महात्मा गाँधी के चरित्र पर लिखना आसान भी है और कठिन भी। गाँधी का चरित्र भारतीय समाज के प्रत्येक मन में समाया हुआ है, इसलिए आसान है लिखना। लेकिन गाँधी के कार्यों को समझना बहुत कठिन है। उनके छोटे से छोटे कार्य भी बड़े प्रभावशाली हुए हैं, चाहे वह कार्य सामाजिक हो, आर्थिक हो, राजनीतिक हो, धार्मिक हो या सांस्कृतिक। गाँधी जी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे। उनके कार्य खुल्लम-खुल्ला होते हैं, कुछ भी छुपा नहीं रहा है। उनके कार्य जितने खुले रूप में सभी के सामने प्रकट होते हैं, उस कार्य का रहस्य उतना ही अद्भुत होता है। देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने अपनी पुस्तक 'बापू के कदमों में' में गाँधी चरित्र को लिखने का प्रयास किया है। गाँधी का चरित्र अवतार का बोध कराता है और इसलिए हम मानते हैं कि गाँधी की कथा अनन्त है। इस पुस्तक में गाँधी के तीन प्रयोग, जो आंदोलन के रूप में है, की चर्चा करने का प्रयास किया गया है।
बिहार राष्ट्रभाषा परिषद के निदेशक सत्येन्द्र कुमार जी के सुझाव पर गाँधी चरित्र मनन का और इस पुस्तक की रचना का जो सुख मिला है, हम उनके आभारी हैं। भाई मदन शर्मा के सहयोग के बिना पुस्तक को आकार देना संभव नहीं था।
इस पुस्तक को आकार देने में पत्नी मधु सिन्हा का विशेष योगदान है। वास्तव में वह इस पुस्तक की सह-लेखिका हैं। बड़े भाई अशोक प्रियदर्शी, विद्वान लेखक भैरव लाल दास, छोटे भाई आसिफ़ वसी और राजेश कुमार के सहयोग के लिए मैं आभारी हूँ। बेटी सोनम सिन्हा पग-पग पर लेखन कार्य देखती रही और विचार देकर लिखने में सहयोग किया। सबके प्रति आभार।
इस पुस्तक में मूल रूप से महात्मा गाँधी के तीन प्रयोग को लिया गया है, जिसमें चम्पारण सत्याग्रह, गाँधीजी का लंगोटी पहनना और नमक सत्याग्रह है। इन आंदोलनों का लक्ष्य स्वराज प्राप्त करना और शोषण मुक्त भारत का निर्माण करना है। चम्पारण सत्याग्रह में चम्पारण की जनता सब कुछ करके थक गयी थी, फिर भी निलहों के अत्याचार से मुक्ति नहीं मिली, तब उन्होंने गाँधी जी को निमंत्रित किया। महात्मा गाँधी ने अपने सत्य और अहिंसा का भारत में पहला प्रयोग यहीं शुरू किया था। इस आंदोलन से चम्पारण की जनता के साथ-साथ भारत ही नहीं, पूरी दुनिया चकित हो गयी। ५० वर्षों का असफल संघर्ष मात्र ५० दिनों में गाँधी ने जीत लिया। न्यायालय झुका, सरकार झुकी, निलहे भाग खड़े हुए। जनता की जीत अद्भुत तरीके से हुई। गाँधी के सत्य और अहिंसा के सिद्धान्त की सारी दुनिया में चर्चा होने लगी।
प्रभु के मनन करने से जो शांति मिलती है, वैसी ही शांति गाँधी चरित्र के मनन से भी मिलती है।
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