखक ने बताया है, आयुर्वेद में जड़ी-बूटियों द्वारा उपचार, खनिज उपक्रमों तथा मानव शरीर को विषमुक्त करनेवाली बॉडी क्लींजिंग पद्धतियों के अलावा उपचार के अनूठे तरीके हैं। आयुर्वेदिक उपचार मानसिक शांति प्रदान करने के अतिरिक्त शारीरिक तथा मानसिक संतुलन को भी सुनिश्चित करता है।
यह अमूल्य पुस्तक आयुर्वेद के सभी आयामों की महत्ता को प्रकट करती है और प्रकृति तथा मनुष्य के बीच अटूट एवं अनिवार्य संबंधों के प्रतीक इस प्राचीन विज्ञान से लाभ उठाने की इच्छा रखनेवाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक उत्तम मार्गदर्शक है। मैं उम्मीद करता हूँ कि डॉ. टी. एल. देवराज मानवता के हित में पारंपरिक आयुर्वेद को शाश्वत बनाने का अपना महान् कार्य जारी रखेंगे।
मुझे प्रसन्नता है कि विद्वान् लेखक ने इस पुस्तक को मेरे पिता राजमंत्रप्रवीण स्व. एच.बी. गुंडप्पा गौड़ा को समर्पित किया है, जिन्होंने आयुर्वेदिक और यूनानी दवाओं को बढ़ावा देने और उन्हें आगे बढ़ाने में विशेष
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