लेखक परिचय
भारतीय संस्कृति की अप्रतिक अध्येतु डा० किरण कुमारी ने अब तक संस्कृत एवं हिन्दी बाङ् मय में अपनी स्पृहनीय स्थान बनाने के साथ-साथ साहित्य (कविता) में भी इनका महत्वपूर्ण योगदान है। मौलिक चिन्तन की धनी विदुशी लेखिका की कई कृतियों ने असंदिग्ध उपयोगिता, सूजन संप्रेशनिगता एवं पठनीयता के फलस्वरूप लोकप्रियता के उन उतंग शिखरों का स्पर्श किया है जो औरों के लिए असभव ही है। इनकी पुस्तक "वैदिक साहित्य और संस्कति" (दो भागो में) भारतीय संस्कृति कोष इण्डिका (तीन भागों में), भारत की विरासत (दस भागों में) प्रकाशित हैं। भारत की विरासत वह अमूल्य निधि है जिसमें उन्होंने सम्पूर्ण भारत की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक तोनों पहलुओं पर प्रकाश डालने का एक सराहनीय प्रयास किया है। उपनिषद् एवं पुराण के साथ-साथ इन्होंने सीता, राधा, मीरा की जीवनी "त्रयोदशी पद्य में एवं बाल्मीकि, तुलसी एवं साई बाबा की जीवनी (पद्म में) "त्रिशूल" और कविता "युग-धर्म" भी लिखा है। साथ ही साथ कृष्णावतार एवं रामावतार की सम्पूर्ण क्रमबद्ध गाथाएं "राधा गोविन्द गाथा" एवं श्री राम जानकी गाथा" इनकी एक महत्वपूर्ण कृतियाँ हैं। गाँधी साहित्य पर भी इनकी चार पुस्तकें अपनी अमिट छाप बनाये हुए हैं। इसके अलावा भी कई अना पुस्तकें धर्म, दर्शन एवं संस्कृति पर उपलब्ध हैं। सौ से भी अधिक आलेख इनकी राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिओं में प्रकाशित है। इन्होंने मानव संसाधन विकास मंत्रालय, शिक्षा विभाग, नयी दिल्ली द्वारा आयोजित प्रोजेक्ट "दर्शन शास्त्र परिभाषा कोष" में भी विशेषज्ञ के रूप में कार्य किया है। डा० किरण कुमारी तीन विषयों में एम०ए० एम०ए० संस्कृत, एम०ए० दर्शन शास्त्र, एम० एड० पी०एच०डी० किया अब तक इनकी तीस से भी अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें सात पुस्तकों का लोकार्पण महामहिम राज्यपाल, विहार, श्री लालजी टंडन एवं आरिफ मोहम्मद खां ने राजभवन में किया है जिसमें पद्म श्री डा० के. के. मुहम्मद भी शामिल थे।
पुस्तक परिचय
यह पुस्तक भारत की विरासत की श्रृंखला में आठवीं कड़ी है। इसमें उत्तर-पूर्व प्रदेश (सेवन सिस्टर्स एवं तीन अन्य प्रदेशों) की विरासत का सोंगोपांग वर्णन है। यह प्रदेश प्रकृति की अद्भुत छटा से भरपूर मानों धरती पर स्वर्ग हो ऐसा प्रतीत होता है। यहां प्रकृति स्वयं बयाँ करती हो, मेरी सुरक्षा अर्थात पर्यावरण सुरक्षा अत्यन्त आवश्यक है। कलियुग का अत्यन्त प्रसिद्ध धाम उड़िसा का जगन्नाथपुरी, कलकत्ता की बड़ी काली माँ सम्पूर्ण सृष्टि की रक्षा करने वाली के महत्व पर भी महत्वपूर्ण प्रकाश डाला गया है। अतः यह पुस्तक अत्यंत प्रसंशनीय एवं पठनीय है।
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